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यह अध्याय “राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन : 1870 के दशक से 1947 तक” संगठित राष्ट्रवाद के उदय से लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति और विभाजन की त्रासदी तक के भारतीय संघर्ष का व्यापक इतिहास प्रस्तुत करता है।
1870 और 1880 के दशक तक भारतीयों के बीच एक नई राजनीतिक चेतना पैदा हो चुकी थी। लोग यह महसूस करने लगे थे कि भारत के संसाधनों और यहाँ के लोगों के जीवन पर अंग्रेजों का नियंत्रण है। जब तक यह नियंत्रण खत्म नहीं होता, भारत यहाँ के लोगों का नहीं हो सकता।
महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे, जहाँ उन्होंने नस्लभेदी प्रतिबंधों के खिलाफ अहिंसक आंदोलनों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था।
1920 के दशक के मध्य के बाद, गाँवों में रचनात्मक कार्यों और नए राजनीतिक बदलावों के कारण राष्ट्रीय आंदोलन को और गति मिली।
संघर्ष का अंतिम चरण द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में शुरू हुआ।
स्वतंत्रता की खुशी देश के विभाजन की हिंसा के कारण फीकी पड़ गई।
महत्वपूर्ण तिथियाँ और घटनाक्रम:
1919 का ‘काला कानून’ जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाया।
एक बुनियादी जरूरत पर राज्य के एकाधिकार को तोड़ने के लिए दांडी तक 240 मील की यात्रा।
सुभाष चंद्र बोस द्वारा फिर से संगठित की गई भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA)।
संसदीय समितियाँ संसद की “आँख और कान” कहलाती हैं। चूंकि संसद एक विशाल निकाय है और उसके पास समय सीमित होता है, इसलिए वह प्रत्येक विधायी और कार्यकारी कार्रवाई की विस्तार से जाँच नहीं कर सकती। यह कार्य समितियों को सौंपा जाता है, जो दलीय राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्ष रूप से कार्य करती हैं।
समितियाँ दो प्रकार की होती हैं:
यह अनुभाग परीक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
| समिति | उद्देश्य |
| कार्य सलाहकार समिति (Business Advisory Committee) | सदन के कार्यक्रम और समय-सारणी को विनियमित करती है। |
| अधीनस्थ विधान संबंधी समिति (Subordinate Legislation) | यह जाँच करती है कि कार्यपालिका अपनी “नियम और उपविधि” बनाने की शक्ति का प्रयोग संसद द्वारा दी गई सीमाओं के भीतर कर रही है या नहीं। |
| आचार समिति (Ethics Committee) | सदस्यों के दुर्व्यवहार के मामलों की जाँच करके अनुशासन और मर्यादा बनाए रखती है। |
| विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) | सदन या उसके सदस्यों के “विशेषाधिकार हनन” के मामलों की जाँच करती है। |
वित्तीय समितियों की तुलना
| विशेषता | लोक लेखा समिति (PAC) | प्राकलन समिति | सार्वजनिक उपक्रम समिति |
| सदस्य संख्या | 22 (15 LS + 7 RS) | 30 (केवल लोकसभा) | 22 (15 LS + 7 RS) |
| अध्यक्ष | आमतौर पर विपक्ष से | आमतौर पर सत्ता पक्ष से | लोकसभा अध्यक्ष द्वारा नियुक्त |
| मुख्य कार्य | खर्च होने के बाद जाँच (Post-mortem) | कार्यक्षमता और बचत के सुझाव देना | PSUs का ऑडिट करना |
| CAG से संबंध | CAG के साथ मिलकर कार्य करती है | कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं | PSUs पर CAG की रिपोर्ट जाँचती है |
💡 परीक्षा के लिए टिप:
हमेशा याद रखें कि प्राकलन समिति ही एकमात्र ऐसी वित्तीय समिति है जिसमें राज्यसभा का कोई भी सदस्य शामिल नहीं होता है। इसके अलावा, इन तीनों वित्तीय समितियों में किसी भी मंत्री को सदस्य के रूप में नहीं चुना जा सकता।
सदन के कार्यक्रम और समय सारणी को विनियमित करती है। इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष/सभापति करते हैं।
यह सुनिश्चित करती है कि कार्यपालिका संसद द्वारा सौंपे गए अधिकारों की सीमा के भीतर ही नियम और उपनियम बनाए।
सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए सदस्यों के दुराचार और “विशेषाधिकार हनन” के मामलों की जाँच करती है।
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (7 फ़रवरी, 2026) दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (पर्यावरण; संरक्षण; आपदा प्रबंधन) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (शासन)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (पर्यावरण; संरक्षण; जलवायु परिवर्तन) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (भारत से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; अंतर्राष्ट्रीय संबंध)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और इसके पड़ोसी; क्षेत्रीय नीतियों का प्रभाव)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (शासन; कल्याणकारी योजनाएं; शासन के महत्वपूर्ण पहलू) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 (सामाजिक मुद्दे)।
वित्त अंतराल $2.4 ट्रिलियन से अधिक। जहाँ COP प्रक्रियाएँ बढ़ रही हैं, वहीं राष्ट्रीय हितों के वैश्विक तत्परता पर हावी होने से वास्तविक कार्रवाई रुकी हुई है।
डोनरो सिद्धांत (Donroe Doctrine) का एक रणनीतिक विकल्प। इस समझौते का लक्ष्य सेमीकंडक्टर, AI और समुद्री क्षेत्र के माध्यम से वैश्विक व्यवस्था को स्थिर करना है।
तेलंगाना त्रासदी रेखांकित करती है कि स्थानीय चुनावों के लिए कड़ी पात्रता कैसे सुभेद्य परिवारों के लिए अत्यधिक और अनपेक्षित सामाजिक विकृतियाँ पैदा करती है।
यहाँ राजनयिक मानचित्रण, नई समुद्री प्रजातियों की खोज और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर केंद्रित मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण दिया गया है:
7 फरवरी, 2026 की एक बड़ी राजनयिक घटना में “मानचित्रों के माध्यम से एक संदेश” दिया गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के साथ एक मानचित्र जारी किया, जिसके महत्वपूर्ण क्षेत्रीय निहितार्थ हैं।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने बंगाल की खाड़ी के पारिस्थितिकी तंत्र में समुद्री कीड़ों (Polychaetes) की दो नई प्रजातियों का पता लगाया है।
महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट क्षेत्र में ‘ट्रैपडोर स्पाइडर’ (Trapdoor Spider) की एक नई प्रजाति दर्ज की गई है।
7 फरवरी को मिली रिपोर्टों के अनुसार, भारत के “रणनीतिक सुरंग मानचित्र” (Strategic Tunnel Map) में तेजी से प्रगति हो रही है।
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| क्षेत्रीय मानचित्र | अविभाजित J&K/लद्दाख | भारत-अमेरिका व्यापार ढांचा मानचित्र |
| समुद्री खोज | Nereis dhritiae | पश्चिम बंगाल के कीचड़ के मैदान |
| दक्कन की खोज | ट्रैपडोर मकड़ी | कोल्हापुर, महाराष्ट्र |
| रणनीतिक सीमा | तवांग कनेक्टिविटी | सेला सुरंग, अरुणाचल प्रदेश |
💡 मैपिंग टिप:
भारत-अमेरिका व्यापार मानचित्र की नई सीमाओं को चिह्नित करते समय सियाचिन हिमनद और गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्रों को विशेष रूप से देखें। यह मानचित्र केवल व्यापार के लिए नहीं, बल्कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता के अंतरराष्ट्रीय समर्थन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पश्चिम बंगाल में समुद्री कीड़ों की दो नई प्रजातियों, जिनमें नेरेस धृतिया (Nereis dhritiae) शामिल है, की पहचान की गई। सल्फाइड-युक्त प्रदूषित वातावरण के अनुकूल, ये महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र संकेतकों के रूप में कार्य करते हैं।
लाहौल को ज़ांस्कर से जोड़ने वाली शिंकू ला (15,800 फीट) और अरुणाचल प्रदेश के तवांग तक 365 दिन हर मौसम में पहुँच प्रदान करने वाली सेला सुरंग का मानचित्रण।
सुंदरबन मडफ्लैट्स में नए पॉलीकीट्स की खोज लचीले जैविक मोर्चों के रूप में मैंग्रोव के मानचित्रण के महत्व को पुख्ता करती है।
यह अध्याय “दृश्य कलाओं की बदलती दुनिया” बताता है कि औपनिवेशिक काल के दौरान नई पश्चिमी शैलियों, तकनीकों और विषयों के आगमन ने भारत की कला और वास्तुकला को कैसे बदल दिया।
अठारहवीं शताब्दी में, यूरोपीय कलाकारों का एक तांता भारत आया, जो अपने साथ तैल चित्र (Oil Painting) की तकनीक और यथार्थवाद (Realism) की अवधारणा लेकर आए। इससे वे ऐसे चित्र बनाने में सक्षम हुए जो बिल्कुल असली और जीवंत दिखते थे।
ब्रिटिश सत्ता के उदय ने पारंपरिक दरबारी चित्रकारों को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया, जिससे उनके संरक्षण और शैली में बदलाव आया।
उन्नीसवीं शताब्दी में, कलकत्ता जैसे बढ़ते शहरों में एक व्यापक दर्शक वर्ग की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोकप्रिय कला का एक नया रूप उभरा।
जैसे-जैसे राष्ट्रवादी आंदोलन ने गति पकड़ी, कलाकारों ने एक ऐसी शैली की तलाश की जो पश्चिमी यथार्थवाद की नकल के बजाय वास्तव में “भारतीय” हो।
औपनिवेशिक भारत में वास्तुकला का उपयोग ब्रिटिश सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभुत्व को भौतिक रूप से व्यक्त करने के लिए किया गया था।
महत्वपूर्ण शब्द:
पेंटिंग की एक शैली जिसका उद्देश्य लोगों और प्रकृति का जीवंत और सटीक चित्रण करना था।
नुकीले मेहराबों वाली वास्तुशिल्प शैली, जिससे इमारतें यूरोपीय गिरजाघरों जैसी दिखती थीं।
एक मुद्रण प्रक्रिया जिसने आम जनता के लिए सस्ते चित्रों के बड़े पैमाने पर उत्पादन की अनुमति दी।
भारतीय संविधान में “बजट” शब्द का कहीं भी प्रयोग नहीं किया गया है। इसके बजाय, अनुच्छेद 112 में इसे ‘वार्षिक वित्तीय विवरण’ (Annual Financial Statement) कहा गया है। यह संसद की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय घटना है, क्योंकि भारत की संचित निधि से कोई भी धन संसदीय स्वीकृति के बिना नहीं निकाला जा सकता।
बजट एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के लिए भारत सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण होता है।
बजट में दो प्रकार के व्यय शामिल होते हैं:
बजट को कानून बनने के लिए इन विशिष्ट चरणों से गुजरना पड़ता है:
कभी-कभी सरकार को नियमित बजट चक्र के बाहर धन की आवश्यकता होती है:
सारांश तालिका
| शब्द | अनुच्छेद | उद्देश्य |
| वार्षिक वित्तीय विवरण | 112 | मुख्य बजट दस्तावेज। |
| विनियोग विधेयक | 114 | धन निकालने का कानूनी अधिकार। |
| वित्त विधेयक | 117 | कर लगाने और एकत्र करने का अधिकार। |
| लेखा अनुदान | 116 | 2 महीने के लिए अग्रिम धन। |
| अनुपूरक अनुदान | 115 | स्वीकृत राशि कम पड़ने पर अतिरिक्त धन। |
| संचित निधि | 266 | सरकार का मुख्य खजाना। |
💡 परीक्षा के लिए टिप:
याद रखें कि ‘गिलोटिन’ (Guillotine) वह प्रक्रिया है जिसमें अनुदान की मांगों के लिए आवंटित समय समाप्त होने पर, शेष सभी मांगों को बिना चर्चा के सीधे मतदान के लिए रख दिया जाता है। यह बजट सत्र के अंतिम दिनों में होता है।
मांग को घटाकर 1 रुपया कर दिया जाता है; यह सरकार की नीति की पूर्ण अस्वीकृति को दर्शाता है।
व्यय में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के लिए मांग को एक विशिष्ट राशि से कम कर दिया जाता है।
मांग को 100 रुपये कम कर दिया जाता है; इसका उपयोग सरकार के खिलाफ विशिष्ट शिकायत व्यक्त करने के लिए होता है।
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (6 फ़रवरी, 2026) दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; पर्यावरण; बुनियादी ढांचा)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य; शासन; सरकारी बजट)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (पर्यावरण; संरक्षण) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (न्यायपालिका)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (सुरक्षा; रक्षा प्रौद्योगिकी; भारतीय अर्थव्यवस्था)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (राजव्यवस्था; राज्यपाल की भूमिका; केंद्र-राज्य संबंध)।
व्यय कुल व्यय के 1.9% पर स्थिर। बायोफार्मा SHAKTI और एक “वृद्ध राष्ट्र” के लिए 1.5 लाख जराचिकित्सा देखभाल कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण पर ध्यान।
रक्षा बजट जीडीपी के 2% तक पहुँचा। घरेलू उद्योग के लिए 75% पूंजीगत बजट का आरक्षण, फिर भी L-1 की बाधाएं उच्च-तकनीकी नवप्रवर्तकों को बाधित करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली तारीख से मंजूरी (Retrospective Clearances) पर प्रतिबंध वापस लिया। अरावली श्रेणियों की नई परिभाषाएं संभावित रूप से निचली चोटियों को खनन शोषण के लिए खोल सकती हैं।
यहाँ सांस्कृतिक भूगोल के विकास, सामरिक एयरोस्पेस क्लस्टर और अंतर-क्षेत्रीय संरक्षण पर केंद्रित मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण दिया गया है:
6 फरवरी, 2026 तक भारत के पर्यटन भूगोल में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है, जो पारंपरिक “समुद्र तट बनाम पहाड़” (Beach vs. Hills) के द्वंद्व से आगे बढ़कर अनुभव-आधारित विरासत केंद्रों (Heritage hubs) की ओर बढ़ रहा है।
6 फरवरी, 2026 को एयरोस्पेस के लिए एक नए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) का उद्घाटन किया गया, जिसने वडोदरा को भारत के उच्च-तकनीकी औद्योगिक मानचित्र पर एक प्रमुख बिंदु के रूप में स्थापित किया है।
यद्यपि इसकी स्थापना पहले हुई थी, लेकिन करिमपुझा वन्यजीव अभयारण्य को इस तिथि पर “नीलगिरी परिदृश्य” (Nilgiri Landscape) की निरंतरता में इसकी भूमिका के लिए विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने 6 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता फिर से शुरू करने की शर्तों पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए।
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| नया विरासत केंद्र | अयोध्या का कायाकल्प | उत्तर प्रदेश |
| एयरोस्पेस CoE | गति शक्ति विश्वविद्यालय | वडोदरा, गुजरात |
| पश्चिमी घाट की कड़ी | करिमपुझा अभयारण्य | केरल (नीलगिरी BR) |
| व्यापार भूगोल | GCC राष्ट्र | पश्चिम एशिया / खाड़ी क्षेत्र |
💡 मैपिंग टिप:
सांस्कृतिक केंद्रों को मैप करते समय उनके पास से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों को भी देखें। उदाहरण के लिए, अयोध्या और वाराणसी के बीच की कनेक्टिविटी उत्तर प्रदेश के पूर्वी आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार, वडोदरा की स्थिति दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे (DMIC) पर इसकी सामरिक महत्ता को बढ़ाती है।
गति शक्ति विश्वविद्यालय में एयरबस साझेदारी के लिए एक प्राथमिक नोड। मानचित्रण एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखलाओं के स्थानीयकरण और MSW-से-SAF विमानन ईंधन तकनीक पर केंद्रित है।
साइलेंट वैली (केरल) और मुकुर्थी (तमिलनाडु) के बीच एक पारिस्थितिक पुल बनाता है। नीलगिरी परिदृश्य में एकांत चोलनायकन जनजाति का आवास।
गंगा और नर्मदा नदियों पर वाराणसी और महेश्वर घाटों के साथ बुनियादी ढांचे के मानचित्रण के माध्यम से “पवित्र और रोजमर्रा” को एकीकृत करना।
यह अध्याय “महिलाएँ, जाति एवं सुधार” 19वीं और 20वीं शताब्दी के भारत की सामाजिक स्थितियों और उन आंदोलनों की व्याख्या करता है जिन्होंने समाज में व्याप्त गहरी असमानताओं को चुनौती दी।
19वीं शताब्दी की शुरुआत में भारतीय समाज लिंग और जाति के आधार पर गहरे भेदभाव से ग्रस्त था।
19वीं सदी में छपाई की नई तकनीक (किताबें, अखबार, पत्रिकाएं) के विकास ने सामाजिक मुद्दों पर बहस करना आसान बना दिया। पहली बार आम जनता के बीच इन बुराइयों पर चर्चा शुरू हुई।
सुधारकों का मानना था कि महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी उपकरण है, हालाँकि उन्हें भारी सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ा।
19वीं सदी के अंत तक महिलाओं ने स्वयं लिखना और अपनी सामाजिक स्थिति को चुनौती देना शुरू कर दिया।
19वीं और 20वीं सदी में जाति व्यवस्था के अन्याय को चुनौती देने वाले कई आंदोलन शुरू हुए।
महत्वपूर्ण शब्दावली:
1873 में फुले द्वारा लिखी गई पुस्तक, जिसका अर्थ है ‘गुलामी’; इसे अमेरिकी दास-मुक्ति आंदोलन को समर्पित किया गया।
हिंदू धर्म में सुधार और शिक्षा के समर्थन के लिए 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित।
पवित्र सार्वजनिक स्थानों से दलितों के बहिष्कार को चुनौती देने के लिए अंबेडकर के नेतृत्व में चलाए गए आंदोलन।
भारतीय संसद में विधेयकों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: साधारण विधेयक, धन विधेयक, वित्त विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक। यहाँ पहले तीन प्रकारों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो विधायी कार्यों के बड़े हिस्से को नियंत्रित करते हैं।
ये विधेयक वित्तीय विषयों के अलावा किसी भी अन्य मामले से संबंधित होते हैं।
अनुच्छेद 110 के अनुसार, कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ तब माना जाता है जब उसमें केवल कराधान (Taxation), सरकार द्वारा धन उधार लेने, या भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से संबंधित मामले शामिल हों।
एक प्रसिद्ध कहावत है: “सभी धन विधेयक वित्त विधेयक होते हैं, लेकिन सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते।” इसके दो प्रकार हैं:
A. वित्त विधेयक (I) – अनुच्छेद 117(1):
इसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित विषयों के साथ-साथ अन्य सामान्य विधायी मामले भी शामिल होते हैं।
B. वित्त विधेयक (II) – अनुच्छेद 117(3):
इसमें भारत की संचित निधि से व्यय (Expenditure) से जुड़े प्रावधान होते हैं, लेकिन अनुच्छेद 110 का कोई भी विषय इसमें शामिल नहीं होता।
तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)
| विशेषता | साधारण विधेयक | धन विधेयक (अनु. 110) | वित्त विधेयक (I) |
| उत्पत्ति का सदन | किसी भी सदन में | केवल लोकसभा में | केवल लोकसभा में |
| राष्ट्रपति की सिफारिश | आवश्यक नहीं | अनिवार्य | अनिवार्य |
| राज्यसभा की शक्ति | संशोधन/अस्वीकार कर सकती है | न संशोधन, न अस्वीकार | संशोधन/अस्वीकार कर सकती है |
| गतिरोध का समाधान | संयुक्त बैठक | संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं | संयुक्त बैठक |
| अधिकतम विलंब (RS) | 6 महीने | 14 दिन | 6 महीने |
प्रत्येक विधेयक को कानून बनने के लिए दोनों सदनों में इन चरणों से गुजरना पड़ता है:
💡 परीक्षा के लिए टिप:
यह याद रखें कि संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और वित्त विधेयकों के लिए है। धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के लिए संयुक्त बैठक नहीं बुलाई जा सकती।
सिफारिश के साथ केवल लोकसभा में पेश किया जाता है; एक बार पेश होने के बाद, इसे साधारण विधेयक की तरह माना जाता है (अनु. 117(1))।
इसमें संचित निधि से व्यय शामिल होता है। इसे पूरी तरह से साधारण विधेयक की तरह माना जाता है (अनु. 117(3))।
राष्ट्रपति धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस नहीं कर सकते, क्योंकि यह उनकी पूर्व सहमति से ही पेश किया जाता है।
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (5 फ़रवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (शासन के महत्वपूर्ण पहलू; केंद्र-राज्य संबंध; संघवाद) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (आंतरिक सुरक्षा)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; सरकारी बजट; राजकोषीय नीति)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव; द्विपक्षीय संबंध)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (राजव्यवस्था; सामाजिक न्याय; उच्च शिक्षा)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (शिक्षा से संबंधित मुद्दे; मानव संसाधन) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 (सामाजिक मुद्दे)।
ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों का 40% हिस्सा ले रहा है। सब्सिडी में 7% की कटौती की गई क्योंकि राजस्व व्यय का हिस्सा गिरकर 77% रह गया है।
‘न्यू स्टार्ट’ (New START) संधि की समाप्ति सीमाओं के अंत का संकेत है। चीन सालाना 100 वारहेड जोड़ रहा है क्योंकि निवारण अब “उपयोग योग्य” सामरिक परमाणु हथियारों की ओर बढ़ रहा है।
1.5 लाख स्कूलों में 50% संविदा कर्मचारी हैं। समान कार्यों के बावजूद पैरा-टीचर्स नियमित कर्मचारियों के वेतन का केवल 1/4 हिस्सा कमाते हैं।
यहाँ पारिस्थितिक संगमों, वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे, और पवित्र नदी भूगोल पर केंद्रित मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण दिया गया है:
इस अभयारण्य का मानचित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की दो सबसे पुरानी पर्वत प्रणालियों के एक अद्वितीय मिलन बिंदु पर स्थित है।
उच्च-ऊंचाई वाले बुनियादी ढांचे का निर्माण वर्ष 2026 का एक प्रमुख विषय है। ‘ट्रांस-हिमालय’ क्षेत्र में दो प्रमुख “विशाल विज्ञान” (Mega Science) सुविधाओं का मानचित्रण किया जा रहा है।
5 फरवरी, 2026 को फल्गु नदी के अद्वितीय “छिपे हुए” भूगोल को इसके सांस्कृतिक और जल विज्ञान संबंधी महत्व के कारण रेखांकित किया गया।
फरवरी 2026 में हुई एक महत्वपूर्ण गणना के अनुसार पक्षियों की आबादी में 21 प्रतिशत का उछाल देखा गया है, जो इसे एक प्रमुख पारिस्थितिक मानचित्रण बिंदु बनाता है।
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| पर्वत संगम | विंध्य-अरावली लिंक | धौलपुर-करौली, राजस्थान |
| छिपी हुई नदी | फल्गु (निरंजना) | गया, बिहार |
| सौर विज्ञान केंद्र | पैंगोंग झील | लद्दाख |
| आर्द्रभूमि सफलता | नलसरोवर गणना | गुजरात |
💡 मैपिंग टिप:
फल्गु नदी का अध्ययन करते समय मानचित्र पर ‘विष्णुपद मंदिर’ की स्थिति को भी देखें, जो इसी नदी के तट पर स्थित है। विंध्य और अरावली के संगम को चिह्नित करते समय यह ध्यान रखें कि अरावली श्रृंखला उत्तर-पूर्व की ओर (दिल्ली की तरफ) जाती है, जबकि विंध्य श्रृंखला पूर्व की ओर बढ़ती है।
गया के पास लीलाजन और मोहना के संगम से निर्मित यह नदी (प्राचीन निरंजना) रेतीले तल के नीचे बहती है, और साल के अधिकांश समय सतह पर सूखी या “छिपी” रहती है।
उन्नत अंतरिक्ष अवलोकन के लिए पेंगोंग झील के पास नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप और 30-मीटर ऑप्टिकल टेलीस्कोप का रणनीतिक मानचित्रण।
राजस्थान की ऊबड़-खाबड़ बीहड़ स्थलाकृति में बाघों के प्रसार के पैटर्न को समझने के लिए रणथंभौर-DKTR अक्ष का मानचित्रण आवश्यक है।
यह अध्याय “‘देशी जनता’ को सभ्य बनाना राष्ट्र को शिक्षित करना” भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान शिक्षा के विकास और इसके प्रति ब्रिटिश अधिकारियों तथा भारतीय विचारकों की विभिन्न प्रतिक्रियाओं की व्याख्या करता है।
1783 में विलियम जोन्स (William Jones) एक जूनियर जज के रूप में कलकत्ता आए। वे एक भाषाविद (Linguist) थे और उन्होंने स्थानीय पंडितों के साथ संस्कृत, व्याकरण और कविता का अध्ययन करना शुरू किया।
19वीं शताब्दी की शुरुआत तक, कई ब्रिटिश अधिकारियों ने प्राच्यवादी दृष्टिकोण पर हमला करना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे वैज्ञानिक आधारहीन और “गंभीर त्रुटियों” से भरा बताया।
1854 में ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ के अध्यक्ष चार्ल्स वुुड द्वारा जारी इस नीति-पत्र ने भारत के लिए औपचारिक शैक्षिक नीति की रूपरेखा तैयार की।
1830 के दशक में, कंपनी ने एक स्कॉटिश मिशनरी विलियम एडम को बंगाल और बिहार के स्थानीय स्कूलों (पाठशालाओं) पर रिपोर्ट देने का काम सौंपा।
कई भारतीयों ने महसूस किया कि पश्चिमी शिक्षा औपनिवेशिक गुलामी का एक साधन है और उन्होंने इसके विकल्प प्रस्तावित किए।
महत्वपूर्ण शब्द:
एशिया की प्राचीन संस्कृतियों, पवित्र ग्रंथों और कानूनों के प्रति गहरा सम्मान रखने वाले विद्वान।
1854 का वह दस्तावेज जिसने यूरोपीय शिक्षा के औपचारिक प्रशासनिक और आर्थिक लाभों को रेखांकित किया।
प्राकृतिक वातावरण में स्थित एक स्कूल जहाँ टैगोर ने स्व-शिक्षा और कलात्मक अभिव्यक्ति को बढ़ावा दिया।
पीठासीन अधिकारी सदनों की गरिमा और विशेषाधिकारों के संरक्षक होते हैं। उनके बिना, संसद एक विचार-विमर्श करने वाले निकाय के रूप में कार्य नहीं कर सकती।
अध्यक्ष लोकसभा का प्रमुख और उसका प्रतिनिधि होता है।
राष्ट्रपति के पास संसद के प्रत्येक सदन का सत्र बुलाने (आहूत करने) की शक्ति होती है।
विस्तृत सारांश तालिका
| विशेषता | लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) | राज्यसभा सभापति (Chairman) |
| क्या वह सदन का सदस्य है? | हाँ | नहीं (उपराष्ट्रपति होता है) |
| चुनाव की तारीख | राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित | लागू नहीं (पदेन पद) |
| किसे इस्तीफा देता है? | उपाध्यक्ष को | राष्ट्रपति को |
| संयुक्त बैठक | अध्यक्षता करता है | अध्यक्षता नहीं करता |
| धन विधेयक | प्रकृति पर निर्णय लेता है | कोई शक्ति नहीं |
| वोट देने का अधिकार | केवल बराबर होने पर (Casting Vote) | केवल बराबर होने पर (Casting Vote) |
💡 परीक्षा के लिए टिप:
यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि जब राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाता है, तो उसकी अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष ही करता है। यदि अध्यक्ष अनुपस्थित हो, तो लोकसभा का उपाध्यक्ष अध्यक्षता करता है। यदि वह भी अनुपस्थित हो, तो राज्यसभा का उपसभापति अध्यक्षता करता है। राज्यसभा का सभापति कभी भी संयुक्त बैठक की अध्यक्षता नहीं करता।
कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इस पर अध्यक्ष का निर्णय अंतिम और निर्विवाद होता है।
पीठासीन अधिकारी केवल मत बराबर होने की स्थिति में वोट देते हैं (प्रथम दृष्टया नहीं)।
अध्यक्ष/सभापति 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता पर निर्णय लेते हैं।
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (4 फ़रवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (द्विपक्षीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; बुनियादी ढांचा; ऊर्जा संक्रमण; औद्योगिक नीति)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आईटी और कंप्यूटर; अर्थव्यवस्था)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (न्यायपालिका; मौलिक अधिकार; शासन के महत्वपूर्ण पहलू)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (संघवाद; संवैधानिक निकाय; केंद्र-राज्य संबंध)।
दहन इंजनों की 35% दक्षता की तुलना में इलेक्ट्रिक मोटर 90% दक्षता प्रदान करते हैं। यूरोपीय संघ के CBAM दंड से बचने के लिए ‘हरित इलेक्ट्रॉनों’ की ओर रुख करना आवश्यक है।
चिप से सॉफ्टवेयर की ओर बदलाव; वर्टिकल AI कानून और स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश का केंद्र बना। फाउंडेशन मॉडल में सर्कुलर फाइनेंसिंग पर चेतावनी।
उपकर (Cesses) बढ़कर जीडीपी का 2.2% हो गया। 16वें वित्त आयोग ने राज्यों की सहमति के बजाय केंद्र के राजकोषीय स्थान को प्राथमिकता देते हुए 41% की दर बरकरार रखी।
यहाँ महत्वपूर्ण खनिज बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन मानचित्रण और रणनीतिक अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर केंद्रित मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण दिया गया है:
एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में, हाई-टेक विनिर्माण के लिए आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करने हेतु समर्पित दुर्लभ मृदा गलियारों की विस्तृत योजना बनाई गई है।
4 फरवरी, 2026 को उत्तर-पूर्व के लिए एक नई एआई (AI) आधारित मानचित्रण परियोजना पर प्रकाश डाला गया, जो उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में अपनी सटीकता के लिए जानी जाती है।
रणनीतिक समुद्री और राजनयिक मानचित्रण IAS/PCS पाठ्यक्रम का एक मुख्य हिस्सा है।
🌍 मानचित्रण सारांश तालिका (Summary Table)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| खनिज गलियारा | दुर्लभ मृदा पेटी (Rare Earth Belt) | ओडिशा से केरल तक का तटीय क्षेत्र |
| उच्च जोखिम क्षेत्र | पूर्वी खासी हिल्स | मेघालय (भूस्खलन मानचित्र) |
| समुद्री भागीदार | सेशेल्स | पश्चिमी हिंद महासागर |
| नदी परियोजना | सुबनसिरी LHE | अरुणाचल-असम सीमा |
💡 मैपिंग टिप:
खनिज संसाधनों का अध्ययन करते समय उन्हें उन राज्यों के बंदरगाहों के साथ जोड़कर देखें जहाँ से उनका निर्यात संभव है। उदाहरण के लिए, ओडिशा के दुर्लभ मृदा निक्षेपों को पारादीप बंदरगाह के साथ जोड़कर देखा जा सकता है।
भारत सेशेल्स (115-द्वीपीय द्वीपसमूह) और तंजानिया (ज़ंजीबार) के साथ समुद्री सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है, जो विक्टोरिया और तांगानिका झील की सीमा पर स्थित हैं।
अरुणाचल-असम सीमा पर स्थित, सुबनसिरी नदी (ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी) पर बनी यह परियोजना प्रतिपूरक वनीकरण को लेकर जांच के घेरे में है।
हाई-टेक विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण 13.15 मिलियन टन दुर्लभ-मृदा संसाधनों को सुरक्षित करने के लिए पूर्वी तटीय पट्टी के साथ समर्पित गलियारों का मानचित्रण किया जा रहा है।
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