यह अध्याय “नगर, व्यापारी और शिल्पीजन” मध्यकालीन भारत के विभिन्न प्रकार के शहरों, व्यापार के जीवंत नेटवर्क और शिल्प उत्पादन के केंद्रों की व्याख्या करता है।

मध्यकालीन नगर अक्सर एक साथ कई कार्य करते थे, जैसे वे प्रशासनिक, धार्मिक और आर्थिक केंद्र हो सकते थे।

  • प्रशासनिक केंद्र: तंजावुर जैसे नगर, जो चोलों की राजधानी थी, शासन के मुख्य केंद्र थे। यहाँ राजा आदेश जारी करते थे और अधिकारी राज्य का प्रबंधन करते थे।
  • मंदिर नगर: ये तीर्थयात्रा और धार्मिक गतिविधियों के केंद्र थे। उदाहरण के लिए—तंजावुर (राजराजेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध) और मदुरै।
  • वाणिज्यिक नगर और बंदरगाह: ये व्यापार और वाणिज्य पर केंद्रित थे। सूरत, हम्पी और मसूलीपट्टनम इसके प्रमुख उदाहरण थे।

मंदिर मध्यकालीन अर्थव्यवस्था और समाज के केंद्र में थे।

  • आर्थिक केंद्र: शासक अपनी भक्ति प्रदर्शित करने के लिए मंदिर बनवाते थे और उन्हें भूमि तथा धन दान करते थे। इससे प्राप्त धन का उपयोग भव्य अनुष्ठानों और व्यापार में किया जाता था।
  • शहरीकरण: मंदिरों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पुजारी, कामगार और व्यापारी मंदिरों के पास बस गए, जिससे ‘मंदिर नगरों’ का विकास हुआ।
  • तीर्थ केंद्र: उत्तर प्रदेश में वृंदावन और तमिलनाडु में तिरुवनमलाई जैसे स्थान भी धीरे-धीरे व्यस्त नगरों के रूप में विकसित हुए।

आठवीं शताब्दी से उपमहाद्वीप में कई छोटे नगरों का उदय हुआ, जो संभवतः बड़े गाँवों से निकले थे।

  • मंडपिका: ये वे बाज़ार थे (जिन्हें बाद में ‘मंडी’ कहा गया) जहाँ आस-पास के गाँव के लोग अपनी उपज बेचने लाते थे।
  • हट्ट: ये बाज़ार की गलियाँ थीं (जिन्हें बाद में ‘हाट’ कहा गया) जहाँ दुकानों की कतारें होती थीं।
  • शिल्पियों के मोहल्ले: कुम्हारों, तेल निकालने वालों और लोहारों जैसे विभिन्न शिल्पकारों के लिए अलग-अलग गलियाँ निर्धारित थीं।

व्यापार विभिन्न समूहों द्वारा किया जाता था, जिनमें स्थानीय फेरीवालों से लेकर शक्तिशाली व्यापारी संघ (Guilds) शामिल थे।

  • काफिले और संघ: अपने हितों की रक्षा के लिए व्यापारी काफिलों में यात्रा करते थे और संघ (गिलड्स) बनाते थे। दक्षिण भारत में ‘मणिग्रामम्’ और ‘नानादेशी’ सबसे प्रसिद्ध व्यापारिक संघ थे।
  • वैश्विक संपर्क: चेट्टियार और मारवाड़ी ओसवाल जैसे व्यापारियों ने लाल सागर, फारस की खाड़ी, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के साथ व्यापक व्यापार किया।
  • प्रमुख वस्तुएं: भारत मसालों, सूती कपड़ों और नील का निर्यात करता था, जबकि सोने, हाथीदांत और घोड़ों का आयात किया जाता था।

मध्यकालीन नगर विशिष्ट शिल्प उत्पादन के लिए प्रसिद्ध थे।

  • बिदरी: बीदर के शिल्पकार तांबे और चाँदी में जड़ाई के काम के लिए इतने प्रसिद्ध थे कि इस शिल्प का नाम ही ‘बिदरी’ पड़ गया।
  • विश्वकर्मा समुदाय: इसमें सुनार, कशेरे (लोहार), बढ़ई और राजमिस्त्री शामिल थे। ये मंदिरों और महलों के निर्माण के लिए अनिवार्य थे।
  • वस्त्र उत्पादन: सालियार या कैक्कोलार जैसे बुनकर समुदाय समृद्ध हो गए और उन्होंने मंदिरों को भारी दान दिया। कपास को साफ करना, कातना और रंगना भी स्वतंत्र शिल्प बन गए थे।
  • हम्पी: कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों की घाटी में स्थित यह विजयनगर साम्राज्य का केंद्र था। यह अपनी विशिष्ट किलेबंदी और भव्य वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध था। 1565 में दक्कनी सुल्तानों द्वारा विजयनगर की हार के बाद इसका पतन हो गया।
  • सूरत: इसे “पश्चिम का प्रवेश द्वार” कहा जाता था क्योंकि यहाँ से मक्का के लिए जहाज रवाना होते थे। यह जरी के काम (गोल्ड लेस) वाले वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध था।
  • मसूलीपट्टनम (मछलीपट्टनम): कृष्णा नदी के डेल्टा पर स्थित यह नगर 17वीं शताब्दी में डच, ब्रिटिश और फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनियों के बीच व्यापारिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन गया।

16वीं और 17वीं शताब्दी में यूरोपीय कंपनियों के आगमन ने व्यापार का परिदृश्य बदल दिया।

  • बंदरगाहों की ओर झुकाव: व्यापार बंबई (मुंबई), कलकत्ता (कोलकाता) और मद्रास (चेन्नई) जैसे यूरोपीय शहरों की ओर स्थानांतरित हो गया।
  • ब्लैक टाउंस: यूरोपीय लोगों ने इन शहरों में किलेबंदी की और भारतीय व्यापारियों व शिल्पकारों को ‘ब्लैक टाउंस’ (भारतीयों के लिए सुरक्षित क्षेत्र) में रहने के लिए मजबूर किया।
  • स्वतंत्रता की हानि: भारतीय बुनकर अब यूरोपीय एजेंटों से पेशगी (Advances) लेकर काम करने लगे, जिससे उनकी अपनी पसंद के डिजाइन बनाने की रचनात्मक स्वतंत्रता खत्म हो गई।
  1. मंडपिका: मंडी।
  2. हट्ट: हाट (बाजार)।
  3. गिल्ड (Guild): व्यापारियों का संघ।
  4. बिदरी: चांदी की जड़ाई वाला शिल्प।
  5. एम्पोरियम (Emporium): एक ऐसा स्थान जहाँ विभिन्न प्रकार की वस्तुएं खरीदी और बेची जाती हैं।

🏺 नगर, व्यापारी और शिल्पीजन

🏙️ शहरी केंद्र
मध्यकालीन नगर बहुआयामी थे: प्रशासनिक (तंजावुर), मंदिर नगर (मदुरै) या पत्तन (सूरत)। मंदिर नगरों ने शहरीकरण को गति दी क्योंकि तीर्थयात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कारीगर और व्यापारी वहां बस गए।
🤝 बाज़ार और संघ
गाँव वाले अपना सामान मण्डपिका (मंडी) में बेचते थे और हट्ट (हाट) में खरीदारी करते थे। बड़े व्यापारियों ने दूर-दराज के व्यापार के लिए मणिग्रामम और नानादेशी जैसे शक्तिशाली ‘गिल्ड’ (संघ) बनाए।
⚒️ विशिष्ट हस्तशिल्प
बीदर के शिल्पकारों की चांदी की जड़ाई इतनी प्रसिद्ध थी कि इसे बीदरी कहा जाने लगा। विश्वकर्मा समुदाय मंदिरों का निर्माण करता था, जबकि सलियार जैसे बुनकर संपन्न और प्रभावशाली दानदाता बन गए।
⚓ ऐतिहासिक पत्तन
हम्पी विजयनगर का वास्तुशिल्प गौरव था। सूरत ज़री के कपड़ों के लिए प्रसिद्ध “पश्चिम का द्वार” था। मसूलीपट्टनम कृष्णा डेल्टा पर स्थित एक महत्वपूर्ण और विवादित बंदरगाह था।
यूरोपीय प्रभाव 17वीं सदी में व्यापार यूरोपीय कंपनियों के नियंत्रण वाले ‘ब्लैक टाउन्स’ (बंबई, मद्रास, कलकत्ता) की ओर बढ़ गया, जहाँ भारतीय बुनकर अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता खो बैठे।
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कक्षा-7 इतिहास अध्याय-6 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: नगर, व्यापारी और शिल्पीजन

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राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों (DPSP) के निष्कर्ष के तौर पर, अनुच्छेद 46 से 51 तक हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान से लेकर पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शांति की प्राप्ति तक, व्यापक जिम्मेदारियों को समाहित करते हैं। इन्हें अक्सर गांधीवादी, समाजवादी और उदार-बौद्धिक सिद्धांतों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

उत्थान, पर्यावरण और वैश्विक शांति: अनुच्छेद 46–51
ये अंतिम अनुच्छेद राष्ट्रीय समाज कल्याण से लेकर एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की भूमिका तक के बदलाव को दर्शाते हैं।

यह अनुच्छेद “सामाजिक न्याय” और शोषण को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश है।

  • शासनादेश: राज्य जनता के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को विशेष सावधानी के साथ बढ़ावा देगा।
  • संरक्षण: यह राज्य को इन समुदायों को सामाजिक अन्याय और सभी प्रकार के शोषण से बचाने का निर्देश देता है।
  • कार्यान्वयन: यह लेख विभिन्न आरक्षण नीतियों और SC/ST छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक/पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का आधार है।

यह अनुच्छेद सार्वजनिक स्वास्थ्य को सामाजिक नैतिकता से जोड़ता है।

  • शासनादेश: राज्य अपने लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाने और सार्वजनिक स्वास्थ्य के सुधार को अपने प्राथमिक कर्तव्यों में मानेगा।
  • निषेध (Prohibition): विशेष रूप से, राज्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेय और दवाओं (औषधीय प्रयोजनों को छोड़कर) के सेवन पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास करेगा।
  • कार्यान्वयन: बिहार और गुजरात जैसे राज्यों ने शराब बंदी को सही ठहराने के लिए इसी अनुच्छेद का सहारा लिया है। ‘पोषण अभियान’ जैसे राष्ट्रीय मिशन भी यहीं से प्रेरित हैं।
  • शासनादेश: राज्य कृषि और पशुपालन को आधुनिक और वैज्ञानिक प्रणालियों से संगठित करने का प्रयास करेगा।
  • पशु संरक्षण: यह राज्य को नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए कदम उठाने और गायों, बछड़ों तथा अन्य दुधारू और वाहक पशुओं के वध पर रोक लगाने का निर्देश देता है।
  • कार्यान्वयन: गोहत्या के संबंध में विभिन्न राज्यों के कानून और “हरित क्रांति” की शुरुआत इसी निर्देश के अनुरूप है।
  • उत्पत्ति: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा जोड़ा गया।
  • शासनादेश: राज्य पर्यावरण के संरक्षण और सुधार का तथा देश के वनों और वन्यजीवों की रक्षा करने का प्रयास करेगा।
  • कार्यान्वयन: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (1986) इसी निर्देश को पूरा करने के लिए बनाए गए थे।
  • शासनादेश: संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्व के घोषित किए गए प्रत्येक स्मारक, स्थान या कलात्मक या ऐतिहासिक रुचि की वस्तु को विरूपण, विनाश, हटाने या निर्यात से बचाना राज्य का दायित्व होगा।
  • कार्यान्वयन: इसका प्रबंधन मुख्य रूप से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किया जाता है।
  • शासनादेश: राज्य की सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने के लिए राज्य कदम उठाएगा।
  • उद्देश्य: न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और कार्यपालिका को कानूनी परिणामों को प्रभावित करने से रोकना।
  • कार्यान्वयन: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 द्वारा इसे पूर्ण रूप से लागू किया गया।

यह अनुच्छेद भारत की विदेश नीति के लक्ष्यों को निर्धारित करता है। राज्य निम्नलिखित के लिए प्रयास करेगा:

  1. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना।
  2. राष्ट्रों के बीच न्यायसंगत और सम्मानजनक संबंध बनाए रखना।
  3. अंतरराष्ट्रीय कानून और संधि दायित्वों के प्रति सम्मान बढ़ाना।
  4. अंतरराष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता (Arbitration) द्वारा निपटाने के लिए प्रोत्साहित करना।
अनुच्छेदश्रेणीमुख्य शब्दकार्यान्वयन का उदाहरण
46समाजवादीSC/ST के हितआरक्षण / छात्रवृत्ति
47गांधीवादीजन स्वास्थ्य और नशाबंदीमिड-डे मील / शराब बंदी
48गांधीवादीवैज्ञानिक कृषिपशुपालन योजनाएं
48Aउदारवादीपर्यावरण और वन्यजीववन संरक्षण अधिनियम
49उदारवादीस्मारक संरक्षणASI द्वारा संरक्षण
50उदारवादीशक्तियों का पृथक्करणस्वतंत्र न्यायपालिका
51उदारवादीअंतरराष्ट्रीय शांति“पंचशील” / विदेश नीति

🌍 उत्थान और वैश्विक शांति

✊ अनु. 46: SC, ST और कमजोर वर्ग
राज्य समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से SC और ST के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देगा और उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाएगा।
🍎 अनु. 47: स्वास्थ्य और निषेध
लोगों के पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाना राज्य का कर्तव्य है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेय और दवाओं पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश देता है (जैसे बिहार/गुजरात में शराबबंदी)।
🐾 अनु. 48 और 48A: पर्यावरण
48: कृषि का वैज्ञानिक संगठन और गोवध पर रोक48A: (42वां संशोधन) वनों, वन्यजीवों की रक्षा और पर्यावरण में सुधार करना।
🏛️ अनु. 49 और 50: राजकीय ढांचा
49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों और स्थानों का संरक्षण। 50: न्यायिक स्वतंत्रता के लिए राज्य की सार्वजनिक सेवाओं में न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना।
🕊️ अनु. 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति
भारत की विदेश नीति का संवैधानिक आधार। अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंध बनाए रखना और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति सम्मान बढ़ाना।
अनुच्छेद श्रेणी मुख्य विषय कार्यान्वयन
46समाजवादीSC/ST हितआरक्षण / छात्रवृत्ति
47गांधीवादीसार्वजनिक स्वास्थ्यपोषण अभियान / शराबबंदी
48Aउदारवादीपर्यावरणवन्यजीव संरक्षण अधिनियम
50उदारवादीन्यायिक स्वतंत्रताCrPC (1973) द्वारा पृथक्करण
51उदारवादीवैश्विक शांतिपंचशील / अंतर्राष्ट्रीय संधि
विशेष तथ्य अनुच्छेद 51 अद्वितीय है क्योंकि यह राज्य को अपनी सीमाओं से परे देखने का निर्देश देता है, जो भारत को विश्व स्तर पर न्यायपूर्ण संबंधों के समर्थक के रूप में स्थापित करता है।

यहाँ द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (21 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (चुनावी सुधार; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)।

  • संदर्भ: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया और इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आलोचनात्मक विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • आक्रामक कटौती: तमिलनाडु जैसे राज्यों में कुछ बूथों पर इतनी आक्रामक तरीके से नाम हटाए गए हैं कि 2024 के वास्तविक मतदाताओं के नाम भी सूची से गायब हो गए हैं।
    • लिंग भेद: बिहार के आंकड़ों में पुरुषों की तुलना में महिला मतदाताओं के नाम असमान रूप से अधिक हटाए गए हैं, जो प्रक्रिया की खामियों को दर्शाता है।
    • आंकड़ों में विसंगति: उत्तर प्रदेश में, राज्य चुनाव आयोग द्वारा गिने गए केवल ग्रामीण मतदाताओं की संख्या, ECI द्वारा पूरे राज्य के लिए जारी किए गए ड्राफ्ट रोल की संख्या से अधिक है।
    • तर्कहीन पुन: पंजीकरण: ECI का यह कहना कि गलत तरीके से हटाए गए मतदाता “नए” (फॉर्म 6) के रूप में पंजीकरण करें, मूल गलतियों की जांच को रोकता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “चुनावी अखंडता”, “सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार” और “निर्वाचन आयोग की भूमिका”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • न्यायिक हस्तक्षेप: पश्चिम बंगाल और बिहार में लाखों लोगों को मिल रहे ‘वेरिफिकेशन नोटिस’ के तनाव को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को नए दिशा-निर्देश जारी करने पड़े हैं।
    • सिस्टम की खराबी: शिकायतें मुख्य रूप से 2002 की ‘मैपिंग लिस्ट’ और एड-हॉक सॉफ्टवेयर की त्रुटियों से उत्पन्न हुई हैं, जिसने वास्तविक नागरिकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; द्विपक्षीय संबंध; भारत के हितों पर क्षेत्रीय राजनीति का प्रभाव)।

  • संदर्भ: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MbZ) की दिल्ली यात्रा और भारत-UAE रणनीतिक रक्षा साझेदारी की घोषणा।
  • मुख्य बिंदु:
    • रक्षा मील का पत्थर: दोनों देश एक “रणनीतिक रक्षा साझेदारी” के लिए रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जो अपनी तरह का पहला समझौता है।
    • आर्थिक समझौते: द्विपक्षीय व्यापार को $200 बिलियन तक दोगुना करने की प्रतिबद्धता, $3 बिलियन का LNG सौदा और गुजरात में भारी निवेश।
    • क्षेत्रीय तनाव: यह यात्रा खाड़ी में UAE और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सत्ता संघर्ष (विशेष रूप से सूडान को लेकर) के बीच हुई है।
    • कनेक्टिविटी जोखिम: क्षेत्रीय अस्थिरता भारत की चाबहार पोर्ट और ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ (IMEC) जैसी योजनाओं को खतरे में डालती है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “पश्चिम एशिया भू-राजनीति”, “रणनीतिक स्वायत्तता” और “ऊर्जा सुरक्षा”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • प्रवासी भारतीय: खाड़ी क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता भारत की घरेलू प्राथमिकता बन जाती है।
    • संतुलन की कला: प्रस्तावित रक्षा समझौता अन्य क्षेत्रीय गठबंधनों के खिलाफ नहीं दिखना चाहिए, इसलिए भारत को बहुत सावधानी से संतुलन बनाना होगा।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव; द्विपक्षीय संबंध)।

  • संदर्भ: एम.के. नारायणन द्वारा ट्रम्प प्रशासन के तहत ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ (Monroe Doctrine) के पुनरुद्धार और इसके वैश्विक प्रभावों का विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • मादुरो ऑपरेशन: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को आधुनिक “मोनरो डॉक्ट्रिन” के रूप में देखा जा रहा है।
    • संप्रभुता का उल्लंघन: यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करने की रणनीति है।
    • वैश्विक जोखिम: विश्व स्तर पर विरोध की कमी यह संकेत देती है कि 1945 के बाद की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दम तोड़ रही है, जिससे चीन या रूस जैसे देशों को भी ऐसी एकपक्षीय कार्रवाइयों के लिए बढ़ावा मिल सकता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “वैश्विक सुरक्षा रुझान”, “भारत-अमेरिका संबंध” और “रणनीतिक स्थिरता”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भारत पर प्रभाव: भारत एक दोराहे पर खड़ा है; अधिकांश मामलों में अमेरिका का साथ देने के बावजूद, उसे रूसी तेल आयात करने पर ट्रम्प की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।
    • क्षेत्रीय अलगाव: भारत-अमेरिका संबंधों में बढ़ती “ठंडक” के कारण भारत पश्चिम एशिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अलग-थलग पड़ सकता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; बुनियादी ढांचा; ऊर्जा संक्रमण; पर्यावरण)।

  • संदर्भ: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर वैश्विक बदलाव तांबे की आपूर्ति में भारी कमी के कारण एक संरचनात्मक बाधा का सामना कर रहा है।
  • मुख्य बिंदु:
    • बढ़ती मांग: वैश्विक EV बिक्री 2015 में 5.5 लाख से बढ़कर 2025 में 2 करोड़ हो गई, जिससे तांबे की खपत 27.5 हजार टन से बढ़कर 12.8 करोड़ टन से अधिक हो गई है।
    • संसाधन घाटा: 2026 तक मांग 3 करोड़ टन तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि आपूर्ति केवल 2.8 करोड़ टन रहने की संभावना है।
    • आपूर्ति बाधाएं: अयस्क की गिरती गुणवत्ता, पर्यावरण संबंधी विरोध और नई खदानों के विकास में लगने वाला लंबा समय (10-15 वर्ष) मुख्य कारण हैं।
    • चीन का दबदबा: चीन वैश्विक बैटरी सेल उत्पादन के 70% हिस्से को नियंत्रित करता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “ऊर्जा संक्रमण रणनीति”, “महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा” और “औद्योगिक नीति”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • संरचनात्मक बाधा: इलेक्ट्रिक वाहनों को पारंपरिक वाहनों की तुलना में चार से पांच गुना अधिक तांबे की आवश्यकता होती है, और वर्तमान में इसका कोई व्यवहार्य विकल्प नहीं है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (भारत से जुड़े समूह और विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव)।

  • संदर्भ: अमेरिका के नेतृत्व वाली “पैक्स सिलिका” पहल का विश्लेषण, जिसका उद्देश्य वैश्विक सेमीकंडक्टर और AI आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करना है।
  • मुख्य बिंदु:
    • पहल का लक्ष्य: जबरन निर्भरता को कम करना और समान विचारधारा वाले देशों के बीच विश्वसनीय डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना।
    • भू-राजनीतिक प्रतिक्रिया: यह पहल दुर्लभ मृदा तत्वों (REEs) में चीन के प्रभुत्व और उसके द्वारा संसाधनों को राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने की प्रतिक्रिया है।
    • भारत का निमंत्रण: शुरुआती शिखर सम्मेलन में न बुलाए जाने के बाद, अब अमेरिका ने भारत को जल्द ही इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की बात कही है।
    • भारत की ताकत: भारत के पास मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा, तेजी से बढ़ता AI बाजार और इंजीनियरों का एक विशाल पूल है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “तकनीकी संप्रभुता”, “महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा” और “भारत की बहु-संरेखण (Multi-alignment) रणनीति”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • दोहरी आपूर्ति श्रृंखला: भविष्य में दो प्रमुख आपूर्ति श्रृंखलाएं उभर सकती हैं—एक चीन के नेतृत्व में और दूसरी ‘पैक्स सिलिका’ के नेतृत्व में। देशों को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सावधानी से चयन करना होगा।
    • घरेलू हितों की रक्षा: भारत को अपने उभरते सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए सब्सिडी और नियमों में विशेष छूट की आवश्यकता होगी, जो वाशिंगटन की वर्तमान नीतियों के साथ टकरा सकता है।

संपादकीय विश्लेषण

21 जनवरी, 2026
GS-2 राजव्यवस्था
⚖️ चुनावी SIR: विलोपन का जाल
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में व्यापक विसंगतियां: बिहार में महिलाओं के नाम हटाने का अनुपात असंतुलित है, जबकि यूपी का ग्रामीण डेटा चुनाव आयोग के ड्राफ्ट रोल का विरोध करता है। आलोचना: गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 (नया पंजीकरण) पर जोर देना त्रुटियों के ऑडिट को रोकता है।
GS-2 अंत. संबंध
🛡️ भारत-यूएई: रणनीतिक रक्षा मील का पत्थर
रणनीतिक रक्षा साझेदारी के ढांचे की घोषणा—खाड़ी क्षेत्र में भारत के लिए पहली ऐसी पहल। आर्थिक लक्ष्य: द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर $200 बिलियन तक पहुँचाना। चुनौती: ऊर्जा हितों और 1 करोड़ प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सऊदी-यूएई मतभेदों के बीच संतुलन बनाना।
GS-2 अंत. संबंध
🌎 “डोनरो” (Donroe) सिद्धांत और संप्रभुता
वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की हिरासत मुनरो सिद्धांत (Monroe Doctrine) के पुनरुत्थान का संकेत है। प्रभाव: 1945 के बाद की अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा। भारत के लिए परिणाम: संघर्ष क्षेत्रों में सापेक्ष रणनीतिक अलगाव और रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी दबाव में वृद्धि।
GS-3 अर्थव्यवस्था
🔋 ईवी तांबा संकट (Copper Crunch)
इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को पारंपरिक वाहनों की तुलना में 4-5 गुना अधिक तांबे की आवश्यकता होती है। कमी: 30 मिलियन टन मांग के मुकाबले आपूर्ति केवल 28 मिलियन टन रहने का अनुमान। दबदबा: चीन वैश्विक बैटरी सेल उत्पादन के 70% को नियंत्रित करता है, जिससे वह हरित संक्रमण पर नियंत्रण रखता है।
GS-2 अंत. संबंध
💻 पैक्स सिलिका: हाई-टेक संप्रभुता
सेमीकंडक्टर और एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाली पहल। चीन के दुर्लभ मृदा तत्वों (REE) पर वर्चस्व का जवाब। अवसर: भारत के इंजीनियरों का विशाल पूल और बदलते वीजा नियमों के कारण घर लौट रहे विशेषज्ञ भारत को विश्वसनीय डिजिटल हब के रूप में स्थापित कर सकते हैं।
त्वरित मूल्यवर्धन (Value Addition):फॉर्म 6: मतदाता सूची में नए पंजीकरण के लिए उपयोग किया जाता है। • पैक्स सिलिका (Pax Silica): रणनीतिक हाई-टेक रिस्क-कम करने वाला क्लब। • मुनरो सिद्धांत: 1823 की अमेरिकी नीति जो अमेरिका में यूरोपीय उपनिवेशवाद का विरोध करती थी।

यहाँ रणनीतिक हिमनदों (Glaciers)ऊँची चोटियों और हिमनद झीलों का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है, जो उत्तर भारत के पर्यावरणीय और सुरक्षा मानचित्रण के लिए महत्वपूर्ण हैं:

हिमनद भारत के “जल मीनार” (Water Towers) हैं, जो सदानीरा (बारहमासी) नदी प्रणालियों को पोषित करते हैं। मानचित्र पर ये मुख्य रूप से ट्रांस-हिमालयी और वृहद हिमालयी क्षेत्रों में केंद्रित हैं।

  • सियाचिन हिमनद (कराकोरम श्रेणी): भारत का सबसे लंबा हिमनद (लगभग 76 किमी)। यह नुब्रा नदी का स्रोत है।
  • गंगोत्री हिमनद (उत्तराखंड): हिमालय के सबसे बड़े हिमनदों में से एक; गंगा (भागीरथी) का प्राथमिक स्रोत।
  • यमुनोत्री हिमनद (उत्तराखंड): बंदरपूंछ चोटी पर स्थित; यमुना नदी का स्रोत।
  • जेमू हिमनद (सिक्किम): पूर्वी हिमालय का सबसे बड़ा हिमनद, जो कंचनजंगा के आधार पर स्थित है; यह तीस्ता नदी को जल प्रदान करता है।
  • बियाफो और बाल्टोरो हिमनद: कराकोरम क्षेत्र में स्थित; सिंधु नदी प्रणाली के जल स्तर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।

सटीक मानचित्रण के लिए यह समझना आवश्यक है कि ये चोटियाँ किस पर्वत श्रेणी का हिस्सा हैं।

चोटीऊँचाई (लगभग)श्रेणी/क्षेत्रमहत्व
K2 (गॉडविन-ऑस्टिन)8,611 मीटरकराकोरम (लद्दाख)भारत की सबसे ऊँची चोटी (और दुनिया की दूसरी)।
कंचनजंगा8,586 मीटरपूर्वी हिमालय (सिक्किम)भारत में स्थित हिमालय की सबसे ऊँची चोटी।
नंदा देवी7,816 मीटरगढ़वाल हिमालय (UK)पूरी तरह से भारत के भीतर स्थित सबसे ऊँची चोटी।
नामचा बरवा7,782 मीटरपूर्वी हिमालयवह स्थान जहाँ से ब्रह्मपुत्र भारत में “यू-टर्न” लेती है।
अनाइमुडी2,695 मीटरपश्चिमी घाट (केरल)प्रायद्वीपीय भारत की सबसे ऊँची चोटी।

ये झीलें पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हैं और अक्सर रणनीतिक सीमा चिह्नों के रूप में कार्य करती हैं।

  • पैंगोंग त्सो (लद्दाख): एक उच्च-ऊँचाई वाली अंतःस्थलीय (Endorheic) झील, जो अपने रंग बदलते पानी के लिए प्रसिद्ध है; यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) द्वारा विभाजित है।
  • त्सो मोरीरी (लद्दाख): ताजे पानी की एक बड़ी उच्च-ऊँचाई वाली झील और एक घोषित रामसर स्थल
  • गुरुडोंगमार झील (सिक्किम): दुनिया की सबसे ऊँची झीलों में से एक; बौद्धों, सिखों और हिंदुओं के लिए पवित्र।
  • रूपकुंड (उत्तराखंड): इसे “कंकाल झील” के रूप में जाना जाता है, जो त्रिशूल पर्वत समूह की गोद में स्थित है।
  • चोलामू झील (सिक्किम): इसे अक्सर भारत की सबसे ऊँची झील माना जाता है, जो तिब्बती सीमा के पास स्थित है।
विशेषतामानचित्रण मुख्य बिंदुमुख्य स्थान
सबसे लंबा हिमनदसियाचिननुब्रा घाटी, लद्दाख
तीस्ता का स्रोतजेमू हिमनदउत्तरी सिक्किम
दक्षिण भारत की सर्वोच्च चोटीअनाइमुडीइराविकुलम, केरल
रणनीतिक जल निकायपैंगोंग त्सोपूर्वी लद्दाख

मानचित्र पर सियाचिन की स्थिति को ‘NJ9842’ बिंदु के उत्तर में देखें। झीलों को याद रखने के लिए उन्हें उनके संबंधित राज्यों (जैसे ‘त्सो’ शब्द वाली झीलें अक्सर लद्दाख/तिब्बत क्षेत्र में होती हैं) के साथ जोड़ें।

हिमशिखरों की दुनिया

हिमंडल (Cryosphere)
❄️ रणनीतिक हिमनद
भारत के “जल मीनारों” में सियाचिन (76 किमी, नुब्रा का स्रोत) और गंगोत्री (भागीरथी का स्रोत) प्रमुख हैं। पूर्व में, कंचनजंगा के आधार पर स्थित जेमू हिमनद तीस्ता नदी को जल प्रदान करता है।
अभ्यास: काराकोरम श्रेणी में सियाचिन हिमनद को खोजें और उसके नीचे स्थित रणनीतिक नुब्रा घाटी की पहचान करें।
स्थलाकृति
🏔️ उच्च तुंगता शिखर
काराकोरम के विशालकाय K2 से लेकर पूर्णतः भारतीय क्षेत्र में स्थित नंदा देवी तक। नामचा बरवा जैसे रणनीतिक शिखर उस स्थान को चिह्नित करते हैं जहाँ से ब्रह्मपुत्र एक विशाल मोड़ लेकर भारत में प्रवेश करती है।
शिखर ऊँचाई श्रेणी/क्षेत्र विशेष महत्व
K28,611 मी.काराकोरम (लद्दाख)भारत का सर्वोच्च बिंदु
कंचनजंगा8,586 मी.पूर्वी हिमालयभारत में स्थित सबसे ऊँचा हिमालयी शिखर
नंदा देवी7,816 मी.गढ़वाल (उत्तराखंड)पूरी तरह से भारतीय सीमा के भीतर स्थित
अनाइमुडी2,695 मी.पश्चिमी घाट (केरल)प्रायद्वीपीय भारत का सर्वोच्च शिखर
झील विज्ञान
💧 प्रहरी झीलें
पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पैंगोंग त्सो (वास्तविक नियंत्रण रेखा द्वारा विभाजित) और गुरुडोंगमार (सिक्किम) जैसी झीलें उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सीमा प्रहरी और जैविक सूचक का कार्य करती हैं।
अभ्यास: पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो के पानी से होकर गुजरने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को मानचित्र पर ट्रेस करें।
मैपिंग सारांश चेकलिस्ट
विशेषता मैपिंग हाइलाइट प्रमुख स्थान
सबसे लंबा हिमनदसियाचिन हिमनदनुब्रा घाटी, लद्दाख
तीस्ता का स्रोतजेमू हिमनदउत्तरी सिक्किम
दक्षिण का सर्वोच्चअनाइमुडीअनामलाई पहाड़ियाँ, केरल
रणनीतिक जल निकायपैंगोंग त्सोपूर्वी लद्दाख (सीमा क्षेत्र)

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