IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 9 जनवरी 2026 (Hindi)

यह अध्याय “अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया” मौर्य साम्राज्य के इतिहास और इसके सबसे प्रसिद्ध शासक, अशोक के जीवन में आए क्रांतिकारी बदलावों का वर्णन करता है।

मौर्य साम्राज्य एक विशाल साम्राज्य था जिसकी स्थापना 2,300 वर्ष से भी पहले हुई थी।

  • संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने बुद्धिमान सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से इस साम्राज्य की स्थापना की। चाणक्य के विचार ‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक में मिलते हैं।
  • वंश (Dynasty): मौर्य वंश में तीन महत्वपूर्ण राजा हुए: चंद्रगुप्त, उनका पुत्र बिंदुसार और बिंदुसार का पुत्र अशोक।
  • प्रमुख नगर: साम्राज्य में कई महत्वपूर्ण नगर थे, जैसे पाटलिपुत्र (राजधानी और सत्ता का केंद्र), तक्षशिला (उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया का प्रवेश द्वार), और उज्जैन (उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने वाले मार्ग पर स्थित)।
  • साम्राज्य बनाम राज्य: साम्राज्य राज्यों से बड़े होते थे, उन्हें सुरक्षा के लिए बड़ी सेनाओं, अधिक संसाधनों और कर वसूलने वाले अधिक अधिकारियों की आवश्यकता होती थी।

साम्राज्य के विशाल आकार के कारण, अलग-अलग क्षेत्रों का प्रबंधन अलग-अलग तरीकों से किया जाता था।

  • केंद्रीय नियंत्रण: पाटलिपुत्र और उसके आस-पास के क्षेत्र पर सम्राट का सीधा नियंत्रण था। अधिकारी कर वसूलते थे, संदेशवाहक सूचनाएँ पहुँचाते थे और जासूस अधिकारियों के कामकाज पर नज़र रखते थे।
  • प्रांतीय शासन: अन्य प्रांतों का शासन तक्षशिला या उज्जैन जैसी प्रांतीय राजधानियों से किया जाता था। यहाँ अक्सर राजकुमारों को ‘राज्यपाल’ (गवर्नर) के रूप में भेजा जाता था।
  • कर और भेंट (Tribute): जहाँ कर नियमित रूप से वसूले जाते थे, वहीं ‘भेंट’ (नजराना) उन लोगों से इकट्ठा किया जाता था जो स्वेच्छा से सोना, कंबल या जंगल के उत्पाद (हाथी, लकड़ी, शहद) देते थे।

अशोक इतिहास के एक अनोखे शासक थे जिन्होंने अपने संदेशों को प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में अभिलेखों के माध्यम से जनता तक पहुँचाने की कोशिश की।

  • निर्णायक मोड़: राजा बनने के आठ साल बाद अशोक ने कलिंग (आधुनिक तटीय ओडिशा) पर विजय प्राप्त की।
  • हृदय परिवर्तन: युद्ध की भीषण हिंसा को देखकर—जिसमें एक लाख से अधिक लोग मारे गए और कई बंदी बनाए गए—अशोक का मन दु:ख से भर गया। उन्होंने भविष्य में कभी युद्ध न करने का निर्णय लिया। वे इतिहास के अकेले ऐसे राजा हैं जिन्होंने युद्ध जीतने के बाद विजय का त्याग कर दिया।

कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने ‘धम्म’ (संस्कृत शब्द ‘धर्म’ का प्राकृत रूप) पर ध्यान केंद्रित किया।

  • मुख्य सिद्धांत: उनके धम्म में किसी देवता की पूजा या कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी। इसका केंद्र था:
    • दासों और नौकरों के प्रति दयावान होना।
    • बड़ों का सम्मान करना और सभी जीवों के प्रति करुणा रखना।
    • सभी धर्मों का सम्मान करना; उनका मानना था कि अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरे के धर्म की निंदा करने से अपने ही धर्म को नुकसान पहुँचता है।
  • संदेश का प्रसार: अशोक ने ‘धम्म महामत्त’ नामक अधिकारियों की नियुक्ति की जो जगह-जगह जाकर लोगों को धम्म की शिक्षा देते थे। उन्होंने अपने संदेश सीरिया, मिस्र, यूनान और श्रीलंका भी भेजे।
  • जन कल्याण: उन्होंने सड़कें बनवाईं, कुएँ खुदवाए, विश्राम गृह बनवाए और मनुष्यों तथा जानवरों के लिए चिकित्सा की व्यवस्था की।

मौर्य काल अपनी उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।

  • सिंह शीर्ष (Lion Capital): यह मूल रूप से सारनाथ के एक पत्थर के स्तंभ पर स्थित था। आज यह हमारे भारतीय नोटों और सिक्कों पर दिखाई देता है (राष्ट्रीय प्रतीक)।
  • रामपुरवा का सांड: बिहार में मिला पत्थर का एक उत्कृष्ट पॉलिश किया हुआ सांड, जो अब राष्ट्रपति भवन में रखा गया है।

लगभग 2,200 वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया, जिससे नए राज्यों का उदय हुआ:

  • उत्तर और पश्चिम: हिंद-यवन (Indo-Greeks), शक, कुषाण और अंततः गुप्त वंश।
  • मध्य और दक्षिण: शुंग, कण्व, सातवाहन, वाकाटक और दक्षिण के तीन प्रसिद्ध राज्य—चोल, चेर तथा पांड्य।
  • साम्राज्य की स्थापना: लगभग 2300 साल पहले।
  • कलिंग युद्ध: अशोक के शासन के 8वें वर्ष में।
  • मौर्य साम्राज्य का अंत: लगभग 2200 साल पहले।

🦁 अशोक: महान सम्राट

🛡️ मौर्य वंश की स्थापना
साम्राज्य की स्थापना 2,300 साल पहले चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से की थी। प्रमुख केंद्र: पाटलिपुत्र (राजधानी), तक्षशिला (उत्तर-पश्चिम का द्वार) और उज्जैन।
🏛️ प्रशासन और शासन
राजधानी के आसपास सम्राट का सीधा नियंत्रण था। अधिकारी नियमित कर (Tax) वसूलते थे, जबकि वनवासी क्षेत्रों के लोग हाथियों और लकड़ी जैसी वस्तुएं नजराने के रूप में देते थे।
⚔️ कलिंग युद्ध: हृदय परिवर्तन
कलिंग (ओडिशा) की भीषण हिंसा देखकर अशोक दुखी हुए। वह इतिहास के इकलौते राजा थे जिन्होंने युद्ध जीतने के बाद विजय का त्याग कर दिया और अहिंसा का मार्ग चुना।
☸️ अशोक का धम्म
अशोक ने धम्म महामत्त नियुक्त किए जो लोगों को नैतिक शिक्षा देते थे। उन्होंने सीरिया, मिस्र, ग्रीस और श्रीलंका में भी शांति के दूत भेजे और लोक कल्याण के लिए सड़कें व कुएं बनवाए।
विरासत सारनाथ का सिंह स्तंभ आज भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। मौर्यों के पतन के बाद भारत में कुषाणों और गुप्त वंश का उदय हुआ।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-8 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया

अभी डाउनलोड करें

भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में, ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के लिए केवल “समान व्यवहार” पर्याप्त नहीं था; इसके लिए भेदभाव के विरुद्ध सक्रिय संरक्षण की आवश्यकता थी। अनुच्छेद 15 और 16 यही सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी प्रगति में बाधा न बने।

अनुच्छेद 15 यह सुनिश्चित करता है कि “राज्य” सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में नागरिकों के साथ भेदभाव न करे। यह अनुच्छेद 14 से अधिक विशिष्ट है क्योंकि यह भेदभाव के पाँच निषिद्ध आधारों को सूचीबद्ध करता है।

राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल इन आधारों पर भेदभाव नहीं कर सकता:

  1. धर्म (Religion)
  2. मूलवंश (Race)
  3. जाति (Caste)
  4. लिंग (Sex)
  5. जन्मस्थान (Place of Birth)

महत्वपूर्ण शब्द: “केवल” (Only)

यदि भेदभाव इन पाँच आधारों के अलावा किसी अन्य कारक (जैसे शैक्षणिक योग्यता या शारीरिक दक्षता) पर आधारित है, तो उसे अनुच्छेद 15 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

  • 15(1): राज्य को नागरिकों के विरुद्ध भेदभाव करने से रोकता है।
  • 15(2): यह “क्षैतिज अधिकार” (Horizontal Rights) है। किसी भी नागरिक को दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों या राज्य निधि से बनी सड़कों, कुओं और तालाबों के उपयोग से नहीं रोका जा सकता। यह अधिकार निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होता है।
  • 15(3) [अपवाद]: राज्य महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है (जैसे स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण या बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा)।
  • 15(4) [अपवाद]: प्रथम संशोधन (1951) द्वारा जोड़ा गया। यह राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs), SC और ST की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है।
  • 15(5): निजी शिक्षण संस्थानों सहित सभी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की अनुमति देता है (93वां संशोधन, 2005)।
  • 15(6): शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% तक आरक्षण की अनुमति देता है (103वां संशोधन, 2019)।

जहाँ अनुच्छेद 15 सामाजिक पहुंच को कवर करता है, वहीं अनुच्छेद 16 विशेष रूप से राज्य के अधीन रोजगार या नियुक्तियों तक सीमित है।

अनुच्छेद 16(2) निषिद्ध आधारों की सूची को सात तक बढ़ाता है। किसी भी नागरिक के साथ सरकारी नौकरियों में इन आधारों पर भेदभाव नहीं किया जा सकता:

  1. धर्म | 2. मूलवंश | 3. जाति | 4. लिंग | 5. जन्मस्थान | 6. उद्भव (Descent) | 7. निवास (Residence)

अनुच्छेद 16 केवल “भेदभाव न करने” के बारे में नहीं है; यह “वास्तविक समानता” (Substantive Equality) के बारे में है।

  • 16(3): संसद किसी विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कुछ नौकरियों के लिए निवास की शर्त निर्धारित कर सकती है।
  • 16(4): राज्य किसी भी “पिछड़े वर्ग” के पक्ष में नियुक्तियों में आरक्षण का प्रावधान कर सकता है, जिसका राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
  • 16(4A): SC और ST के लिए पदोन्नति (Promotion) में आरक्षण का प्रावधान करता है।
  • 16(4B): “कैरी फॉरवर्ड रूल” (अग्रनयन नियम)। यदि किसी वर्ष आरक्षित सीटें नहीं भरी जाती हैं, तो उन्हें अगले वर्ष भरा जा सकता है और उन्हें उस वर्ष की 50% की सीमा में नहीं गिना जाएगा।
  • 16(5): किसी धार्मिक संस्था (जैसे वक्फ बोर्ड या मंदिर ट्रस्ट) के पदाधिकारी के लिए उस विशिष्ट धर्म का होना अनिवार्य करने वाले कानून को अनुमति देता है।
  • 16(6): सार्वजनिक नियुक्तियों में EWS के लिए 10% तक आरक्षण का प्रावधान करता है।
विशेषताअनुच्छेद 15अनुच्छेद 16
दायरा (Scope)व्यापक (सामाजिक, शैक्षिक, सार्वजनिक स्थान)।संकीर्ण (केवल सरकारी रोजगार/पद)।
आधार (Grounds)5 आधार (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान)।7 आधार (उद्भव और निवास भी शामिल)।
लाभार्थीकुछ पहलुओं में गैर-नागरिक भी शामिल (15(2))।केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध।
  1. मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन (1951): इस मामले के कारण प्रथम संविधान संशोधन हुआ और अनुच्छेद 15(4) का जन्म हुआ।
  2. इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992): इसे “मंडल आयोग मामला” भी कहा जाता है। इसमें 27% OBC आरक्षण को बरकरार रखा गया, लेकिन कुल आरक्षण की सीमा 50% तय की गई और ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा पेश की गई।
  3. जनहित अभियान बनाम भारत संघ (2022): उच्चतम न्यायालय ने 103वें संशोधन (10% EWS आरक्षण) को बरकरार रखा और फैसला सुनाया कि यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।

🛡️ अनुच्छेद 15 और 16: सामाजिक समता

🚫 अनु. 15: भेदभाव का निषेध
राज्य को केवल 5 आधारों पर भेदभाव करने से रोकता है: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान। 15(2) सभी के लिए दुकानों, कुओं और सड़कों तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है।
💼 अनु. 16: सार्वजनिक रोजगार
सरकारी नौकरियों में समान अवसर की गारंटी। इसमें उद्भव (Descent) और निवास जोड़कर आधारों की संख्या 7 हो जाती है। यह अधिकार केवल नागरिकों के लिए है।
👩‍👧 विशेष प्रावधान
15(3) महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति देता है। 15(4) और 15(5) शिक्षण संस्थानों में SC/ST और OBC के लिए आरक्षण का आधार प्रदान करते हैं।
📊 आरक्षण नीति
16(4) पिछड़े वर्गों के लिए नौकरियों में आरक्षण देता है। 16(4A) SC/ST के लिए पदोन्नति (Promotion) में आरक्षण और 16(4B) बैकलॉग पदों के लिए नियम बनाता है।
💰 EWS आरक्षण
103वें संशोधन (2019) द्वारा अनुच्छेद 15(6) और 16(6) जोड़े गए, जो शिक्षा और नौकरियों में ‘आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों’ के लिए 10% कोटा प्रदान करते हैं।
⚖️ ऐतिहासिक निर्णय
इन्द्रा साहनी: आरक्षण की सीमा 50% तय की और ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा दी। जनहित अभियान: सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा।
तुलना अनुच्छेद 15 का दायरा सामाजिक और शैक्षणिक है (5 आधार), जबकि अनुच्छेद 16 का दायरा व्यावसायिक यानी सरकारी नौकरियों तक सीमित है (7 आधार)।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (9 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)

  • संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ (Russia Sanctions Bill) को हरी झंडी दे दी है, जो उन्हें रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • रणनीति: इस विधेयक का उद्देश्य भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाना है ताकि वे तेल खरीद के माध्यम से यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाइयों के वित्तपोषण को रोकें।
    • द्विदलीय समर्थन: विधेयक को अमेरिकी सीनेट और हाउस दोनों में भारी समर्थन प्राप्त है, जो इसके सुचारू क्रियान्वयन का संकेत देता है।
    • भारत की प्रतिक्रिया: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दिसंबर 2025 से अपने जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल प्राप्त करना बंद कर दिया है। भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने वर्तमान 25% दंड टैरिफ से राहत मांगी है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “ऊर्जा सुरक्षा”, “रणनीतिक स्वायत्तता” और “भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंध” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • आर्थिक प्रभाव: भारत के लिए, जिसके कुल तेल आयात का 35% हिस्सा रूसी तेल रहा है, 500% टैरिफ इन खरीदों की आर्थिक व्यवहार्यता को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
    • राजनयिक संतुलन: यह कदम 2018 के पैटर्न को दोहराता है जब भारत ने इसी तरह के अमेरिकी दबाव के तहत ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात ‘शून्य’ कर दिया था।
    • आपूर्ति में बदलाव: जबकि सरकारी तेल कंपनियाँ अभी भी आयात कर रही हैं, रिलायंस और नायरा एनर्जी जैसे निजी खिलाड़ियों द्वारा आयात बंद करने से भविष्य में रूसी तेल पर निर्भरता कम होना तय है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; संसाधनों का संग्रहण; संघीय ढांचा)

  • संदर्भ: एक संपादकीय प्रस्ताव जिसमें सुझाव दिया गया है कि दक्षता और समानता को संतुलित करने के लिए ‘सकल राज्य घरेलू उत्पाद’ (GSDP) को केंद्र-राज्य कर हस्तांतरण का प्राथमिक मानदंड बनाया जाना चाहिए।
  • मुख्य बिंदु:
    • संग्रहण बनाम उपार्जन: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य तर्क देते हैं कि वे केंद्रीय करों में भारी योगदान देते हैं लेकिन उन्हें हस्तांतरण में बहुत कम हिस्सा मिलता है।
    • GSDP एक विकल्प के रूप में: प्रत्यक्ष कर के आंकड़े अक्सर केवल पंजीकृत कार्यालयों (जैसे मुंबई या दिल्ली) के स्थान को दर्शाते हैं, जबकि GSDP उस वास्तविक आधार को दर्शाता है जहाँ आर्थिक गतिविधि होती है।
    • हस्तांतरण परिणाम: 15वें वित्त आयोग के तहत, उत्तर प्रदेश को कुल हस्तांतरण का 15.81% मिला जबकि उसका कर योगदान मात्र 4.6% था; इसके विपरीत, महाराष्ट्र का योगदान 40.3% था लेकिन उसे केवल 6.64% मिला।
  • UPSC प्रासंगिकता: “राजकोषीय संघवाद”, “वित्त आयोग का अधिदेश” और “GST चुनौतियां” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • दक्षता बनाम समानता: वर्तमान सूत्र ‘आय की दूरी’ और ‘जनसंख्या’ को प्राथमिकता देते हैं, जो बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित करते हैं। GSDP आधारित फॉर्मूला राष्ट्रीय आय में राज्यों के वास्तविक योगदान को मान्यता देगा।
    • सांख्यिकीय संबंध: डेटा दिखाता है कि GSDP और GST संग्रह के बीच बहुत गहरा संबंध (0.91) है, जो इसे राज्य स्तर पर कर उपार्जन का एक विश्वसनीय संकेतक बनाता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां; साइबर सुरक्षा)

  • संदर्भ: नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के विस्तार और बिना किसी वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) के इसके संचालन पर चिंताओं का विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • पहुंच का विस्तार: NATGRID अब प्रति माह लगभग 45,000 अनुरोधों को संसाधित कर रहा है, और SP रैंक तक के अधिकारियों को इसकी पहुंच दी गई है।
    • डेटा एकीकरण: इसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 119 करोड़ निवासियों का डेटा है।
    • तकनीकी क्षमता: सिस्टम ‘गांडीव’ विश्लेषणात्मक इंजन का उपयोग करता है जो व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए अलग-अलग रिकॉर्ड्स को जोड़ने (Triangulation) में सक्षम है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “निगरानी कानून”, “निजता का अधिकार (पुट्टस्वामी मामला)” और “सुशासन बनाम सुरक्षा”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • वैधानिक निरीक्षण की कमी: NATGRID संसद के अधिनियम के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से कार्य करता है, जिससे इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए स्वतंत्र निरीक्षण की मांग बढ़ रही है।
    • पूर्वाग्रहों का दोहराव: संपादकीय चेतावनी देता है कि इसमें इस्तेमाल किए गए एल्गोरिदम जाति, धर्म या भूगोल से जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को दोहरा सकते हैं, जिससे कुछ समुदायों के खिलाफ भेदभावपूर्ण परिणाम निकल सकते हैं।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)

  • संदर्भ: एक रिपोर्ट जो बताती है कि भारत में स्पाइना बिफिडा की दर विश्व में सबसे अधिक (प्रति 1,000 जन्मों पर 4) है, जबकि यह काफी हद तक रोके जाने योग्य बीमारी है।
  • मुख्य बिंदु:
    • रोकथाम: गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड (Folic Acid) का सेवन स्पाइना बिफिडा के 70% से अधिक मामलों को रोक सकता है।
    • नीति का अभाव: 68 अन्य देशों के विपरीत, भारत में फोलिक एसिड के लिए अनिवार्य खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) कानून या व्यापक जागरूकता अभियान नहीं हैं।
    • आर्थिक बोझ: रोकथाम पर खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया प्रभावित बच्चों के दीर्घकालिक उपचार पर खर्च होने वाले 100 रुपये बचा सकता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति”, “विकलांगों के लिए सामाजिक न्याय” और “पोषण सुरक्षा”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही: फोलिक एसिड के बारे में जनता को शिक्षित न करना ‘गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य लापरवाही’ माना जा रहा है, क्योंकि यह स्थिति बच्चों में आजीवन पक्षाघात (Paralysis) का कारण बनती है।
    • नवाचारी समाधान: नमक या चाय जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में फोलेट और विटामिन B12 का सुदृढ़ीकरण तंत्रिका संबंधी जटिलताओं को खत्म करने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; विकास)।

  • संदर्भ: वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार के प्रथम अग्रिम अनुमान (7.4%) और UN DESA के विकास पूर्वानुमान (7.2%) के बीच तुलना।
  • मुख्य बिंदु:
    • विकास के चालक: घरेलू खपत और बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश से अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।
    • टैरिफ की बाधा: चूंकि भारत का 18% निर्यात अमेरिका जाता है, इसलिए टैरिफ एक बड़ा जोखिम है; हालांकि, यूरोप और पश्चिम एशिया की मांग इसे संतुलित कर सकती है।
    • आपूर्ति पक्ष: विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र का विस्तार विकास के प्राथमिक आपूर्ति-पक्ष चालक बने हुए हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “मैक्रोइकोनॉमिक प्लानिंग”, “वैश्विक आर्थिक रुझान” और “बजटीय अनुमान”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • विपरीत रुझान: जहाँ भारत में ‘सकल स्थायी पूंजी निर्माण’ (GFCF) में वृद्धि देखी जा रही है, वहीं चीन ने अपने कमजोर संपत्ति क्षेत्र के कारण निवेश में संकुचन देखा है।
    • राजकोषीय समर्थन: 7%+ विकास पथ को बनाए रखने के लिए निकट अवधि में कर सुधार और मौद्रिक सुगमता को आवश्यक माना गया है।

संपादकीय विश्लेषण

09 जनवरी, 2026
GS-2 अंत. संबंध
🛢️ तेल कूटनीति और 500% टैरिफ
अमेरिकी रूस प्रतिबंध विधेयक तेल खरीदारों पर 500% टैरिफ का खतरा पैदा करता है। प्रभाव: रिलायंस जामनगर ने पहले ही रूसी कच्चे तेल की खरीद रोक दी है। चुनौती: अमेरिका के दबाव के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखना, क्योंकि रूस भारत के आयात का 35% हिस्सा है।
GS-3 अर्थव्यवस्था
📊 GSDP: राजस्व वितरण पर बहस
टैक्स वितरण में बदलाव का प्रस्ताव: पंजीकृत कार्यालय डेटा के बजाय GSDP हिस्सेदारी का उपयोग। विरोधाभास: महाराष्ट्र 40.3% योगदान देता है लेकिन उसे 6.64% मिलता है; जबकि यूपी 4.6% योगदान पर 15.81% प्राप्त करता है। लक्ष्य: आर्थिक दक्षता को बेहतर पुरस्कृत करना।
GS-3 सुरक्षा
👁️ नेटग्रिड और ‘गांडीव’ विश्लेषण
नेटग्रिड का विस्तार अब 45,000 मासिक अनुरोधों तक। NPR (119 करोड़ निवासी) के साथ एकीकृत हाई-टेक “एंटिटी रेजोल्यूशन” तकनीक। जोखिम: वैधानिक ढांचे के बिना कार्यकारी आदेश के जरिए संचालन से व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग और निजता के उल्लंघन का खतरा।
GS-2 स्वास्थ्य
🏥 स्पाइना बिफिडा: नीतिगत अनदेखी
भारत में इसकी व्यापकता उच्च है (4 प्रति 1,000 जन्म)। तथ्य: 70% मामले फोलिक एसिड से रोके जा सकते हैं। कमी: भारत में अनिवार्य खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) कानूनों का अभाव। बचत: रोकथाम पर खर्च किया गया ₹1 उपचार के ₹100 बचाता है।
GS-3 अर्थव्यवस्था
📈 वृद्धि का अनुमान: भारत बनाम UN DESA
संयुक्त राष्ट्र ने 7.2% विकास दर का अनुमान लगाया है (सरकार का 7.4%)। मुख्य चालक: सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और घरेलू खपत। जोखिम: 18% निर्यात अमेरिका की ओर है, जिससे टैरिफ की प्रतिकूलताएं वित्त वर्ष 2026 के लिए सबसे बड़ा जोखिम हैं।

यहाँ भारत के तटीय भूगोल, प्रमुख बंदरगाहों और द्वीप समूहों का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

भारत की कुल तटरेखा 7,516.6 किमी है, जिसमें मुख्य भूमि और द्वीप क्षेत्र शामिल हैं। इसे मुख्य रूप से पश्चिमी तट और पूर्वी तट में विभाजित किया गया है।

  • पश्चिमी तट (Western Coast): यह पूर्वी तट की तुलना में संकरा है। इसके उप-भाग हैं:
    • कोंकण तट: महाराष्ट्र और गोवा।
    • कनारा तट: कर्नाटक।
    • मालाबार तट: केरल (यह अपने ‘कयाल’ या Backwaters के लिए प्रसिद्ध है)।
  • पूर्वी तट (Eastern Coast): यह अधिक चौड़ा है और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों द्वारा बनाए गए विशाल डेल्टाओं की विशेषता रखता है।
    • उत्तरी सरकार (Northern Circars): उत्तरी भाग (ओडिशा/आंध्र प्रदेश)।
    • कोरोमंडल तट: दक्षिणी भाग (तमिलनाडु)।

भारत में 13 प्रमुख बंदरगाह हैं जो इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।

तटप्रमुख बंदरगाहमुख्य विशेषता
पश्चिमीकांडला (गुजरात)एक ज्वारीय (Tidal) बंदरगाह; पेट्रोलियम और उर्वरक आयात के लिए।
पश्चिमीमुंबई (महाराष्ट्र)भारत का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बंदरगाह।
पश्चिमीमर्मगाओ (गोवा)लौह अयस्क निर्यात करने वाला प्रमुख बंदरगाह।
पश्चिमीकोच्चि (केरल)एक लैगून (वेम्बनाड झील) के मुहाने पर स्थित है।
पूर्वीतूतूकोरिन (तमिलनाडु)श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के लिए विभिन्न माल का प्रबंधन।
पूर्वीविशाखापत्तनम (A.P.)सबसे गहरा स्थलसीमा से घिरा (Landlocked) और सुरक्षित बंदरगाह।
पूर्वीपारादीप (ओडिशा)जापान को लौह अयस्क के निर्यात में विशेषज्ञता।
पूर्वीहल्दिया/कोलकाता (W.B.)हुगली नदी पर स्थित एक नदीय (Riverine) बंदरगाह।

भारत के पास दो प्रमुख द्वीप समूह हैं जो समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

  • अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी):
    • ये समुद्र में डूबी हुई पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं।
    • 10 डिग्री चैनल: अंडमान समूह को निकोबार समूह से अलग करता है।
    • बैरन द्वीप (Barren Island): भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी का घर।
  • लक्षद्वीप समूह (अरब सागर):
    • ये प्रवाल द्वीप (Coral islands/Atolls) हैं।
    • 9 डिग्री चैनल: मिनिकॉय द्वीप को शेष लक्षद्वीप से अलग करता है।
    • 8 डिग्री चैनल: पूरे लक्षद्वीप समूह को मालदीव से अलग करता है।
विशेषताविवरणभौगोलिक स्थिति
सबसे लंबी तटरेखागुजरातपश्चिमी तट
सबसे गहरा बंदरगाहविशाखापत्तनमपूर्वी तट
प्रवाल द्वीपलक्षद्वीपअरब सागर
सक्रिय ज्वालामुखीबैरन द्वीपअंडमान सागर

मानचित्र पर उत्तर से दक्षिण की ओर बंदरगाहों के क्रम को याद रखें (जैसे: कांडला → मुंबई → मर्मगाओ → मंगलुरु → कोच्चि)। UPSC अक्सर उत्तर-से-दक्षिण क्रम पर प्रश्न पूछता है।

समुद्री सीमाएँ (Maritime Frontiers)

तटीय क्षेत्र
🌊 7,516 किमी लंबी तटरेखा
भारत की तटरेखा संकरे पश्चिमी तट (कोंकण, कनारा, मालाबार) और चौड़े, डेल्टा युक्त पूर्वी तट (उत्तरी सरकार, कोरोमंडल) में विभाजित है।
अभ्यास: पहचानें कि कौन सा तट ‘कयाल’ (पश्वजल) के लिए प्रसिद्ध है और दक्षिण-पूर्व में कोरोमंडल तट को लोकेट करें।
समुद्री व्यापार
🚢 प्रमुख समुद्री बंदरगाह
भारत 13 प्रमुख बंदरगाहों के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का प्रबंधन करता है, जिसमें कांडला के ज्वारीय बंदरगाह से लेकर कोलकाता-हल्दिया के नदी बंदरगाह तक शामिल हैं।
बंदरगाह तट विशिष्ट विशेषता
मुंबईपश्चिमीभारत का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बंदरगाह
विशाखापत्तनमपूर्वीसबसे गहरा भू-आबद्ध सुरक्षित बंदरगाह
मर्मगाओपश्चिमीप्रमुख लौह अयस्क निर्यातक (गोवा)
अभ्यास: ओडिशा तट पर पारादीप को खोजें और जापान को होने वाले लौह अयस्क निर्यात मार्ग को ट्रेस करें।
द्वीप समूह
🏝️ रणनीतिक द्वीप
इसमें लक्षद्वीप के मूंगा एटोल से लेकर अंडमान और निकोबार की ज्वालामुखीय चोटियाँ शामिल हैं। ये क्षेत्र 8°, 9° और 10° उत्तरी समुद्री चैनलों द्वारा विभाजित हैं।
अभ्यास: अंडमान सागर में बैरन द्वीप को लोकेट करें—जो भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है।
त्वरित संदर्भ तालिका
विशेषता विवरण स्थान
सबसे लंबी तटरेखागुजरातपश्चिमी तट
मूंगा एटोल (Coral)लक्षद्वीपअरब सागर
रणनीतिक चैनल10 डिग्री चैनलअंडमान और निकोबार

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 8 जनवरी 2026 (Hindi)

यह अध्याय लगभग 2,500 वर्ष पहले भारत में उभरे नए धार्मिक और दार्शनिक विचारों के बारे में है।

बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे और वे तीव्र सामाजिक परिवर्तनों के काल में जीवित थे।

  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पहले ‘सिद्धार्थ’ (जिन्हें गौतम के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में हुआ था। वे शाक्य गण के एक क्षत्रिय थे।
  • गृहत्याग: युवावस्था में ही जीवन के सच्चे अर्थ की तलाश में उन्होंने घर के सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया।
  • ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment): कई वर्षों तक भ्रमण और चर्चा के बाद, उन्होंने बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया, जहाँ उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • शिक्षा: उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी के पास) में दिया और अपना शेष जीवन पैदल यात्रा करते हुए लोगों को शिक्षा देने में बिताया। उनकी मृत्यु कुशीनारा में हुई।
  • मुख्य दर्शन:
    • उन्होंने सिखाया कि जीवन दुखों और कष्टों से भरा है, जिसका कारण हमारी असीमित इच्छाएँ और लालसाएँ हैं, जिसे उन्होंने ‘तन्हा’ (तृष्णा) कहा है।
    • इन इच्छाओं को दूर करने के लिए उन्होंने ‘आत्म-संयम’ (moderation) का मार्ग अपनाने की सलाह दी।
    • उन्होंने कर्म के महत्व पर जोर दिया और बताया कि हमारे कार्यों का फल हमें इस जीवन और अगले जीवन दोनों में मिलता है।
    • उन्होंने अपने उपदेश उस समय की आम भाषा प्राकृत में दिए, ताकि हर कोई उन्हें समझ सके।

इसी समय, अन्य विचारक मृत्यु के बाद के जीवन और यज्ञों के उद्देश्य जैसे कठिन प्रश्नों के उत्तर खोज रहे थे।

  • आत्मा और ब्रह्म: इन विचारकों का मानना था कि ब्रह्मांड में कुछ ऐसा है जो स्थायी है। उन्होंने इसे ‘आत्मा’ (व्यक्तिगत आत्मा) और ‘ब्रह्म’ (सार्वभौमिक आत्मा) के रूप में वर्णित किया और निष्कर्ष निकाला कि अंततः ये दोनों एक ही हैं।
  • ग्रंथ: उनके विचारों को ‘उपनिषदों’ में संकलित किया गया। उपनिषद् का शाब्दिक अर्थ है “गुरु के समीप बैठना”। इन ग्रंथों में अक्सर शिक्षकों और छात्रों के बीच बातचीत के रूप में विचार दिए गए हैं।
  • विचारक: इनमें मुख्य रूप से ब्राह्मण और राजा शामिल थे, लेकिन गार्गी जैसी कुछ महिला विचारकों का भी उल्लेख मिलता है। सत्यकाम जाबाल (एक दासी का पुत्र) भी एक प्रसिद्ध विचारक बने, जिन्हें गौतम नाम के एक ब्राह्मण शिक्षक ने अपना शिष्य बनाया था।
  • भारतीय दर्शन की छह पद्धतियाँ: भारत के बौद्धिक विकास का प्रतिनिधित्व छह दर्शनों द्वारा किया जाता है: वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा और वेदांत (उत्तर मीमांसा)

जैनों के 24वें तीर्थंकर वर्धमान महावीर ने भी इसी समय अपने विचारों का प्रसार किया।

  • पृष्ठभूमि: वे वज्जि संघ के ‘लिच्छवि’ कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे।
  • मुख्य सिद्धांत: महावीर ने सिखाया कि सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने अहिंसा के नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा (अर्थात किसी भी जीव को कष्ट न देना)।
  • जीवन का तरीका: अनुयायियों (जैनों) को बहुत सादा जीवन जीना पड़ता था, भोजन के लिए भिक्षा मांगनी पड़ती थी, पूरी तरह ईमानदार रहना पड़ता था और चोरी न करने की सख्त हिदायत थी। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था और पुरुषों को वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागना पड़ता था।
  • प्रसार: जैन धर्म को मुख्य रूप से व्यापारियों का समर्थन मिला। किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकोड़ों को मारना पड़ता था।

महावीर और बुद्ध दोनों का मानना था कि सच्चा ज्ञान केवल वही प्राप्त कर सकते हैं जो अपना घर छोड़ देते हैं।

  • संघ: यह उन लोगों का एक संगठन था जिन्होंने घर का त्याग किया था।
    • बौद्ध संघ के नियम ‘विनय पिटक’ नामक ग्रंथ में मिलते हैं।
    • संघ के सदस्यों को ‘भिक्खु’ और ‘भिक्खुणी’ (भिखारी के लिए प्राकृत शब्द) कहा जाता था।
    • इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, व्यापारी, मजदूर और दास (अनुमति लेकर) शामिल हो सकते थे।
  • विहार (Monasteries): भिक्खु-भिक्खुणी पूरे साल यात्रा करते थे, केवल वर्षा ऋतु को छोड़कर। समय के साथ उनके लिए स्थायी शरण स्थल बनाए गए जिन्हें ‘विहार’ कहा गया। ये लकड़ी, ईंट या पहाड़ों को काटकर (जैसे कार्ले की गुफाएँ) बनाए गए थे।

जैन और बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के समय, ब्राह्मणों ने जीवन के चार चरणों की एक व्यवस्था विकसित की जिसे ‘आश्रम’ कहा गया:

आश्रमअपेक्षित जीवनशैली
ब्रह्मचर्यसादा जीवन बिताना और वेदों का अध्ययन करना।
गृहस्थविवाह करना और एक गृहस्थ के रूप में रहना।
वानप्रस्थजंगल में रहना और साधना करना।
संन्याससब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाना।

☸️ नए प्रश्न नए विचार

🧘 बुद्ध का मार्ग
सिद्धार्थ गौतम ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने सिखाया कि दुख का कारण तन्हा (लालसा) है। जनसाधारण तक पहुँचने के लिए उन्होंने प्राकृत भाषा का प्रयोग किया। उनका प्रथम उपदेश सारनाथ में हुआ।
🕯️ उपनिषदिक विचार
विचारकों ने आत्मा (व्यक्तिगत आत्मा) और ब्रह्म (सार्वभौमिक आत्मा) के बारे में चर्चा की। इनमें गार्गी जैसी महिला विचारकों और सत्यकाम जाबाल जैसे जिज्ञासुओं ने भाग लिया।
🐜 जैन धर्म और महावीर
वर्धमान महावीर ने अहिंसा (कठोर जीव हत्या निषेध) पर जोर दिया। उनके अनुयायी ‘जैन’ कहलाए, जो भोजन के लिए भिक्षा माँगते थे और पूर्ण ईमानदारी का पालन करते थे। इसे व्यापारी वर्ग का भारी समर्थन मिला।
🏘️ संघ और विहार
घर त्यागने वाले लोग संघ में रहते थे, जिसके नियम विनय पिटक में मिलते हैं। वर्षा ऋतु के दौरान भिक्खु-भिक्खुनी विहारों (शरण स्थलों) में रहते थे, जो अक्सर चट्टानों को काटकर बनाए जाते थे।
आश्रम व्यवस्था ब्रह्मचर्य (सादा जीवन/अध्ययन) • गृहस्थ (विवाह/घर) • वानप्रस्थ (जंगल में साधना) • संन्यास (सब कुछ त्याग देना)।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-7 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: नए प्रश्न नए विचार

अभी डाउनलोड करें

भारतीय संविधान का भाग III नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों की गहराई में जाने से पहले, उस ढांचे को समझना आवश्यक है जो इन्हें नियंत्रित करता है। अनुच्छेद 12 बताता है कि ये अधिकार किसके विरुद्ध लागू हैं; अनुच्छेद 13 अन्य कानूनों पर इन अधिकारों की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है; और अनुच्छेद 14 समानता के उस मूल सिद्धांत को स्थापित करता है जो राष्ट्र को बांधता है।

मौलिक अधिकार मुख्य रूप से सरकार द्वारा शक्ति के मनमाने उपयोग के विरुद्ध संरक्षण हैं। इसलिए, अनुच्छेद 12 संविधान के भाग III के उद्देश्यों के लिए “राज्य” शब्द को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 12 के अनुसार, ‘राज्य’ में शामिल हैं:

  1. भारत की सरकार और संसद: संघ के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे मंत्रालय, राष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा)।
  2. राज्यों की सरकारें और विधानमंडल: प्रत्येक राज्य के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे विधानसभा, राज्यपाल)।
  3. स्थानीय प्राधिकारी: नगरपालिकाएं, पंचायतें, जिला बोर्ड, सुधार न्यास (Improvement Trusts) आदि।
  4. अन्य प्राधिकारी: यह सबसे अधिक चर्चित श्रेणी है, जिसकी व्याख्या न्यायपालिका द्वारा समय-समय पर की गई है।

उच्चतम न्यायालय ने अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब जैसे मामलों में यह स्थापित किया कि कोई निजी संस्था या निगम भी “राज्य” माना जा सकता है यदि वह सरकार के एक उपकरण या एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

कसौटी (Criteria):

  • यदि संपूर्ण शेयर पूंजी सरकार के पास है।
  • यदि वित्तीय सहायता इतनी अधिक है कि वह लगभग पूरे खर्च को पूरा करती है।
  • यदि संस्था को राज्य द्वारा संरक्षित ‘एकाधिकार’ प्राप्त है।
  • यदि राज्य का गहरा और व्यापक नियंत्रण (Pervasive Control) है।
  • यदि संस्था के कार्य सार्वजनिक महत्व के हैं और सरकारी कार्यों से जुड़े हैं।

नोट: LIC, ONGC और SAIL जैसे निकायों को “राज्य” माना जाता है, जबकि BCCI और NCERT को सामान्यतः इस परिभाषा से बाहर रखा गया है।

अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों का “द्वारपाल” है। यह न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति देता है, जिससे अदालतें उन कानूनों को रद्द कर सकती हैं जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

  • अनुच्छेद 13(1): संविधान पूर्व कानूनों (Pre-Constitutional Laws) से संबंधित है। 1950 से पहले के कानून यदि मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं, तो वे उस सीमा तक शून्य (Void) हो जाएंगे।
  • अनुच्छेद 13(2): संविधान के बाद के कानूनों से संबंधित है। यह राज्य को ऐसा कोई भी कानून बनाने से रोकता है जो मौलिक अधिकारों को छीनता या कम करता हो।
  • अनुच्छेद 13(3): “विधि” (Law) शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित करता है। इसमें शामिल हैं:
    • अध्यादेश (Ordinances)
    • आदेश, उपविधि (Bye-laws), नियम, विनियम (Regulations)
    • अधिसूचनाएं (Notifications)
    • रूढ़ि या प्रथाएं (Customs) जिनका कानून जैसा प्रभाव हो।
  1. पृथक्करणीयता का सिद्धांत (Doctrine of Severability): यदि किसी कानून का एक हिस्सा असंवैधानिक है, तो केवल वही हिस्सा रद्द किया जाएगा, पूरा कानून नहीं। (बशर्ते वैध हिस्सा अवैध हिस्से के बिना जीवित रह सके)।
  2. आच्छादन का सिद्धांत (Doctrine of Eclipse): मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला संविधान-पूर्व कानून पूरी तरह खत्म नहीं होता; वह केवल मौलिक अधिकारों द्वारा “ढक” लिया जाता है। यदि बाद में संविधान संशोधन द्वारा वह बाधा हट जाए, तो कानून पुनः सक्रिय हो जाता है।
  3. त्याग का सिद्धांत (Doctrine of Waiver): कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को अपनी मर्जी से छोड़ (Waive) नहीं सकता, क्योंकि ये अधिकार केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि लोक हित के लिए दिए गए हैं।

अनुच्छेद 14 भारतीय संविधान का हृदय है। यह गारंटी देता है: “राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।”

विधि के समक्ष समता (Equality Before Law)विधियों का समान संरक्षण (Equal Protection of Laws)
यह ब्रिटिश सामान्य विधि से लिया गया है।यह अमेरिकी संविधान से लिया गया है।
नकारात्मक अवधारणा: किसी व्यक्ति के लिए विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति।सकारात्मक अवधारणा: समान परिस्थितियों में समान व्यवहार सुनिश्चित करना।
इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।इसका अर्थ है “समान लोगों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।”
यह ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) पर केंद्रित है।यह ‘वास्तविक समानता’ (Substantive Equality) पर केंद्रित है।

अनुच्छेद 14 ‘वर्ग-विधान’ (बिना कारण किसी समूह को लाभ देना) का निषेध करता है लेकिन ‘तर्कसंगत वर्गीकरण’ की अनुमति देता है। चूँकि लोग अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में हैं, इसलिए कानून सबके साथ बिल्कुल एक जैसा व्यवहार नहीं कर सकता।

वर्गीकरण की कसौटी:

  1. बोधगम्य अंतरक (Intelligible Differentia): उन समूहों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए जिनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है।
  2. तार्किक संबंध (Rational Nexus): उस अंतर का उस लक्ष्य से तार्किक संबंध होना चाहिए जिसे कानून प्राप्त करना चाहता है।

नया सिद्धांत (मनमानापन – Arbitrariness):
ई.पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 14 का विस्तार करते हुए कहा कि “समानता और मनमानापन एक-दूसरे के विरोधी हैं।” यदि राज्य की कोई कार्रवाई अनुचित, अतार्किक या मनमानी है, तो वह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

अनुच्छेदमुख्य केंद्रलोकतंत्र में भूमिका
12राज्य की परिभाषाउन संस्थाओं की पहचान करना जो मौलिक अधिकारों को मानने के लिए बाध्य हैं।
13न्यायिक समीक्षामौलिक अधिकारों को नए या पुराने कानूनों द्वारा कमजोर होने से बचाना।
14समानता का अधिकारनिष्पक्षता सुनिश्चित करना और भेदभाव व मनमानी सरकारी कार्रवाई को रोकना।

⚖️ मूल अधिकार ढांचा

🏛️ अनुच्छेद 12: “राज्य”
उन संस्थाओं को परिभाषित करता है जिनके विरुद्ध मूल अधिकार लागू होते हैं: संघ और राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और अन्य प्राधिकारी। निजी संस्थाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं यदि वे राज्य के नियंत्रण में हों।
🛡️ अनुच्छेद 13: न्यायिक समीक्षा
यह अधिकारों का रक्षक है। मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाली विधियां शून्य होंगी। इसमें पृथक्करणीयता का सिद्धांत (केवल खराब हिस्सा हटाना) और आच्छादन का सिद्धांत शामिल हैं।
🤝 अनु. 14: समानता के स्तंभ
1. विधि के समक्ष समता: नकारात्मक अवधारणा (UK); कानून से ऊपर कोई नहीं।
2. विधियों का समान संरक्षण: सकारात्मक अवधारणा (USA); समान परिस्थितियों में समान व्यवहार।
🔍 वर्गीकरण और मनमानापन
यह तर्कसंगत वर्गीकरण की अनुमति देता है यदि वह बोधगम्य अंतरक पर आधारित हो। रॉयप्पा केस के अनुसार, समानता मनमानेपन (Arbitrariness) की विरोधी है।
📜 “विधि” क्या है? (अनु. 13)
इसमें अध्यादेश, उप-नियम, नियम, अधिसूचनाएं और यहां तक कि कानून की शक्ति रखने वाली रूढ़ियां भी शामिल हैं। राज्य कार्यकारी आदेशों के जरिए अधिकारों को नहीं छीन सकता।
🚫 परित्याग का सिद्धांत
भारत में कोई व्यक्ति अपने मूल अधिकारों का परित्याग नहीं कर सकता। चूंकि ये अधिकार सार्वजनिक हित के लिए हैं, संविधान आपकी रक्षा आपकी अपनी सहमति (अधिकार छोड़ने की) से भी करता है।
निष्कर्ष अनुच्छेद 12 लक्ष्य की पहचान करता है, अनुच्छेद 13 रक्षा कवच (न्यायिक समीक्षा) प्रदान करता है, और अनुच्छेद 14 भारतीय लोकतंत्र में निष्पक्षता की भावना स्थापित करता है।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (08 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (जनसंख्या और संबंधित मुद्दे); GS पेपर 2 (शासन; नीतियां और हस्तक्षेप)।

  • संदर्भ: भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने अधिसूचित किया है कि जनगणना 2027 का पहला चरण—मकान सूचीकरण (Houselisting Operations – HLO)—1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक चलेगा।
  • मुख्य बिंदु:
    • डिजिटल जनगणना: यह भारत के इतिहास की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
    • जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार, फरवरी 2027 में दूसरे चरण के दौरान जातिगत पहचान की गणना की जाएगी।
    • मकान सूचीकरण चरण: प्रत्येक राज्य में 30 दिनों की अवधि में आयोजित, इसमें आवास संरचना, अनाज की खपत और पीने के पानी के स्रोत जैसे 35 प्रश्न शामिल होंगे।
    • स्व-गणना (Self-Enumeration): घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों के पास खुद से जानकारी भरने (Self-enumeration) का विकल्प होगा।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जनसांख्यिकी”, “सामाजिक न्याय (जाति जनगणना)” और “डिजिटल गवर्नेंस” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • लॉजिस्टिक पैमाना: डेटा संग्रह और पर्यवेक्षण के लिए गणनाकारों और पर्यवेक्षकों सहित लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
    • योजना का आधार: जनगणना के आंकड़े विभिन्न गणनाओं और अनुपातों का आधार बनते हैं, जिनका उपयोग केंद्रीय बजट तैयार करने और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां)।

  • संदर्भ: नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के विस्तार और इसके निरीक्षण के लिए किसी वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) की कमी की आलोचना।
  • मुख्य बिंदु:
    • पहुंच का विस्तार: इसका उपयोग काफी बढ़ गया है, प्रति माह लगभग 45,000 अनुरोध आ रहे हैं। अब पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर तक के अधिकारियों को इसकी पहुंच दी गई है।
    • NPR एकीकरण: रिपोर्टों के अनुसार NATGRID को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 119 करोड़ निवासियों का विवरण है।
    • “गांडीव” (Gandiva) इंजन: एक विश्लेषणात्मक इंजन का उपयोग किया जा रहा है जो बिखरे हुए रिकॉर्ड्स को जोड़कर व्यक्तियों की सटीक पहचान करने में सक्षम है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “निगरानी बनाम निजता”, “मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)” और “आंतरिक सुरक्षा बुनियादी ढांचा”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • वैधानिक निरीक्षण की कमी: नेटग्रिड को संसद के अधिनियम के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से मंजूरी दी गई थी, जिससे स्वतंत्र निरीक्षण पर संवैधानिक प्रश्न उठते हैं।
    • पक्षपात का जोखिम: संपादकीय चेतावनी देता है कि एल्गोरिदम डेटा में मौजूद सामाजिक पूर्वाग्रहों (जाति, धर्म या भूगोल) को दोहरा सकते हैं, जिससे गलत पहचान और उत्पीड़न की संभावना बढ़ सकती है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; विकास)।

  • संदर्भ: केंद्र सरकार के प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.5% से अधिक है।
  • मुख्य बिंदु:
    • विकास पथ: जहाँ वर्ष की पहली छमाही में विकास दर 7.8% और 8.2% रही, वहीं दूसरी छमाही में इसके घटकर 6.8% रहने की उम्मीद है।
    • बाहरी चुनौतियाँ: कपड़ा, परिधान और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
    • क्षेत्रीय प्रदर्शन: सेवा क्षेत्र (Tertiary Sector) में 9.1% की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि खनन क्षेत्र में 0.7% की गिरावट का अनुमान है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आर्थिक विकास”, “निर्यात क्षेत्र की चुनौतियां” और “बजटीय गणना”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • उपभोक्ता व्यय: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) के 7% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष के 7.2% से थोड़ा कम है।
    • बजट का आधार: प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) अब तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पूरे वर्ष के विकास का पूर्वानुमान है और यह केंद्रीय बजट की तैयारी का आधार बनता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; जलवायु परिवर्तन)।

  • संदर्भ: पेरिस सम्मेलन की प्रतिबद्धताओं पर भारत की प्रगति का मूल्यांकन, जिसमें उत्सर्जन तीव्रता (Intensity) में कमी और पूर्ण उत्सर्जन (Absolute Emissions) के बीच संघर्ष को रेखांकित किया गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • उत्सर्जन तीव्रता: भारत ने 2020 तक अपनी उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36% की कमी की (2005 के आधार पर), जिससे अपना मूल लक्ष्य समय से पहले ही पूरा कर लिया।
    • उत्पादन अंतराल: जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 51% तक पहुँचने के बावजूद, बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी अभी भी 70% से अधिक है क्योंकि यह “बेसलोड” बिजली प्रदान करता है।
    • वन क्षेत्र की परिभाषा: ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023’ की आलोचना की गई है क्योंकि इसमें एकल-कृषि (Monocultures) और वृक्षारोपण को भी वन क्षेत्र में शामिल किया गया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जलवायु परिवर्तन शमन”, “नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति” और “सतत विकास लक्ष्य”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भंडारण की समस्या: स्थापित क्षमता को निरंतर बिजली उत्पादन में बदलने के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के बड़े पैमाने पर विस्तार की आवश्यकता है। वर्तमान में यह केवल 500 MWh है, जबकि 2029-30 तक लक्ष्य 336 GWh का है।
    • पूर्ण उत्सर्जन: जीडीपी विकास उत्सर्जन वृद्धि से तेज रही है, जिसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में कुल उत्सर्जन कम हुए बिना उत्सर्जन तीव्रता में गिरावट आई है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)।

  • संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मन की बात” संबोधन के बाद सूक्ष्मजीवरोधी प्रतिरोध (AMR) पर कार्रवाई तेज करने की आवश्यकता पर चर्चा।
  • मुख्य बिंदु:
    • तर्कहीन उपयोग: भारत में AMR का सबसे बड़ा कारण जनता द्वारा एंटीबायोटिक्स का बिना सोचे-समझे और अंधाधुंध उपयोग है।
    • निगरानी अंतराल: वर्तमान में AMR की निगरानी मुख्य रूप से शहरी और बड़े मेडिकल कॉलेजों (60 लैब) तक सीमित है, जबकि ग्रामीण और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को छोड़ दिया गया है।
    • ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण: इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की अंतर्संबंधता को पहचानना आवश्यक है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति”, “संक्रामक रोग” और “सरकारी जागरूकता अभियान”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • कार्रवाई का आह्वान: विशेषज्ञों का तर्क है कि एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटासेट में निजी अस्पतालों और प्राथमिक केंद्रों का डेटा भी शामिल होना चाहिए ताकि प्रतिरोध की सही तस्वीर सामने आए।
    • नीतिगत प्रभाव: पीएम के संबोधन से इस विषय के मुख्यधारा में आने की उम्मीद है, जिससे प्रयोगशाला आधारित चेतावनियों को व्यापक सार्वजनिक आंदोलन में बदला जा सकेगा।

संपादकीय विश्लेषण

08 जनवरी, 2026
GS-1 समाज
📊 जनगणना 2027: डिजिटल मील का पत्थर
भारत की पहली डिजिटल जनगणना अधिसूचित; हाउसलिस्टिंग अप्रैल 2026 में शुरू होगी। बड़ी उपलब्धि: स्वतंत्र भारत में पहली बार दूसरे चरण में जाति गणना की जाएगी। 30 लाख कर्मी उपभोग और आवास सहित 35 मापदंडों पर डेटा एकत्र करेंगे।
GS-3 सुरक्षा
👁️ नेटग्रिड (NATGRID): निगरानी बनाम कानून
नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को NPR (119 करोड़ निवासी) के साथ एकीकृत किया गया। “गांडीव” इंजन खंडित रिकॉर्ड के मिलान में सक्षम। मुख्य चिंता: प्रति माह 45,000 अनुरोधों तक पहुँचने के बावजूद इसके स्वतंत्र निरीक्षण के लिए वैधानिक ढांचे की कमी।
GS-3 अर्थव्यवस्था
📈 GDP आउटलुक: 7.4% वृद्धि का अनुमान
FAE ने वित्त वर्ष 26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान लगाया है। चुनौतियां: कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर 50% अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव। सेवा क्षेत्र (9.1%) और खनन (-0.7%) में भारी अंतर।
GS-3 पर्यावरण
🔋 जलवायु लक्ष्य और भंडारण अंतराल
उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी। समस्या: ‘बेसलोड’ बिजली के रूप में कोयला अब भी 70% उत्पादन करता है। मुख्य बाधा: अक्षय ऊर्जा के लिए भारत को अपनी भंडारण क्षमता वर्तमान 500 MWh से बढ़ाकर 2030 तक 336 GWh करनी होगी।
GS-2 स्वास्थ्य
💊 AMR: शहरी केंद्रों से परे निगरानी
प्रधानमंत्री के “मन की बात” संबोधन का उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को मुख्यधारा में लाना है। निगरानी अंतराल: वर्तमान में केवल 60 शहरी लैब तक सीमित। समाधान: प्राथमिक स्वास्थ्य और निजी डेटासेट को एकीकृत करने वाला “वन हेल्थ” दृष्टिकोण।

यहाँ भारत की भू-राजनीतिक सीमाओं, पर्वतीय दर्रों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमियों (Wetlands) का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

भारत सात देशों के साथ अपनी जमीनी सीमाएँ साझा करता है। ये सीमाएँ लंबाई और भौगोलिक भू-भाग के मामले में काफी भिन्न हैं।

रैंकपड़ोसी देशसीमा की लंबाई (लगभग)मुख्य साझा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
1बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
2चीन3,488 किमीलद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
3पाकिस्तान3,323 किमीगुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख
4नेपाल1,751 किमीउत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम
5म्यांमार1,643 किमीअरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम
6भूटान699 किमीसिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश
7अफगानिस्तान106 किमीलद्दाख (पी.ओ.के. क्षेत्र)

पर्वतीय दर्रे (ला) पर्वत श्रृंखलाओं के बीच के प्राकृतिक मार्ग होते हैं। ये व्यापार, यात्रा और सैन्य रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • लद्दाख और जम्मू-कश्मीर:
    • ज़ोजिला (Zoji La): श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
    • खारदुंग ला (Khardung La): दुनिया की सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़कों में से एक के रूप में जाना जाता है।
    • बनिहाल दर्रा (Banihal Pass): कश्मीर घाटी को बाहरी हिमालय (जम्मू) से जोड़ता है।
  • हिमाचल प्रदेश:
    • रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass): कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है।
    • शिपकी ला (Shipki La): हिमाचल प्रदेश को तिब्बत (चीन) से जोड़ता है।
  • सिक्किम:
    • नाथू ला (Nathu La): एक प्राचीन सिल्क रूट शाखा जो सिक्किम को तिब्बत से जोड़ती है।
    • जेलेप ला (Jelep La): सिक्किम को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है।
  • अरunachal प्रदेश:
    • बोमडिला (Bomdi La): अरुणाचल प्रदेश को ल्हासा से जोड़ता है।

आर्द्रभूमियाँ “जैविक सुपरमार्केट” हैं जो विशाल खाद्य जाल और जल शुद्धिकरण प्रदान करती हैं। भारत में 80 से अधिक रामसर स्थल हैं।

  • चिल्का झील (ओडिशा): भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रवास स्थल।
  • केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान): एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि और प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य (जिसे पहले भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था)।
  • वुलर झील (जम्मू और कश्मीर): एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की झीलों में से एक, जो विवर्तनिक गतिविधि (Tectonic activity) से बनी है और झेलम नदी द्वारा पोषित है।
  • सांभर झील (राजस्थान): भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय नमक की झील।
  • अष्टमुडी आर्द्रभूमि (केरल): एक अद्वितीय ताड़ के आकार का मुहाना (Estuary), जो स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भोज आर्द्रभूमि (मध्य प्रदेश): भोपाल शहर में स्थित दो झीलें, जो निवासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराती हैं।
श्रेणीमुख्य बिंदुभौगोलिक केंद्र
सबसे लंबी सीमाबांग्लादेशपूर्वी भारत
सबसे ऊँचा दर्राखारदुंग लालद्दाख श्रेणी
सबसे बड़ी आर्द्रभूमिसुंदरबन / चिल्कातटीय क्षेत्र
सबसे छोटी सीमाअफगानिस्तानउत्तर-पश्चिमी लद्दाख

मानचित्र पर पड़ोसी देशों के साथ लगने वाले राज्यों के क्रम (उत्तर-से-दक्षिण और पूर्व-से-पश्चिम) को ध्यान से देखें, क्योंकि UPSC अक्सर ऐसे प्रश्न पूछता है।

सीमाएँ और प्रवेश द्वार

भू-राजनीति
🚩 राष्ट्रीय सीमाएँ
भारत सात देशों के साथ थल सीमा साझा करता है, विशाल 4,096 किमी बांग्लादेश सीमा से लेकर 106 किमी की छोटी अफगानिस्तान पट्टी तक।
देश लंबाई प्रमुख साझा क्षेत्र
बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य
चीन3,488 किमीलद्दाख, अरुणाचल प्रदेश
पाकिस्तान3,323 किमीराजस्थान, पंजाब, J&K
🎯 मिशन: नेपाल के साथ सीमा साझा करने वाले पांच भारतीय राज्यों की पहचान करें।
मार्ग (Navigation)
🏔️ पर्वतीय दर्रे (La)
नाथू ला और ज़ोजी ला जैसे रणनीतिक प्रवेश द्वार दुनिया की सबसे ऊँची श्रेणियों के बीच महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग प्रदान करते हैं।
🎯 मिशन: खारदुंग ला को लोकेट करें और एक मोटर योग्य सड़क के रूप में इसके महत्व को नोट करें।
पारिस्थितिकी
🦆 रामसर आर्द्रभूमि (Wetlands)
भारत के ‘जैविक सुपरमार्केट’ में चिल्का झील और वुलर झील जैसे पारिस्थितिक रूप से समृद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
🎯 मिशन: झेलम नदी के मार्ग को वुलर झील के साथ उसके जुड़ाव तक ट्रैक करें।

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 7 जनवरी 2026 (Hindi)

यह अध्याय “राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य” हमें बताता है कि कैसे लगभग 3,000 से 2,500 साल पहले छोटे कबीलों (जनों) से बड़े संगठित राज्यों का उदय हुआ और शासन की विभिन्न प्रणालियाँ विकसित हुईं।

लगभग 3,000 साल पहले, राजा बनने की प्रक्रिया में बदलाव आया। अब कुछ लोग बड़े-बड़े यज्ञों का आयोजन करके राजा के रूप में प्रतिष्ठित होने लगे।

  • अश्वमेध यज्ञ (घोड़े की बलि): यह एक प्रमुख अनुष्ठान था जिसमें एक घोड़े को राजा के आदमियों की देखरेख में स्वतंत्र घूमने के लिए छोड़ दिया जाता था।
  • यज्ञ का महत्व: यदि कोई दूसरा राजा घोड़े को रोकता था, तो उसे युद्ध करना पड़ता था; यदि वे उसे जाने देते थे, तो इसका अर्थ था कि उन्होंने यज्ञ करने वाले राजा को अधिक शक्तिशाली स्वीकार कर लिया है।
  • राजा की भूमिका: वह इस आयोजन का मुख्य केंद्र होता था। वह अक्सर एक विशेष सिंहासन या बाघ की खाल पर बैठता था, जबकि उसका सारथी युद्ध के मैदान में उसकी वीरता की कहानियाँ सुनाता था।
  • वर्ण व्यवस्था (The Varna System): पुरोहितों ने समाज को चार समूहों में विभाजित किया था जिन्हें ‘वर्ण’ कहा जाता था। प्रत्येक वर्ण के कार्य जन्म के आधार पर निर्धारित थे:
    1. ब्राह्मण: वे वेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करते थे, जिसके लिए उन्हें उपहार मिलते थे।
    2. क्षत्रिय (शासक): इनका काम युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।
    3. वैश्य (कृषक/व्यापारी): इनमें किसान, पशुपालक और व्यापारी आते थे। क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही यज्ञ कर सकते थे।
    4. शूद्र: इन्हें अन्य तीन समूहों की सेवा करनी पड़ती थी। ये कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे और न ही वेद पढ़ सकते थे।
    5. अछूत: बाद के समय में शिल्पकारों, शिकारियों और शवों को दफनाने वालों के एक समूह को अछूत माना जाने लगा।

जैसे-जैसे राजाओं ने बड़े यज्ञ किए, उन्हें अब केवल कबीलों का राजा न मानकर ‘जनपदों’ (जहाँ ‘जन’ ने अपने पैर रखे और बस गए) का राजा माना जाने लगा।

  • जनपद: पुरातत्वविदों ने पुराना किला (दिल्ली) और हस्तिनापुर (मेरठ के पास) जैसी बस्तियों की खोज की है। यहाँ लोग झोपड़ियों में रहते थे और चावल, गेहूँ, गन्ना जैसी फसलें उगाते थे।
  • महाजनपद: लगभग 2,500 साल पहले, कुछ जनपद अन्य की तुलना में अधिक शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हो गए। इन्हें ‘महाजनपद’ कहा गया।
  • किलेबंदी (Fortification): अधिकांश महाजनपदों की राजधानियों के चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊँची और मज़बूत दीवारें बनाई गई थीं। ये सुरक्षा के लिए, शक्ति के प्रदर्शन के लिए और जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए बनाई जाती थीं।
  • सेना और कर (Taxes): राजाओं ने अब नियमित और वेतनभोगी सेनाएँ रखना शुरू कर दिया। किलों के निर्माण और सेना के खर्च के लिए, वे अब उपहारों के बजाय नियमित कर वसूलने लगे।

कृषि में दो बड़े बदलाव आए जिससे खाद्य उत्पादन में वृद्धि हुई:

  1. लोहे के हल के फाल: अब लकड़ी के हल के स्थान पर लोहे के फाल का उपयोग होने लगा, जिससे कठोर जमीन को आसानी से जोता जा सका और अधिक अनाज पैदा हुआ।
  2. धान का प्रत्यारोपण (Transplantation): बीजों को बिखेरने के बजाय, अब धान के पौधे तैयार कर उन्हें खेतों में लगाया जाने लगा। इससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ गई और पैदावार अधिक हुई।
  • कर (Tax): किसान अपनी उपज का 1/6 हिस्सा कर के रूप में देते थे, जिसे ‘भाग’ कहा जाता था। शिल्पकार श्रम के रूप में कर चुकाते थे, जबकि पशुपालक जानवरों या पशु उत्पादों के रूप में कर देते थे।

अध्याय में शासन की दो अलग-अलग प्रणालियों का उल्लेख है: राजतंत्र और गणतंत्र

  • भूगोल: मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया। गंगा और सोन नदियाँ यहाँ से बहती थीं, जो परिवहन, जल आपूर्ति और जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण थीं।
  • संसाधन: यहाँ के जंगलों से सेना के लिए हाथी और इमारतों के निर्माण के लिए लकड़ी मिलती थी। लोहे की खदानों से मज़बूत हथियार बनाने के लिए लोहा मिलता था।
  • शासक: बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्म नन्द जैसे शक्तिशाली राजाओं ने इस साम्राज्य का विस्तार किया।
  • राजधानी: पहले राजगृह (बिहार) मगध की राजधानी थी, जिसे बाद में पाटलिपुत्र (पटना) स्थानांतरित कर दिया गया।
  • अलग शासन व्यवस्था: मगध के विपरीत, वज्जि में ‘गण’ या ‘संघ’ शासन प्रणाली थी, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
  • कई शासक: गण या संघ में एक नहीं बल्कि कई शासक (राजा) होते थे जो मिलकर शासन करते थे।
  • सभाएँ: ये राजा सभाओं में मिलते थे और चर्चा तथा बहस के माध्यम से निर्णय लेते थे।
  • वर्जित: महिलाओं, दासों और ‘कम्मकारों’ (मजदूरों) को इन सभाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।
समयघटना
लगभग 3000 साल पहलेयज्ञों के माध्यम से नए प्रकार के राजाओं का उदय।
लगभग 2500 साल पहलेमहाजनपदों का उदय और किलेबंद शहरों का विकास।
लगभग 2300 साल पहलेसिकंदर का आक्रमण और बौद्ध ग्रंथों का लेखन।
लगभग 1500 साल पहलेगुप्त शासकों द्वारा गणों/संघों पर विजय और उनका अंत।

👑 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

🔱 अनुष्ठान और वर्ण
राजाओं का चुनाव अश्वमेध जैसे यज्ञों द्वारा होने लगा। समाज जन्म के आधार पर 4 वर्णों में विभाजित था:
ब्राह्मण: वेदों का अध्ययन/यज्ञ करना
क्षत्रिय: युद्ध करना और रक्षा करना
वैश्य: किसान, पशुपालक और व्यापारी
शूद्र: अन्य तीन वर्गों की सेवा करना
🧱 महाजनपद
2,500 साल पहले कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण हो गए, जिन्हें महाजनपद कहा गया। इनकी विशाल किलेबंदी होती थी और नियमित सेनाओं के लिए भाग (उपज का 1/6 हिस्सा) नामक कर लिया जाता था।
🌾 कृषि में परिवर्तन
दो बड़े बदलाव आए:
1. लोहे के फाल: कठोर जमीन को आसानी से जोता जाने लगा।
2. धान का प्रत्यारोपण: बीजों को छिड़कने के बजाय पौधों को रोपकर खेती शुरू हुई, जिससे पैदावार बढ़ गई।
⚖️ सत्ता के दो रूप
मगध: नदियों और लोहे की खानों के कारण सबसे शक्तिशाली राजतंत्र बना।
वज्जि: यहाँ शासन का स्वरूप गण या संघ था, जहाँ कई शासक (राजा) मिलकर सभाओं में चर्चा के जरिए निर्णय लेते थे।
समयरेखा 3,000y पहले: नए राजाओं का उदय • 2,500y पहले: महाजनपदों का काल • 2,300y पहले: सिकंदर का आक्रमण • 1,500y पहले: गण या संघों का अंत।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-6 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

अभी डाउनलोड करें

भारतीय संवैधानिक और कानूनी ढांचे के आधार पर, नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके और इसे खोने के तीन तरीके बताता है।

  • 1 जुलाई, 1987 से पहले: भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, चाहे उसके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
  • 1 जुलाई, 1987 – 3 दिसंबर, 2004: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक होगा यदि जन्म के समय उसके माता-पिता में से कम से कम कोई एक भारत का नागरिक हो।
  • 3 दिसंबर, 2004 के बाद: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक माना जाएगा यदि उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा ‘अवैध प्रवासी’ (Illegal migrant) न हो।
  • यह भारत के बाहर पैदा हुए लोगों पर लागू होता है।
  • यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है, तो वह भारत का नागरिक हो सकता है यदि उसके पिता (1992 के बाद माता-पिता में से कोई भी) जन्म के समय भारत के नागरिक थे।
  • 3 दिसंबर, 2004 के बाद, ऐसे जन्मों का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास (Consulate) में कराना अनिवार्य है।

केंद्र सरकार आवेदन पर किसी भी व्यक्ति (अवैध प्रवासी को छोड़कर) को नागरिक के रूप में पंजीकृत कर सकती है, यदि वे निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:

  • भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) जो सात साल से भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हों।
  • वे व्यक्ति जो भारतीय नागरिकों से विवाहित हैं और पंजीकरण से पहले सात साल से भारत में रह रहे हों।
  • भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।

कोई भी विदेशी नागरिक नागरिकता प्राप्त कर सकता है यदि वह 12 वर्षों से भारत में रह रहा हो (आवेदन से ठीक 1 वर्ष पहले और पिछले 14 वर्षों में से कुल 11 वर्ष) और निम्नलिखित योग्यताएं रखता हो:

  • उसका चरित्र अच्छा हो।
  • संविधान की आठवीं अनुसूची में निर्दिष्ट किसी एक भाषा का ज्ञान हो।
  • उसका इरादा भारत में ही रहने का हो।

यदि कोई विदेशी क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पुडुचेरी या गोवा का संघ में शामिल होना), तो भारत सरकार उन व्यक्तियों को निर्दिष्ट करती है जो भारत के नागरिक होंगे।

  • कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता त्यागने की घोषणा कर सकता है।
  • जब कोई व्यक्ति नागरिकता त्यागता है, तो उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिग बच्चा भी अपनी भारतीय नागरिकता खो देता है (हालाँकि, बच्चा 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर इसे पुनः प्राप्त कर सकता है)।
  • भारत ‘एकल नागरिकता’ के सिद्धांत का पालन करता है।
  • यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वचालित रूप से समाप्त हो जाती है।

केंद्र सरकार द्वारा निम्नलिखित आधारों पर किसी व्यक्ति की नागरिकता अनिवार्य रूप से समाप्त की जा सकती है:

  • यदि नागरिकता धोखाधड़ी (Fraud) से प्राप्त की गई हो।
  • नागरिक ने भारत के संविधान के प्रति अनिष्ठा (Disloyalty) दिखाई हो।
  • युद्ध के दौरान नागरिक ने शत्रु के साथ अवैध रूप से व्यापार या संचार किया हो।
  • पंजीकरण या देशीयकरण के पाँच वर्षों के भीतर, उस नागरिक को किसी भी देश में दो साल के लिए जेल हुई हो।

🇮🇳 नागरिकता अधिनियम, 1955

👶 अर्जन: जन्म द्वारा
मानदंड मिट्टी के अधिकार (Jus Soli) से रक्त के अधिकार (Jus Sanguinis) की ओर विकसित हुए। 2004 के बाद, दोनों माता-पिता नागरिक होने चाहिए, या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।
✈️ अर्जन: वंश द्वारा
भारत के बाहर जन्मे लोगों के लिए। 1992 से, माता या पिता में से कोई भी नागरिक हो सकता है। 2004 के बाद के जन्मों का 1 वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास में पंजीकरण अनिवार्य है।
✍️ पंजीकरण द्वारा
भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) या भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी पर लागू। आवेदन करने से पहले भारत में 7 वर्ष तक सामान्य निवास आवश्यक है।
🏛️ प्राकृतिकरण द्वारा
भारत में 12 वर्ष से रह रहे विदेशियों के लिए। अच्छा चरित्र और 8वीं अनुसूची की किसी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।
🗺️ क्षेत्र समावेश और त्याग
क्षेत्र समावेश: नए क्षेत्र के भारत में मिलने पर सरकार नागरिकता देती है। स्वेच्छा से त्याग: अपनी इच्छा से नागरिकता छोड़ना; बच्चों की नागरिकता भी समाप्त हो जाती है।
🚫 अनिवार्य समाप्ति
बर्खास्तगी: विदेशी नागरिकता लेने पर स्वतः अंत। वंचित करना: धोखाधड़ी, संविधान के प्रति अनादर या युद्ध के समय शत्रु की मदद करने पर सरकार द्वारा निष्कासन।
विशेष तथ्य नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) ने पड़ोसी देशों के कुछ धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए प्राकृतिकरण की अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया है।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (07 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था और शासन; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)

  • संदर्भ: भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए इसे “समांतर NRC” (parallel NRC) होने के दावों को खारिज कर दिया।
  • मुख्य बिंदु:
    • संवैधानिक कर्तव्य: आयोग का तर्क है कि अनुच्छेद 324 के तहत उसका यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी विदेशी देश की मतदाता सूची में स्थान न पाए।
    • NRC से भिन्नता: आयोग के अनुसार NRC में सभी नागरिकों का पंजीकरण होता है, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से ऊपर के स्वस्थ दिमाग वाले नागरिकों को ही शामिल किया जाता है।
    • बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अकेले उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए (कुल सूची का 18.7%), जिसका मुख्य कारण स्थायी प्रवास और मृत्यु बताया गया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “संवैधानिक निकाय (चुनाव आयोग)”, “चुनावी सुधार” और “नागरिकता कानून” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • नागरिक-केंद्रित शासन: आयोग के वकील ने तर्क दिया कि संविधान “नागरिक-केंद्रित” है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी के लिए नागरिकता मुख्य आधार बन जाती है।
    • राजनीतिक विरोध: पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने तकनीकी खामियों का आरोप लगाया है और कहा है कि आयोग एक राजनीतिक दल द्वारा विकसित ऐप का उपयोग कर रहा है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन; सामाजिक न्याय) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था- श्रम सुधार)

  • संदर्भ: एक निजी सदस्य विधेयक के माध्यम से भारत के कार्यबल में ‘बर्नआउट’ (काम का अत्यधिक तनाव) और मानसिक स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए ‘डिस्कनेक्ट होने के अधिकार’ (Right to Disconnect) की मांग की गई है।
  • मुख्य बिंदु:
    • बर्नआउट डेटा: ILO के अनुसार, भारत का 51% कार्यबल प्रति सप्ताह 49 घंटे से अधिक काम करता है (वैश्विक स्तर पर दूसरा), और 78% कर्मचारी काम के तनाव (Burnout) की रिपोर्ट करते हैं।
    • प्रस्तावित संरक्षण: विधेयक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निर्धारित घंटों के बाद काम के कॉल या मैसेज का जवाब न देने पर कर्मचारियों को दंडित न किया जाए।
    • वैश्विक उदाहरण: फ्रांस (2017 से), पुर्तगाल, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने श्रम कानूनों में इसे पहले ही शामिल कर लिया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “श्रम सुधार”, “मानसिक स्वास्थ्य” और “कार्य-जीवन संतुलन” (Work-Life Balance) के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • कानूनी कमियाँ: ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (2020)’ अक्सर अनुबंधात्मक और ‘गिग’ श्रमिकों (Gig workers) को शोषणकारी घंटों से बचाने में विफल रहती है।
    • उत्पादकता का भ्रम: संपादकीय का तर्क है कि थका हुआ कर्मचारी कम उत्पादक होता है; विश्राम का समय स्थायी आर्थिक विकास के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)

  • संदर्भ: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
  • मुख्य बिंदु:
    • बल का अवैध प्रयोग: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है (सिवाय आत्मरक्षा या सुरक्षा परिषद की अनुमति के), जो इस मामले में लागू नहीं थे।
    • राज्य प्रमुख की उन्मुक्ति (Immunity): अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, राज्य प्रमुखों को विदेशी अदालतों के आपराधिक क्षेत्राधिकार से व्यक्तिगत उन्मुक्ति प्राप्त होती है।
    • चीन का झुकाव: वेनेजुएला का झुकाव चीन की ओर बढ़ा है; 2014 से वेनेजुएला के कुल हथियार आयात का 46% चीन से रहा है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “अंतरराष्ट्रीय कानून”, “वैश्विक भू-राजनीति” और “भारत की विदेश नीति की चुनौतियां” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • डिजिटल संप्रभुता: यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि राजनीतिक संप्रभुता डिजिटल संप्रभुता से अलग नहीं है; विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता नेतृत्व को ‘ट्रैकिंग’ के प्रति असुरक्षित बनाती है।
    • आर्थिक वर्चस्व: इस कदम को ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ (Monroe Doctrine) के पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करना है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; संरक्षण; जलवायु परिवर्तन)

  • संदर्भ: एक विश्लेषण कि क्यों घास के मैदानों और सवाना को जंगलों के साथ राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं (NDCs) में एकीकृत किया जाना चाहिए।
  • मुख्य बिंदु:
    • कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration): घास के मैदान जंगलों की तुलना में बेहतर और अधिक स्थिर कार्बन सिंक हो सकते हैं, फिर भी उन्हें COP30 जैसी वार्ताओं से बाहर रखा गया है।
    • नीतिगत समस्या: भारत में घास के मैदान 18 अलग-अलग मंत्रालयों के अंतर्गत आते हैं और अक्सर उन्हें “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में लेबल किया जाता है।
    • अंतरराष्ट्रीय मान्यता: संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जैव विविधता संरक्षण”, “जलवायु शमन रणनीतियाँ” और “चरवाहों के अधिकार” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भारत के लिए अवसर: अपने NDCs में घास के मैदानों को मान्यता देकर, भारत अपने जलवायु शमन प्रयासों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दे सकता है।
    • सामाजिक न्याय: चरागाहों की रक्षा करना स्वदेशी लोगों के क्षेत्रीय अधिकारों को मान्यता देने से जुड़ा एक सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; पश्चिम एशिया)

  • संदर्भ: ईरान में राष्ट्रव्यापी आर्थिक विरोध प्रदर्शनों और इसके राजनीतिक जोखिमों का विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • आर्थिक तनाव: ईरान में खाद्य मुद्रास्फीति 64% तक पहुँच गई है और जून 2025 से रियाल की कीमत में 60% की गिरावट आई है।
    • दैनिक कठिनाइयाँ: बिजली कटौती एक दैनिक वास्तविकता बन गई है और सरकार “फंसी हुई” महसूस कर रही है।
    • दमन का चक्र: बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बाहरी खतरों के बीच सरकार का दमनकारी रुख एक “संकट का चक्र” पैदा कर रहा है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “पश्चिम एशिया भू-राजनीति” और “ईरान में भारत के रणनीतिक हित” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • सुधार की अनिवार्यता: संपादकीय का तर्क है कि गहराते आर्थिक संकट के सामने धर्म और राष्ट्रवाद जनता को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते।
    • अमेरिकी नीति की आलोचना: वाशिंगटन की “आर्थिक दबाव” की नीति आम ईरानियों की पीड़ा को बढ़ा रही है और शासन को अधिक संदिग्ध बना रही है।
    • आगे की राह: स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान के नेतृत्व को आंतरिक सुधार शुरू करने और भ्रष्टाचार से निपटने की आवश्यकता है।

संपादकीय विश्लेषण

07 जनवरी, 2026
GS-2 राजव्यवस्था
🗳️ मतदाता सूची बनाम NRC का डर
चुनाव आयोग (EC) अनुच्छेद 324 के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करता है। मुख्य प्रवृत्ति: “नागरिक-केंद्रित” सूची सुनिश्चित करने के लिए यूपी में 2.89 करोड़ नाम (सूची का 18.7%) हटाए गए। EC आयु और मानसिक क्षमता के आधार पर मतदाता सूची को NRC से अलग मानता है।
GS-2 सामाजिक
📵 ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ विधेयक
शशि थरूर का विधेयक भारत के ‘बर्नआउट’ संकट को संबोधित करता है जहाँ 51% कर्मचारी सप्ताह में 49 घंटे से अधिक काम करते हैं। प्रस्ताव: काम के घंटों के बाद कॉल इग्नोर करने पर कर्मचारियों को दंड से कानूनी सुरक्षा। लक्ष्य: शोषणकारी श्रम से सतत आर्थिक विकास की ओर बढ़ना।
GS-2 अंत. संबंध
🇻🇪 संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की हिरासत की संयुक्त राष्ट्र चार्टर अनुच्छेद 2(4) के उल्लंघन के रूप में आलोचना। यह कदम “डिजिटल संप्रभुता” के जोखिमों को भी उजागर करता है। ध्यान दें: चीन अब वेनेजुएला को 46% हथियारों का निर्यात करता है, जो भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
GS-3 पर्यावरण
🌾 घास के मैदान: अदृश्य कार्बन सिंक
घास के मैदान वनों की तुलना में अधिक स्थिर कार्बन सिंक हैं, फिर भी भारत में इन्हें ‘बंजर भूमि’ माना जाता है। UN ने 2026 को अंतर्राष्ट्रीय रेंगलैंड्स (चरागाह) वर्ष घोषित किया है। नीतिगत आवश्यकता: NDCs में घास के मैदानों को शामिल करने के लिए 18 मंत्रालयों का एकीकृत प्रबंधन।
GS-2 अंत. संबंध
🇮🇷 ईरान का “संकट चक्र”
खाद्य मुद्रास्फीति 64% तक पहुँच गई है, जबकि रियाल ने 6 महीने में 60% मूल्य खो दिया है। संपादकीय चेतावनी देता है कि अब धर्म या राष्ट्रवाद आर्थिक दुर्दशा की भरपाई नहीं कर सकते, जिससे दमन के बजाय आंतरिक सुधार आवश्यक हो गए हैं।

भारत का भूगोल उसके विशाल जल निकासी बेसिनों (Drainage Basins) द्वारा परिभाषित है:

हिमालयी नदियाँ (The Himalayan Rivers):

  • सिंधु प्रणाली (Indus System): इसमें सिंधु और उसकी पाँच मुख्य सहायक नदियाँ शामिल हैं: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
  • गंगा प्रणाली (Ganga System): यह भागीरथी और अलकनंदा के मिलने से बनती है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन हैं।
  • ब्रह्मपुत्र प्रणाली (Brahmaputra System): यह अरुणाचल प्रदेश के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है और असम से होकर बहती है।

प्रायद्वीपीय नदियाँ (The Peninsular Rivers):

  • पश्चिम की ओर बहने वाली: नर्मदा और तापी (ये अरब सागर में गिरती हैं)।
  • पूर्व की ओर बहने वाली: महानदी, गोदावरी (प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी), कृष्णा और कावेरी (ये बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं)।

जैव विविधता के संरक्षण के लिए ये क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

बाघ अभयारण्य (Project Tiger):

  • कॉर्बेट (उत्तराखंड): भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य।
  • कान्हा और बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश): उच्च बाघ घनत्व के लिए प्रसिद्ध।
  • रणथंभौर (राजस्थान): अपने शुष्क पर्णपाती आवास के लिए जाना जाता है।
  • सुंदरवन (पश्चिम बंगाल): दुनिया का एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास।
  • पेरियार (केरल): एक अनूठा जंगल और झील आधारित रिजर्व।

प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव:

  • काजीरंगा (असम): ‘एक सींग वाले गेंडे’ के लिए प्रसिद्ध।
  • गिर (गुजरात): ‘एशियाई शेरों’ का अंतिम निवास स्थान।
  • केवलादेव (राजस्थान): एक प्रमुख पक्षी अभयारण्य और आर्द्रभूमि (Wetland)।

खनिजों और ईंधन में भारत की संपदा का मानचित्रण:

तेल और प्राकृतिक गैस भंडार:

  • अपतटीय (Offshore): बॉम्बे हाई (महाराष्ट्र) सबसे बड़ा क्षेत्र है।
  • ओंशोर (Onshore): डिगबोई (असम) सबसे पुराना है; बाड़मेर (राजस्थान) और खंभात (गुजरात) प्रमुख आधुनिक क्षेत्र हैं।

लौह अयस्क और कोयला:

  • लोहा: छोटा नागपुर पठार (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़) में केंद्रित है।
  • कोयला: गोंदवाना क्षेत्रों में पाया जाता है (दामोदर घाटी—झरिया, रानीगंज)।

बॉक्साइट और तांबा:

  • बॉक्साइट: ओडिशा और गुजरात की पहाड़ियों में पाया जाता है।
  • तांबा: बालाघाट (मध्य प्रदेश) और खेतड़ी (राजस्थान)।
विशेषताउदाहरणमुख्य स्थान
प्रमुख नदियाँसिंधु, गंगा, गोदावरीउत्तरी और मध्य भारत के मैदान
बाघ अभयारण्यजिम कॉर्बेट, सरिस्का, वाल्मीकिहिमालय की तराई और मध्य भारत
तेल भंडारमुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी बेसिनअपतटीय और पश्चिमी भारत
वन्यजीवशेर, गेंडा, हाथीगुजरात, असम, कर्नाटक

UPSC के लिए नदियों के उत्तर-से-दक्षिण क्रम और टाइगर रिजर्व के पूर्व-से-पश्चिम क्रम को मानचित्र पर जरूर देखें।

भारतीय भूगोल (Indian Geography)

जल विज्ञान
🌊 नदी प्रणालियाँ
भारत का भू-दृश्य सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी हिमालयी नदियों और गोदावरी एवं नर्मदा जैसी प्रायद्वीपीय नदियों द्वारा निर्मित है।
अभ्यास: पूर्व की ओर बहने वाली नदियों (बंगाल की खाड़ी) और पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों (अरब सागर) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
संरक्षण
🐯 जैव विविधता हॉटस्पॉट
काजीरंगा के गैंडों से लेकर गिर के शेरों और जिम कॉर्बेट के बाघों तक, भारत के राष्ट्रीय उद्यान अद्वितीय पारिस्थितिक क्षेत्रों की रक्षा करते हैं।
अभ्यास: मानचित्र पर सुंदरबन को खोजें और दुनिया के एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास को देखें।
संसाधन
⛏️ खनिज और ऊर्जा संपदा
ऊर्जा का मुख्य स्रोत बॉम्बे हाई जैसे अपतटीय क्षेत्र और दामोदर घाटी की कोयला खदानें हैं, जबकि छोटा नागपुर पठार लौह अयस्क का हृदय स्थल है।
अभ्यास: असम के डिगबोई में ‘सबसे पुराने तेल क्षेत्र’ और राजस्थान के खेतड़ी में तांबे की खदानों की पहचान करें।
त्वरित संदर्भ तालिका
विशेषता प्रमुख उदाहरण स्थान फोकस
प्रमुख नदियाँ सिंधु, गंगा, गोदावरी उत्तरी और मध्य मैदान
बाघ अभयारण्य जिम कॉर्बेट, सरिस्का तलहटी और मध्य भारत
तेल भंडार मुंबई हाई, डिगबोई अपतटीय और उत्तर-पूर्व
वन्यजीव शेर, गैंडे, हाथी गुजरात, असम, दक्षिण भारत

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 6 जनवरी 2026 (Hindi)

यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि प्राचीन साहित्य (वेद) और पुरातात्विक कब्रें (महापाषाण) हज़ारों साल पहले के लोगों के जीवन, विश्वास और सामाजिक संरचनाओं के बारे में क्या जानकारी देती हैं।

वेद प्राचीन धार्मिक ग्रंथों का एक संग्रह हैं। वेद चार हैं: ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।

  • ऋग्वेद: यह सबसे पुराना वेद है, जिसकी रचना लगभग 3,500 वर्ष पहले हुई थी। इसमें एक हज़ार से अधिक प्रार्थनाएँ हैं जिन्हें ‘सूक्त’ (जिसका अर्थ है “अच्छी तरह से बोला गया”) कहा जाता है।
  • देवता: ये सूक्त विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति में रचे गए हैं। मुख्य रूप से तीन देवता महत्वपूर्ण थे: अग्नि (आग के देवता), इंद्र (युद्ध के देवता) और सोम (एक पौधा जिससे एक विशेष पेय बनाया जाता था)।
  • मौखिक परंपरा: ऋग्वेद को मूल रूप से पढ़ा नहीं जाता था; इसे उच्चारण और श्रवण (सुनकर) के माध्यम से याद किया जाता था। ऋषि अपने शिष्यों को अक्षरों और शब्दों को बहुत सावधानी से याद करना सिखाते थे। इसे छापा तो केवल 200 साल से भी कम समय पहले गया है।
  • भाषा: इसकी भाषा ‘वैदिक संस्कृत’ है, जो ‘भारोपीय’ (Indo-European) भाषा परिवार का हिस्सा है।

ऋग्वेद में लोगों का वर्गीकरण उनके काम और समुदाय के आधार पर किया गया है।

  • व्यावसायिक समूह:
    • ब्राह्मण (पुरोहित): वे अनुष्ठान और यज्ञ करते थे।
    • राजा: ये बाद के समय के राजाओं जैसे नहीं थे। इनके पास न तो बड़े महल थे, न ही स्थायी सेना, और न ही वे कर (Tax) वसूलते थे। उस समय राजा का पद वंशानुगत भी नहीं था।
  • समुदाय के लिए शब्द: पूरे समुदाय या जनता के लिए दो शब्दों का प्रयोग होता था— ‘जन’ और ‘विश’ (जिससे वैश्य शब्द निकला है)।
  • आर्य और दास: प्रार्थनाओं की रचना करने वाले स्वयं को ‘आर्य’ कहते थे और अपने विरोधियों को ‘दास’ या ‘दस्यु’ कहते थे। दासों को अक्सर युद्ध में बंदी बनाया जाता था और उन्हें उनके मालिकों की संपत्ति माना जाता था।
  • युद्ध: युद्ध मवेशियों (गायों), उपजाऊ जमीन (चारागाह), पानी और लोगों को बंदी बनाने के लिए लड़े जाते थे। युद्ध में जीते गए धन का कुछ हिस्सा नेताओं के पास रहता था, कुछ पुरोहितों को दिया जाता था और बाकी आम जनता में बाँट दिया जाता था।

जिस समय उत्तर-पश्चिम में वेदों की रचना हो रही थी, उसी समय दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और कश्मीर में लोग ‘महापाषाण’ (Megaliths – बड़े पत्थर) बनाने की परंपरा विकसित कर रहे थे।

  • उद्देश्य: इन बड़े पत्थरों को कब्रगाहों को चिह्नित करने के लिए लगाया जाता था। कुछ जमीन के ऊपर दिखते थे और कुछ जमीन के अंदर होते थे।
  • सिस्ट (Cists): कुछ महापाषाणों को ‘सिस्ट’ कहा जाता है, जिनमें ‘पोर्ट-होल’ (एक बड़ा छेद) होता था, जिसका उपयोग बाद में मरने वाले परिवार के सदस्यों के शवों को अंदर लाने के लिए प्रवेश द्वार के रूप में किया जाता था।
  • कब्रों में वस्तुएं: मृतकों को विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तनों के साथ दफनाया जाता था जिन्हें ‘काले और लाल मृदभांड’ (Black and Red Ware) कहा जाता है। इन कब्रों में लोहे के औजार, घोड़े के उपकरण और सोने व पत्थर के गहने भी मिले हैं।
  • सामाजिक अंतर: कब्रों में मिली वस्तुओं से पता चलता है कि समाज में अमीर-गरीब का अंतर था। उदाहरण के लिए, ब्रह्मगिरि में एक व्यक्ति की कब्र में 33 सोने के मनके और शंख मिले हैं, जबकि दूसरी कब्रों में केवल कुछ मिट्टी के बर्तन ही मिले हैं।

इनामगाँव (घोड़ नदी के किनारे) एक विशिष्ट पुरास्थल है जहाँ लोग 3,600 से 2,700 साल पहले रहते थे।

  • दफनाने की प्रथा: वयस्कों को आमतौर पर जमीन में सीधा लिटाकर दफनाया जाता था, जिनका सिर उत्तर की ओर होता था।
  • विशेष कब्र: एक व्यक्ति को पाँच कमरों वाले घर के आंगन में मिट्टी के एक बड़े जार में बैठा हुआ (पालथी मारकर) दफनाया गया था। इस घर में एक अन्नागार (Granary) भी था, जिससे पता चलता है कि वह शायद गाँव का कोई सरदार रहा होगा।
  • आहार और व्यवसाय: साक्ष्यों से पता चलता है कि वे गेहूँ, जौ, चावल, दाल और जानवरों का मांस (गाय, बकरी, मछली आदि) खाते थे। वे बेर, आँवला और जामुन जैसे फल भी इकट्ठा करते थे।

लगभग 2,000 साल पहले, चरक नाम के एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने ‘चरक संहिता’ नामक पुस्तक लिखी थी। उन्होंने बताया कि मनुष्य के शरीर में 360 हड्डियाँ होती हैं (दांतों, जोड़ों और कार्टिलेज को जोड़कर), जो आधुनिक शरीर रचना विज्ञान द्वारा पहचानी गई 206 हड्डियों से काफी अधिक हैं।

📖 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

📜 वेद और ऋग्वेद
सबसे पुराना वेद ऋग्वेद है (3,500 साल पहले रचना)। इसमें 1000 से ज्यादा प्रार्थनाएँ हैं जिन्हें सूक्त (अच्छी तरह बोला गया) कहते हैं। यह मौखिक परंपरा थी जिसे पढ़ने के बजाय सुना और याद किया जाता था।
👥 वैदिक समाज
लोगों का वर्गीकरण काम के आधार पर था: ब्राह्मण (पुरोहित) और राजा। पूरी जनता के लिए जन या ‘विश’ शब्द का प्रयोग होता था, जबकि विरोधियों को दस्यु या ‘दास’ कहा जाता था।
🪨 महापाषाण (Megaliths)
कब्रों को चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए गए “बड़े पत्थर”। कब्रों में अक्सर काले-लाल मिट्टी के बर्तन और लोहे के औजार मिलते थे। ब्रह्मगिरि जैसे स्थलों से दबे लोगों की सामाजिक असमानता का पता चलता है।
🏺 इनामगाँव और विज्ञान
घोड़ नदी के तट पर स्थित एक स्थल जहाँ वयस्कों को घर में ही दफनाया जाता था। प्रसिद्ध चिकित्सक चरक (2,000 साल पहले) ने चरक संहिता लिखी और मानव शरीर में 360 हड्डियों की पहचान की।
समयरेखा 3,500 वर्ष पूर्व: वेदों की रचना शुरू • 3,000 वर्ष पूर्व: महापाषाणों का निर्माण • 2,000 वर्ष पूर्व: चरक की चिकित्सा पुस्तक।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-5 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

अभी डाउनलोड करें

नागरिकता व्यक्ति और राज्य के बीच के संबंधों को दर्शाती है। भारत ‘एकल नागरिकता’ (Single Citizenship) का प्रावधान करता है, जिसका अर्थ है कि यहाँ राज्यों के लिए अलग नागरिकता नहीं होती।

यह अनुच्छेद उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जिनका 26 जनवरी, 1950 को भारत में अधिवास (Domicile) था और जो निम्नलिखित में से कोई एक शर्त पूरी करते थे:

  1. उनका जन्म भारत में हुआ हो।
  2. उनके माता-पिता में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो।
  3. संविधान लागू होने के ठीक पहले वे कम से कम पांच वर्ष तक भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हों।

यह उन लोगों से संबंधित है जो पाकिस्तान से भारत आए थे। एक व्यक्ति भारतीय नागरिक बन गया यदि:

  • वह या उसके माता-पिता/दादा-दादी में से कोई अविभाजित भारत में पैदा हुआ हो।
  • यदि वह 19 जुलाई, 1948 से पहले आया हो: वह प्रवास की तिथि से ही सामान्य रूप से भारत का निवासी रहा हो।
  • यदि वह 19 जुलाई, 1948 के बाद आया हो: उसे भारत सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के पास पंजीकरण कराना आवश्यक था, जिसके लिए उसे कम से कम छह महीने भारत में निवास करना पड़ता था।

यह अनुच्छेद 5 और 6 के प्रावधानों पर प्रभावी होता है।

  • यदि कोई व्यक्ति 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया, तो वह भारत का नागरिक नहीं रहा।
  • हालाँकि, यदि ऐसा व्यक्ति पुनर्वास (Resettlement) के परमिट के तहत भारत वापस आया, तो वह नागरिक बन सकता था (वही नियम लागू होते थे जो 19 जुलाई, 1948 के बाद आने वालों पर लागू थे)।

यह विदेश (जैसे ब्रिटेन या अमेरिका) में रहने वाले उन लोगों के लिए था जो भारतीय नागरिकता का दावा करना चाहते थे।

  • यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता/दादा-दादी अविभाजित भारत में पैदा हुए थे, तो वह उस देश के भारतीय राजनयिक या कांसुलर प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराकर भारत का नागरिक बन सकता था।

यह एकल नागरिकता के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुच्छेद है।

  • यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वचालित रूप से समाप्त हो जाती है। भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता।

यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति, जो उपर्युक्त अनुच्छेदों के तहत भारत का नागरिक है या माना जाता है, वह ऐसा नागरिक बना रहेगा (संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन)।

अनुच्छेद 5 से 10 केवल संविधान के प्रारंभ (1950) के समय की नागरिकता से संबंधित थे।

  • अनुच्छेद 11 भारत की संसद को यह सर्वोच्च शक्ति देता है कि वह नागरिकता के अर्जन (Acquisition), समाप्ति (Termination) और नागरिकता से जुड़े अन्य सभी मामलों के लिए कानून बना सके।
  • इसी शक्ति के प्रयोग से संसद ने ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ पारित किया।

संविधान के अनुच्छेद केवल 1950 की स्थिति बताते हैं, जबकि यह अधिनियम वर्तमान में नागरिकता के नियमों को परिभाषित करता है:

  1. जन्म से (By Birth): जन्म की तारीख और माता-पिता की नागरिकता के आधार पर।
  2. वंश के आधार पर (By Descent): भारत के बाहर जन्मे उन लोगों के लिए जिनके माता-पिता भारतीय हों।
  3. पंजीकरण द्वारा (By Registration): भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) या भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी के लिए (भारत में एक निश्चित अवधि तक रहने के बाद)।
  4. प्राकृतिक रूप से/देशीयकरण द्वारा (By Naturalization): उन विदेशियों के लिए जो 12 वर्षों से भारत में रह रहे हों और विशिष्ट योग्यताएं पूरी करते हों।
  5. क्षेत्र समाविष्टि द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पुडुचेरी), तो सरकार निर्दिष्ट करती है कि कौन नागरिक बनेगा।
  1. त्याग द्वारा (Renunciation): स्वेच्छा से नागरिकता छोड़ना।
  2. समाप्ति द्वारा (Termination): दूसरे देश की नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता का स्वतः समाप्त होना।
  3. वंचित किए जाने द्वारा (Deprivation): सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से नागरिकता छीनना (जैसे यदि नागरिकता धोखाधड़ी से प्राप्त की गई हो)।

🇮🇳 नागरिकता (अनुच्छेद 5–11)

📜 अनुच्छेद 5: संविधान का प्रारंभ
26 जनवरी, 1950 को भारत में अधिवास (Domicile) रखने वाले व्यक्तियों के लिए, जो भारत में जन्मे हों या जिनके माता-पिता भारतीय हों।
🔄 अनुच्छेद 6 और 7: प्रवासन
पाकिस्तान से भारत आने वाले और भारत से पाकिस्तान जाने वाले प्रवासियों के अधिकार। 19 जुलाई, 1948 इसके लिए मुख्य कट-ऑफ तिथि है।
🌍 वैश्विक और एकल नियम
अनुच्छेद 8 विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (PIOs) के बारे में है। अनुच्छेद 9 के अनुसार, विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
⚖️ अनुच्छेद 11: संसद की शक्ति
संविधान ने केवल 1950 की स्थिति को संभाला। संसद के पास नागरिकता के अर्जन और समाप्ति को विनियमित करने की सर्वोच्च शक्ति है, जिससे नागरिकता अधिनियम, 1955 बना।
➕ नागरिकता अर्जन के तरीके
1955 के अधिनियम के तहत: जन्म, वंशानुगत, पंजीकरण, प्राकृतिकरण और क्षेत्र का समावेश (जैसे- पांडिचेरी)।
➖ नागरिकता की समाप्ति
समाप्ति के तीन तरीके: स्वेच्छा से त्याग (Renunciation), बर्खास्तगी (Termination- अन्य देश की नागरिकता लेने पर) या वंचित किया जाना (Deprivation)।
विशेष तथ्य भारत राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एकल नागरिकता (Single Citizenship) का पालन करता है, अमेरिका के विपरीत जहाँ दोहरी नागरिकता होती है।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (06 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (ऊर्जा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और उनके अनुप्रयोग)

  • संदर्भ: संसद ने ‘भारत में परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति’ (SHANTI) विधेयक पारित कर दिया है, जिससे परमाणु क्षेत्र में दशकों पुराने सरकारी एकाधिकार का अंत हो गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • निजी और विदेशी भागीदारी: यह विधेयक निजी भारतीय कंपनियों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलता है, जिससे NPCIL का एकाधिकार समाप्त हो गया है।
    • नियंत्रण तंत्र: यह 49% तक निजी भागीदारी की अनुमति देता है, जबकि केंद्र सरकार ईंधन उत्पादन, सुरक्षा और रणनीतिक निरीक्षण जैसे संवेदनशील कार्यों पर 51% नियंत्रण बनाए रखेगी।
    • AERB को वैधानिक दर्जा: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा दिया गया है और अब यह केवल कार्यपालिका के बजाय संसद के प्रति जवाबदेह होगा।
    • पारदर्शी उत्तरदायित्व (Liability): बड़े संयंत्रों के लिए उत्तरदायित्व सीमा ₹3,000 करोड़ और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के लिए ₹100 करोड़ निर्धारित की गई है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “ऊर्जा सुरक्षा”, “रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत” और “परमाणु दायित्व कानून” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • रणनीतिक ऊर्जा मिश्रण: इस विधेयक का लक्ष्य 2070 तक भारत के ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों को प्राप्त करना है। यह कोयला आधारित बिजली की तुलना में स्वच्छ और 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली ‘बेसलोड पावर’ प्रदान करके ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएगा।
    • जवाबदेही संबंधी चिंताएँ: विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक आपूर्तिकर्ता की जिम्मेदारी को हटाकर और ऑपरेटर की जिम्मेदारी को वास्तविक आपदा लागत (जैसे फुकुशिमा) से बहुत कम रखकर जवाबदेही को कमजोर करता है।
    • पारदर्शिता का टकराव: विधेयक की धारा 39 ‘आरटीआई अधिनियम 2005’ के प्रभाव को खत्म करने का प्रयास करती है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जनता के लिए प्रतिबंधित हो सकती है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था और शासन; शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही)

  • संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के साजिश मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए “भागीदारी का पदानुक्रम” (Hierarchy of Participation) ढांचा विकसित किया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • मास्टरमाइंड बनाम सहायक: कोर्ट ने उमर खालिद और शारजील इमाम को “कथित मास्टरमाइंड” बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
    • जमानत मंजूर: पांच अन्य सह-आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई क्योंकि उनकी भूमिका “सहायक” पाई गई।
    • UAPA प्रतिबंध: कोर्ट ने UAPA की धारा 43D(5) के तहत सख्त जमानत प्रतिबंधों को बरकरार रखा।
    • देरी ‘ट्रम्प कार्ड’ नहीं: यह फैसला दिया गया कि यदि आतंकी कृत्य में केंद्रीय भूमिका का प्रमाण है, तो केवल मुकदमे में देरी जमानत का आधार नहीं हो सकती।
  • UPSC प्रासंगिकता: “मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)”, “UAPA और नागरिक स्वतंत्रता” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • आतंक की परिभाषा: कोर्ट ने व्याख्या की है कि ‘आतंकी कृत्य’ में न केवल अंतिम हिंसा शामिल है, बल्कि पूरी साजिश रचना और आवश्यक आपूर्ति में बाधा डालना भी शामिल है।
    • व्यक्तिगत मूल्यांकन: साजिश के मामले में सभी आरोपियों के साथ एक जैसा व्यवहार करना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रबंधकीय जिम्मेदारी का अलग से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
    • संवैधानिक चिंता: मुख्य आरोपियों को जमानत न देते हुए भी, पीठ ने स्वीकार किया कि छह साल की बिना मुकदमे की हिरासत एक “संवैधानिक चिंता” है और निचली अदालत को कार्यवाही तेज करने का निर्देश दिया।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां)

  • संदर्भ: पुलिस बुनियादी ढांचे के आंकड़ों का विश्लेषण भारत भर में समर्पित सोशल मीडिया निगरानी सेल में 39% की वृद्धि दर्शाता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • बुनियादी ढांचे में वृद्धि: समर्पित निगरानी सेल 2020 में 262 से बढ़कर 2024 में 365 हो गए।
    • अग्रणी राज्य: बिहार (52) और महाराष्ट्र (50) परिचालन सेल की संख्या में सबसे आगे हैं।
    • संघर्ष क्षेत्रों में निगरानी: मणिपुर में इंटरनेट शटडाउन के बावजूद निगरानी सेल 3 से बढ़कर 16 हो गए।
    • उभरते रुझान: व्हाट्सएप, एक्स (X) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर अपराध के रुझानों को रोकने के लिए इन इकाइयों का विस्तार किया गया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “साइबर सुरक्षा”, “निगरानी बनाम निजता” और “पुलिस व्यवस्था में तकनीक की भूमिका” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • विशिष्ट कार्यात्मक इकाइयाँ: 2021 के बाद से, ये सेल सामान्य साइबर अपराध स्टेशनों के बजाय अलग इकाइयों के रूप में कार्य करने लगे हैं।
    • तकनीकी एकीकरण: यह डिजिटल विस्तार एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें 2024 तक पुलिस बलों के पास 1,147 ड्रोन की उपलब्धता भी शामिल है।
    • प्रशासनिक अंतर: डिजिटल निगरानी में यह वृद्धि तब हो रही है जब देश भर में लगभग 5.93 लाख पुलिस पद अभी भी खाली पड़े हैं।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; निर्यात प्रदर्शन; विकसित देशों की नीतियों के प्रभाव)

  • संदर्भ: नवंबर 2025 के व्यापार आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कैसे भारतीय निर्यातक विविधीकरण के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहे हैं।
  • मुख्य बिंदु:
    • स्मार्टफोन का सहारा: अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में 237% की वृद्धि ने टैरिफ से प्रभावित अन्य क्षेत्रों की गिरावट को छिपा दिया।
    • नए बाजार: निर्यातकों ने चीन और यूरोपीय संघ (स्पेन, बेल्जियम और जर्मनी) की ओर रुख किया है।
    • मुद्रा सहायता: डॉलर के मुकाबले रुपये का ₹90 के स्तर पर होना निर्यातकों के लिए नए बाजारों में प्रवेश करने में मददगार साबित हो रहा है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “भारत का विदेशी व्यापार”, “व्यापार युद्ध और संरक्षणवाद” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • रणनीतिक बदलाव: कुछ वस्तुओं के लिए, अमेरिकी टैरिफ के झटके को आंशिक रूप से अवशोषित कर लिया गया, जबकि अन्य के लिए, सफल बाजार विविधीकरण के कारण कुल निर्यात में वृद्धि हुई।
    • नीतिगत सिफारिश: उद्योग निकाय सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वे पारंपरिक बाजारों से बाहर इस गति को बनाए रखने के लिए अधिक ‘मुक्त व्यापार समझौतों’ (FTAs) पर काम करें।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां)

  • संदर्भ: जनरेटिव एआई चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) द्वारा नैतिक सुरक्षा उपायों की कमी की आलोचना।
  • मुख्य बिंदु:
    • समस्या: ग्रोक को जानबूझकर सुरक्षा उपायों की कमी के साथ पेश किया जा रहा है, जो एक लापरवाह रवैये को जन्म देता है।
    • चिंताजनक व्यवहार: चैटबॉट द्वारा महिलाओं की बिना सहमति के अश्लील छवियां उत्पन्न करने की खबरें आई हैं।
    • सरकारी हस्तक्षेप: भारत सरकार ने ‘एक्स’ से ऐसी छवि निर्माण को रोकने की मांग की है और इसे आपराधिक कृत्य बताया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “एआई में नैतिकता”, “महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध” और “बिग टेक का विनियमन” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • साइबर-शत्रुता: संपादकीय का तर्क है कि ‘ग्रोक’ जैसे उपकरण इंटरनेट पर महिलाओं के लिए शत्रुतापूर्ण वातावरण बनाते हैं, जहाँ यौन हिंसा की धमकियाँ बिना किसी सजा के दी जाती हैं।
    • भू-राजनीतिक कवच: मंच की इस लापरवाही को इस धारणा से जोड़ा गया है कि अमेरिकी शक्ति इसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचा लेगी।
    • नीतिगत अनिवार्यता: संपादकीय सरकार से आग्रह करता है कि वह न केवल प्लेटफार्मों पर दबाव डाले, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी मुकदमा चलाए जो ऐसी सामग्री को प्रसारित करते हैं।

संपादकीय विश्लेषण

06 जनवरी, 2026
GS-3 ऊर्जा
⚛️ SHANTI विधेयक: परमाणु विनियंत्रण
49% निजी भागीदारी की अनुमति देकर NPCIL के एकाधिकार को समाप्त करता है। मुख्य सुधार: AERB को वैधानिक दर्जा दिया गया। चिंता: धारा 39 RTI अधिनियम को ओवरराइड करती है, जिससे सुरक्षा निरीक्षण में पारदर्शिता सीमित हो सकती है।
GS-2 राजव्यवस्था
⚖️ UAPA: ‘भागीदारी का पदानुक्रम’
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए नया ढांचा विकसित किया: मुख्य साजिशकर्ताओं को सहायक अभिनेताओं से अलग करना। धारा 43D(5) को बरकरार रखते हुए, कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों के साथ एक जैसा व्यवहार अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
GS-3 सुरक्षा
📱 डिजिटल निगरानी का विस्तार
2020 से सोशल मीडिया निगरानी सेल में 39% की वृद्धि हुई है। विरोधाभास: हाई-टेक विस्तार (1,147 ड्रोन) के बावजूद पुलिस में 5.93 लाख पद खाली हैं, जो डिजिटल निगरानी और जमीनी पुलिसिंग के बीच की खाई को दर्शाता है।
GS-3 अर्थव्यवस्था
🚢 निर्यात लचीलापन: ‘पिवट’ रणनीति
भारतीय निर्यातक स्मार्टफोन निर्यात में 237% की वृद्धि और चीन की ओर रुख (समुद्री निर्यात +23%) के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला कर रहे हैं। ₹90/USD पर रुपया बाजार विविधीकरण के लिए एक प्रतिस्पर्धी उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है।
GS-3 तकनीक
🤖 AI नीतिशास्त्र: ‘गार्डरेल’ की खामियां
बिना “गार्डरेल” के विपणन किए जा रहे जनरेटिव AI मॉडल गैर-सहमति वाली AI छवियों को बढ़ावा दे रहे हैं। नीतिगत अनिवार्यता: प्लेटफॉर्म चेतावनियों से आगे बढ़कर डीपफेक फैलाने वाले व्यक्तियों के कठोर अभियोजन की आवश्यकता है।

वैदिक और महापाषाण काल के भूगोल को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि उपमहाद्वीप में अलग-अलग संस्कृतियाँ कैसे उभरीं। ऋग्वेद की रचना उत्तर-पश्चिम में हुई, जबकि महापाषाण संस्कृति दक्षिण और मध्य भारत के क्षेत्रों में फली-फूली।

ऋग्वेद के सूक्त (प्रार्थनाएँ) उस परिदृश्य का नक्शा प्रदान करते हैं जहाँ प्रारंभिक आर्य रहते थे।

  • सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ: ऋग्वेद में सिंधु और उसकी सहायक नदियों जैसे व्यास और सतलुज का बार-बार उल्लेख मिलता है।
  • व्यास और सतलुज: इन नदियों को देवियों के रूप में पूजा जाता था और उनकी तुलना “दो फुर्तीले घोड़ों” और “दो चमकती गायों” से की गई है।
  • सरस्वती: सूक्तों में इस नदी की भी अत्यधिक प्रशंसा की गई है और इसे पवित्र माना गया है।
  • गंगा और यमुना: उत्तर-पश्चिमी नदियों के विपरीत, ऋग्वेद में गंगा और यमुना का नाम केवल एक बार आया है। यह दर्शाता है कि उस समय मुख्य सभ्यता अभी पूर्वी मैदानों (गंगा घाटी) में गहराई तक नहीं पहुँची थी।

जिस समय उत्तर-पश्चिम में ऋग्वेद की रचना हो रही थी, उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में महापाषाण (Megalithic) कब्र बनाने की प्रथा प्रचलित थी।

  • दक्कन और दक्षिण भारत: यह महापाषाण संस्कृति का प्राथमिक क्षेत्र था। यहाँ ब्रह्मगिरि जैसे प्रसिद्ध स्थल हैं, जहाँ सोने के मनकों वाली समृद्ध कब्रें मिली हैं।
  • इनामगाँव: यह महाराष्ट्र में घोड़ नदी (भीमा की सहायक नदी) के तट पर स्थित है।
  • उत्तर-पूर्व और कश्मीर: उपमहाद्वीप के इन सुदूर कोनों में भी महापाषाण संरचनाएँ पाई गई हैं।

इनामगाँव प्राचीन जीवन का एक विशिष्ट भौगोलिक संदर्भ प्रदान करता है।

  • घोड़ नदी: यह बस्ती इसी सहायक नदी के किनारे बसी थी।
  • केंद्रीय आवास: महत्वपूर्ण व्यक्ति, संभवतः सरदार, बस्ती के केंद्र में स्थित बड़े घरों में दफनाए गए थे, जिनमें अक्सर अन्नागार (अनाज भंडार) जैसी संरचनाएँ भी शामिल होती थीं।

पाठ के आधार पर, आप मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को खोजने का अभ्यास कर सकते हैं:

  1. नदियाँ: सिंधु, व्यास और सतलुज को चिह्नित करें यह देखने के लिए कि ऋग्वैदिक सूक्तों की रचना संभवतः कहाँ हुई थी।
  2. कब्रगाह स्थल: महापाषाण और उत्तर-हड़प्पा संस्कृतियों के विस्तार को समझने के लिए ब्रह्मगिरि और इनामगाँव को खोजें।
  3. गंगा और यमुना: इन नदियों के मार्ग को देखें और समझें कि क्यों ऋग्वेद के समय इनका महत्व कम था।

प्राचीन भौगोलिक परिदृश्य

ऋग्वैदिक काल
🛶 उत्तर-पश्चिमी हृदयस्थल
प्रारंभिक आर्यों ने सिंधु, ब्यास और सतलज की भूमि पर निवास किया। जबकि इन नदियों की देवी के रूप में पूजा की जाती थी, गंगा और यमुना का उल्लेख केवल एक बार मिलता है, जो उनके शुरुआती विस्तार की सीमा को दर्शाता है।
अभ्यास: उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सिंधु, ब्यास और सतलज को लोकेट करें जहाँ ऋग्वेद के सूक्तों की रचना की गई थी।
महापाषाणिक संस्कृति
🪨 मूक प्रहरी
जहाँ उत्तर-पश्चिम सूक्तों से गूँज रहा था, वहीं दक्कन और दक्षिण भारत में महापाषाणिक कब्रें फल-फूल रही थीं। ब्रह्मगिरि जैसे स्थल सोने के मनकों और पत्थर के घेरों वाली समृद्ध कब्रों को उजागर करते हैं।
अभ्यास: दक्कन के पठार पर महापाषाणिक संस्कृति के प्रसार को समझने के लिए दक्षिण भारत के मानचित्र पर ब्रह्मगिरि को खोजें।
बस्ती अध्ययन
🏠 घोड़ नदी पर जीवन
महाराष्ट्र में स्थित, इनामगाँव घोड़ नदी (भीमा की सहायक नदी) के तट पर स्थित था। यहाँ विशिष्ट केंद्रीय आवास और प्रभावशाली सरदारों से संबंधित अन्नागार पाए गए हैं।
अभ्यास: घोड़ नदी के मार्ग को ट्रेस करें और इनामगाँव को लोकेट करें ताकि यह समझा जा सके कि सहायक नदियों ने विशिष्ट प्राचीन बस्तियों को कैसे सहारा दिया।

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 5 जनवरी 2026 (Hindi)

लगभग 4,700 वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ सबसे पुराने नगरों का विकास हुआ, जिन्हें हम हड़प्पा सभ्यता के नाम से जानते हैं।

  • आकस्मिक खोज: लगभग 150 साल पहले, जब पंजाब (अब पाकिस्तान में) में पहली बार रेलवे लाइनें बिछाई जा रही थीं, तो इंजीनियरों को अचानक हड़प्पा का पुरास्थल मिला।
  • विरासत का नुकसान: उन्होंने इसे ईंटों का एक तैयार स्रोत समझा और हज़ारों ईंटें उखाड़ लीं, जिससे कई प्राचीन इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं।
  • पुरातत्व मान्यता: लगभग 80 साल पहले पुरातत्वविदों ने इस स्थल को खोजा और महसूस किया कि यह उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक था।
  • समयरेखा: इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले हुआ था।
  • दो भागों में विभाजन: अधिकांश नगरों को दो भागों में बांटा गया था: एक छोटा लेकिन ऊंचाई पर बना पश्चिमी भाग जिसे ‘नगर दुर्ग’ (Citadel) कहा जाता था, और एक बड़ा लेकिन निचले इलाके में बना पूर्वी भाग जिसे ‘निचला शहर’ (Lower Town) कहा जाता था।
  • मजबूत दीवारें: दोनों हिस्सों की दीवारें पकी हुई ईंटों से बनी थीं। ईंटें इतनी अच्छी तरह पकी थीं कि वे हज़ारों सालों बाद भी टिकी रहीं। उन्हें ‘इंटरलॉकिंग’ तरीके से लगाया गया था जिससे दीवारें मज़बूत रहती थीं।
  • महान स्नानागार (मोहनजोदड़ो): नगर दुर्ग में एक विशेष तालाब बनाया गया था। इसमें ईंटों और प्लास्टर का उपयोग किया गया था और पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्राकृतिक तार (Natural Tar/Bitumen) की परत चढ़ाई गई थी। इसमें उतरने के लिए दो तरफ से सीढ़ियाँ थीं।
  • उन्नत जल निकासी: नालियाँ सीधी रेखा में बनाई गई थीं और पानी के बहाव के लिए उनमें हल्की ढलान थी। नालियाँ ढकी हुई थीं और नियमित सफाई के लिए जगह-जगह पर ‘मेनहोल’ (निरीक्षण छेद) बनाए गए थे।
  • घर: घर आमतौर पर एक या दो मंजिला होते थे, जिनमें एक आंगन के चारों ओर कमरे बने होते थे। अधिकांश घरों में अलग स्नानघर और अपने कुएं होते थे।
  • प्रमुख व्यवसाय:
    • शासक: वे लोग जो विशेष इमारतों के निर्माण की योजना बनाते थे और संसाधनों को जुटाते थे।
    • लिपिक (Scribes): वे लोग जो लिखना जानते थे और मुहरों को तैयार करने में मदद करते थे।
    • शिल्पकार: पुरुष और महिलाएं जो घरों या विशेष कार्यशालाओं में सभी प्रकार की चीजें बनाते थे।
  • विशेष शिल्प:
    • पत्थर के बाट: ये चर्ट (Chert) पत्थर से बने होते थे और बहुमूल्य धातुओं या पत्थरों को तौलने के लिए सटीक आकार में बनाए गए थे।
    • मनके (Beads): सुंदर लाल कार्नेलियन पत्थरों को काटकर, तराशकर और पॉलिश करके आभूषण बनाए जाते थे।
    • मुहरें (Seals): पत्थर की आयताकार मुहरों पर आमतौर पर जानवरों के चित्र और एक लिपि होती थी जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है।
    • फयेंस (Faience): यह एक कृत्रिम रूप से तैयार पदार्थ था जिसका उपयोग मनके, चूड़ियाँ और छोटे बर्तन बनाने के लिए किया जाता था।

हड़प्पा के लोग दूर-दराज के स्थानों से कच्चा माल प्राप्त करते थे:

  • तांबा: वर्तमान राजस्थान और ओमान से।
  • टीन: वर्तमान अफगानिस्तान और ईरान से (तांबे के साथ मिलाकर कांसा बनाने के लिए)।
  • सोना: वर्तमान कर्नाटक से।
  • बहुमूल्य पत्थर: वर्तमान गुजरात, ईरान और अफगानिस्तान से।
  • फसलें: वे गेहूं, जौ, दालें, मटर, धान, तिल, अलसी और सरसों उगाते थे।
  • हल: मिट्टी को जोतने और बीज बोने के लिए लकड़ी के हल का उपयोग किया जाता था।
  • सिंचाई: चूंकि इस क्षेत्र में भारी वर्षा नहीं होती थी, इसलिए पानी का संचय किया जाता था और आवश्यकता पड़ने पर खेतों में आपूर्ति की जाती थी।
  • पशुपालन: वे गाय, भैंस, भेड़ और बकरी पालते थे।
  • धौलावीरा: कच्छ के रण में स्थित यह शहर अद्वितीय था क्योंकि यह तीन भागों (दो नहीं) में विभाजित था और इसमें प्रवेश के लिए बड़े पत्थर के प्रवेश द्वार थे। यहाँ से हड़प्पा लिपि के बड़े अक्षरों के अवशेष भी मिले हैं।
  • लोथल: खंभात की खाड़ी के पास स्थित यह शहर पत्थर, शंख और धातु की चीजें बनाने का केंद्र था। यहाँ एक बड़ा गोदीवाड़ा (Dockyard/बंदरगाह) था जहाँ जहाजों से माल उतारा और चढ़ाया जाता था।

लगभग 3,900 वर्ष पहले, इन नगरों में बड़े बदलाव आने शुरू हुए:

  • विनाश के संकेत: जल निकासी प्रणाली खराब हो गई, सड़कों पर कचरा जमा होने लगा और लोगों ने लेखन, मुहरों और बाटों का उपयोग बंद कर दिया।
  • संभावित कारण: इतिहासकारों के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे: नदियों का सूख जाना, जंगलों का विनाश (ईंटें पकाने के लिए ईंधन की कमी), बाढ़ आना या शासकों का नियंत्रण समाप्त हो जाना।

🧱 आरंभिक नगर

🏗️ नगर नियोजन
नगरों में एक ऊँचा नगर दुर्ग और एक निचला नगर होता था। दीवारें इंटरलॉकिंग पकी हुई ईंटों से बनी थीं, जिसने इन्हें 4,700 वर्षों तक मजबूती प्रदान की।
💧 इंजीनियरिंग के चमत्कार
महान स्नानागार को प्राकृतिक चारकोल की परत से वाटर-टाइट बनाया गया था। सड़कों के किनारे ढकी हुई नालियाँ थीं जिनमें सफाई के लिए मैनहोल भी थे।
⚒️ शिल्प और व्यापार
कार्नेलियन (लाल पत्थर) के मनके और फ़यॉन्स (कृत्रिम पत्थर) प्रसिद्ध थे। लोथल गोदीबाड़े (Dockyard) के जरिए अन्य देशों से कच्चा माल मंगाया जाता था।
🔍 रहस्यमय अंत
लगभग 3,900 वर्ष पूर्व सभ्यता का पतन शुरू हुआ। इसके संभावित कारणों में वनों का विनाश, बाढ़, या नदियों का सूखना शामिल माना जाता है।
परीक्षा तथ्य हड़प्पा की मुहरें आयताकार होती थीं जिन पर जानवरों के चित्र और एक लिपि होती थी, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-4 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: आरंभिक नगर

अभी डाउनलोड करें

भारत के संघ और उसके क्षेत्र को समझने के लिए हमें भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1 से 4) को देखना होगा। यह भाग भारत की पहचान, उसके दायरे और संसद को देश की भौगोलिक सीमाओं को फिर से आकार देने की शक्ति को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 1 सबसे मौलिक है क्योंकि यह परिभाषित करता है कि भारत क्या है।

  • अनुच्छेद 1(1): इसमें कहा गया है कि “इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ (Union of States) होगा।”
  • “यूनियन” (संघ) बनाम “फेडरेशन” (महासंघ): डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत एक “यूनियन” है क्योंकि:
    1. भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसा कि अमेरिका में है)।
    2. किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secede) का अधिकार नहीं है।
  • अनुच्छेद 1(3) – भारत का क्षेत्र: इसमें तीन श्रेणियां शामिल हैं:
    1. राज्यों के क्षेत्र: पहली अनुसूची में उल्लिखित राज्य (जैसे पंजाब, राजस्थान, गुजरात)।
    2. संघ राज्य क्षेत्र (UTs): केंद्र सरकार द्वारा सीधे प्रशासित क्षेत्र।
    3. अधिग्रहित क्षेत्र: वे क्षेत्र जिन्हें भारत भविष्य में अधिग्रहित कर सकता है (जैसे संधि या खरीद के माध्यम से)।

यह अनुच्छेद संसद को उन नए राज्यों को संघ में शामिल करने की शक्ति देता है जो पहले भारत का हिस्सा नहीं थे।

  • प्रवेश (Admission): पहले से अस्तित्व में रहे किसी बाहरी राज्य को शामिल करना (जैसे सिक्किम का प्रवेश)।
  • स्थापना (Establishment): ऐसे क्षेत्र में राज्य बनाना जहाँ पहले कोई राज्य नहीं था।

जहाँ अनुच्छेद 2 बाहरी क्षेत्रों से संबंधित है, वहीं अनुच्छेद 3 संसद को भारत के आंतरिक मानचित्र पर पूर्ण अधिकार देता है।

  • अनुच्छेद 3 के तहत संसद की शक्तियाँ:
    1. नया राज्य बनाना: किसी राज्य से क्षेत्र अलग करके या दो राज्यों को मिलाकर।
    2. क्षेत्र बढ़ाना/घटाना: किसी भी राज्य के भौतिक आकार को बदलना।
    3. सीमाओं में परिवर्तन: राज्यों के बीच की सीमा रेखाओं को बदलना।
    4. नाम बदलना: उदाहरण के लिए, ‘उड़ीसा’ से ‘ओडिशा’ या ‘पांडिचेरी’ से ‘पुडुचेरी’।
  • शर्तें और प्रक्रिया:
    • राष्ट्रपति की सिफारिश: इन परिवर्तनों के लिए विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही पेश किया जा सकता है।
    • राज्यों की राय: राष्ट्रपति को संबंधित राज्य विधानमंडल को एक निश्चित समय के भीतर अपनी राय देने के लिए विधेयक भेजना होता है।
    • संसद सर्वोच्च है: संसद राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। वह उनके सुझावों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।

यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तनों को लागू करना आसान हो।

  • साधारण बहुमत: नए राज्यों के निर्माण या नाम बदलने के कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत ‘संवैधानिक संशोधन’ की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें किसी भी सामान्य कानून की तरह साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
  • स्वचालित परिवर्तन: ऐसे कानून स्वचालित रूप से पहली अनुसूची (राज्यों की सूची) और चौथी अनुसूची (राज्यसभा में सीटों का आवंटन) में संशोधन की अनुमति देते हैं।
चरणमुख्य घटना / समितिपरिणाम
1948धर आयोग (Dhar Commission)प्रशासनिक सुविधा के आधार पर पुनर्गठन की सिफारिश की, भाषा के आधार पर नहीं।
1949JVP समितिराज्यों के आधार के रूप में भाषा को खारिज कर दिया।
1953आंध्र राज्य का गठनभाषाई आधार पर बनाया गया पहला राज्य (पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद)।
1956राज्य पुनर्गठन अधिनियमभारत को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।

⚖️ संघ और उसके क्षेत्र

📜 अनुच्छेद 1: संघ की प्रकृति
भारत राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम। राज्यों को संघ से विभक्त होने का अधिकार नहीं है। इसमें राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और अर्जित क्षेत्र शामिल हैं।
🌍 अनुच्छेद 2 और 3: सीमाएँ
अनुच्छेद 2 नए राज्यों (बाहरी क्षेत्रों) के प्रवेश से संबंधित है। अनुच्छेद 3 संसद को विद्यमान राज्यों के नाम बदलने, विभाजन करने या आंतरिक पुनर्गठन की शक्ति देता है।
⚡ पुनर्गठन प्रक्रिया
इसके लिए राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य है। संबंधित राज्य की राय मांगी जाती है, लेकिन वह संसद पर बाध्यकारी नहीं है। आंतरिक मानचित्र को बदलने में संसद सर्वोच्च है।
⚖️ अनुच्छेद 4: कानूनी सरलता
अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तन केवल साधारण बहुमत द्वारा किए जा सकते हैं। इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
परीक्षा तथ्य 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम द्वारा 14 राज्य और 6 UT बनाए गए थे। भाषाई आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य आंध्र राज्य (1953) था।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (05 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और इसके पड़ोसी देश)

  • संदर्भ: 2026 की शुरुआत में चीन की रणनीतिक स्थिति और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक स्थिति पर इसके प्रभाव का विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • एक राष्ट्रीय विरोधाभास: चीन वर्तमान में गहरे आंतरिक आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन साथ ही विदेशों में रणनीतिक आत्मविश्वास और राजनयिक पहुंच का प्रदर्शन कर रहा है।
    • आर्थिक रणनीति (चीन शॉक 2.0): कमजोर घरेलू मांग की भरपाई के लिए, बीजिंग इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे “उच्च गुणवत्ता” वाले निर्यात को प्राथमिकता दे रहा है, जो वैश्विक व्यापार को बाधित कर रहा है।
    • सैन्य आक्रामकता: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपनी पारंपरिक और परमाणु क्षमताओं का विस्तार करना जारी रखे हुए है।
    • भारत-चीन संबंध: 2025 में संबंधों में थोड़ी स्थिरता देखी गई लेकिन संरचनात्मक मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। ‘बफर जोन’ के कारण भारत के गश्त अधिकारों पर प्रतिबंध जारी हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “भारत-चीन संबंध”, “हिंद-प्रशांत भू-राजनीति” और “रणनीतिक स्वायत्तता” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भारत पर प्रभाव: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में चीन के प्रभुत्व ने व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है (2025 में $110 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद)। फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की निर्भरता बनी हुई है।
    • रणनीतिक दृष्टिकोण: भारत को ‘रणनीतिक धैर्य’ (Strategic Patience) रखना चाहिए और दीर्घकालिक संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा करने में गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भूमिका)

  • संदर्भ: दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों (Security Camps) की स्थापना ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) को कैसे कम किया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • सांख्यिकीय गिरावट: 2010 से 2025 के बीच माओवादी हिंसा में लगभग 90% की कमी आई है।
    • प्रभावित क्षेत्रों में कमी: LWE प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में 126 से घटकर अक्टूबर 2025 तक केवल 11 रह गई है।
    • शिविरों की भूमिका: सुरक्षा शिविरों ने सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई है, प्रतिक्रिया समय कम किया है और मानवीय खुफिया जानकारी (HUMINT) में सुधार किया है।
    • बुनियादी ढांचे का विकास: ये शिविर सड़क निर्माण और मोबाइल टावरों के केंद्र बन गए हैं, जिससे स्थानीय जीवनशैली बदल गई है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां”, “LWE और विकास” और “जनजातीय क्षेत्रों में शासन” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • प्रशासन की पहुंच: अब कलेक्टर, तहसीलदार और पटवारी उन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं जहां पहले केवल पुलिस या वन रक्षक ही जाते थे।
    • भावी चुनौतियां: स्थायी शांति तभी संभव है जब पेसा (PESA) अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम जैसी संवैधानिक गारंटी के माध्यम से संरचनात्मक मुद्दों को हल किया जाए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (सामाजिक मुद्दे; महिलाओं की भूमिका) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था; रोजगार)

  • संदर्भ: महिलाओं के अवैतनिक देखभाल (Unpaid Care) और भावनात्मक श्रम के व्यवस्थित अवमूल्यन और संस्थागत मान्यता की आवश्यकता पर चर्चा।
  • मुख्य बिंदु:
    • देखभाल अंतराल (Care Gap): 2023 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम पर 2.8 घंटे अधिक समय बिताती हैं।
    • नीतिगत पूर्वाग्रह: आर्थिक प्राथमिकताओं ने देखभाल कार्य को “उत्पादक” श्रम (जो पारंपरिक रूप से पुरुष करते हैं) की तुलना में गौण माना है।
    • भारतीय न्यायिक रुख: कन्नन नायडू बनाम कमसाला अम्मल (2023) मामले में, मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी के घरेलू कर्तव्य पारिवारिक संपत्ति में योगदान करते हैं, जिससे वह संपत्ति में समान हिस्से की हकदार है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “महिला सशक्तिकरण”, “जेंडर बजटिंग” और “समावेशी विकास” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • अदृश्य श्रम: परिवारों को बनाए रखने में लगने वाले भावनात्मक और मानसिक श्रम को नीतिगत ढांचे में शायद ही कभी मापा या पुरस्कृत किया जाता है।
    • परिवर्तन की आवश्यकता: महिलाओं के श्रम को मान्यता देने के साथ-साथ पुरुषों को भी देखभाल की जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आपदा प्रबंधन; प्राकृतिक आपदाओं का आर्थिक प्रभाव)

  • संदर्भ: भारत को प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रतिवर्ष महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान होता है, जिससे आपदा जोखिम वित्त की ओर बदलाव आवश्यक हो गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • आर्थिक प्रभाव: 1990 से 2024 तक, भारत को अपनी जीडीपी के 0.4% के बराबर औसत वार्षिक आपदा संबंधी नुकसान हुआ।
    • खतरों की प्रकृति: भारत की संवेदनशीलता मुख्य रूप से जल विज्ञान संबंधी (बाढ़ और भूस्खलन) है, जबकि चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों में भूकंपीय जोखिम अधिक है।
    • उच्च जोखिम रैंकिंग: ‘विश्व जोखिम सूचकांक 2025’ में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में फिलीपींस के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आपदा प्रबंधन रणनीतियाँ” और “जलवायु परिवर्तन का आर्थिक प्रभाव” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • क्षेत्रीय खतरा: उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती आपदाओं का सामना कर रही हैं। पिछले दशक में, इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 100 आपदाएं आईं, जिससे लगभग 8 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
    • नीतिगत अनिवार्यता: आर्थिक नुकसान बढ़ने के साथ ही, प्रभावी और डेटा-संचालित प्रतिक्रिया के लिए ‘डिजास्टर रिस्क फाइनेंस’ क्षेत्रीय नीति के केंद्र में आ गया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (सुरक्षा; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण)

  • संदर्भ: बेंगलुरु में ‘हल्के लड़ाकू विमान’ (LCA) तेजस की 25 साल की उड़ान का जश्न मनाने और भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए एक राष्ट्रीय सेमिनार।
  • मुख्य बिंदु:
    • तेजस का मील का पत्थर: LCA तेजस ने 25 साल पूरे कर लिए हैं और 5,600 से अधिक सफल परीक्षण उड़ानें भरी हैं।
    • स्वदेशी तकनीक: कार्बन कंपोजिट, ‘फ्लाई-बाय-वायर’ फ्लाइट कंट्रोल और डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकों ने तेजस को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना दिया है।
    • आयात पर निर्भरता कम करना: ‘एरोनॉटिक्स 2047’ का लक्ष्य विदेशी आयात पर निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक विकसित करना है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “रक्षा स्वदेशीकरण”, “रक्षा में मेक इन इंडिया” और “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भविष्य के लक्ष्य: अब ध्यान अगली पीढ़ी के विमानों, डिजिटल विनिर्माण और विमान डिजाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण की ओर बढ़ रहा है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: इस कार्यक्रम ने 100 से अधिक डिजाइन केंद्रों को सफलतापूर्वक जोड़ा है, जिससे एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस ईकोसिस्टम तैयार हुआ है।

संपादकीय विश्लेषण

05 जनवरी, 2026
GS-2 अंत. संबंध
🇨🇳 चीन का विरोधाभास और “शॉक 2.0”
बीजिंग अपनी घरेलू कमजोरी का मुकाबला आक्रामक उच्च गुणवत्ता वाले निर्यात (EVs, सेमीकंडक्टर) के साथ कर रहा है। प्रभाव: 2025 में भारत का व्यापार घाटा $110 बिलियन के पार जाने की आशंका। रणनीति: “रणनीतिक धैर्य” और असममित निवारण।
GS-3 सुरक्षा
🛡️ LWE: सुरक्षा शिविर क्रांति
2010 के बाद से माओवादी हिंसा में 90% की गिरावट आई है। प्रभावित जिलों की संख्या 2025 में घटकर सिर्फ 11 रह गई है। सुरक्षा शिविर अब ‘ग्रे ज़ोन’ में नागरिक प्रशासन, सड़कों और डिजिटल कनेक्टिविटी के केंद्र बन गए हैं।
GS-1 समाज
👩‍🍳 देखभाल की अदृश्य अर्थव्यवस्था
महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल पर 2.8 गुना अधिक समय खर्च करती हैं। महत्वपूर्ण बदलाव: मद्रास HC (2023) ने घरेलू कर्तव्यों को पारिवारिक संपत्ति में आर्थिक योगदान माना। नीतिगत आवश्यकता: GDP-केंद्रित से देखभाल-समावेशी विकास की ओर बढ़ना।
GS-3 आपदा
🌊 आपदा जोखिम वित्तपोषण (DRF)
भारत प्राकृतिक आपदाओं के कारण सालाना GDP का 0.4% खो देता है। जोखिम के मामले में एशिया में दूसरे स्थान पर है। बदलाव की जरूरत: प्रतिक्रियाशील राहत से हटकर सक्रिय, डेटा-संचालित आपदा जोखिम वित्तपोषण और मुकाबला करने की क्षमता विकसित करना।
GS-3 स्वदेशी
✈️ वैमानिकी 2047: तेजस और उससे आगे
LCA तेजस ने 5,600+ उड़ान परीक्षणों के साथ 25 वर्ष पूरे किए। अब ध्यान 5वीं पीढ़ी की तकनीक और AI एकीकरण पर है। लक्ष्य: 2047 तक एयरोस्पेस इकोसिस्टम में आयात निर्भरता खत्म करने के लिए “तकनीकी संप्रभुता” प्राप्त करना।

आरंभिक नगरों के भूगोल को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि हड़प्पा सभ्यता अपनी नदी प्रणालियों से किस प्रकार अटूट रूप से जुड़ी हुई थी। इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले सिंधु और उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में हुआ था।

  • स्थान: हड़प्पा वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।
  • खोज: यह इस सभ्यता का खोजा गया पहला शहर था, इसी कारण पुरातत्वविदों ने इसके बाद मिलने वाले सभी समान स्थलों को “हड़प्पा” स्थल कहा।
  • महत्व: लगभग 150 साल पहले रेलवे लाइन बिछाते समय इंजीनियरों को यह स्थल मिला था, और उन्होंने अनजाने में इसकी उच्च गुणवत्ता वाली प्राचीन ईंटों का उपयोग निर्माण के लिए कर लिया था।
  • स्थान: यह स्थल वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुख्य सिंधु नदी के किनारे स्थित है।
  • वास्तुकला: यह अपने ‘महान स्नानागार’ (Great Bath) के लिए प्रसिद्ध है, जो ईंटों से बना एक जलरोधी तालाब था जिसमें प्राकृतिक तार (bitumen) की परत चढ़ाई गई थी।
  • शहरी जीवन: यहाँ की खुदाई से उन्नत जल निकासी प्रणाली का पता चला है, जहाँ घरों की नालियाँ सड़कों की बड़ी नालियों से जुड़ी थीं।
  • स्थान: यह भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है।
  • नदी संदर्भ: यह घग्गर-हाकरा नदी प्रणाली (जिसे अक्सर प्राचीन सरस्वती नदी से जोड़ा जाता है) के तट पर स्थित था।
  • विशेष विशेषताएं: अन्य नगरों के विपरीत, कालीबंगन (और लोथल) में अग्निकुंड (Fire Altars) मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि यहाँ धार्मिक अनुष्ठान या यज्ञ किए जाते होंगे।

💡 मानचित्र कार्य (Mapping Task):

अपने मानचित्र पर इन तीन मुख्य केंद्रों के साथ-साथ गुजरात के लोथल (खंभात की खाड़ी) और धौलावीरा (कच्छ के रण) को भी चिह्नित करें, जो इस सभ्यता के महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र थे।

नदियों का मानचित्रण

स्थल: हड़प्पा
🧱 पंजाब सीमांत
पाकिस्तान के साहीवाल जिले में स्थित। यह शहर कृषि और व्यापार के लिए रावी नदी के उपजाऊ मैदानी इलाकों पर निर्भर था।
अभ्यास: मानचित्र पर रावी नदी को खोजें और हिमालय (हिमाचल प्रदेश) में इसके उद्गम की पहचान करें।
स्थल: मोहनजोदड़ो
🌊 सिंध महानगर
सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा शहर, जो विशाल सिंधु नदी के दाहिने तट पर रणनीतिक रूप से बनाया गया था।
अभ्यास: सिंधु नदी के मुख्य मार्ग को खोजें और देखें कि यह पंजाब के उत्तरी स्थलों को अरब सागर से कैसे जोड़ती है।
स्थल: कालीबंगा
🏺 राजस्थान बेसिन
अग्निकुंडों और जुते हुए खेतों के लिए प्रसिद्ध, यह स्थल अब मौसमी घग्गर-हकरा नदी तंत्र द्वारा पोषित था।
अभ्यास: राजस्थान में घग्गर नदी के सूखे मार्ग को ट्रेस करें और प्राचीन सरस्वती नदी के साथ इसके ऐतिहासिक संबंध को पहचानें।

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 3 जनवरी 2026 (Hindi)

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material - 3 जनवरी 2026 (Hindi)

मानव इतिहास में खानाबदोश (शिकारी-संग्राहक) जीवन से एक बसे हुए कृषि जीवन की ओर संक्रमण एक बहुत बड़ा मोड़ था।

  • किसान बनना: जैसे-जैसे दुनिया की जलवायु बदली, मनुष्यों ने खाने योग्य पौधों का अवलोकन किया और देखा कि कैसे बीज से नए पौधे उगते हैं। उन्होंने इन पौधों को पक्षियों और जानवरों से बचाना शुरू किया और अंततः किसान बन गए।
  • पशुपालक बनना: लोगों ने अपने आश्रयों (गुफाओं/घरों) के पास भोजन छोड़कर जानवरों को पालतू बनाना शुरू किया। सबसे पहले जिस जानवर को पालतू बनाया गया वह कुत्ते का जंगली पूर्वज था। बाद में, उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे शांत जानवरों को पाला जो घास खाते थे और झुंड में रहते थे।
  • बसने की प्रक्रिया (Domestication): यह वह प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य पौधे उगाते हैं और जानवरों की देखभाल करते हैं। पालतू बनाए गए पौधे और जानवर जंगली किस्मों से भिन्न हो गए; उदाहरण के लिए, पालतू जानवरों के दांत और सींग जंगली जानवरों की तुलना में छोटे होते हैं।

फसलें उगाने के लिए लोगों को एक ही स्थान पर लंबे समय तक रहना पड़ता था ताकि वे अनाज के पकने तक पौधों को पानी दे सकें, निराई कर सकें और उनकी रक्षा कर सकें।

  • भंडारण (Storage): अनाज को भोजन और बीज दोनों के रूप में संग्रहित किया जाता था। शुरुआती इंसानों ने भंडारण के लिए मिट्टी के बड़े बर्तन बनाए, टोकरियाँ बुनीं या जमीन में गड्ढे खोदे।
  • ‘चलते-फिरते’ खाद्य भंडार के रूप में पशु: पशुपालन से दूध और मांस की निरंतर आपूर्ति होती थी, जो एक जीवित “खाद्य भंडार” के रूप में कार्य करते थे।

पुरातत्वविदों को पूरे उपमहाद्वीप में जले हुए अनाज और जानवरों की हड्डियों के माध्यम से शुरुआती बस्तियों के प्रमाण मिलते हैं।

साक्ष्य (अनाज और हड्डियाँ)प्रमुख नवपाषाणिक (Neolithic) स्थल
गेहूँ, जौ, भेड़, बकरी, मवेशीमेहरगढ़ (आधुनिक पाकिस्तान)
चावल, जानवरों की हड्डियों के टुकड़ेकोल्डीहवा (आधुनिक उत्तर प्रदेश)
गेहूँ और दलहन, कुत्ता, मवेशी, भेड़, बकरीबुर्जहोम (आधुनिक कश्मीर)
गेहूँ, हरा चना, जौ, भैंस, बैलचिरांद (आधुनिक बिहार)
ज्वार-बाजरा, मवेशी, भेड़, बकरी, सुअरहल्लूर (आधुनिक आंध्र प्रदेश/कर्नाटक)
  • आवास: बुर्जहोम में लोग जमीन के नीचे ‘गर्तवास’ (Pit-houses) बनाकर रहते थे, जिसमें नीचे जाने के लिए सीढ़ियाँ होती थीं। घर के अंदर और बाहर दोनों जगह खाना पकाने के चूल्हे मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि मौसम के अनुसार लोग खाना पकाते थे।
  • नवपाषाणिक औजार: पुरापाषाण (Palaeolithic) औजारों के विपरीत, ये औजार अधिक पैने और पॉलिश किए हुए होते थे। अनाज पीसने के लिए ओखली और मूसल का विकास हुआ।
  • मिट्टी के बर्तन: खाना पकाने और अनाज रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता था। इन्हें कभी-कभी सजाया भी जाता था।
  • बुनाई: कपास की खेती शुरू होने के साथ ही लोगों ने कपड़े बुनना शुरू कर दिया।
  • जनजातियाँ (Tribes): शुरुआती किसान और पशुपालक समूहों में रहते थे जिन्हें ‘जनजाति’ कहा जाता था। वे जमीन, जंगलों और पानी को सामूहिक संपत्ति मानते थे, और उनमें अमीर-गरीब का कोई बड़ा अंतर नहीं था।
  • मेहरगढ़: यह बोलन दर्रे (Bolan Pass) के पास स्थित है और सबसे शुरुआती ज्ञात गाँवों में से एक है। यहाँ चौकोर या आयताकार घर मिले हैं। कब्रों में मृतकों के साथ बकरी को भी दफनाया जाता था (शायद अगले जन्म में भोजन के रूप में)।
  • दाओजली हेडिंग: यह ब्रह्मपुत्र घाटी में चीन की ओर जाने वाले रास्तों पर स्थित है। यहाँ खरल-मूसल और ‘जेडाइट’ (Jadeite) पत्थर मिले हैं (जो संभवतः चीन से आया था)।
  • बसने की प्रक्रिया (Domestication) की शुरुआत: लगभग 12,000 साल पहले।
  • मेहरगढ़ में बस्ती का आरंभ: लगभग 8,000 साल पहले।

भोजन: संग्रह से उत्पादन तक

🐕 पालतू बनाने की प्रक्रिया
शुरुआत ~12,000 वर्ष पूर्व हुई। सबसे पहले कुत्ते के जंगली पूर्वज को पालतू बनाया गया। पहली फसलें गेहूँ और जौ थीं। जानवर एक तरह के चलते-फिरते ‘खाद्य भंडारण’ थे।
⚒️ नवपाषाण (Neolithic) तकनीक
औजारों की धार तेज करने के लिए उन पर पॉलिश की जाती थी। अनाज पीसने के लिए ओखली और मूसल का प्रयोग शुरू हुआ। खाना पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन और कपास से बुनाई का विकास हुआ।
🏠 महत्वपूर्ण बस्तियाँ
बुर्जहोम (Burzahom)
यहाँ के लोग जमीन के नीचे गर्त-वास (Pit-houses) बनाकर रहते थे, जिनमें सीढ़ियाँ होती थीं।
मेहरगढ़ (Mehrgarh)
यहाँ चौकोर तथा आयतकार घर मिले हैं, जिनमें 4 या उससे अधिक कमरे होते थे।
दाओजली हेडिंग
यहाँ जेडाइट (Jadeite) पत्थर मिला है, जिससे चीन के साथ संपर्क का संकेत मिलता है।
⚰️ सामाजिक जीवन और विश्वास
लोग साझा रीति-रिवाजों वाली जनजातियों में रहते थे। मेहरगढ़ में कब्रों में (बकरी के साथ) दफनाने के साक्ष्य मृत्यु के बाद जीवन में उनके विश्वास को दर्शाते हैं।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-3 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: भोजन: संग्रह से उत्पादन तक

अभी डाउनलोड करें

प्रस्तावना एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना करती है जो लोकप्रिय संप्रभुता (शक्ति जनता के हाथों में) के सिद्धांत पर आधारित है।

  • प्रतिनिधि लोकतंत्र: भारत एक ‘अप्रत्यक्ष लोकतंत्र’ का पालन करता है जहाँ कार्यपालिका अपनी सभी नीतियों और कार्यों के लिए विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
  • व्यापक दायरा: UPSC के संदर्भ में, प्रस्तावना में “लोकतंत्र” शब्द का अर्थ केवल राजनीतिक लोकतंत्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी है।
  • मुख्य तत्व: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, समय-समय पर चुनाव, कानून का शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता।

‘गणतंत्र’ शब्द दो विशिष्ट चीजों को दर्शाता है:

  • निर्वाचित प्रमुख: राजशाही (जैसे ब्रिटेन) के विपरीत, भारतीय राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) एक निश्चित कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
  • राजनीतिक संप्रभुता: यह किसी एक व्यक्ति (जैसे राजा) के बजाय जनता में निहित होती है। इसका अर्थ यह भी है कि किसी भी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की अनुपस्थिति; सभी सार्वजनिक कार्यालय बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं।

🎯 संविधान के उद्देश्य (Objectives of the Constitution)

प्रस्तावना तीन अलग-अलग रूपों में न्याय सुरक्षित करने का प्रयास करती है, जिन्हें मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से हासिल किया जाता है:

  • सामाजिक न्याय: जाति, रंग, नस्ल, धर्म या लिंग के आधार पर बिना किसी सामाजिक भेदभाव के सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार।
  • आर्थिक न्याय: आर्थिक कारकों (संपत्ति/आय) के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव न करना।
  • राजनीतिक न्याय: सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार, सभी राजनीतिक कार्यालयों तक समान पहुंच और सरकार में समान आवाज प्राप्त होना।
  • नोट: न्याय का आदर्श (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) 1917 की रूसी क्रांति से लिया गया था।

स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्तियों की गतिविधियों पर रोक-टोक की अनुपस्थिति और साथ ही व्यक्तिगत व्यक्तित्व के विकास के लिए अवसर प्रदान करना।

  • विशिष्ट स्वतंत्रताएं: प्रस्तावना विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता सुरक्षित करती है।
  • सीमित, निरपेक्ष नहीं: स्वतंत्रता का अर्थ कुछ भी करने का ‘लाइसेंस’ नहीं है। इसका प्रयोग संविधान में वर्णित सीमाओं के भीतर ही किया जाता है।
  • स्रोत: स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से लिए गए हैं।

समता का अर्थ है समाज के किसी भी वर्ग के लिए विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति और बिना किसी भेदभाव के सभी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करना। इसके तीन आयाम हैं:

  • नागरिक (Civic): अनुच्छेद 14 से 18 (कानून के समक्ष समानता, भेदभाव का निषेध, आदि)।
  • राजनीतिक (Political): कोई भी व्यक्ति चुनावी नामावली में शामिल होने के लिए अपात्र नहीं होगा (अनुच्छेद 325) और वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव (अनुच्छेद 326)।
  • आर्थिक (Economic): नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 39) पर्याप्त आजीविका के समान अधिकार और समान काम के लिए समान वेतन सुरक्षित करते हैं।

बंधुत्व का अर्थ है भाईचारे की भावना। संविधान ‘एकल नागरिकता’ की प्रणाली के माध्यम से इसे बढ़ावा देता है।

  • व्यक्ति की गरिमा: प्रस्तावना घोषणा करती है कि बंधुत्व को व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करनी होगी।
  • राष्ट्र की एकता: यह राष्ट्र की एकता और अखंडता को भी सुनिश्चित करता है। “अखंडता” (Integrity) शब्द को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा जोड़ा गया था।

लक्ष्मीकांत (M. Laxmikanth) से इन शब्दों का अध्ययन करते समय, हमेशा प्रेरणा के स्रोत को याद रखें:

  1. न्याय (Justice): रूसी क्रांति (Russian Revolution)।
  2. स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity): फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution)।

प्रस्तावना: दार्शनिक स्तंभ

⚖️ न्याय (Justice)
इसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पक्ष शामिल हैं। यह FRs और DPSPs द्वारा सुरक्षित है और रूसी क्रांति से प्रेरित है।
🗽 स्वतंत्रता (Liberty)
विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता। नोट: यह निरपेक्ष नहीं है और इस पर उचित प्रतिबंध हैं।
🤝 समानता (Equality)
विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति। यह हर नागरिक के लिए नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक समानता सुनिश्चित करती है।
🕊️ बंधुत्व (Fraternity)
भाईचारे की भावना। यह व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता (अखंडता शब्द 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया) सुनिश्चित करता है।
💡
रैंकर टिप: प्रस्तावना में ‘गणराज्य’ शब्द का अर्थ है कि राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) निर्वाचित होता है, न कि ब्रिटेन की तरह वंशानुगत।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (03 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी; संरक्षण, प्रदूषण और क्षरण)

  • संदर्भ: अवैध खनन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण अरावली पर्वतमाला के पारिस्थितिक विनाश पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
  • मुख्य बिंदु:
    • पारिस्थितिक बफर: अरावली भारत-गंगा के मैदानों के मरुस्थलीकरण (Desertification) के खिलाफ एक अवरोधक के रूप में कार्य करती है।
    • जैव विविधता का नुकसान: तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं।
    • भूजल की कमी: खनन ने उन प्राकृतिक जलभृतों (Aquifers) को बाधित कर दिया है जो दिल्ली-NCR क्षेत्र को रिचार्ज करते हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)”, “सतत विकास” और “न्यायिक सक्रियता (NGT की भूमिका)” से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • संकट: उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंधों के बावजूद, हरियाणा और राजस्थान में “पहाड़ों को कुचलने वाली” मशीनें काम कर रही हैं, जिससे कई पहाड़ियाँ गायब हो गई हैं।
    • मानवीय क्षति: पत्थरों की धूल से स्थानीय लोगों को सांस की बीमारियाँ हो रही हैं और पहाड़ियों द्वारा वर्षा जल न रोक पाने के कारण जल संकट गहरा गया है।
    • नीतिगत आवश्यकता: ‘ग्रीन वॉल’ परियोजना और ‘वन संरक्षण अधिनियम’ को सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)

  • संदर्भ: केंद्र सरकार द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के मानदंडों में ढील देने और शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत करने की योजना।
  • मुख्य बिंदु:
    • लचीलापन: माध्यमिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने के लिए नियमों को सरल बनाना।
    • AI एकीकरण: व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized learning) और तकनीकी शिक्षा मानकों को तैयार करने के लिए AI का उपयोग।
    • रोजगार क्षमता: रटकर सीखने (Rote learning) के बजाय कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर।
  • UPSC प्रासंगिकता: “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020” के कार्यान्वयन और “डिजिटल इंडिया” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • डिजिटल छलांग: सरकार AI के माध्यम से छात्रों के सीखने की कमियों (Learning gaps) को स्वचालित रूप से पहचानने का लक्ष्य रखती है।
    • शिक्षा का लोकतंत्रीकरण: ओपन स्कूलिंग के नियमों में ढील देने से स्कूल छोड़ने वाले (Dropouts) और कामकाजी पेशेवरों को अपनी शिक्षा पूरी करने में मदद मिलेगी।
    • मानकीकरण: डिग्री और नौकरी के बीच के अंतर (Degree-job mismatch) को खत्म करने के लिए नए तकनीकी मानक तैयार किए जा रहे हैं।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा) और GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)

  • संदर्भ: विदेश मंत्री द्वारा सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख के संबंध में एक मजबूत नीतिगत बयान।
  • मुख्य बिंदु:
    • संप्रभु अधिकार: भारत का तर्क है कि आत्मरक्षा केवल एक नीति नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु अधिकार है।
    • आतंकवाद विरोधी ढांचा: ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन’ (CCIT) के लिए भारत का निरंतर प्रयास।
    • निवारक कार्रवाई: यह बयान ‘प्रतिक्रियात्मक’ (Reactive) के बजाय ‘सक्रिय’ (Pro-active) सुरक्षा उपायों की ओर बदलाव का संकेत देता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “भारत-पाकिस्तान संबंध”, “UNSC सुधार” और “राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • कानूनी आधार: विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का उल्लेख किया, जो देशों को आत्मरक्षा का अधिकार देता है। यह भविष्य में भारत की “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसी कार्रवाइयों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
    • राजनयिक संदेश: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंकवाद “कम लागत वाला युद्ध” (Low-cost war) नहीं रहेगा।
    • रणनीतिक स्वायत्तता: भारत यह संकेत दे रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव)

  • संदर्भ: केंद्र ने SPECS (इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर्स के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
  • मुख्य बिंदु:
    • आयात में कमी: चीन और वियतनाम पर निर्भरता कम कर भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनाना।
    • रोजगार सृजन: इन परियोजनाओं से हाई-टेक क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
    • पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: केवल “असेंबली” (जोड़ना) से आगे बढ़कर “कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग” (पुर्जा निर्माण) पर ध्यान केंद्रित करना।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आत्मनिर्भर भारत”, “सेमीकंडक्टर मिशन” और “विनिर्माण क्षेत्र” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • रणनीतिक बदलाव: भारत अब तक स्मार्टफोन असेंबली का केंद्र रहा है, लेकिन उच्च-मूल्य वाले पुर्जे (जैसे PCB, सेंसर) आयात किए जाते थे। ये 22 परियोजनाएं उस “मूल्यवर्धन” (Value-addition) की कमी को पूरा करेंगी।
    • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: “चीन प्लस वन” (China Plus One) रणनीति के बीच, यह कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गजों के लिए एक स्थिर विकल्प के रूप में स्थापित करता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (बुनियादी ढांचा: रेलवे; निवेश मॉडल)

  • संदर्भ: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर में पहली पहाड़ी सुरंग का निर्माण कार्य पूरा।
  • मुख्य बिंदु:
    • अभियांत्रिकी चमत्कार: भारत में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ (NATM) का उपयोग।
    • समय की बचत: बुलेट ट्रेन के शुरू होने पर यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर 2 घंटे रह जाएगा।
  • UPSC प्रासंगिकता: “विकास के लिए बुनियादी ढांचा” और “जापान-भारत रणनीतिक साझेदारी” पर उत्तर लिखने के लिए उपयोगी।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: यह परियोजना केवल गति के बारे में नहीं है, बल्कि जापान से भारतीय इंजीनियरों तक ‘शिनकानसेन’ (Shinkansen) तकनीक के हस्तांतरण के बारे में भी है।
    • आर्थिक प्रभाव: यह कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा, जिससे एक “मेगा-रीजन” बनेगा जो महाराष्ट्र और गुजरात दोनों की GDP को बढ़ावा दे सकता है।

संपादकीय विश्लेषण

03 जनवरी, 2026
GS-3 पर्यावरण
🌲 अरावली जलभृत (Aquifer) संकट
अवैध खनन महत्वपूर्ण जलभृतों को बाधित कर रहा है। समाधान: इस पारिस्थितिक बफर को बचाने के लिए ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का विस्तार और FCA का सख्त प्रवर्तन आवश्यक है।
GS-2 शिक्षा
🤖 NEP 2020: AI एकीकरण
दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यक्तिगत शिक्षा। डिग्री और नौकरी के बेमेल (Mismatch) को दूर करने के लिए मुक्त विद्यालयी शिक्षा (NIOSH) के उदारीकरण पर ध्यान।
GS-3 सुरक्षा
🛡️ संप्रभु आत्मरक्षा
सक्रिय सुरक्षा के लिए अनुच्छेद 51 (UN चार्टर) का लाभ उठाना। प्रतिक्रियात्मक रुख से हटकर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ एक निवारक (Deterrent) मुद्रा की ओर बदलाव।
GS-3 अर्थव्यवस्था
🏭 SPECS: इलेक्ट्रॉनिक्स उछाल
घरेलू पुर्जा निर्माण के लिए 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी। लक्ष्य: चीन और वियतनाम पर भारत की आयात निर्भरता में भारी कमी लाना।

आज की अध्ययन सामग्री उन विशिष्ट भौगोलिक स्थानों और रणनीतिक क्षेत्रों पर प्रकाश डालती है जो आपकी UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं:

  • भौगोलिक विस्तार: यह लगभग 670 किमी लंबी श्रृंखला है जो चार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई है: गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली।
  • रणनीतिक महत्व: यह एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक बफर के रूप में कार्य करती है, जो थार मरुस्थल के पूर्व की ओर उपजाऊ सिंधु-गंगा के मैदानों में विस्तार को रोकती है।
  • संकट: अवैध खनन और “पहाड़-तोड़ने” वाली मशीनों के कारण कई पहाड़ियाँ गायब हो गई हैं, जिससे दिल्ली-NCR क्षेत्र के प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) में बाधा आ रही है।
  • बुनियादी ढांचा मील का पत्थर: इस कॉरिडोर में पहली पहाड़ी सुरंग का पूरा होना एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है।
  • NATM तकनीक: ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ का उपयोग जापान से भारत में एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण है।
  • मैपिंग कार्य: वित्तीय राजधानी (मुंबई) को वस्त्र हब (अहमदाबाद) से जोड़ने वाले मार्ग की पहचान करें, जो महाराष्ट्र और गुजरात के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है। इसमें साबरमती, वडोदरा, भरूच, सूरत और वापी जैसे प्रमुख स्टेशनों को चिह्नित करें।
  • रणनीतिक संदर्भ: ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ पर हालिया नीतिगत बयान के बाद, अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) का भूगोल महत्वपूर्ण हो गया है।
  • फोकस क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर और पंजाब सीमाओं के साथ संवेदनशील ‘लॉन्च पैड’ और आतंकवाद विरोधी नोड्स (counter-terror nodes) का मानचित्रण करना।
  • अंतर समझें:
    • LoC (Line of Control): जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच की सैन्य नियंत्रण रेखा (यह औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है)।
    • IB (International Border): दोनों देशों के बीच आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय सीमा (जैसे पंजाब, राजस्थान और गुजरात सीमा)।

मानचित्रण (Mapping)

पर्यावरण
📍 अरावली पर्वत श्रेणी फोकस
यह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में विस्तृत है। यह थार के मरुस्थलीकरण के खिलाफ एक रणनीतिक पारिस्थितिक बफर के रूप में कार्य करती है और NCR के जलभृत पुनर्भरण (Aquifer Recharge) के लिए महत्वपूर्ण है।
कार्य: ‘ग्रीन वॉल’ विस्तार को अंकित करें और गुरु शिखर जैसी प्रमुख चोटियों की पहचान करें।
बुनियादी ढांचा
🚅 MAHSR (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर
मुंबई-अहमदाबाद मार्ग। महत्वपूर्ण उपलब्धि: पालघर-झरोली पहाड़ी क्षेत्र में NATM तकनीक का उपयोग करके पहली पर्वतीय सुरंग का निर्माण पूरा हुआ।
कार्य: महाराष्ट्र-गुजरात सीमा के पास सुरंग के स्थान को मानचित्र पर अंकित करें।
आंतरिक सुरक्षा
🛡️ IB और LoC रणनीतिक नोड्स
जम्मू-कश्मीर और पंजाब में महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र। भारत की ‘आत्मरक्षा का संप्रभु अधिकार’ नीति के अनुरूप संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण।
कार्य: गुरदासपुर-पठानकोट-जम्मू रणनीतिक अक्ष (Axis) की कल्पना करें।

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 2 जनवरी 2026 (Hindi)

IAS PCS मिशन 2026 Dainik Study Material - 2 जनवरी 2026 (Hindi)

इतिहास हमें अपने पूर्वजों के जीवन के कई पहलुओं को समझने में मदद करता है:

  • जीवनशैली: लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे और किस तरह के घरों में रहते थे।
  • व्यवसाय: शिकारियों (आखेटकों), पशुपालकों, कृषकों, शासकों, व्यापारियों, पुरोहितों, शिल्पकारों, कलाकारों और संगीतकारों के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
  • बच्चों का जीवन: उस समय बच्चे कौन से खेल खेलते थे, कौन सी कहानियाँ सुनते थे और कौन से गीत गाते थे।

प्राचीन काल में लोग संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बसे:

  • नर्मदा नदी: कई लाख साल पहले लोग इस नदी के तट पर रहते थे। वे कुशल संग्राहक (gatherers) थे, जो जंगलों की विशाल संपदा से परिचित थे और जानवरों का शिकार भी करते थे।
  • सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (उत्तर-पश्चिम): यहाँ लगभग 8000 वर्ष पहले स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलें उगाना शुरू किया। उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालना भी शुरू किया।
  • गारो पहाड़ियाँ और विंध्य पर्वतमाला: यहाँ भी कृषि का विकास हुआ। विंध्य के उत्तर में सबसे पहले चावल उपजाया गया।
  • सिंधु और इसकी सहायक नदियाँ: लगभग 4700 वर्ष पूर्व, इन्हीं नदियों के किनारे आरंभिक नगर फले-फूले।
  • गंगा घाटी: लगभग 2500 वर्ष पूर्व गंगा और इसकी सहायक नदियों के किनारे नगरों का विकास हुआ। गंगा के दक्षिण में एक शक्तिशाली राज्य मगध स्थापित हुआ।

पहाड़ों, रेगिस्तानों और समुद्रों जैसी भौगोलिक बाधाओं के बावजूद लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते थे:

  • यात्रा के कारण: लोग काम की तलाश में या प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा) से बचने के लिए यात्रा करते थे।
  • अभियान: सेनाएँ दूसरे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने के लिए जाती थीं, जबकि व्यापारी काफिलों या जहाजों के माध्यम से मूल्यवान वस्तुओं का व्यापार करते थे।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: धार्मिक गुरु लोगों को शिक्षा और सलाह देने के लिए गाँव-गाँव घूमते थे। इन यात्राओं से हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ समृद्ध हुईं और लोगों ने पत्थर तराशने, संगीत रचने और भोजन बनाने के नए तरीके सीखे।

हमारे देश के लिए अक्सर ‘इण्डिया’ (India) और ‘भारत’ (Bharat) जैसे नामों का प्रयोग होता है:

  • इण्डिया: यह शब्द ‘इंडस’ (Indus) से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। लगभग 2500 वर्ष पहले उत्तर-पश्चिम से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को ‘हिन्दोस’ या ‘इन्दोस’ कहा, और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि को ‘इण्डिया’ कहा गया।
  • भारत: ‘भरत’ नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था, जिनका उल्लेख संस्कृत की सबसे पुरानी कृति ऋग्वेद (लगभग 3500 वर्ष पुरानी) में मिलता है। बाद में इसका प्रयोग पूरे देश के लिए होने लगा।

इतिहासकार और पुरातत्वविद अतीत को जानने के लिए मुख्य रूप से इन स्रोतों का उपयोग करते हैं:

  • पांडुलिपियाँ (Manuscripts): ये हाथ से लिखी गई पुस्तकें होती थीं। इन्हें अक्सर ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले ‘भूर्ज’ नामक पेड़ की छाल से तैयार भोजपत्र पर लिखा जाता था। इनमें धार्मिक मान्यताओं, राजाओं के जीवन, औषधियों और विज्ञान आदि का विवरण मिलता है।
  • अभिलेख (Inscriptions): ये पत्थर अथवा धातु जैसी कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (लिखे) किए गए लेख होते हैं। राजा अक्सर अपने आदेशों या विजयों का विवरण इन पर लिखवाते थे ताकि लोग उन्हें देख और पढ़ सकें।
  • पुरातत्व (Archaeology): पुरातत्वविद पत्थर और ईंट से बनी इमारतों के अवशेषों, चित्रों और मूर्तियों का अध्ययन करते हैं। वे औजारों, हथियारों, बर्तनों, आभूषणों और सिक्कों की प्राप्ति के लिए खुदाई (उत्खनन) भी करते हैं। वे जानवरों की हड्डियों और अनाज के दानों का अध्ययन करके यह भी पता लगाते हैं कि लोग क्या खाते थे।

इतिहास में तिथियों की गणना ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म की तारीख से की जाती है:

  • ई.पू. / BC / BCE: ‘ईसा पूर्व’ (Before Christ) या ‘Before Common Era’। यह समय पीछे की ओर गिना जाता है।
  • ईस्वी / AD / CE: ‘ईस्वी’ (Anno Domini – प्रभु के वर्ष में) या ‘Common Era’। यह ईसा मसीह के जन्म के बाद का समय है।

🏹 आरंभिक मानव की खोज में

🏃‍♂️ खानाबदोश गतिशीलता
आरंभिक मानव प्रवासी जानवरों के पीछे चलने, पौधों के मौसमी चक्र को समझने और सूखी ऋतु में मौसमी नदियों में पानी की तलाश के कारण लगातार घूमते रहते थे।
⚒️ पाषाण तकनीक
औजारों को पत्थर से पत्थर टकराकर और दबाव शल्क तकनीक से बनाया जाता था। मध्यपाषाण काल में छोटे औजारों का उपयोग बढ़ा, जिन्हें लघुपाषाण (Microliths) कहा जाता है।
📍 रणनीतिक पुरास्थल
कुरनूल की गुफाओं में आग के साक्ष्य (राख) मिले हैं, हुँसगी में चूना पत्थर के औजार और भीमबेटका में प्राचीन शैल चित्र (आवास) पाए गए हैं।
🌍 पर्यावरणीय बदलाव
लगभग 12,000 वर्ष पूर्व जलवायु में आए बदलावों से घास के मैदानों का विकास हुआ, जिससे शाकाहारी जानवरों और प्राकृतिक रूप से उगने वाले गेहूँ व जौ की मात्रा में वृद्धि हुई।
UPSC विशेष पुरापाषाण काल (Palaeolithic) मानव इतिहास की 99% कहानी समेटे हुए है, जो 20 लाख साल पहले से 12,000 साल पहले तक फैला है।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-2 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: आरंभिक मानव की खोज में

अभी डाउनलोड करें

प्रस्तावना संविधान के परिचय या भूमिका को कहते हैं। इसमें संविधान का सार या संक्षिप्त विवरण होता है। प्रसिद्ध न्यायविद एन.ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को ‘संविधान का परिचय पत्र’ कहा है।

प्रस्तावना चार महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट करती है:

  1. अधिकार का स्रोत: यह बताता है कि संविधान अपनी शक्ति ‘भारत की जनता’ से प्राप्त करता है।
  2. भारतीय राज्य की प्रकृति: यह घोषणा करती है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष), लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है।
  3. संविधान के उद्देश्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व संविधान के मूल उद्देश्य हैं।
  4. संविधान अपनाने की तिथि: यह 26 नवंबर, 1949 की तारीख का उल्लेख करती है।
  • संप्रभु (Sovereign): भारत न तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और न ही किसी अन्य देश का डोमिनियन है। यह अपने आंतरिक और बाहरी मामलों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
  • समाजवादी (Socialist): भारत ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ को अपनाता है, जिसका उद्देश्य गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है।
  • पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष (Secular): हमारे देश में सभी धर्मों को समान दर्जा प्राप्त है और उन्हें राज्य का समान समर्थन मिलता है।
  • लोकतांत्रिक (Democratic): सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथ में है। भारत में प्रतिनिधि संसदीय लोकतंत्र है।
  • गणराज्य (Republic): इसका अर्थ है कि राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) हमेशा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित समय के लिए चुना जाता है (वंशानुगत नहीं होता)।
  • न्याय (Justice): सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय (मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से सुनिश्चित)।
  • स्वतंत्रता (Liberty): विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता।
  • समता (Equality): स्थिति और अवसर की समानता।
  • बंधुत्व (Fraternity): व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली भाईचारे की भावना।
  • प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संशोधन किया गया है।
  • इस संशोधन के माध्यम से तीन नए शब्द जोड़े गए: समाजवादी (Socialist), पंथनिरपेक्ष (Secular) और अखंडता (Integrity)
  • बेरुबारी संघ मामला (1960): उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।
  • केशवानंद भारती मामला (1973): उच्चतम न्यायालय ने पूर्व के फैसले को पलट दिया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक हिस्सा है
  • वर्तमान स्थिति: यह संविधान का हिस्सा है लेकिन यह ‘गैर-न्यायिक’ (non-justiciable) है, यानी इसके प्रावधानों को कानून की अदालतों में लागू नहीं करवाया जा सकता।
  • तथ्य 1: प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा तैयार और पेश किए गए ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objectives Resolution) पर आधारित है।
  • तथ्य 2: 42वें संशोधन द्वारा ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए थे। (इसे याद रखने के लिए ‘SSI’ शॉर्टकट का उपयोग कर सकते हैं)।

संप्रभु • समाजवादी • पंथनिरपेक्ष

संप्रभु (Sovereign)
भारत एक स्वतंत्र सत्ता है। यह न तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और न ही किसी अन्य देश का डोमिनियन। यह अपने आंतरिक और वैश्विक मामलों के संचालन के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
समाजवादी (Socialist)
भारतीय संविधान लोकतांत्रिक समाजवाद में विश्वास रखता है। इसका उद्देश्य गरीबी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है। यह मार्क्सवाद और गांधीवाद का एक अनूठा मिश्रण है, जिसमें गांधीवाद की ओर गहरा झुकाव है।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
भारत सकारात्मक पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत का पालन करता है: राज्य की नजर में सभी धर्म समान हैं और उन्हें समान समर्थन प्राप्त है। यह अनुच्छेद 25–28 के तहत मौलिक अधिकारों द्वारा संरक्षित है।

यहां 1 जनवरी, 2026 के The Hindu के संपादकीय लेखों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है, जिसे UPSC की तैयारी के लिए पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन व्यवस्था; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951)

  • संदर्भ: 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की आलोचना।
  • प्रक्रियात्मक अराजकता:
    • पश्चिम बंगाल: बुजुर्ग निवासियों को दूर-दराज के स्थानों पर सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन भारी सार्वजनिक विरोध के बाद इसे ‘होम वेरिफिकेशन’ (घर पर सत्यापन) में बदला गया।
    • बिहार: सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण डेटा में विसंगतियां देखी गईं।
  • बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में 6.5 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।
    • उत्तर प्रदेश: 2.89 करोड़।
    • तमिलनाडु और गुजरात: क्रमशः 97 लाख और 73.7 लाख (इन राज्यों में उच्च प्रवासी आबादी के बावजूद)।
  • चिंताएँ: संपादकीय के अनुसार, इस अभियान का उपयोग अनौपचारिक रूप से ‘नागरिकता स्क्रीनिंग’ के रूप में किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की अवधारणा का उल्लंघन है।
  • आगे की राह: निर्वाचन आयोग को एक पारदर्शी और सहभागी तंत्र अपनाना चाहिए, जहाँ नाम हटाने से पहले मतदाताओं को सक्रिय रूप से सूचित किया जाए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष जागरूकता; स्वदेशीकरण)

  • संदर्भ: भारत का संसाधन-सीमित अन्वेषण से ‘न्यू स्पेस’ युग के वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में परिवर्तन।
  • प्रमुख उपलब्धियां:
    • चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश।
    • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (2025): ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने ISS पर तिरंगा लहराया।
    • मंगलयान: अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला एशियाई देश।
  • रणनीतिक रोडमैप:
    • गगनयान: भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन (लक्ष्य: 2027)।
    • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।
    • चंद्रमा पर मानव: 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य।
  • वाणिज्यिक विकास: यह क्षेत्र निजी खिलाड़ियों के लिए खुल गया है, जिसमें अब 350 से अधिक स्टार्टअप हैं। भारत 2030 तक 400 बिलियन डॉलर के वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का 10% हिस्सा हासिल करना चाहता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; औद्योगिक नीति और विकास)

  • संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है।
  • भेद्यता (Vulnerability): भारत “दुनिया की दवा की दुकान” है, जो अमेरिका की 40% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। हालांकि जेनेरिक दवाओं को अभी छोड़ दिया गया है, लेकिन तनाव बढ़ने से निर्यात राजस्व में 10-15% की गिरावट आ सकती है और GDP विकास दर में 0.2-0.3% की कमी हो सकती है।
  • चीन कारक: भारत अपनी ‘एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स’ (API) के लिए 72% चीन पर निर्भर है, जो आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम है।
  • घरेलू सुरक्षा कवच: सितंबर 2025 में GST युक्तिकरण के कारण दवाओं पर दरें 12% से घटाकर 5% कर दी गईं, जिससे उपभोक्ताओं को $1.2 बिलियन की बचत हुई और घरेलू खपत बढ़ी।
  • सुझाव: भारत को यूरोपीय संघ, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में निर्यात का विविधीकरण करना चाहिए और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए बल्क ड्रग्स हेतु PLI योजनाओं में तेजी लानी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और उसके पड़ोसी)

  • संदर्भ: खालिदा जिया का निधन (30 दिसंबर, 2025) और शेख हसीना का निर्वासन, फरवरी 2026 के चुनावों से पहले बांग्लादेश की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है।
  • भारत के लिए सुरक्षा जोखिम: जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी तत्व मजबूत हो रहे हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश का होना अनिवार्य है।
  • राजनयिक रणनीति: भारत को केवल अवामी लीग के भरोसे न रहकर ढाका के व्यापक राजनीतिक स्पेक्ट्रम के साथ जुड़ना चाहिए, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक कनेक्टिविटी (जैसे अखौरा-अगरतला रेल लिंक) सुनिश्चित करनी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 4 (नीतिशास्त्र); GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय)

  • संदर्भ: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे की गणना के पीछे कानूनी और नैतिक सिद्धांतों का विश्लेषण।
  • मुद्दा: वर्तमान में सड़क दुर्घटना मुआवजे की गणना पीड़ित की भविष्य की आय (Multiplicand Method) के आधार पर की जाती है।
  • नैतिक असमानता: यह तरीका एक CEO के जीवन को दैनिक वेतनभोगी मजदूर की तुलना में अधिक मूल्यवान मानता है, जो अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमा) का उल्लंघन है।
  • प्रस्तावित सुधार: संपादकीय एक ‘गरिमा आधार’ (Dignity Floor) की वकालत करता है—अर्थात आय के बावजूद प्रत्येक मृत्यु के लिए एक समान न्यूनतम आधारभूत मुआवजा होना चाहिए।

द हिंदू विश्लेषण

02 जनवरी, 2026
शहरी संकट GS-1 और GS-3
🏙️ आवास वहनीयता संकट
टियर-1 शहरों में घर की कीमत और आय का अनुपात 10.0 को पार कर गया है, जिससे घेतोकरण (Ghettoization) बढ़ रहा है। कामकाजी वर्ग को हाशिये पर धकेला जा रहा है, जो आवास को बुनियादी जरूरत के बजाय एक सट्टा संपत्ति (Speculative Asset) के रूप में देख रहे हैं।
कमजोर वर्ग GS-2 और नीतिशास्त्र
🩺 ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य सेवा
नैदानिक असंवेदनशीलता और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की कमी के कारण प्रणालीगत बहिष्कार। मुख्य समाधान: जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर-विशिष्ट क्लीनिक स्थापित करना और MBBS पाठ्यक्रम में बदलाव करना।
सार्वजनिक सत्यनिष्ठा GS-2 और GS-4
⚖️ व्यय में नैतिकता
लोकपाल की लग्जरी कार निविदा रद्द होना इस बात को रेखांकित करता है कि कानूनी कार्रवाइयों का नैतिक होना भी अनिवार्य है। संस्थागत मूल्यों (जैसे मितव्ययिता) को केवल कानूनी अनुमतियों से ऊपर होना चाहिए।
तकनीकी युद्ध GS-2 और GS-3
🚁 असममित ड्रोन युद्ध
सस्ते $500 के ड्रोन द्वारा करोड़ों डॉलर की संपत्तियों को नष्ट करना एक बड़ा बदलाव है। भारत का जवाब: iDEX के माध्यम से ड्रोन झुंड (Drone Swarms) और एंटी-ड्रोन प्रणालियों का विस्तार करना।
क्षेत्रीय स्थिरता GS-3
🏞️ J&K शांति लाभांश
गुलमर्ग में होटलों की पूरी बुकिंग विकास-आधारित एकीकरण की ओर बदलाव का संकेत देती है। अब मुख्य ध्यान आर्थिक सामान्य स्थिति के माध्यम से युवाओं के कट्टरपंथ को समाप्त करने पर है।
🎯
मुख्य परीक्षा फोकस: GS-3 सुरक्षा के लिए “शासन में मितव्ययिता” और “आधुनिक ड्रोन युद्ध की असमिति” पर संक्षिप्त नोट्स तैयार करें।

आज की अध्ययन सामग्री उन विशिष्ट भौगोलिक स्थानों पर प्रकाश डालती है जो आपके मानचित्र अभ्यास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • संदर्भ: लगभग 4700 वर्ष पहले यहाँ प्राचीन नगरों का उदय हुआ था।
  • मुख्य स्थान: राखीगढ़ी (हरियाणा) – यह वर्तमान में सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) का सबसे बड़ा स्थल है।
  • मैपिंग कार्य: सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियों की स्थिति मानचित्र पर देखें: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
  • संदर्भ: लगभग 2500 वर्ष पूर्व, गंगा के दक्षिण के क्षेत्र में ‘मगध’ नामक एक शक्तिशाली साम्राज्य विकसित हुआ था।
  • महत्व: यह प्राचीन भारत का पहला सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था।
  • मैपिंग कार्य: सोन और गंगा नदियों के संगम (मिलन स्थल) को चिह्नित करें, जहाँ मगध का हृदय स्थल (वर्तमान बिहार का क्षेत्र) स्थित था।
  • संदर्भ: भारत 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश बना।
  • महत्व: इस मिशन ने चंद्रमा की सतह और वहाँ पानी के अणुओं (water molecules) की उपस्थिति के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान की है।
  • मैपिंग कार्य: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की स्थिति और वहां स्थित ‘शिव शक्ति पॉइंट’ (जहाँ चंद्रयान-3 लैंड हुआ था) को ध्यान में रखें।

मानचित्रण

J&K स्थिरता
🏞️ गुलमर्ग और पहलगाम
कश्मीर में सामान्य स्थिति का सूचकांक। मुख्य विशेषताएं: पीर पंजाल श्रेणी और लिद्दर नदी का संगम।
मिशन: लिद्दर नदी के मार्ग को रेखांकित करें और मानचित्र पर अनंतनाग जिले को अंकित करें।
वैश्विक संघर्ष
🌍 खेरसॉन (यूक्रेन)
नीपर नदी (Dnieper) पर स्थित एक रणनीतिक बंदरगाह शहर। यह क्रीमिया और काला सागर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
मिशन: नीपर अपवाह तंत्र का अध्ययन करें और क्रीमिया से खेरसॉन की दूरी का पता लगाएं।
शहरीकरण
🏙️ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)
4 राज्यों में इसके विस्तार को देखें। उप-क्षेत्रीय आर्थिक विकास के नए चालक के रूप में दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर ध्यान दें।
मिशन: राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले NCR के प्रमुख जिलों को अंकित करें।

IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 1 जनवरी 2026 (Hindi)

IAS PCS मिशन 2026 Dainik Study Material - 1 जनवरी 2026 (Hindi)

इतिहास हमें अपने पूर्वजों के जीवन के कई पहलुओं को समझने में मदद करता है:

  • जीवनशैली: लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे और किस तरह के घरों में रहते थे।
  • व्यवसाय: शिकारियों (आखेटकों), पशुपालकों, कृषकों, शासकों, व्यापारियों, पुरोहितों, शिल्पकारों, कलाकारों और संगीतकारों के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
  • बच्चों का जीवन: उस समय बच्चे कौन से खेल खेलते थे, कौन सी कहानियाँ सुनते थे और कौन से गीत गाते थे।

प्राचीन काल में लोग संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बसे:

  • नर्मदा नदी: कई लाख साल पहले लोग इस नदी के तट पर रहते थे। वे कुशल संग्राहक (gatherers) थे, जो जंगलों की विशाल संपदा से परिचित थे और जानवरों का शिकार भी करते थे।
  • सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (उत्तर-पश्चिम): यहाँ लगभग 8000 वर्ष पहले स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलें उगाना शुरू किया। उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालना भी शुरू किया।
  • गारो पहाड़ियाँ और विंध्य पर्वतमाला: यहाँ भी कृषि का विकास हुआ। विंध्य के उत्तर में सबसे पहले चावल उपजाया गया।
  • सिंधु और इसकी सहायक नदियाँ: लगभग 4700 वर्ष पूर्व, इन्हीं नदियों के किनारे आरंभिक नगर फले-फूले।
  • गंगा घाटी: लगभग 2500 वर्ष पूर्व गंगा और इसकी सहायक नदियों के किनारे नगरों का विकास हुआ। गंगा के दक्षिण में एक शक्तिशाली राज्य मगध स्थापित हुआ।

पहाड़ों, रेगिस्तानों और समुद्रों जैसी भौगोलिक बाधाओं के बावजूद लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते थे:

  • यात्रा के कारण: लोग काम की तलाश में या प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा) से बचने के लिए यात्रा करते थे।
  • अभियान: सेनाएँ दूसरे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने के लिए जाती थीं, जबकि व्यापारी काफिलों या जहाजों के माध्यम से मूल्यवान वस्तुओं का व्यापार करते थे।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: धार्मिक गुरु लोगों को शिक्षा और सलाह देने के लिए गाँव-गाँव घूमते थे। इन यात्राओं से हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ समृद्ध हुईं और लोगों ने पत्थर तराशने, संगीत रचने और भोजन बनाने के नए तरीके सीखे।

हमारे देश के लिए अक्सर ‘इण्डिया’ (India) और ‘भारत’ (Bharat) जैसे नामों का प्रयोग होता है:

  • इण्डिया: यह शब्द ‘इंडस’ (Indus) से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। लगभग 2500 वर्ष पहले उत्तर-पश्चिम से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को ‘हिन्दोस’ या ‘इन्दोस’ कहा, और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि को ‘इण्डिया’ कहा गया।
  • भारत: ‘भरत’ नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था, जिनका उल्लेख संस्कृत की सबसे पुरानी कृति ऋग्वेद (लगभग 3500 वर्ष पुरानी) में मिलता है। बाद में इसका प्रयोग पूरे देश के लिए होने लगा।

इतिहासकार और पुरातत्वविद अतीत को जानने के लिए मुख्य रूप से इन स्रोतों का उपयोग करते हैं:

  • पांडुलिपियाँ (Manuscripts): ये हाथ से लिखी गई पुस्तकें होती थीं। इन्हें अक्सर ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले ‘भूर्ज’ नामक पेड़ की छाल से तैयार भोजपत्र पर लिखा जाता था। इनमें धार्मिक मान्यताओं, राजाओं के जीवन, औषधियों और विज्ञान आदि का विवरण मिलता है।
  • अभिलेख (Inscriptions): ये पत्थर अथवा धातु जैसी कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (लिखे) किए गए लेख होते हैं। राजा अक्सर अपने आदेशों या विजयों का विवरण इन पर लिखवाते थे ताकि लोग उन्हें देख और पढ़ सकें।
  • पुरातत्व (Archaeology): पुरातत्वविद पत्थर और ईंट से बनी इमारतों के अवशेषों, चित्रों और मूर्तियों का अध्ययन करते हैं। वे औजारों, हथियारों, बर्तनों, आभूषणों और सिक्कों की प्राप्ति के लिए खुदाई (उत्खनन) भी करते हैं। वे जानवरों की हड्डियों और अनाज के दानों का अध्ययन करके यह भी पता लगाते हैं कि लोग क्या खाते थे।

इतिहास में तिथियों की गणना ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म की तारीख से की जाती है:

  • ई.पू. / BC / BCE: ‘ईसा पूर्व’ (Before Christ) या ‘Before Common Era’। यह समय पीछे की ओर गिना जाता है।
  • ईस्वी / AD / CE: ‘ईस्वी’ (Anno Domini – प्रभु के वर्ष में) या ‘Common Era’। यह ईसा मसीह के जन्म के बाद का समय है।
NCERT इतिहास   •   कक्षा-6
अध्याय – 1

क्या, कहाँ, कैसे और कब?

देश के नाम
इण्डिया: ‘इण्डस’ शब्द से निकला है (संस्कृत में ‘सिंधु’)। ईरानियों और यूनानियों ने लगभग 2,500 वर्ष पूर्व इस नाम का प्रयोग किया था।
भारत: उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए ऋग्वेद (~3,500 वर्ष पूर्व) में इस नाम का उल्लेख मिलता है।
तिथियों का अर्थ
BCE: ईसा पूर्व (बिफोर कॉमन एरा)।
CE: ईसवी (कॉमन एरा)।
तिथियों की गणना ईसा मसीह के जन्म से की जाती है।
भौगोलिक विकास
नर्मदा घाटी: यहाँ रहने वाले शुरुआती लोग कुशल संग्राहक थे, जो पौधों की विशाल संपदा से परिचित थे और शिकार करते थे।
सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ: यहाँ सबसे पहले स्त्री-पुरुषों ने गेहूँ और जौ जैसी फसलें उगाना शुरू किया (~8,000 वर्ष पूर्व)।
विंध्य क्षेत्र: मध्य भारत का वह क्षेत्र जहाँ सबसे पहले चावल उपजाया गया (विंध्य के उत्तर में)।
सिंधु और गंगा प्रणालियाँ: सिंधु के किनारे 4,700 वर्ष पूर्व आरंभिक नगर फले-फूले; गंगा घाटी के नगरों का विकास 2,500 वर्ष पूर्व हुआ।

पाण्डुलिपियाँ

ताड़ के पत्तों या हिमालय में उगने वाले ‘भूर्ज’ पेड़ की छाल पर हाथ से लिखी गई पुस्तकें।

अभिलेख

पत्थर अथवा धातु जैसी अपेक्षाकृत कठोर सतहों पर उत्कीर्ण किए गए लेख।

पुरातत्व

अवशेषों, औजारों, बर्तनों और हड्डियों जैसे भौतिक साक्ष्यों का अध्ययन।

प्रथम बड़ा
साम्राज्य
गंगा के दक्षिण में स्थित मगध अपनी उपजाऊ भूमि और रणनीतिक स्थिति के कारण शक्तिशाली बनकर उभरा। इतिहास हमें याद दिलाता है कि जहाँ राजाओं ने अपनी विजयों का लेखा-जोखा अभिलेखों में रखा, वहीं आम किसानों और शिकारियों के दैनिक जीवन को केवल पुरातत्व के माध्यम से ही समझा जा सकता है।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-1 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: क्या, कहाँ, कैसे और कब?

अभी डाउनलोड करें

प्रस्तावना संविधान के परिचय या भूमिका को कहते हैं। इसमें संविधान का सार या संक्षिप्त विवरण होता है। प्रसिद्ध न्यायविद एन.ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को ‘संविधान का परिचय पत्र’ कहा है।

प्रस्तावना चार महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट करती है:

  1. अधिकार का स्रोत: यह बताता है कि संविधान अपनी शक्ति ‘भारत की जनता’ से प्राप्त करता है।
  2. भारतीय राज्य की प्रकृति: यह घोषणा करती है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष), लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है।
  3. संविधान के उद्देश्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व संविधान के मूल उद्देश्य हैं।
  4. संविधान अपनाने की तिथि: यह 26 नवंबर, 1949 की तारीख का उल्लेख करती है।
  • संप्रभु (Sovereign): भारत न तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और न ही किसी अन्य देश का डोमिनियन है। यह अपने आंतरिक और बाहरी मामलों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
  • समाजवादी (Socialist): भारत ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ को अपनाता है, जिसका उद्देश्य गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है।
  • पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष (Secular): हमारे देश में सभी धर्मों को समान दर्जा प्राप्त है और उन्हें राज्य का समान समर्थन मिलता है।
  • लोकतांत्रिक (Democratic): सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथ में है। भारत में प्रतिनिधि संसदीय लोकतंत्र है।
  • गणराज्य (Republic): इसका अर्थ है कि राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) हमेशा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित समय के लिए चुना जाता है (वंशानुगत नहीं होता)।
  • न्याय (Justice): सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय (मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से सुनिश्चित)।
  • स्वतंत्रता (Liberty): विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता।
  • समता (Equality): स्थिति और अवसर की समानता।
  • बंधुत्व (Fraternity): व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली भाईचारे की भावना।
  • प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संशोधन किया गया है।
  • इस संशोधन के माध्यम से तीन नए शब्द जोड़े गए: समाजवादी (Socialist), पंथनिरपेक्ष (Secular) और अखंडता (Integrity)
  • बेरुबारी संघ मामला (1960): उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।
  • केशवानंद भारती मामला (1973): उच्चतम न्यायालय ने पूर्व के फैसले को पलट दिया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक हिस्सा है
  • वर्तमान स्थिति: यह संविधान का हिस्सा है लेकिन यह ‘गैर-न्यायिक’ (non-justiciable) है, यानी इसके प्रावधानों को कानून की अदालतों में लागू नहीं करवाया जा सकता।
  • तथ्य 1: प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा तैयार और पेश किए गए ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objectives Resolution) पर आधारित है।
  • तथ्य 2: 42वें संशोधन द्वारा ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए थे। (इसे याद रखने के लिए ‘SSI’ शॉर्टकट का उपयोग कर सकते हैं)।
भारतीय राजव्यवस्था   •   नागरिक शास्त्र
भारत का संविधान

प्रस्तावना: संविधान का परिचय पत्र

शक्ति का स्रोत
प्रस्तावना स्पष्ट करती है कि संविधान अपनी अंतिम शक्ति सीधे ‘भारत के लोग’ से प्राप्त करता है।
कानूनी स्थिति
सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक केशवानंद भारती मामले (1973) में इसे संविधान का अभिन्न अंग माना।
राज्य की प्रकृति
प्रस्तावना भारत को एक निम्न रूप में बनाने का संकल्प लेती है:
संप्रभु: स्वतंत्र अधिकार, जो किसी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं है।
समाजवादी एवं धर्मनिरपेक्ष: समानता और धार्मिक तटस्थता पर जोर देने के लिए 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया।
लोकतांत्रिक गणराज्य: शक्ति निर्वाचित प्रतिनिधियों और चुने हुए राष्ट्राध्यक्ष में निहित है।

42वां संशोधन (1976)

प्रस्तावना में केवल एक बार संशोधन किया गया। इसमें तीन शब्द जोड़े गए: समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता।

उद्देश्य प्रस्ताव

प्रस्तावना ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ पर आधारित है, जिसे पंडित नेहरू द्वारा 13 दिसंबर, 1946 को पेश किया गया था।

कानूनी
सार
प्रस्तावना गैर-न्यायोचित (अदालतों में लागू करने योग्य नहीं) है, लेकिन यह संविधान निर्माताओं के विचारों को समझने की कुंजी है। जब भी किसी अनुच्छेद की भाषा अस्पष्ट होती है, तो यह मार्गदर्शक का कार्य करती है।

यहां 1 जनवरी, 2026 के The Hindu के संपादकीय लेखों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है, जिसे UPSC की तैयारी के लिए पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन व्यवस्था; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951)

  • संदर्भ: 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की आलोचना।
  • प्रक्रियात्मक अराजकता:
    • पश्चिम बंगाल: बुजुर्ग निवासियों को दूर-दराज के स्थानों पर सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन भारी सार्वजनिक विरोध के बाद इसे ‘होम वेरिफिकेशन’ (घर पर सत्यापन) में बदला गया।
    • बिहार: सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण डेटा में विसंगतियां देखी गईं।
  • बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में 6.5 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।
    • उत्तर प्रदेश: 2.89 करोड़।
    • तमिलनाडु और गुजरात: क्रमशः 97 लाख और 73.7 लाख (इन राज्यों में उच्च प्रवासी आबादी के बावजूद)।
  • चिंताएँ: संपादकीय के अनुसार, इस अभियान का उपयोग अनौपचारिक रूप से ‘नागरिकता स्क्रीनिंग’ के रूप में किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की अवधारणा का उल्लंघन है।
  • आगे की राह: निर्वाचन आयोग को एक पारदर्शी और सहभागी तंत्र अपनाना चाहिए, जहाँ नाम हटाने से पहले मतदाताओं को सक्रिय रूप से सूचित किया जाए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष जागरूकता; स्वदेशीकरण)

  • संदर्भ: भारत का संसाधन-सीमित अन्वेषण से ‘न्यू स्पेस’ युग के वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में परिवर्तन।
  • प्रमुख उपलब्धियां:
    • चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश।
    • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (2025): ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने ISS पर तिरंगा लहराया।
    • मंगलयान: अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला एशियाई देश।
  • रणनीतिक रोडमैप:
    • गगनयान: भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन (लक्ष्य: 2027)।
    • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।
    • चंद्रमा पर मानव: 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य।
  • वाणिज्यिक विकास: यह क्षेत्र निजी खिलाड़ियों के लिए खुल गया है, जिसमें अब 350 से अधिक स्टार्टअप हैं। भारत 2030 तक 400 बिलियन डॉलर के वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का 10% हिस्सा हासिल करना चाहता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; औद्योगिक नीति और विकास)

  • संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है।
  • भेद्यता (Vulnerability): भारत “दुनिया की दवा की दुकान” है, जो अमेरिका की 40% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। हालांकि जेनेरिक दवाओं को अभी छोड़ दिया गया है, लेकिन तनाव बढ़ने से निर्यात राजस्व में 10-15% की गिरावट आ सकती है और GDP विकास दर में 0.2-0.3% की कमी हो सकती है।
  • चीन कारक: भारत अपनी ‘एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स’ (API) के लिए 72% चीन पर निर्भर है, जो आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम है।
  • घरेलू सुरक्षा कवच: सितंबर 2025 में GST युक्तिकरण के कारण दवाओं पर दरें 12% से घटाकर 5% कर दी गईं, जिससे उपभोक्ताओं को $1.2 बिलियन की बचत हुई और घरेलू खपत बढ़ी।
  • सुझाव: भारत को यूरोपीय संघ, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में निर्यात का विविधीकरण करना चाहिए और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए बल्क ड्रग्स हेतु PLI योजनाओं में तेजी लानी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और उसके पड़ोसी)

  • संदर्भ: खालिदा जिया का निधन (30 दिसंबर, 2025) और शेख हसीना का निर्वासन, फरवरी 2026 के चुनावों से पहले बांग्लादेश की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है।
  • भारत के लिए सुरक्षा जोखिम: जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी तत्व मजबूत हो रहे हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश का होना अनिवार्य है।
  • राजनयिक रणनीति: भारत को केवल अवामी लीग के भरोसे न रहकर ढाका के व्यापक राजनीतिक स्पेक्ट्रम के साथ जुड़ना चाहिए, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक कनेक्टिविटी (जैसे अखौरा-अगरतला रेल लिंक) सुनिश्चित करनी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 4 (नीतिशास्त्र); GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय)

  • संदर्भ: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे की गणना के पीछे कानूनी और नैतिक सिद्धांतों का विश्लेषण।
  • मुद्दा: वर्तमान में सड़क दुर्घटना मुआवजे की गणना पीड़ित की भविष्य की आय (Multiplicand Method) के आधार पर की जाती है।
  • नैतिक असमानता: यह तरीका एक CEO के जीवन को दैनिक वेतनभोगी मजदूर की तुलना में अधिक मूल्यवान मानता है, जो अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमा) का उल्लंघन है।
  • प्रस्तावित सुधार: संपादकीय एक ‘गरिमा आधार’ (Dignity Floor) की वकालत करता है—अर्थात आय के बावजूद प्रत्येक मृत्यु के लिए एक समान न्यूनतम आधारभूत मुआवजा होना चाहिए।

संपादकीय विश्लेषण

01 जनवरी, 2026
GS-3 अर्थव्यवस्था एवं व्यापार फार्मा: अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव

ब्रांडेड आयात पर प्रस्तावित 100% टैरिफ भारत के $50B के क्षेत्र के लिए खतरा है। जेनेरिक दवाओं में आपूर्ति बफर के बावजूद, चीन पर 72% API निर्भरता एक संरचनात्मक कमजोरी बनी हुई है।

GS-3 पर्यावरण एवं कृषि चावल निर्यात नेतृत्व बनाम भूजल स्वास्थ्य

भारत वैश्विक चावल निर्यात में अग्रणी है, फिर भी 1 किलो चावल उत्पादन के लिए 3,000–4,000L पानी की आवश्यकता होती है। उच्च MSP और बिजली सब्सिडी पंजाब और हरियाणा के भूजल के “अत्यधिक दोहन” को बढ़ावा दे रही है।

GS-2 शासन (गवर्नेंस) भूमि रिकॉर्ड में ब्लॉकचेन

सर्वोच्च न्यायालय ने संपत्ति लेनदेन को सुरक्षित करने के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का समर्थन किया। ‘पुनर्विवाद योग्य’ से निर्णायक साक्ष्य (Conclusive Proof) की ओर बढ़ना भूमि मुकदमों को समाप्त करने का लक्ष्य रखता है।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने भारत-पाक द्विपक्षीय संबंधों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को फिर से खारिज किया।
बैक्ट्रियन ऊंट: लद्दाख सेना के अभियानों के लिए दो कूबड़ वाले ऊंटों को सफलतापूर्वक शामिल किया गया।
निमेसुलाइड: लिवर विषाक्तता के कारण खुराक (>100mg) प्रतिबंधित; NSAID सुरक्षा प्रोटोकॉल की निगरानी।
चाबहार बंदरगाह: क्षेत्रीय टर्मिनल संचालन जारी रखने के संबंध में कूटनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
GS-4
क्षरण की नैतिकता
चावल निर्यात मॉडल अनिवार्य रूप से ‘वर्चुअल वॉटर’ का हस्तांतरण है। भूजल स्थिरता के ऊपर निर्यात के आंकड़ों को प्राथमिकता देना ‘अंतर-पीढ़ीगत समानता’ (Intergenerational Equity) का उल्लंघन है, जो भविष्य की घरेलू जल सुरक्षा की कीमत पर वैश्विक खपत को सब्सिडी देने जैसा है।
📰

द हिंदू संपादकीय (01-जनवरी-2026)

सारांश और विश्लेषण: मतदाता सूची, अंतरिक्ष यात्रा और फार्मा भविष्य

विश्लेषण डाउनलोड करें

आज की अध्ययन सामग्री उन विशिष्ट भौगोलिक स्थानों पर प्रकाश डालती है जो आपके मानचित्र अभ्यास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • संदर्भ: लगभग 4700 वर्ष पहले यहाँ प्राचीन नगरों का उदय हुआ था।
  • मुख्य स्थान: राखीगढ़ी (हरियाणा) – यह वर्तमान में सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) का सबसे बड़ा स्थल है।
  • मैपिंग कार्य: सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियों की स्थिति मानचित्र पर देखें: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
  • संदर्भ: लगभग 2500 वर्ष पूर्व, गंगा के दक्षिण के क्षेत्र में ‘मगध’ नामक एक शक्तिशाली साम्राज्य विकसित हुआ था।
  • महत्व: यह प्राचीन भारत का पहला सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था।
  • मैपिंग कार्य: सोन और गंगा नदियों के संगम (मिलन स्थल) को चिह्नित करें, जहाँ मगध का हृदय स्थल (वर्तमान बिहार का क्षेत्र) स्थित था।
  • संदर्भ: भारत 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश बना।
  • महत्व: इस मिशन ने चंद्रमा की सतह और वहाँ पानी के अणुओं (water molecules) की उपस्थिति के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान की है।
  • मैपिंग कार्य: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की स्थिति और वहां स्थित ‘शिव शक्ति पॉइंट’ (जहाँ चंद्रयान-3 लैंड हुआ था) को ध्यान में रखें।

मानचित्रण

उत्तर-पश्चिम उपमहाद्वीप सिंधु नदी प्रणाली

प्राचीन शहरों का पालना (4,700 वर्ष पहले)। वर्तमान केंद्र: राखीगढ़ी, जिसे अब वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े हड़प्पा स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

गंगा घाटी मगध क्षेत्र

मुख्य रूप से गंगा नदी के दक्षिण में स्थित। यह लगभग 2,500 वर्ष पूर्व भारत के पहले विशाल साम्राज्य के रूप में उभरा।

बाहरी अंतरिक्ष
चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव

23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 के साथ वैश्विक सुर्खियों में। इस लैंडिंग ने जल-बर्फ की उपस्थिति की पुष्टि की और पहले कभी न देखे गए चंद्र क्षेत्रों का मानचित्रण किया।

स्थलाकृतिक प्रोटोकॉल
रणनीतिक एटलस कार्य

क्षेत्रों का पता लगाकर स्थायी दृश्य स्मृति बनाएँ। झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलज का पता लगाएं और सोन और गंगा के संगम की पहचान करें।

सिंधु पांच प्रमुख सहायक नदियों का पता लगाएं।
मगध सोन-गंगा संगम की पहचान करें।
अंतरिक्ष दक्षिणी ध्रुव की स्थलाकृति का अध्ययन करें।
एटलस प्रोटोकॉल
स्थानिक रणनीति: स्थायी दृश्य स्मृति बनाने के लिए आज इन तीन विशिष्ट क्षेत्रों का पता लगाएं। मानचित्रण वह स्थानिक आधार है जिस पर आपका ऐतिहासिक और आर्थिक ज्ञान टिका है।

UPSC CSE साक्षात्कार रणनीति

UPSC CSE साक्षात्कार रणनीति

UPSC CSE साक्षात्कार रणनीति

UPSC CSE साक्षात्कार रणनीति

यूपीएससी व्यक्तित्व परीक्षण आपके सिविल सेवक बनने के सफर का अंतिम और सबसे निर्णायक पड़ाव है। इसे अक्सर “ज्ञान का परीक्षण” समझ लिया जाता है, जबकि वास्तव में यह एक उद्देश्यपूर्ण बातचीत है, जिसका उद्देश्य आपकी मानसिक क्षमता, नैतिक अखंडता और नेतृत्व क्षमता का आकलन करना है।

WhatsApp ग्रुप अभी जुड़ें
Telegram चैनल अभी जुड़ें

यह साक्षात्कार उम्मीदवार और पांच अनुभवी सदस्यों के बोर्ड के बीच एक उद्देश्यपूर्ण संवाद है।

  • अंक: 275 अंक।
  • अवधि: आमतौर पर 25 से 35 मिनट।
  • उद्देश्य: मानसिक सतर्कता, स्पष्ट और तार्किक व्याख्या, निर्णय का संतुलन, रुचियों की गहराई और सामाजिक सामंजस्य की क्षमता का मूल्यांकन करना।

आपका DAF ही आपके साक्षात्कार का “प्रश्न पत्र” है।

  • गृहनगर और राज्य: अपने क्षेत्र के इतिहास, भूगोल और वर्तमान मुद्दों से अवगत रहें।
  • शैक्षिक पृष्ठभूमि: अपने स्नातक के विषय की बुनियादी बातों को दोहराएं।
  • कार्य अनुभव: अपने कार्य प्रोफ़ाइल और प्रशासन में उसकी प्रासंगिकता को समझें।
  • शौक (Hobbies): अपने शौक के बारे में गहराई से तैयारी करें।

बोर्ड आपसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर एक सुविचारित राय की अपेक्षा करता है।

  • दैनिक पठन: कम से कम दो विविध समाचार पत्र (जैसे द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस) पढ़ें।
  • संतुलित दृष्टिकोण: विवादास्पद विषयों पर एक संतुलित “पक्ष-विपक्ष-निष्कर्ष” वाला दृष्टिकोण विकसित करें।
  • स्पष्टता और संक्षिप्तता: उत्तर सीधे दें और लंबी व्याख्याओं से बचें।
  • अशाब्दिक संकेत: चेहरे पर मुस्कान, आंखों में आत्मविश्वास (eye contact) और बैठने का सही तरीका बनाए रखें।
  • विनम्रता: यदि उत्तर नहीं पता है, तो विनम्रता से स्वीकार करें। यह कहना बेहतर है कि “क्षमा करें सर/मैम, फिलहाल मेरे पास इसकी जानकारी नहीं है”
  • अपनी कमियों को पहचानने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए 3-4 गुणवत्तापूर्ण मॉक इंटरव्यू पर्याप्त हैं।
WhatsApp चैनल फॉलो करें

प्रथम प्रभाव (First impression) अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

  • पुरुष: हल्के रंग की औपचारिक शर्ट, गहरी पतलून, टाई और पॉलिश किए हुए जूते।
  • महिलाएं: सौम्य रंग की साड़ी या औपचारिक सलवार-कमीज को प्राथमिकता दी जाती है।
  • व्यवहार: विनम्र अभिवादन के साथ प्रवेश करें और दबाव में भी शांत बने रहें।
प्रश्नउत्तर
क्या साक्षात्कार केवल ज्ञान के बारे में है?नहीं, यह आपके व्यक्तित्व का परीक्षण है। ज्ञान का परीक्षण मुख्य परीक्षा में पहले ही हो चुका है।
क्या मैं हिंदी में उत्तर दे सकता हूँ?हाँ, यदि आपने अपने DAF में इसका विकल्प चुना है, तो आप हिंदी में साक्षात्कार दे सकते हैं।
तनावपूर्ण साक्षात्कार (Stress Interview) को कैसे संभालें?शांत रहें। बोर्ड आपके विचारों को चुनौती दे सकता है ताकि आपकी तर्कशक्ति को परखा जा सके।
यदि मुख्य परीक्षा में कम अंक हों तो?साक्षात्कार में उच्च स्कोर (200+) आपकी रैंक में काफी सुधार कर सकता है।

UPSC बोर्ड भविष्य के नेताओं की तलाश कर रहा है। ईमानदार और विनम्र रहें और राष्ट्र की सेवा के प्रति अपना वास्तविक जुनून दिखाएं। यदि आप सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ बोर्ड के सामने जाते हैं, तो सफलता निश्चित है।

अपने साक्षात्कार (Interview) की तैयारी को अगले स्तर पर ले जाएं!

साक्षात्कार को एक उद्देश्यपूर्ण बातचीत में बदलें। यह मार्गदर्शिका DAF पर पकड़ बनाने और संचार कौशल सुधारने के लिए रणनीतियां प्रदान करती है।

अपनी तैयारी के लिए यह निःशुल्क और प्रिंट-फ्रेंडली PDF डाउनलोड करें।

📥 अभी PDF डाउनलोड करें

Dainik CSAT Quiz in Hindi – September 26, 2025

Dainik CSAT Quiz (26 September 2025)
दैनिक CSAT क्विज़

दैनिक CSAT क्विज़

10:00

लोड हो रहा है…

    History

    Geography

    Indian Polity

    Indian Economy

    Environment & Ecology

    Science & Technology

    Art & Culture

    Static GK

    Current Affairs

    Quantitative Aptitude

    Reasoning

    General English

    History

    Geography

    Indian Polity

    Indian Economy

    Environment & Ecology

    Science & Technology

    Art & Culture

    Static GK

    Current Affairs

    Quantitative Aptitude

    Reasoning

    General English