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यह अध्याय “बुनकर, लोहा पिघलाने वाले और फैक्ट्री मालिक” ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीय हस्तशिल्प और उद्योगों के इतिहास, विशेष रूप से कपड़ा तथा लोहा और इस्पात उद्योगों पर केंद्रित है।
लगभग 1750 के आसपास, अंग्रेजों द्वारा बंगाल पर विजय प्राप्त करने से पहले, भारत दुनिया में सूती कपड़ों का सबसे बड़ा उत्पादक था। भारतीय कपड़े अपनी बेहतरीन गुणवत्ता और बेजोड़ कारीगरी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे।
18वीं शताब्दी की शुरुआत तक, इंग्लैंड में भारतीय कपड़ों की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि वहां के ऊन और रेशम निर्माताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, ब्रिटिश सरकार ने 1720 में ‘कैलिको अधिनियम’ पारित किया, जिसके तहत इंग्लैंड में छापेदार सूती कपड़ों (छींट) के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई। भारतीय कपड़ों से मुकाबला करने के लिए ब्रिटिश निर्माताओं ने भारतीय डिजाइनों की नकल करना शुरू किया और तकनीकी नवाचारों की तलाश की:
बुनाई का कौशल विशिष्ट समुदायों के भीतर पीढ़ियों तक हस्तांतरित किया जाता था।
ब्रिटिश औद्योगिक उत्पादन के उदय ने भारतीय बुनकरों को कई तरह से बर्बाद कर दिया:
भारत में धातु विज्ञान की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा थी, जिसका सबसे बेहतरीन उदाहरण टीपू सुल्तान की तलवार है।
19वीं शताब्दी में भारत का पारंपरिक लोहा गलाने का शिल्प निम्नलिखित कारणों से समाप्त हो गया:
‘टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी’ (TISCO) की स्थापना भारत में आधुनिक भारी उद्योग की शुरुआत थी।
निष्कर्ष: इस प्रकार, जहाँ ब्रिटिश नीतियों ने भारत के पारंपरिक कपड़ा और लोहा उद्योगों को नुकसान पहुँचाया, वहीं विश्व युद्ध की परिस्थितियों और भारतीय उद्यमियों के साहस ने आधुनिक उद्योगों की नींव रखी।
हिंदी शब्द ‘छींट’ से निकला; रंगीन फूलदार कपड़ा जिसने यूरोप में एक सनक पैदा कर दी थी।
लोहा पिघलाने वालों का एक समुदाय जिसने टाटा को दुनिया के बेहतरीन लौह अयस्क भंडार तक पहुँचाया।
चमकीले मुद्रित सिर के स्कार्फ जिन्हें ‘बांधना’ (टाई-डाई) विधि के माध्यम से तैयार किया जाता था।
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स:उपनिवेशवाद और शहर
संसद की निरंतरता और उसके सदस्यों की योग्यता व सत्यनिष्ठा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83, 84 और 102 द्वारा शासित होती है।
राज्यसभा (स्थायी सदन):
लोकसभा (अस्थायी सदन):
संसद का सदस्य (MP) चुने जाने के लिए किसी व्यक्ति के पास निम्नलिखित योग्यताएं होनी चाहिए:
यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। संविधान के अनुसार, कोई व्यक्ति संसद सदस्य होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा यदि:
निर्णय कौन लेता है? अनुच्छेद 102 के तहत अयोग्यता के प्रश्नों पर राष्ट्रपति का निर्णय अंतिम होता है। हालाँकि, निर्णय लेने से पहले राष्ट्रपति को निर्वाचन आयोग (Election Commission) की राय लेनी अनिवार्य है और वह उसी के अनुसार कार्य करेगा।
सदस्यों को दलबदल के आधार पर भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है, जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम (1985) द्वारा संविधान की ‘दसवीं अनुसूची’ में जोड़ा गया था:
निर्णय कौन लेता है? दलबदल के आधार पर अयोग्यता का निर्णय राज्यसभा के मामले में सभापति और लोकसभा के मामले में अध्यक्ष (Speaker) द्वारा लिया जाता है। 1992 में उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी कि सभापति/अध्यक्ष का यह निर्णय ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) के अधीन है।
विस्तृत सारांश तालिका
| विशेषता | राज्यसभा (Rajya Sabha) | लोकसभा (Lok Sabha) |
| प्रकृति | स्थायी (भंग नहीं हो सकती) | अस्थायी (5 वर्ष बाद भंग) |
| कार्यकाल | 6 वर्ष (RPA 1951 के तहत) | 5 वर्ष (सामान्यतः) |
| न्यूनतम आयु | 30 वर्ष | 25 वर्ष |
| अयोग्यता (अनुच्छेद 102) | राष्ट्रपति द्वारा (निर्वाचन आयोग की सलाह पर) | राष्ट्रपति द्वारा (निर्वाचन आयोग की सलाह पर) |
| दलबदल (10वीं अनुसूची) | सभापति (Chairman) द्वारा | अध्यक्ष (Speaker) द्वारा |
💡 परीक्षा के लिए टिप:
हमेशा याद रखें कि ‘अनुच्छेद 102’ (सामान्य अयोग्यता) के लिए निर्णय राष्ट्रपति लेता है, जबकि ‘दसवीं अनुसूची’ (दलबदल) के लिए निर्णय सदन का पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) लेता है। इन दोनों के अंतर को समझना बहुत जरूरी है।
अनुच्छेद 102 के तहत निर्णय राष्ट्रपति द्वारा लिए जाते हैं। चुनाव आयोग (EC) की सलाह अनिवार्य और बाध्यकारी है।
10वीं अनुसूची द्वारा शासित। लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति के पास अंतिम निर्णय लेने की शक्ति होती है।
दलबदल पर पीठासीन अधिकारी के निर्णय उच्च न्यायालय/उच्चतम न्यायालय द्वारा समीक्षा के अधीन हैं।
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (3 फ़रवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (पर्यावरण; संरक्षण; पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (शासन)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; द्विपक्षीय संबंध)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (संघवाद; केंद्र-राज्य संबंध; संवैधानिक निकाय) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (अर्थव्यवस्था)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (सामाजिक न्याय; स्वास्थ्य; न्यायपालिका) और सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 (सामाजिक मुद्दे)।
पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; रोजगार; सरकारी बजट)।
अमेरिका ने टैरिफ घटाकर 18% किया। भारत रूसी तेल से हटने पर सहमत हुआ और अमेरिकी उत्पादों की $500 बिलियन की खरीद के लिए प्रतिबद्धता जताई।
“जीडीपी में योगदान” के लिए क्षैतिज भार बढ़ाकर 10% किया गया। शहरी स्थानीय निकायों को अनुदान तीन गुना बढ़ाकर ₹23.5 लाख करोड़ किया गया।
युवाओं की NEET दर 23%-25% के उच्च स्तर पर। जीडीपी पूंजी-गहन परत द्वारा संचालित है जबकि श्रम कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों में पुनः समाहित हो रहा है।
यहाँ केंद्रीय बजट 2026-27 और ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026’ की घोषणाओं से उत्पन्न होने वाले रणनीतिक भौगोलिक अद्यतनों (Updates) का विस्तृत मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:
2 फरवरी, 2026 तक भारत का रामसर नेटवर्क आधिकारिक तौर पर 98 स्थलों तक पहुँच गया है, जो एशिया में अग्रणी देश के रूप में इसकी स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करता है।
| नया रामसर स्थल | जिला / राज्य | मुख्य विशेषताएं |
| पटना पक्षी अभयारण्य | एटा, उत्तर प्रदेश | यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण लघु आर्द्रभूमि (108.8 हेक्टेयर) है जो पक्षियों की 178 से अधिक प्रजातियों का आश्रय स्थल है; यह ‘सारस क्रेन’ (Sarus Crane) के लिए एक प्रमुख शीतकालीन आवास के रूप में कार्य करता है। |
| छारी-ढंढ (Chhari-Dhand) | कच्छ, गुजरात | यह एक मौसमी मरुस्थलीय आर्द्रभूमि है; यहाँ ‘कैराकल’ (Caracal), मरुस्थलीय लोमड़ी और धूसर भेड़िये (Grey Wolf) जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं। |
बजट 2026 ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए एक नया “संसाधन मानचित्र” (Resource Map) पेश किया है।
शहरी आर्थिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सात नए उच्च गति रेल (High-speed rail) गलियारों का मानचित्रण किया गया है।
मानचित्र पर चिह्नित किए जाने वाले 7 गलियारे:
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | वर्तमान 2026 का संदर्भ |
| आर्द्रभूमि मील का पत्थर | 98 स्थल | स्थलों की संख्या के मामले में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। |
| खनिज फोकस | दुर्लभ मृदा गलियारे | ओडिशा से केरल तक फैला 4 राज्यों का बेल्ट। |
| रणनीतिक संपर्क | वाराणसी – सिलीगुड़ी | उत्तर-पूर्व का प्रवेश द्वार, नया उच्च गति रेल मार्ग। |
| सौर विज्ञान केंद्र | पैंगोंग झील | ‘नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप’ का निर्माण स्थल। |
💡 मैपिंग टिप:
UPSC परीक्षा के दृष्टिकोण से, उच्च गति रेल गलियारों को उन औद्योगिक गलियारों (जैसे DMIC) के साथ जोड़कर देखें जिनसे वे गुजरते हैं। इससे आपको आर्थिक और परिवहन भूगोल के अंतर्संबंधों को समझने में मदद मिलेगी।
सात नए HSR गलियारों का मानचित्रण, विशेष रूप से वाराणसी–सिलीगुड़ी लिंक जो रणनीतिक रूप से ‘चिकन नेक’ को उत्तर भारत के आर्थिक केंद्रों से जोड़ता है।
उन्नत अनुसंधान के लिए पेंगोंग झील, लद्दाख के पास नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप के साथ 30-मीटर ऑप्टिकल टेलिस्कोप की स्थापना।
राखीगढ़ी (HR), धोलावीरा (GJ) और लेह पैलेस सहित 15 स्थलों का उन्नयन ताकि पर्यटन को स्थानिक इतिहास के साथ एकीकृत किया जा सके।
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