IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 22 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 7 Chapter-7 (जनजातियाँ, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय)
यह अध्याय “जनजातियाँ, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय” उन समाजों के जीवन की पड़ताल करता है जो वर्ण-आधारित सामाजिक व्यवस्था से बाहर थे और मध्यकाल के दौरान बसे हुए राज्यों के साथ उनके संबंधों का वर्णन करता है।
1. बड़े शहरों से परे: जनजातीय समाज
उपमहाद्वीप के कई समाज ब्राह्मणों द्वारा निर्धारित सामाजिक नियमों और कर्मकांडों का पालन नहीं करते थे।
- परिभाषा: इन समाजों को अक्सर ‘जनजाति’ कहा जाता है।
- सामाजिक संरचना: जनजातीय सदस्य नातेदारी (Kinship) के बंधनों से जुड़े होते थे। उनमें अमीर-गरीब का कोई बड़ा भेदभाव नहीं था।
- आजीविका: कई जनजातियाँ खेती से अपनी आजीविका प्राप्त करती थीं। कुछ शिकारी-संग्राहक या पशुपालक थे। वे अपने निवास क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का पूरा उपयोग करते थे।
- क्षेत्र: जनजातियाँ अक्सर जमीन और चरागाहों पर संयुक्त रूप से नियंत्रण रखती थीं और अपने नियमों के अनुसार उन्हें परिवारों के बीच बांटती थीं।
- संपर्क: जनजातीय और जाति-आधारित समाजों के बीच निरंतर संघर्ष और निर्भरता का संबंध था। इस रिश्ते ने धीरे-धीरे दोनों प्रकार के समाजों को बदलने का काम किया।
2. जनजातीय लोग कहाँ रहते थे?
उपमहाद्वीप के लगभग हर क्षेत्र में जनजातीय समुदाय पाए जाते थे।
- शक्तिशाली जनजातियाँ: पंजाब में 13वीं और 14वीं शताब्दी में खोखर जनजाति प्रभावशाली थी; बाद में गक्खर अधिक महत्वपूर्ण हो गए।
- मुल्तान और सिंध: यहाँ लंगाह और अरघुन जनजातियों का प्रभुत्व था।
- उत्तर-पश्चिम: बलूची एक बड़ी और शक्तिशाली जनजाति थी, जो छोटे-छोटे कुलों में विभाजित थी।
- उत्तर-पूर्व: इस सुदूर क्षेत्र में नागा, अहोम और कई अन्य जनजातियाँ रहती थीं।
- मध्य और पश्चिमी भारत: भील इन क्षेत्रों में फैले हुए थे। गोंड जनजाति वर्तमान छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में पाई जाती थी।
3. खानाबदोश और घूमने वाले लोग कैसे रहते थे?
खानाबदोश पशुपालक अपने जानवरों के साथ लंबी दूरी तय करते थे।
- विनिमय (Exchange): वे दूध और अन्य पशु उत्पादों पर जीवित रहते थे। वे खेती करने वाले लोगों के साथ अनाज, कपड़े और बर्तनों के बदले घी, ऊन आदि का विनिमय करते थे।
- बंजारे: वे सबसे महत्वपूर्ण व्यापारी-खानाबदोश थे। उनके कारवां को ‘तांडा’ कहा जाता था। सुल्तान अलाउद्दीन ख़लजी नगर के बाज़ारों तक अनाज पहुँचाने के लिए बंजारों का उपयोग करते थे। सम्राट जहाँगीर ने लिखा है कि बंजारे विभिन्न क्षेत्रों से अपने बैलों पर अनाज ढोकर शहरों में बेचते थे।
- भ्रमणशील समूह: शिल्पकार और नर्तक जैसे अन्य समूह भी एक गाँव से दूसरे गाँव अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए यात्रा करते थे।
4. बदलता समाज: नई जातियाँ और श्रेणियाँ
जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था और समाज की ज़रूरतें बढ़ीं, नए कौशल वाले लोगों की आवश्यकता हुई।
- जातियाँ: वर्णों के भीतर छोटी-छोटी ‘जातियाँ’ उभरीं। उदाहरण के लिए, ब्राह्मणों के बीच नई जातियाँ दिखाई दीं।
- विशिष्ट समूह: कई जनजातियों को जाति-आधारित समाज में शामिल किया गया और उन्हें जातियों का दर्जा दिया गया। लोहार, बढ़ई और राजमिस्त्री जैसे विशिष्ट शिल्पकारों को भी ब्राह्मणों द्वारा अलग जातियों के रूप में मान्यता दी गई।
- राजपूत कुल: क्षत्रियों के बीच नए राजपूत कुल (जैसे—हुण, चंदेल, चालुक्य) शक्तिशाली हुए। उन्होंने धीरे-धीरे पुराने शासकों की जगह ले ली और शक्तिशाली राज्यों की स्थापना की।
5. सूक्ष्म निरीक्षण: गोंड और अहोम
यह अध्याय दो प्रमुख जनजातीय समूहों के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालता है जिन्होंने अपने राज्य स्थापित किए।
गोंड (The Gonds)
- निवास: वे ‘गोंडवाना’ नामक विशाल वन क्षेत्र में रहते थे और स्थानांतरीय कृषि (Shifting cultivation) करते थे।
- प्रशासन: गोंड राज्य ‘गढ़ों’ में विभाजित था। प्रत्येक गढ़ पर एक विशेष गोंड कुल का नियंत्रण होता था। गढ़ आगे ‘चैरासी’ (84 गाँवों की इकाई) में विभाजित थे, जो फिर ‘बरहोत’ (12 गाँवों की इकाई) में बंटे थे।
- सामाजिक परिवर्तन: बड़े राज्यों के उदय ने गोंड समाज की प्रकृति को बदल दिया। उनका समानता वाला समाज धीरे-धीरे असमान सामाजिक वर्गों में बंट गया। ब्राह्मणों ने गोंड राजाओं से भूमि अनुदान प्राप्त किया और अधिक प्रभावशाली हो गए।
अहोम (The Ahoms)
- प्रवास: अहोम लोग 13वीं शताब्दी में वर्तमान म्यांमार से आकर ब्रह्मपुत्र घाटी में बसे।
- राज्य निर्माण: उन्होंने ‘भूँइया’ (ज़मींदार) की पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को दबाकर एक नया राज्य बनाया। उन्होंने 1530 के दशक में ही आग्नेयास्त्रों (Firearms) का प्रयोग शुरू कर दिया था।
- जबरन श्रम (Paiks): अहोम राज्य जबरन श्रम पर निर्भर था। राज्य के लिए काम करने के लिए मजबूर किए गए लोगों को ‘पाइक’ कहा जाता था।
- कुल (Khel): अहोम समाज कुलों या ‘खेल’ में विभाजित था। एक ‘खेल’ अक्सर कई गाँवों को नियंत्रित करता था।
- धर्म: मूल रूप से अहोम अपने जनजातीय देवताओं की पूजा करते थे, लेकिन 18वीं शताब्दी के दौरान हिंदू धर्म मुख्य धर्म बन गया। फिर भी, अहोम राजाओं ने हिंदू धर्म अपनाने के बाद भी अपनी पारंपरिक मान्यताओं को पूरी तरह नहीं छोड़ा।
💡 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण शब्द:
- कुल (Clan): उन परिवारों का समूह जो एक ही पूर्वज के वंशज होने का दावा करते हैं।
- तांडा (Tanda): बंजारों का कारवां।
- पाइक (Paik): अहोम राज्य के वे लोग जिनसे जबरन श्रम कराया जाता था।
- स्थानांतरीय कृषि: जंगल को जलाकर साफ करना और वहां खेती करना, फिर कुछ वर्षों बाद नई जगह पर जाना।
🏹 जनजातियाँ, खानाबदोश और बसे समुदाय
कक्षा-7 इतिहास अध्याय-7 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: जनजातियाँ, खानाबदोश और एक जगह बसे हुए समुदाय
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: भाग IV – राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) (अनुच्छेद 36-51)
राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) राज्य के लिए ‘अनुदेशों के साधन’ (Instrument of Instructions) हैं। ये गैर-न्यायिक (अदालत द्वारा लागू नहीं कराए जा सकते) हैं, लेकिन देश के शासन में मूलभूत महत्व रखते हैं।
अनुच्छेद 36: “राज्य” की परिभाषा
यह स्पष्ट करता है कि भाग IV के लिए “राज्य” का वही अर्थ है जो भाग III (मौलिक अधिकार) के अनुच्छेद 12 में दिया गया है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें, संसद, विधानमंडल और सभी स्थानीय अधिकारी शामिल हैं।
अनुच्छेद 37: प्रकृति और अनुप्रयोग
यह DPSP की कानूनी प्रकृति को परिभाषित करता है:
- ये सिद्धांत किसी भी अदालत द्वारा लागू करने योग्य नहीं हैं (गैर-न्यायिक)।
- इसके बावजूद, ये देश के शासन में मूलभूत हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
1. समाजवादी एवं कल्याणकारी निर्देश (Socialistic Directives)
- अनुच्छेद 38: सामाजिक व्यवस्था सुनिश्चित करना
- 38(1): राज्य लोक कल्याण की वृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जहाँ सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुनिश्चित हो।
- 38(2): (44वें संशोधन द्वारा) राज्य आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को कम करने का प्रयास करेगा।
- अनुच्छेद 39: राज्य द्वारा अनुसरण की जाने वाली नीति के सिद्धांत
- (a) सभी नागरिकों को आजीविका के पर्याप्त साधन का अधिकार।
- (b) समुदाय के भौतिक संसाधनों का उचित वितरण।
- (c) धन और उत्पादन के साधनों का संकेंद्रण रोकना।
- (d) पुरुषों और महिलाओं के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन।
- (e) श्रमिकों के स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा।
- (f) बच्चों को गरिमापूर्ण वातावरण में विकास के अवसर (42वें संशोधन द्वारा)।
- अनुच्छेद 39A: समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता
- (42वें संशोधन द्वारा) गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना ताकि आर्थिक तंगी के कारण कोई न्याय से वंचित न रहे।
- अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और लोक सहायता का अधिकार
- बेकारी, बुढ़ापे, बीमारी और निशक्तता की स्थिति में काम, शिक्षा और सरकारी सहायता पाने का अधिकार।
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत दशाएं और मातृत्व सहायता
- कार्यस्थल पर मानवीय वातावरण और महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश की व्यवस्था।
- अनुच्छेद 43: निर्वाह मजदूरी (Living Wage)
- सभी श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी और सभ्य जीवन स्तर सुनिश्चित करना। ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 43A: प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी
- (42वें संशोधन द्वारा) उद्योगों के प्रबंधन में मजदूरों की भूमिका सुनिश्चित करना।
2. गांधीवादी एवं सामाजिक सुधार निर्देश (Gandhian Directives)
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन
- ग्राम पंचायतों का गठन करना और उन्हें स्वशासन की इकाइयों के रूप में शक्ति प्रदान करना।
- अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों को बढ़ावा देना
- (97वें संशोधन, 2011 द्वारा) सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन और लोकतांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देना।
- अनुच्छेद 46: SC, ST और कमजोर वर्गों के हितों का संरक्षण
- अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के शैक्षिक और आर्थिक हितों को बढ़ावा देना और सामाजिक अन्याय से रक्षा करना।
- अनुच्छेद 47: पोषण स्तर, जीवन स्तर और नशाबंदी
- पोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार करना। स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नशीले पेय और दवाओं पर प्रतिबंध लगाना।
- अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन का संगठन
- कृषि को वैज्ञानिक बनाना। गायों, बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध पर रोक लगाना।
3. उदारवादी-बौद्धिक निर्देश (Liberal-Intellectual Directives)
- अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता (UCC)
- पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने का प्रयास करना।
- अनुच्छेद 45: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल (0–6 वर्ष)
- छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए शिक्षा और देखभाल का प्रावधान।
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण
- (42वें संशोधन द्वारा) पर्यावरण की रक्षा करना और वनों व वन्यजीवों को सुरक्षित रखना।
- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों का संरक्षण
- ऐतिहासिक इमारतों और कलात्मक वस्तुओं को विनाश या चोरी से बचाना।
- अनुच्छेद 50: कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण
- न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करना।
- अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
- विश्व शांति को बढ़ावा देना, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण संबंध बनाए रखना और अंतर्राष्ट्रीय कानून का सम्मान करना।
⚡ त्वरित तुलना: मौलिक अधिकार (FR) बनाम नीति निदेशक तत्व (DPSP)
| विशेषता | मौलिक अधिकार (भाग III) | नीति निदेशक तत्व (भाग IV) |
| प्रकृति | नकारात्मक (राज्य को कुछ करने से रोकना) | सकारात्मक (राज्य को कुछ करने का निर्देश) |
| न्यायिकता | अदालत द्वारा प्रवर्तनीय (वाद-योग्य) | अदालत द्वारा गैर-प्रवर्तनीय (अवाद-योग्य) |
| उद्देश्य | राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना | सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना |
| निलंबन | आपातकाल के दौरान निलंबित हो सकते हैं | कभी निलंबित नहीं होते; केवल लागू किए जाते हैं |
🧠 याद रखने की “कीवर्ड” ट्रिक (DPSP Memorization)
| अनुच्छेद | कीवर्ड (Hindi) | याद रखने का तरीका (Trick) |
| 36 | परिभाषा | अनुच्छेद 12 के समान “राज्य”। |
| 37 | अवाद-योग्य | यह केवल शासन का आधार है। |
| 38 | लोक कल्याण | न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक)। |
| 39 | आजीविका/वेतन | समान काम – समान वेतन। |
| 39A | मुफ्त कानूनी सहायता | ‘A’ से ‘Aid’ (गरीबों को सहायता)। |
| 40 | पंचायत | गांधी जी के ग्राम स्वराज का सपना। |
| 41 | काम/शिक्षा | बुढ़ापे/बेकारी में सहायता। |
| 42 | मातृत्व सहायता | महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर छूट। |
| 43 | मजदूरी | कम से कम इतनी मजदूरी कि सम्मान से जी सकें। |
| 43B | सहकारी समिति | ‘B’ से ‘Business’ (Co-operatives)। |
| 44 | UCC | 4 और 4 समान हैं = समान नागरिक संहिता। |
| 45 | शिशु शिक्षा | 6 साल से छोटे बच्चों के लिए आंगनवाड़ी। |
| 46 | SC / ST | पिछड़े वर्गों का उत्थान। |
| 47 | स्वास्थ्य/नशाबंदी | शराब बंदी (Public Health)। |
| 48 | कृषि/गोहत्या | वैज्ञानिक खेती और गाय की रक्षा। |
| 48A | पर्यावरण | ‘A’ से ‘Air’ (पर्यावरण की रक्षा)। |
| 49 | स्मारक | ऐतिहासिक इमारतों की रक्षा। |
| 50 | पृथक्करण | 50-50 बंटवारा (न्यायपालिका vs कार्यपालिका)। |
| 51 | शांति | अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शांति। |
💡 विचारधारा के आधार पर वर्गीकरण
- समाजवादी (Socialistic): 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47.
- गांधीवादी (Gandhian): 40, 43, 43B, 46, 47, 48.
- उदारवादी (Liberal): 44, 45, 48, 48A, 49, 50, 51.
🛠️ कार्यान्वयन के उदाहरण
- अनुच्छेद 39A: NALSA (विधिक सेवा प्राधिकरण) का गठन।
- अनुच्छेद 40: 73वां संविधान संशोधन (पंचायती राज)।
- अनुच्छेद 41: मनरेगा (MGNREGA) योजना।
- अनुच्छेद 45: शिक्षा का अधिकार (RTE) और 86वां संशोधन।
- अनुच्छेद 47: गुजरात और बिहार में शराब बंदी।
📜 राज्य के नीति निदेशक तत्व (भाग IV)
DPSP: सकारात्मक / सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र / गैर-वादयोग्य।
🧠 5-मिनट मेमोरी टेबल
| अनुच्छेद | कीवर्ड | याद करने की ट्रिक (Trick) |
|---|---|---|
| 39A | कानूनी सहायता | A = Aid (गरीबों के लिए ‘सहायता’) |
| 40 | पंचायत | गांधीजी का ‘ग्राम’ विजन |
| 43B | सहकारिता | B = Business (सहकारी व्यापार) |
| 44 | समानता (UCC) | 4 और 4 ‘समान’ (Uniform) हैं |
| 45 | बच्चे (0-6) | ‘नन्हे-मुन्नों’ की शिक्षा |
| 48A | पर्यावरण | A = Air / Animals (हवा और जीव) |
| 50 | पृथक्करण | 50-50 बंटवारा (न्यायपालिका/कार्यपालिका) |
| 51 | शांति | अंतिम लक्ष्य: ‘विश्व शांति’ |
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (22 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (22 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. विवेकाधिकार अनियंत्रित शक्ति नहीं है (SIR पर सुप्रीम कोर्ट)
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (चुनावी सुधार; संवैधानिक निकाय; शासन के महत्वपूर्ण पहलू)।
- संदर्भ: मतदाता सूचियों के “विशेष गहन पुनरीक्षण” (SIR) पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ और निर्वाचन आयोग की विवेकाधीन शक्तियों की सीमाएँ।
- मुख्य बिंदु:
- न्यायिक निरीक्षण: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यद्यपि निर्वाचन आयोग के पास जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) के तहत “व्यापक विवेकाधिकार” हैं, लेकिन यह स्थापित मानदंडों से हटने के लिए “अनियंत्रित शक्ति” प्रदान नहीं करता है।
- प्रक्रियात्मक पवित्रता: पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 से किसी भी प्रकार के विचलन के पीछे ऐसे कारण होने चाहिए जो “निष्पक्ष, पारदर्शी और रिकॉर्डेड” हों।
- “तनाव और दबाव” का कारक: न्यायालय ने उन लाखों नागरिकों—जिनमें बुजुर्ग और दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल हैं—को होने वाले “अत्यधिक तनाव” को रेखांकित किया, जिन्हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए भौतिक सुनवाइयों (Physical hearings) में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।
- मतदाता संरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा कोई भी पुनरीक्षण जो वास्तविक मतदाताओं को “नए” मतदाताओं (फॉर्म 6) के रूप में फिर से आवेदन करने के लिए मजबूर करता है, उनके मताधिकार का उल्लंघन है।
- विस्तृत विश्लेषण:
- तार्किकता का सिद्धांत (Doctrine of Reasonableness): संपादकीय नोट करता है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस सिद्धांत को लागू किया है कि सभी प्रशासनिक विवेकाधिकारों का प्रयोग तर्कसंगत रूप से और सार्वजनिक हित में किया जाना चाहिए।
- व्यवस्थागत बोझ (Systemic Burden): निर्वाचन आयोग के इस तर्क को खारिज कर दिया गया कि वह SIR के दौरान सामान्य प्रक्रियाओं से “मुक्त” (Unshackled) है; यह पुनः पुष्टि करता है कि “विवेकाधिकार के शासन” के ऊपर “कानून का शासन” (Rule of law) सर्वोपरि है।
- बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का प्रभाव: लगभग 6.5 करोड़ नामों को हटाए जाने के साथ, न्यायालय का हस्तक्षेप उन मतदाताओं के लिए “नागरिक मृत्यु” (Civil death) को रोकने का प्रयास करता है जो दशकों से मतदान कर रहे हैं।
2. ट्रम्प का ग्रीनलैंड अल्टीमेटम: एक नया उपनिवेशवाद?
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव)।
- संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड पर “बातचीत” की मांग और डेनमार्क पर भारी टैरिफ का थोपा जाना।
- मुख्य बिंदु:
- आर्थिक दबाव (Economic Coercion): अमेरिका ने इस स्वायत्त क्षेत्र की बिक्री के लिए दबाव बनाने हेतु लेगो (LEGO) और दवाओं सहित डेनिश सामानों पर 25% टैरिफ लगा दिया है।
- आर्कटिक रणनीति: यह मांग “रणनीतिक गहराई” (Strategic depth) और दुर्लभ मृदा तत्वों (REE) जैसे विशाल अप्रयुक्त खनिज संसाधनों तक पहुंच की आवश्यकता से प्रेरित है, जो हाई-टेक उद्योगों के लिए अनिवार्य हैं।
- “बल प्रयोग नहीं” का दावा: ट्रम्प ने कहा कि वह सैन्य बल का उपयोग नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक “असंतुलन” को ठीक करने के लिए “आर्थिक शक्ति” का उपयोग किया जाएगा।
- यूरोपीय प्रतिक्रिया: डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने इस मांग को “बेतुका” बताया है, जिससे नाटो (NATO) गठबंधन के भीतर एक राजनयिक गतिरोध पैदा हो गया है।
- विस्तृत विश्लेषण:
- मोनरो सिद्धांत का पुनर्जन्म (Monroe Doctrine Reborn): इसे “डोनरो डॉक्ट्रिन” (Donroe Doctrine) के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ अमेरिका आर्कटिक सहित पूरे पश्चिमी गोलार्ध पर अपने विशेष प्रभाव का दावा करता है।
- ग्रीनलैंडवासियों पर प्रभाव: ग्रीनलैंड के 57,000 निवासियों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने ‘आत्मनिर्णय के अधिकार’ (Right to self-determination) पर जोर दिया है।
- वैश्विक व्यवस्था में बदलाव: संपादकीय सुझाव देता है कि यह नियमों पर आधारित व्यवस्था से “लेनदेन वाली व्यवस्था” (Transactional order) की ओर संक्रमण का प्रतीक है, जहाँ संप्रभुता को एक व्यापारिक संपत्ति (Tradeable asset) माना जा रहा है।
3. पुलिस मीडिया ब्रीफिंग: अभियुक्तों की सुरक्षा
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन के महत्वपूर्ण पहलू; न्यायपालिका; मौलिक अधिकार)।
- संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर पुलिस मीडिया ब्रीफिंग पर एक व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश।
- मुख्य बिंदु:
- निर्दोषता का अनुमान (Presumption of Innocence): न्यायालय ने कहा कि पुलिस द्वारा समय से पहले की गई मीडिया ब्रीफिंग अक्सर “मीडिया ट्रायल” का कारण बनती है, जो अभियुक्त के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करती है।
- निजता और गरिमा: अभियुक्तों की सार्वजनिक परेड करना या जांच के संवेदनशील विवरणों का खुलासा करना अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
- बलों का संवेदीकरण: नीति में पुलिस अधिकारियों के लिए यह प्रशिक्षण शामिल होना चाहिए कि जांच या पीड़ित के अधिकारों से समझौता किए बिना कौन सी जानकारी साझा की जा सकती है।
- पीड़ित संरक्षण: यौन अपराधों और नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़ितों की पहचान की रक्षा करने पर विशेष जोर दिया गया है।
- विस्तृत विश्लेषण:
- “ब्रेकिंग न्यूज़” का नियमन: संपादकीय का तर्क है कि मीडिया में “पुलिस की वाहवाही” (Police glory) की तलाश अक्सर न्याय की विफलता (Miscarriage of justice) का कारण बनती है।
- संतुलित प्रकटीकरण (Balanced Disclosure): प्रस्तावित नीति का उद्देश्य “जनता के जानने के अधिकार” और “अभियुक्त के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार” के बीच संतुलन बनाना है।
- जवाबदेही: राज्य के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को किसी भी अनधिकृत लीक या ब्रीफिंग के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा जो न्यायिक कार्यवाही को खतरे में डालते हैं।
4. डूबते डेल्टा: एक पर्यावरणीय संकट
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण; संरक्षण; आपदा प्रबंधन)।
- संदर्भ: ‘नेचर’ (Nature) पत्रिका के एक हालिया अध्ययन में अत्यधिक भूजल दोहन और शहरीकरण के कारण भारतीय डेल्टाओं को उच्च जोखिम में बताया गया है।
- मुख्य बिंदु:
- धंसने की दर (Subsidence Rates): मानवीय हस्तक्षेपों ने डेल्टाओं के धंसने की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है, जिससे एक क्रमिक भूगर्भीय प्रक्रिया एक तत्काल संकट में बदल गई है।
- संवेदनशील क्षेत्र: गंगा-ब्रह्मपुत्र और कावेरी डेल्टा विशेष रूप से भूजल की कमी से प्रभावित हैं, जबकि ब्राह्मणी डेल्टा तीव्र शहरीकरण का सामना कर रहा है।
- “तैयारी रहित गोताखोर” (The Unprepared Diver): गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा “अप्रत्यक्ष खतरे” से “तैयारी रहित गोताखोर” की स्थिति में आ गया है, जिसका अर्थ है कि जोखिम बढ़ गए हैं जबकि संस्थागत क्षमता स्थिर है।
- बंदरगाहों पर प्रभाव: डूबते डेल्टा परिवहन नेटवर्क और बंदरगाहों सहित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए खतरा पैदा करते हैं, जो भारत के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- विस्तृत विश्लेषण:
- संस्थागत पिछड़ापन (Institutional Lag): अध्ययन इस बात पर प्रकाश डालता है कि इन क्षेत्रों में उच्च जनसंख्या घनत्व के बावजूद, नीतिगत प्रतिक्रियाएं सक्रिय (Proactive) होने के बजाय केवल प्रतिक्रियात्मक (Reactive) बनी हुई हैं।
- समेकन और विवर्तनिकी (Compaction and Tectonics): हालांकि प्राकृतिक जमाव होता है, लेकिन पानी और हाइड्रोकार्बन निकालने से वह “पोर प्रेशर” (Pore pressure) खत्म हो जाता है जो जमीन को सहारा देता है, जिससे जमीन तेजी से धंसती है।
- खाद्य सुरक्षा: जैसे-जैसे डेल्टा डूबते हैं, खारे पानी का प्रवेश कृषि भूमि को बर्बाद कर देता है, जिससे पलायन और संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
5. डेटा पॉइंट: चीनी FDI पर अंकुश
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; संसाधनों का संग्रहण; FDI नीति)।
- संदर्भ: भारत द्वारा चीनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर कुछ प्रतिबंधों को हटाने पर विचार और इसके संभावित आर्थिक परिणाम।
- मुख्य बिंदु:
- गलवान के बाद की नीति: 2020 से, ‘प्रेस नोट 3’ के तहत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।
- विनिर्माण अंतराल: “चीन प्लस वन” रणनीति के बावजूद, भारतीय निर्माता अभी भी चीनी पुर्जों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, जिससे स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निवेश मानदंडों में ढील देने की मांग उठी है।
- चीनी अनिच्छा: विश्लेषण में सवाल उठाया गया है कि क्या चीन “विश्वास की कमी” और भारत में चीनी टेक फर्मों पर हालिया टैक्स छापों को देखते हुए निवेश करना चाहेगा।
- व्यापार असंतुलन: चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा एक संरचनात्मक चिंता बना हुआ है, और FDI को व्यापार को स्थानीय उत्पादन में बदलने के तरीके के रूप में देखा जा रहा है।
- विस्तृत विश्लेषण:
- सुरक्षा बनाम विकास: संपादकीय राष्ट्रीय सुरक्षा (महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीनी प्रभाव से बचने) और इलेक्ट्रॉनिक्स व ईवी (EV) क्षेत्रों में पूंजी और तकनीक की आवश्यकता के बीच के तनाव का विश्लेषण करता है।
- रणनीतिक लाभ: FDI में ढील देकर, भारत उन वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में एकीकृत होना चाहता है जो वर्तमान में चीनी फर्मों के प्रभुत्व में हैं।
- पारस्परिकता (Reciprocity): मानदंडों में कोई भी ढील पूरी तरह से नीति पलटने के बजाय संतुलित और क्षेत्र-विशिष्ट (Sectoral) होने की संभावना है।
संपादकीय विश्लेषण
22 जनवरी, 2026Mapping:
यहाँ भारत की प्रमुख घाटियों (Valleys) और कैन्यन (Canyons) का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है। UPSC और राज्य PCS परीक्षाओं के लिए घाटियाँ एक महत्वपूर्ण विषय हैं क्योंकि ये भौतिक भूगोल, जलवायु और मानव बस्तियों के पैटर्न को जोड़ती हैं।
1. हिमालयी घाटी प्रणालियाँ (Himalayan Valley Systems)
ये घाटियाँ विवर्तनिक गतिविधियों (Tectonic activity) और हिमनद अपरदन (Glacial erosion) द्वारा बनी हैं। ये अक्सर कृषि और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र होती हैं।
- कश्मीर घाटी (जम्मू-कश्मीर): यह वृहद हिमालय और पीर पंजाल श्रेणी के बीच स्थित है। यह अपनी ‘करेवा’ (Karewa) मिट्टी की संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है, जो केसर (Saffron) की खेती के लिए अनिवार्य हैं।
- कुल्लू घाटी (हिमाचल प्रदेश): इसे “देवताओं की घाटी” के रूप में जाना जाता है। यह पीर पंजाल और धौलाधार श्रेणियों के बीच स्थित है।
- स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश): यह एक उच्च-ऊँचाई वाली शीत मरुस्थल घाटी है। यह बौद्ध संस्कृति और ट्रेकिंग के लिए एक प्रमुख केंद्र है।
- दून घाटी (उत्तराखंड): यह लघु हिमालय और शिवालिक के बीच स्थित एक अनुदैर्ध्य (Longitudinal) घाटी है। प्रसिद्ध शहर देहरादून यहीं स्थित है।
- युमथांग घाटी (सिक्किम): इसे अक्सर “पूर्व की फूलों की घाटी” कहा जाता है। यह तिब्बती सीमा के पास बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित है।
2. प्रायद्वीपीय और दक्षिणी घाटियाँ
ये घाटियाँ आमतौर पर हिमालयी घाटियों से पुरानी हैं और यहाँ अक्सर घने उष्णकटिबंधीय वन या विशिष्ट नदी अपरदन देखा जाता है।
| घाटी का नाम | राज्य | महत्व |
| शांत घाटी (Silent Valley) | केरल | नीलगिरी पहाड़ियों में स्थित; अपनी दुर्लभ जैव विविधता और उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों के लिए प्रसिद्ध। |
| अराकू घाटी (Araku Valley) | आंध्र प्रदेश | पूर्वी घाट में स्थित; अपनी कॉफी के बागानों और जनजातीय संस्कृति के लिए जानी जाती है। |
| कंबम घाटी (Kambam Valley) | तमिलनाडु | थेनी पहाड़ियों और पश्चिमी घाट के बीच स्थित एक उपजाऊ घाटी। |
| जुकोऊ घाटी (Dzukou Valley) | नागालैंड/मणिपुर | अपनी मौसमी फूलों और विशिष्ट बाँस की प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध। |
3. भारत का ‘ग्रैंड कैन्यन’: गंडिकोटा (Gandikota)
- स्थान: आंध्र प्रदेश (कडपा जिला)।
- निर्माण: यह पेन्नार नदी द्वारा एरामला पहाड़ियों को काटकर बनाया गया है।
- मैपिंग पॉइंट: भौतिक मानचित्र पर इसे दक्कन के पठार के पूर्वी भाग में चिह्नित करें। यह प्रायद्वीपीय क्षेत्र में एक गहरे ‘गॉर्ज’ या ‘कैन्यन’ का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
4. रणनीतिक गॉर्ज और कैन्यन
- सिंधु गॉर्ज (Indus Gorge): गिलगित के पास जहाँ सिंधु नदी हिमालय को काटती है; यह दुनिया के सबसे गहरे गॉर्ज में से एक है।
- ब्रह्मपुत्र (दिहांग) गॉर्ज: वह स्थान जहाँ ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वी हिमालय को काटकर भारत में प्रवेश करती है।
- सतलुज गॉर्ज: शिपकी ला दर्रे के पास स्थित, जहाँ सतलुज नदी तिब्बत से भारत में प्रवेश करती है।
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| विशेषता का प्रकार | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| केसर का केंद्र | कश्मीर घाटी | पीर पंजाल और हिमाद्रि के बीच |
| अनुदैर्ध्य घाटी | देहरादून (दून) | शिवालिक और हिमाचल (लघु हिमालय) के बीच |
| जैव विविधता हॉटस्पॉट | शांत घाटी (Silent Valley) | पलक्कड़, केरल |
| प्रायद्वीपीय कैन्यन | गंडिकोटा | पेन्नार नदी, आंध्र प्रदेश |
💡 मैपिंग टिप:
घाटियों को याद रखने के लिए उन्हें उन दो पर्वत श्रेणियों के साथ जोड़कर देखें जिनके बीच वे स्थित हैं। उदाहरण के लिए, कुल्लू घाटी धौलाधार और पीर पंजाल के बीच है। मानचित्र पर इन पर्वत श्रेणियों को पहले चिह्नित करना घाटी की स्थिति को सटीक बनाता है।
घाटी प्रणालियाँ (Valley Systems)
| प्रकार | मैपिंग हाइलाइट | प्रमुख स्थान |
|---|---|---|
| केसर का केंद्र | कश्मीर घाटी | पीर पंजाल और हिमाद्रि के बीच |
| लंबवत घाटी | देहरादून (दून) | शिवालिक और हिमाचल के बीच |
| जैव विविधता हॉटस्पॉट | शांत घाटी (Silent Valley) | पालक्कड़, केरल |
| प्रायद्वीपीय कैनियन | गंडिकोटा | पेन्नार नदी, आंध्र प्रदेश |