यह अध्याय “शासक और इमारतें” आठवीं और अठारहवीं शताब्दी के बीच की वास्तुकला संबंधी उपलब्धियों की व्याख्या करता है और बताता है कि कैसे राजाओं ने निर्माण के माध्यम से अपनी शक्ति, भक्ति और सांस्कृतिक प्रभाव को प्रदर्शित किया।

इस अवधि के दौरान, राजाओं और उनके अधिकारियों ने दो प्रकार की संरचनाओं का निर्माण किया:

  • किले, महल और मकबरे: ये सुरक्षित, संरक्षित और इस दुनिया तथा अगली दुनिया में शासकों के आराम के लिए भव्य स्थान थे।
  • सार्वजनिक गतिविधियाँ: इनमें मंदिर, मस्जिद, हौज (तलाब), कुएँ, सराय और बाज़ार शामिल थे। राजाओं ने अपनी प्रजा के आराम और उपयोग के लिए इनका निर्माण किया ताकि वे जनता की प्रशंसा और स्नेह प्राप्त कर सकें।

इन इमारतों के निर्माण में लगने वाली सटीकता (जैसे कुतुब मीनार की घुमावदार सतह पर अभिलेख लिखना) शिल्पकारों के उच्च स्तर के कौशल को दर्शाती है।

  • अनुप्रस्थ टोडा निर्माण (Trabeate Principle): आठवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच, वास्तुकारों ने इस शैली का उपयोग किया, जहाँ दो खड़े खंभों के ऊपर एक क्षैतिज शहतीर (Horizontal beam) रखकर छत, दरवाजे और खिड़कियाँ बनाई जाती थीं।
  • चापाकार शैली (Arcuate Principle): बारहवीं शताब्दी से दो प्रमुख तकनीकी विकास हुए:
    1. दरवाजों और खिड़कियों के ऊपर के ढांचे का भार कभी-कभी मेहराबों (Arches) द्वारा उठाया जाता था।
    2. निर्माण में चूना पत्थर सीमेंट का प्रयोग बढ़ गया, जो पत्थर के टुकड़ों के साथ मिलकर उच्च गुणवत्ता वाला कंक्रीट बन जाता था। इससे विशाल संरचनाओं का निर्माण आसान और तेज़ हो गया।

मंदिरों और मस्जिदों का निर्माण बहुत खूबसूरती से किया गया था क्योंकि वे उपासना के स्थल थे और संरक्षक की शक्ति, धन तथा भक्ति को प्रदर्शित करने के लिए थे।

  • प्रतीक के रूप में मंदिर: एक राजा अक्सर अपने नाम पर ही मंदिर का नाम रखता था (जैसे—राजा राजराजदेव ने अपने देवता ‘राजराजेश्वरम्’ की पूजा के लिए ‘राजराजेश्वर’ मंदिर बनवाया) ताकि वह स्वयं ईश्वर जैसा दिखे।
  • सबसे बड़े मंदिर: ये आमतौर पर राजाओं द्वारा बनाए गए थे, जबकि मंदिर के अन्य छोटे देवता राजा के सहयोगियों और अधीनस्थों के देवी-देवता थे।
  • मस्जिद और सुल्तान: हालाँकि मुस्लिम सुल्तान खुद को भगवान का अवतार नहीं मानते थे, लेकिन फारसी दरबारी इतिहास में सुल्तान का वर्णन ‘अल्लाह की परछाई’ (Shadow of God) के रूप में किया गया है।
  • जल का महत्व: शासक अक्सर जनता को पानी उपलब्ध कराने के लिए टैंक और जलाशय बनवाते थे, जैसे इल्तुतमिश का ‘हौज-ए-सुलतानी’ (राजा का जलाशय)।

चूँकि राजाओं ने अपनी भक्ति और शक्ति दिखाने के लिए मंदिर बनवाए थे, इसलिए आक्रमणों के दौरान वे अक्सर मुख्य निशाना बनते थे।

  • जब शासक एक-दूसरे के राज्यों पर आक्रमण करते थे, तो वे धन और प्रतिष्ठा लूटने के लिए अक्सर इन इमारतों को निशाना बनाते थे।
  • उदाहरण के लिए, चोल राजा राजेंद्र प्रथम ने पराजित शासकों से जब्त की गई मूर्तियों से अपना मंदिर भर दिया था, और सुल्तान महमूद गजनवी ने अपने अभियानों के दौरान सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था।

मुगलों ने विभिन्न शैलियों को मिलाकर वास्तुकला को और अधिक जटिल बना दिया।

  • चारबाग (Chahar Bagh): बाबर को औपचारिक बागों का शौक था, जो आयताकार घेरों में स्थित थे और कृत्रिम नहरों द्वारा चार भागों में विभाजित थे। इस विन्यास को ‘चारबाग’ कहा जाता था।
  • पितरा दूरा (Pietra Dura): शाहजहाँ के शासनकाल में, दिल्ली के दीवान-ए-आम में सिंहासन के पीछे ‘पितरा दूरा’ जड़ाऊ काम (संगमरमर या बलुआ पत्थर पर नक्काशी करके उसमें कीमती रंगीन पत्थर जड़ना) की एक श्रृंखला का उपयोग किया गया था।
  • ताजमहल: शाहजहाँ ने ताजमहल के विन्यास के लिए ‘तटवर्ती बाग’ (River-front garden) की योजना अपनाई, जहाँ सफेद संगमरमर का मकबरा यमुना नदी के तट पर एक चबूतरे पर बनाया गया था और बाग इसके दक्षिण में था।

जैसे-जैसे साम्राज्य बढ़े, वास्तुकला की शैलियों का आदान-प्रदान हुआ।

  • विजयनगर में, राजाओं के गजशालाओं (हाथी-अस्तबल) पर बीजापुर और गोलकुंडा जैसे पड़ोसी सुल्तानों की वास्तुकला शैली का गहरा प्रभाव था।
  • वृंदावन में मंदिरों की निर्माण शैली फतेहपुर सीकरी के मुगल महलों से बहुत मिलती-जुलती थी।
  • मुगल शासक क्षेत्रीय शैलियों को अपनी वास्तुकला में अपनाने में बहुत कुशल थे, जैसे बंगाल का ‘बांग्ला गुंबद’
  1. शिखर: मंदिर के गर्भगृह के ऊपर की ऊँची मीनार।
  2. मंडप: मंदिर का वह स्थान जहाँ लोग इकट्ठा होते थे।
  3. मेहराब: दरवाजे या खिड़की के ऊपर का धनुषाकार हिस्सा।
  4. पितरा दूरा: संगमरमर पर कीमती पत्थरों की नक्काशी।

🏛️ शासक और इमारतें (8वीं-18वीं शताब्दी)

🏗️ अभियांत्रिकी कौशल
वास्तुकला की अनुप्रस्थ टोडा (Trabeate) शैली से चापाकार (Arcuate) शैली की ओर बदलाव आया, जहाँ मेहराबों पर भार डाला जाता था। चूना पत्थर सीमेंट के बढ़ते प्रयोग ने विशाल संरचनाओं का निर्माण आसान कर दिया।
🕌 सत्ता के प्रतीक
मंदिर राजा की शक्ति और धन का प्रदर्शन थे। मुस्लिम सुल्तानों ने स्वयं को भगवान का अवतार नहीं कहा, लेकिन उन्हें फारसी तवारीख़ में ‘ईश्वर की छाया’ के रूप में वर्णित किया गया। जनता का समर्थन पाने के लिए राजाओं ने हौज़ (जलाशय) बनवाए।
🌸 मुगल नवाचार
मुगलों ने चारबाग़ (बगीचे के चार समान हिस्से) की परंपरा शुरू की। शाहजहाँ ने संगमरमर पर रत्नों की जड़ाई की पितरा-दूरा (Pietra Dura) तकनीक और ताजमहल जैसे तट-वर्तीय बाग शैली को लोकप्रिय बनाया।
🔄 सांस्कृतिक आदान-प्रदान
विभिन्न क्षेत्रों की शैलियाँ आपस में मिलीं: विजयनगर की गजशालाओं पर सल्तनत शैली का प्रभाव था, जबकि मुगलों ने बंगाल की बाँगला गुम्बद शैली को अपनाया। वृन्दावन के मंदिरों का वास्तुशिल्प फ़तेहपुर सीकरी के महलों जैसा था।
युद्ध नीति चूँकि मंदिर शक्ति और अपार धन के प्रतीक थे, इसलिए जब एक राजा दूसरे के राज्य पर आक्रमण करता था, तो वे इन मंदिरों को प्राथमिक लक्ष्य बनाते थे।
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कक्षा-7 इतिहास अध्याय-5 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: शासक और इमारतें

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यहाँ भारतीय राजव्यवस्था (Indian Polity) के भाग IV: राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP) के अंतर्गत अनुच्छेद 42 से 45 का विस्तृत विश्लेषण हिंदी में दिया गया है। ये अनुच्छेद कार्यस्थल को मानवीय बनाने, जीवन स्तर को सम्मानजनक बनाने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने पर केंद्रित हैं।

मानवीय कल्याण और प्रारंभिक शिक्षा: अनुच्छेद 42–45
इन निर्देशों का उद्देश्य केवल अस्तित्व बचाने और गरिमापूर्ण जीवन के बीच के अंतर को समाप्त करना है। ये राज्य को एक ऐसा वातावरण बनाने का निर्देश देते हैं जहाँ काम मानवीय हो और भविष्य (बच्चे) सुरक्षित हों।

यह अनुच्छेद मानता है कि “काम का अधिकार” (अनुच्छेद 41) तब तक अर्थहीन है जब तक कि कार्य वातावरण दमनकारी या खतरनाक हो।

  • शासनादेश: राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएं सुनिश्चित करने के लिए और मातृत्व सहायता (Maternity Relief) के लिए प्रावधान करेगा।
  • महत्व: यह इस बात पर जोर देता है कि श्रमिक केवल “उत्पादन के उपकरण” नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य और गरिमा के अधिकार रखने वाले इंसान हैं।
  • कार्यान्वयन:
    • मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (और 2017 संशोधन): गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए सवैतनिक अवकाश और लाभ प्रदान करता है।
    • कारखाना अधिनियम, 1948: कारखानों में श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करता है।

अनुच्छेद 43 “न्यूनतम मजदूरी” की अवधारणा से आगे बढ़कर “निर्वाह मजदूरी” की बात करता है।

  • शासनादेश: राज्य सभी श्रमिकों (कृषि, औद्योगिक या अन्य) के लिए एक निर्वाह मजदूरी और ऐसी कार्य परिस्थितियाँ सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा जो जीवन का एक सभ्य स्तर और अवकाश (Leisure) का पूर्ण आनंद सुनिश्चित करें।
  • कुटीर उद्योगों को बढ़ावा: यह विशेष रूप से राज्य को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का निर्देश देता है (गांधीवादी सिद्धांत)।
न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wage) बनाम निर्वाह मजदूरी (Living Wage) में अंतर:
  1. न्यूनतम मजदूरी: केवल भोजन, कपड़े और आश्रय की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए।
  2. निर्वाह मजदूरी: बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को भी शामिल करती है।
  • उत्पत्ति: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा जोड़ा गया।
  • शासनादेश: राज्य किसी भी उद्योग में लगे उपक्रमों, प्रतिष्ठानों या अन्य संगठनों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगा।
  • लक्ष्य: औद्योगिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना और मालिकों व मजदूरों के बीच की खाई को कम करना।
  • उत्पत्ति: 97वें संविधान संशोधन अधिनियम (2011) द्वारा जोड़ा गया।
  • शासनादेश: राज्य सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।

यह भारतीय संविधान के सबसे चर्चित और विवादित अनुच्छेदों में से एक है।

  • शासनादेश: राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त करने का प्रयास करेगा।
  • परिभाषा: UCC देश के प्रत्येक प्रमुख धार्मिक समुदाय के धर्मग्रंथों और रीति-रिवाजों पर आधारित ‘व्यक्तिगत कानूनों’ (Personal Laws) के स्थान पर हर नागरिक के लिए कानूनों का एक साझा सेट होगा।
  • दायरा: इसमें विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत और गोद लेने जैसे धर्मनिरपेक्ष मामले शामिल हैं।
  • वर्तमान स्थिति: गोवा में एक साझा पारिवारिक कानून (पुर्तगाली नागरिक संहिता) लागू है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर UCC अभी तक लागू नहीं हुआ है।

इस अनुच्छेद को 86वें संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा महत्वपूर्ण रूप से बदला गया था।

  • मूल प्रावधान: सभी बच्चों को 14 वर्ष की आयु तक मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रावधान था।
  • वर्तमान शासनादेश: राज्य सभी बच्चों के लिए, जब तक वे छह वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेते, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) प्रदान करने का प्रयास करेगा।
  • बदलाव का कारण: 86वें संशोधन के बाद, 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए “शिक्षा का अधिकार” एक मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21A) बन गया। अब अनुच्छेद 45 केवल “प्री-स्कूल” या आंगनवाड़ी स्तर (0-6 वर्ष) पर केंद्रित है।
अनुच्छेदप्रकृतिमुख्य केंद्रप्रमुख कानून/उदाहरण
42समाजवादीमातृत्व सहायता और मानवीय कार्यमातृत्व लाभ अधिनियम
43समाजवादी/गांधीवादीनिर्वाह मजदूरी और कुटीर उद्योगमनरेगा / खादी बोर्ड
43Aसमाजवादीप्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारीट्रेड यूनियन अधिनियम
43Bउदारवादीसहकारी समितियाँ97वां संशोधन
44उदारवादीसमान नागरिक संहिता(वर्तमान में चर्चा का विषय)
45उदारवादी0-6 वर्ष के बच्चों की शिक्षाICDS / आंगनवाड़ी

🏢 मानव कल्याण और समान नागरिक संहिता

🤰 अनु. 42: प्रसूति और मानवीय कार्य
कार्य की न्यायसंगत और मानवीय दशाएं सुनिश्चित करना तथा मातृत्व राहत (Maternity Relief) प्रदान करना। इसके तहत श्रमिकों को केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि इंसान समझा जाता है। (संदर्भ: मातृत्व लाभ अधिनियम)।
🥖 अनु. 43: निर्वाह मजदूरी
राज्य सभी श्रमिकों के लिए निर्वाह मजदूरी (बुनियादी जरूरतें + स्वास्थ्य/शिक्षा) सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत या सहकारी आधार पर कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
🤝 अनु. 43A और 43B: सहकारिता
43A: उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी। 43B: सहकारी समितियों का स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज और लोकतांत्रिक नियंत्रण को बढ़ावा देना।
⚖️ अनु. 44: समान नागरिक संहिता
राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता (UCC) सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा, जो विवाह, तलाक और विरासत के लिए धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों का स्थान लेगी।
👶 अनु. 45: शैशवकाल की देखभाल (0–6 वर्ष)
86वें संशोधन द्वारा संशोधित। जहाँ 6–14 वर्ष शिक्षा अब एक मूल अधिकार (अनु. 21A) है, वहीं अनुच्छेद 45 छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पर केंद्रित है।
अनुच्छेद प्रकृति मुख्य फोकस प्रमुख विधान/योजना
42समाजवादीप्रसूति सहायतामातृत्व लाभ अधिनियम
43गांधीवादीनिर्वाह मजदूरीमनरेगा / खादी बोर्ड
43Aसमाजवादीप्रबंधन में भागीदारीट्रेड यूनियन अधिनियम
44उदारवादीसमान नागरिक संहिता(विधिक चर्चा का विषय)
45उदारवादी0–6 वर्ष की देखभालICDS / आंगनवाड़ी
विधिक तथ्य “निर्वाह मजदूरी” (Living Wage) “न्यूनतम मजदूरी” (Minimum Wage) से श्रेष्ठ है क्योंकि इसमें सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा शामिल है, जो एक गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करती है।

यहाँ द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (20 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था; शासन के महत्वपूर्ण पहलू; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं)।

  • संदर्भ: महाराष्ट्र के हालिया नगर निगम चुनाव परिणामों का विश्लेषण, जो राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़े बदलाव का संकेत देते हैं।
  • मुख्य बिंदु:
    • भाजपा का चुनावी दबदबा: भाजपा पुणे, नागपुर और नासिक जैसे प्रमुख शहरों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों में से लगभग 1,425 सीटें जीती हैं।
    • पहचान की राजनीति का नया रूप: पार्टी ने मराठी क्षेत्रीयता (Nativism) और हिंदू सांप्रदायिकता को कुशलतापूर्वक मिलाकर बाल ठाकरे की विरासत को अपनाया है ताकि बदलते शहरी जनसांख्यिकी को साधा जा सके।
    • नेतृत्व का विकास: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वैचारिक अपेक्षाओं और शासन की जटिलताओं के बीच संतुलन बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की है।
    • पारंपरिक गुटों का पतन: पवार और ठाकरे परिवारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। भाजपा-शिंदे गठबंधन ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) पर कब्जा कर लिया, जिस पर 25 साल से उद्धव ठाकरे का नियंत्रण था।
  • UPSC प्रासंगिकता: “क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय दल”, “चुनावी राजनीति और जनसांख्यिकी” और “भारत में वैचारिक विमर्श का विकास”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • जनसांख्यिकीय लाभ: भाजपा ने हिंदी भाषी मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रवासन (Migration) के कारण हुए जनसंख्या परिवर्तनों का उपयोग किया है, जिससे पारंपरिक क्षेत्रीय राजनीति कमजोर हुई है।
    • शिवसेना का संघर्ष: शिवसेना के विभिन्न गुट बदलती जनसंख्या के अनुसार खुद को ढालने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं।
    • समावेशिता का तर्क: लेख चेतावनी देता है कि क्षेत्रीयता के स्थान पर सांप्रदायिकता का आना राज्य के लिए आदर्श नहीं है; भाजपा को अपने लक्ष्यों के लिए अधिक समावेशी मंच का उपयोग करना चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित/विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)।

  • संदर्भ: यमन की सऊदी समर्थित सरकार और यूएई (UAE) समर्थित ‘दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद’ (STC) के बीच हालिया संघर्ष।
  • मुख्य बिंदु:
    • क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता: इस संघर्ष ने सऊदी-यूएई तनाव को उजागर कर दिया है। रियाद ने अबू धाबी पर यमनी अलगाववादियों को हथियार देने का आरोप लगाया है।
    • हूथी की पकड़: जैसे-जैसे दक्षिण के गुट आपस में लड़ रहे हैं, उत्तर में हूथी मिलिशिया (अंसार अल्लाह) ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।
    • मानवीय संकट: यमन दुनिया के सबसे खराब संकटों में से एक का सामना कर रहा है, जहाँ लाखों लोग अकाल की कगार पर हैं और अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है।
    • यूएई की वापसी: सऊदी अरब की फटकार के बाद, यूएई ने यमन से अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा की है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “पश्चिम एशिया भू-राजनीति”, “छद्म युद्ध (Proxy Wars)” और “अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संकट प्रबंधन”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • संघीय ढांचा समाधान: स्थायी शांति के लिए, संपादकीय सभी यमनी गुटों को एक संघीय शासन संरचना स्थापित करने की सलाह देता है।
    • सहयोग की आवश्यकता: लेख इस बात पर जोर देता है कि सऊदी अरब और यूएई को अपने पड़ोस में स्थिरता के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
    • वायु शक्ति का प्रभाव: सऊदी हवाई शक्ति सरकारी बलों को खोए हुए क्षेत्रों को वापस पाने में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण रही है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (सांविधिक, नियामक और अर्ध-न्यायिक निकाय; शासन के महत्वपूर्ण पहलू)।

  • संदर्भ: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया जांच प्रणालियों की आलोचना और न्यायिक जांच से पहले छवि खराब करने वाले “मीडिया ट्रायल” की भूमिका।
  • मुख्य बिंदु:
    • तर्क का उलटफेर: PMLA (2002) के तहत, ED पर आरोप है कि वह किसी मूल अपराध (Scheduled Offence) को स्थापित किए बिना ही धन शोधन (Money Laundering) को एक स्वतंत्र अपराध की तरह मान रही है।
    • प्रक्रियात्मक अतिरेक: PMLA की धारा 50 के तहत, एजेंसी किसी को भी बुला सकती है और शपथ पर बयान दर्ज कर सकती है, जो जमानत के लिए ‘निर्दोषता के अनुमान’ (Presumption of Innocence) को उलट देता है।
    • न्यायिक हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट सहित कई अदालतों ने ED की जांच पर रोक लगाई है और कहा है कि एजेंसी “सभी सीमाएं पार कर रही है।”
    • संस्थागत अखंडता: रिश्वत लेते पकड़े गए ED अधिकारियों के मामलों ने एजेंसी की नैतिक साख को नुकसान पहुँचाया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जांच शक्तियों का दुरुपयोग”, “न्यायिक निरीक्षण” और “पत्रकारिता में नैतिकता”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • मीडिया की संलिप्तता: संपादकीय उन पत्रकारों की आलोचना करता है जो चुनिंदा ‘लीक’ के लिए माध्यम के रूप में कार्य करते हैं; “पत्रकारिता स्टेनोग्राफी नहीं है।”
    • संवैधानिक सुरक्षा: लेख का तर्क है कि केवल सख्त सीमाएं ही जांच प्राधिकरण को मनमानी सरकारी शक्ति बनने से रोक सकती हैं।
    • लोकतंत्र का स्वास्थ्य: झूठे या कमजोर मामले संस्थानों में जनता के विश्वास को खत्म करते हैं।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (भारत से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और समझौते)।

  • संदर्भ: “डिप्लोमैटिक व्हाइट स्पेस” (राजनयिक रिक्त स्थान)—वैश्विक नेतृत्व में वे अंतराल जहाँ बड़ी शक्तियाँ आपस में भिड़ी हुई हैं—उनमें नेतृत्व करने के भारत के अवसरों की तलाश।
  • मुख्य बिंदु:
    • भारत-यूरोपीय संघ FTA: 2026 के गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय संघ के नेतृत्व की उपस्थिति भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लिए एक बड़ा संकेत है।
    • ब्रिक्स (BRICS) का संचालन: 2026 के अध्यक्ष के रूप में, भारत को इस समूह को पश्चिम-विरोधी बयानबाजी से हटाकर ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ के माध्यम से व्यावहारिक परिणामों की ओर ले जाना चाहिए।
    • क्वाड (Quad) की उपयोगिता: भारत क्वाड को हिंद महासागर के देशों के लिए उपयोगी बना सकता है, अपनी समुद्री डोमेन जागरूकता क्षमताओं को सेवाओं में बदलकर।
    • नए गठबंधन: भारत को “पैक्स सिलिका” (Pax Silica – अमेरिका के नेतृत्व वाला AI और सेमीकंडक्टर क्लब) में शामिल होने का निमंत्रण मिलना छोटे, कार्यात्मक राजनयिक गठबंधनों की ओर झुकाव को दर्शाता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “भारत का वैश्विक नेतृत्व”, “बहु-संरेखण रणनीति (Multi-alignment)” और “बहुपक्षवाद का भविष्य”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • छोटे मंच, बड़े लाभ: संपादकीय का सुझाव है कि विभाजित दुनिया में परिणाम संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े मंचों के बजाय छोटे गठबंधनों से निकल रहे हैं।
    • रणनीतिक संतुलन: भारत की 2026 की गति ‘व्हाइट स्पेस’ को वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं (जैसे AI मानक और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा) के लिए कार्य तंत्र में बदलने से आएगी।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (चुनावी सुधार; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)।

  • संदर्भ: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और बिना दस्तावेजों वाले आव्रजन के मुद्दे का विश्लेषण।
  • मुख्य बिंदु:
    • मतदाता सूची पुनरीक्षण: विवादों के बावजूद, यह “अत्यधिक महसूस” किया जा रहा है कि मृत और नकली नामों को हटाने के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण आवश्यक है।
    • सार्वजनिक चिंता: संपादकीय नोट करता है कि सबूतों के बावजूद अवैध प्रवासियों के मुद्दे को पूरी तरह नकारना राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंतित जनता के एक वर्ग को नाराज करता है।
    • संस्थागत विफलता: SIR 2.0 ने ECINet डिजिटल बुनियादी ढांचे का पूरी तरह उपयोग करने के बजाय कागजी फॉर्मों और भौतिक सुनवाइयों (नोबेल पुरस्कार विजेताओं को भी बुलाने) पर भरोसा किया।
    • चुनावी अखंडता: इस अभ्यास में लगभग 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे विपक्ष ने “वोट चोरी” के आरोप लगाए।
  • UPSC प्रासंगिकता: “मतदाता सूची की अखंडता”, “आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां” और “नागरिकता की राजनीति”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • सटीक संवाद: एक बुद्धिमानी भरा रास्ता यह होगा कि बयानबाजी के बजाय कानूनी कार्य प्राधिकरणों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित बातचीत की जाए।
    • डिजिटल-प्रथम समाधान: लेख ऑनलाइन दस्तावेज़ अपलोड और बैकएंड सत्यापन पर आधारित प्रणाली की वकालत करता है ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष और मानवीय हो सके।
    • भरोसे की रक्षा: चुनावी सुधार समावेश और डिजिटल उपकरणों के जिम्मेदार उपयोग के माध्यम से ही सफल होते हैं।

संपादकीय विश्लेषण

20 जनवरी, 2026
GS-2 राजव्यवस्था
🗳️ महाराष्ट्र: क्षेत्रीय ‘भगवा’ बदलाव
नगरपालिका चुनावों में भाजपा ने 2,869 में से 1,425 सीटें जीतकर पारंपरिक क्षेत्रीय दलों को विस्थापित किया। मुख्य रणनीति: बदलती शहरी जनसांख्यिकी को लुभाने के लिए मराठी भूमिपुत्रवाद (Nativism) और सांप्रदायिकता का मिश्रण। भाजपा-शिंदे गठबंधन ने BMC पर 25 साल पुराने ठाकरे दबदबे को समाप्त कर दिया।
GS-2 अंत. संबंध
🇾🇪 विभाजित यमन: सऊदी-यूएई प्रतिद्वंद्विता
अलगाववादियों को हथियार हस्तांतरण पर रियाद की फटकार के बाद यूएई द्वारा सेना वापस बुलाने से भू-राजनीतिक दरारें गहरी हुईं। परिणाम: उत्तरी केंद्रों में हुथी विद्रोहियों का सुदृढ़ीकरण। समाधान: मानवीय संकट से जूझ रहे इस देश में स्थायी शांति के लिए एक संघीय ढांचा अनिवार्य है।
GS-2 एजेंसियां
⚖️ ED और मीडिया ट्रायल की नैतिकता
प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग को “अनुसूचित अपराध” से स्वतंत्र मानने की आलोचना। PMLA धारा 50 के तहत शपथ पर दिए गए बयान निर्दोषता की उपधारणा के सिद्धांत को उलट देते हैं। चेतावनी: चयनात्मक मीडिया लीक राज्य की मनमानी शक्ति के वाहक बन रहे हैं।
GS-2 अंत. संबंध
🌍 राजनयिक रिक्त स्थान: 2026 का दृष्टिकोण
भारत नेतृत्व की कमियों को छोटे, कार्यात्मक गठबंधनों के माध्यम से भरने का लक्ष्य रखता है। मुख्य कदम: भारत-यूरोपीय संघ FTA को “जोखिम-निवारण समझौते” के रूप में देखना और पैक्स सिलिका (Pax Silica) (यूएस-नीत AI/सेमीकंडक्टर ब्लॉक) में शामिल होना। वैश्विक सार्वजनिक वस्तुओं के लिए नए प्रबंध बनाना प्राथमिकता है।
GS-2 शासन
📜 चुनावी SIR: डिजिटल बनाम कागज़
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2.0 में 6.5 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने से “वोट चोरी” के आरोप लगे। आलोचना: त्रुटि-प्रवण कागजी फॉर्म और भौतिक सुनवाई पर निर्भरता के बजाय ECINet बुनियादी ढांचे की आवश्यकता। सुरक्षा पर बातचीत पारदर्शी होनी चाहिए, उपेक्षापूर्ण नहीं।

यहाँ भारत के समुद्री भूगोल (Ocean Geography) और सामरिक समुद्री बिंदुओं का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

सामरिक जलमार्ग और चैनल समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनका मानचित्रण करते समय अक्षांश रेखाओं (Latitudes) का ध्यान रखना आवश्यक है।

  • 8 डिग्री चैनल (8 Degree Channel): यह लक्षद्वीप समूह (विशेषकर मिनिकॉय) को मालदीव से अलग करता है।
  • 9 डिग्री चैनल (9 Degree Channel): यह मिनिकॉय द्वीप को शेष लक्षद्वीप द्वीपसमूह से अलग करता है।
  • 10 डिग्री चैनल (10 Degree Channel): यह बंगाल की खाड़ी में अंडमान द्वीपों को निकोबार द्वीपों से अलग करता है।
  • डंकन पैसेज (Duncan Passage): यह दक्षिण अंडमान और लिटिल अंडमान के बीच स्थित है।
  • पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait): भारत (तमिलनाडु) को श्रीलंका से अलग करने वाली पानी की एक संकरी पट्टी।
  • कोको चैनल (Coco Channel): अंडमान द्वीपों को म्यांमार के कोको द्वीपों से अलग करता है।

भारत के पास एक विशाल अनन्य आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) है जो समुद्री संसाधनों पर अधिकार प्रदान करता है।

  • महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf): तट से समुद्र की ओर फैला हुआ समुद्र तल का उथला हिस्सा।
  • EEZ की सीमा: आधार रेखा (Baseline) से 200 समुद्री मील (Nautical Miles) तक फैली होती है। भारत का EEZ लगभग 20.2 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करता है।
  • रणनीतिक नौसैनिक अड्डे:
    • पोर्ट ब्लेयर (अंडमान): भारत की एकमात्र ‘ट्राई-सर्विस कमांड’ (थल, जल और वायु सेना) का मुख्यालय।
    • कारवार (INS कदंब): पश्चिमी तट पर भारत के सबसे बड़े नौसैनिक अड्डों में से एक।
    • विशाखापत्तनम: पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय।

भारत की प्रवाल भित्तियों का मानचित्रण पारिस्थितिक और पर्यावरणीय भूगोल के लिए महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रभित्ति का प्रकारमहत्व
लक्षद्वीपएटोल (Atolls)पूरी तरह से प्रवाल द्वीपों से निर्मित; अत्यधिक संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र।
मन्नार की खाड़ीतटीय भित्ति (Fringing)भारत और श्रीलंका के बीच स्थित; एक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve)।
अंडमान और निकोबारतटीय भित्ति (Fringing)भारत में सबसे व्यापक और विस्तृत प्रवाल भित्तियाँ।
कच्छ की खाड़ीतटीय भित्ति (Fringing)भारत की सबसे उत्तरी प्रवाल भित्तियाँ; उथले पानी में पाई जाती हैं।

ये विशेषताएँ भारतीय तटरेखा के आकार को परिभाषित करती हैं।

  • कच्छ की खाड़ी: गुजरात में स्थित; उच्च ज्वारीय ऊर्जा (Tidal energy) क्षमता के लिए जानी जाती है।
  • खंभात की खाड़ी: गुजरात में स्थित; प्रमुख अपतटीय तेल (Offshore oil) अन्वेषण स्थल।
  • मन्नार की खाड़ी: दक्षिण में स्थित; मोती निकालने और समुद्री जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध।
  • बंगाल की खाड़ी: दुनिया की सबसे बड़ी खाड़ी, जो भारतीय मानसून को गहराई से प्रभावित करती है।
श्रेणीमानचित्रण मुख्य बिंदुमुख्य स्थान
सबसे दक्षिणी बिंदुइंदिरा पॉइंटग्रेट निकोबार द्वीप
ट्राई-सर्विस बेसपोर्ट ब्लेयरदक्षिण अंडमान
प्रवाल राजधानीकवरत्तीलक्षद्वीप
आदम का पुलराम सेतुपम्बन द्वीप और मन्नार द्वीप के बीच

UPSC के लिए पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी की सापेक्ष स्थिति को ध्यान से देखें। पाक जलडमरूमध्य उत्तर में है, जबकि मन्नार की खाड़ी उसके दक्षिण में स्थित है।

समुद्री परिदृश्य (Maritime Horizons)

जलसंधियाँ एवं मार्ग
🧭 रणनीतिक चैनल
रणनीतिक अक्षांश रेखाएँ जैसे 8°, 9°, और 10° चैनल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के गलियारों को परिभाषित करती हैं। वहीं, पाक जलडमरूमध्य और डंकन मार्ग महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट (अवरोध बिंदु) के रूप में कार्य करते हैं।
अभ्यास: मानचित्र पर 10 डिग्री चैनल को खोजें और उन दो द्वीप समूहों की पहचान करें जिन्हें यह अलग करता है।
सुरक्षा
⚓ नौसेना कमान केंद्र
भारत की समुद्री रक्षा पोर्ट ब्लेयर (त्रि-सेवा कमान), कारवार (INS कदंब), और विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी कमान पर आधारित है।
अभ्यास: भारतीय तटरेखा से 200 समुद्री मील की ‘अनन्य आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) सीमा को ट्रेस करें।
समुद्री जीव विज्ञान
🐚 मूंगा (कोरल) संरचनाएं
भारत की कोरल संपदा लक्षद्वीप के एटोल से लेकर अंडमान और मन्नार की खाड़ी की विस्तृत तटीय प्रवाल भित्तियों (Fringing Reefs) तक फैली हुई है।
क्षेत्र रीफ का प्रकार महत्व
लक्षद्वीपएटोल (Atolls)पूरी तरह से मूंगा द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र
मन्नार की खाड़ीतटीय (Fringing)समुद्री जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
कच्छ की खाड़ीतटीय (Fringing)सबसे उत्तरी उथले पानी की भित्तियाँ
तटीय आकृति
🌊 खाड़ियाँ एवं ज्वारीय ऊर्जा
भारत की तटरेखा कच्छ की खाड़ी (ज्वारीय क्षमता) और खंभात की खाड़ी (अपतटीय तेल) से कटी-फटी है, जो गुजरात के अद्वितीय समुद्री प्रोफाइल को परिभाषित करती है।
अभ्यास: पंबन द्वीप और मन्नार द्वीप के बीच “आदम का पुल” (राम सेतु) के स्थान की पहचान करें।
समुद्री मानचित्रण चेकलिस्ट
श्रेणी मैपिंग हाइलाइट प्रमुख स्थान
सबसे दक्षिणी सिराइंदिरा पॉइंटग्रेट निकोबार द्वीप
मूंगा राजधानीकवरत्तीलक्षद्वीप द्वीपसमूह
त्रि-सेवा आधारपोर्ट ब्लेयरदक्षिण अंडमान द्वीप
मोती की खेतीमन्नार की खाड़ीदक्षिणी तट (तमिलनाडु)

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