Dainik CSAT Quiz in Hindi – January 9, 2026

Dainik CSAT Quiz (9 January 2026)
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    Dainik GS Quiz in Hindi – January 9, 2026

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      IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 8 जनवरी 2026 (Hindi)

      यह अध्याय लगभग 2,500 वर्ष पहले भारत में उभरे नए धार्मिक और दार्शनिक विचारों के बारे में है।

      बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे और वे तीव्र सामाजिक परिवर्तनों के काल में जीवित थे।

      • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पहले ‘सिद्धार्थ’ (जिन्हें गौतम के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में हुआ था। वे शाक्य गण के एक क्षत्रिय थे।
      • गृहत्याग: युवावस्था में ही जीवन के सच्चे अर्थ की तलाश में उन्होंने घर के सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया।
      • ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment): कई वर्षों तक भ्रमण और चर्चा के बाद, उन्होंने बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया, जहाँ उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
      • शिक्षा: उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी के पास) में दिया और अपना शेष जीवन पैदल यात्रा करते हुए लोगों को शिक्षा देने में बिताया। उनकी मृत्यु कुशीनारा में हुई।
      • मुख्य दर्शन:
        • उन्होंने सिखाया कि जीवन दुखों और कष्टों से भरा है, जिसका कारण हमारी असीमित इच्छाएँ और लालसाएँ हैं, जिसे उन्होंने ‘तन्हा’ (तृष्णा) कहा है।
        • इन इच्छाओं को दूर करने के लिए उन्होंने ‘आत्म-संयम’ (moderation) का मार्ग अपनाने की सलाह दी।
        • उन्होंने कर्म के महत्व पर जोर दिया और बताया कि हमारे कार्यों का फल हमें इस जीवन और अगले जीवन दोनों में मिलता है।
        • उन्होंने अपने उपदेश उस समय की आम भाषा प्राकृत में दिए, ताकि हर कोई उन्हें समझ सके।

      इसी समय, अन्य विचारक मृत्यु के बाद के जीवन और यज्ञों के उद्देश्य जैसे कठिन प्रश्नों के उत्तर खोज रहे थे।

      • आत्मा और ब्रह्म: इन विचारकों का मानना था कि ब्रह्मांड में कुछ ऐसा है जो स्थायी है। उन्होंने इसे ‘आत्मा’ (व्यक्तिगत आत्मा) और ‘ब्रह्म’ (सार्वभौमिक आत्मा) के रूप में वर्णित किया और निष्कर्ष निकाला कि अंततः ये दोनों एक ही हैं।
      • ग्रंथ: उनके विचारों को ‘उपनिषदों’ में संकलित किया गया। उपनिषद् का शाब्दिक अर्थ है “गुरु के समीप बैठना”। इन ग्रंथों में अक्सर शिक्षकों और छात्रों के बीच बातचीत के रूप में विचार दिए गए हैं।
      • विचारक: इनमें मुख्य रूप से ब्राह्मण और राजा शामिल थे, लेकिन गार्गी जैसी कुछ महिला विचारकों का भी उल्लेख मिलता है। सत्यकाम जाबाल (एक दासी का पुत्र) भी एक प्रसिद्ध विचारक बने, जिन्हें गौतम नाम के एक ब्राह्मण शिक्षक ने अपना शिष्य बनाया था।
      • भारतीय दर्शन की छह पद्धतियाँ: भारत के बौद्धिक विकास का प्रतिनिधित्व छह दर्शनों द्वारा किया जाता है: वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा और वेदांत (उत्तर मीमांसा)

      जैनों के 24वें तीर्थंकर वर्धमान महावीर ने भी इसी समय अपने विचारों का प्रसार किया।

      • पृष्ठभूमि: वे वज्जि संघ के ‘लिच्छवि’ कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे।
      • मुख्य सिद्धांत: महावीर ने सिखाया कि सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने अहिंसा के नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा (अर्थात किसी भी जीव को कष्ट न देना)।
      • जीवन का तरीका: अनुयायियों (जैनों) को बहुत सादा जीवन जीना पड़ता था, भोजन के लिए भिक्षा मांगनी पड़ती थी, पूरी तरह ईमानदार रहना पड़ता था और चोरी न करने की सख्त हिदायत थी। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था और पुरुषों को वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागना पड़ता था।
      • प्रसार: जैन धर्म को मुख्य रूप से व्यापारियों का समर्थन मिला। किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकोड़ों को मारना पड़ता था।

      महावीर और बुद्ध दोनों का मानना था कि सच्चा ज्ञान केवल वही प्राप्त कर सकते हैं जो अपना घर छोड़ देते हैं।

      • संघ: यह उन लोगों का एक संगठन था जिन्होंने घर का त्याग किया था।
        • बौद्ध संघ के नियम ‘विनय पिटक’ नामक ग्रंथ में मिलते हैं।
        • संघ के सदस्यों को ‘भिक्खु’ और ‘भिक्खुणी’ (भिखारी के लिए प्राकृत शब्द) कहा जाता था।
        • इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, व्यापारी, मजदूर और दास (अनुमति लेकर) शामिल हो सकते थे।
      • विहार (Monasteries): भिक्खु-भिक्खुणी पूरे साल यात्रा करते थे, केवल वर्षा ऋतु को छोड़कर। समय के साथ उनके लिए स्थायी शरण स्थल बनाए गए जिन्हें ‘विहार’ कहा गया। ये लकड़ी, ईंट या पहाड़ों को काटकर (जैसे कार्ले की गुफाएँ) बनाए गए थे।

      जैन और बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के समय, ब्राह्मणों ने जीवन के चार चरणों की एक व्यवस्था विकसित की जिसे ‘आश्रम’ कहा गया:

      आश्रमअपेक्षित जीवनशैली
      ब्रह्मचर्यसादा जीवन बिताना और वेदों का अध्ययन करना।
      गृहस्थविवाह करना और एक गृहस्थ के रूप में रहना।
      वानप्रस्थजंगल में रहना और साधना करना।
      संन्याससब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाना।

      ☸️ नए प्रश्न नए विचार

      🧘 बुद्ध का मार्ग
      सिद्धार्थ गौतम ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने सिखाया कि दुख का कारण तन्हा (लालसा) है। जनसाधारण तक पहुँचने के लिए उन्होंने प्राकृत भाषा का प्रयोग किया। उनका प्रथम उपदेश सारनाथ में हुआ।
      🕯️ उपनिषदिक विचार
      विचारकों ने आत्मा (व्यक्तिगत आत्मा) और ब्रह्म (सार्वभौमिक आत्मा) के बारे में चर्चा की। इनमें गार्गी जैसी महिला विचारकों और सत्यकाम जाबाल जैसे जिज्ञासुओं ने भाग लिया।
      🐜 जैन धर्म और महावीर
      वर्धमान महावीर ने अहिंसा (कठोर जीव हत्या निषेध) पर जोर दिया। उनके अनुयायी ‘जैन’ कहलाए, जो भोजन के लिए भिक्षा माँगते थे और पूर्ण ईमानदारी का पालन करते थे। इसे व्यापारी वर्ग का भारी समर्थन मिला।
      🏘️ संघ और विहार
      घर त्यागने वाले लोग संघ में रहते थे, जिसके नियम विनय पिटक में मिलते हैं। वर्षा ऋतु के दौरान भिक्खु-भिक्खुनी विहारों (शरण स्थलों) में रहते थे, जो अक्सर चट्टानों को काटकर बनाए जाते थे।
      आश्रम व्यवस्था ब्रह्मचर्य (सादा जीवन/अध्ययन) • गृहस्थ (विवाह/घर) • वानप्रस्थ (जंगल में साधना) • संन्यास (सब कुछ त्याग देना)।
      📂

      कक्षा-6 इतिहास अध्याय-7 PDF

      सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: नए प्रश्न नए विचार

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      भारतीय संविधान का भाग III नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों की गहराई में जाने से पहले, उस ढांचे को समझना आवश्यक है जो इन्हें नियंत्रित करता है। अनुच्छेद 12 बताता है कि ये अधिकार किसके विरुद्ध लागू हैं; अनुच्छेद 13 अन्य कानूनों पर इन अधिकारों की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है; और अनुच्छेद 14 समानता के उस मूल सिद्धांत को स्थापित करता है जो राष्ट्र को बांधता है।

      मौलिक अधिकार मुख्य रूप से सरकार द्वारा शक्ति के मनमाने उपयोग के विरुद्ध संरक्षण हैं। इसलिए, अनुच्छेद 12 संविधान के भाग III के उद्देश्यों के लिए “राज्य” शब्द को परिभाषित करता है।

      अनुच्छेद 12 के अनुसार, ‘राज्य’ में शामिल हैं:

      1. भारत की सरकार और संसद: संघ के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे मंत्रालय, राष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा)।
      2. राज्यों की सरकारें और विधानमंडल: प्रत्येक राज्य के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे विधानसभा, राज्यपाल)।
      3. स्थानीय प्राधिकारी: नगरपालिकाएं, पंचायतें, जिला बोर्ड, सुधार न्यास (Improvement Trusts) आदि।
      4. अन्य प्राधिकारी: यह सबसे अधिक चर्चित श्रेणी है, जिसकी व्याख्या न्यायपालिका द्वारा समय-समय पर की गई है।

      उच्चतम न्यायालय ने अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब जैसे मामलों में यह स्थापित किया कि कोई निजी संस्था या निगम भी “राज्य” माना जा सकता है यदि वह सरकार के एक उपकरण या एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

      कसौटी (Criteria):

      • यदि संपूर्ण शेयर पूंजी सरकार के पास है।
      • यदि वित्तीय सहायता इतनी अधिक है कि वह लगभग पूरे खर्च को पूरा करती है।
      • यदि संस्था को राज्य द्वारा संरक्षित ‘एकाधिकार’ प्राप्त है।
      • यदि राज्य का गहरा और व्यापक नियंत्रण (Pervasive Control) है।
      • यदि संस्था के कार्य सार्वजनिक महत्व के हैं और सरकारी कार्यों से जुड़े हैं।

      नोट: LIC, ONGC और SAIL जैसे निकायों को “राज्य” माना जाता है, जबकि BCCI और NCERT को सामान्यतः इस परिभाषा से बाहर रखा गया है।

      अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों का “द्वारपाल” है। यह न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति देता है, जिससे अदालतें उन कानूनों को रद्द कर सकती हैं जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

      • अनुच्छेद 13(1): संविधान पूर्व कानूनों (Pre-Constitutional Laws) से संबंधित है। 1950 से पहले के कानून यदि मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं, तो वे उस सीमा तक शून्य (Void) हो जाएंगे।
      • अनुच्छेद 13(2): संविधान के बाद के कानूनों से संबंधित है। यह राज्य को ऐसा कोई भी कानून बनाने से रोकता है जो मौलिक अधिकारों को छीनता या कम करता हो।
      • अनुच्छेद 13(3): “विधि” (Law) शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित करता है। इसमें शामिल हैं:
        • अध्यादेश (Ordinances)
        • आदेश, उपविधि (Bye-laws), नियम, विनियम (Regulations)
        • अधिसूचनाएं (Notifications)
        • रूढ़ि या प्रथाएं (Customs) जिनका कानून जैसा प्रभाव हो।
      1. पृथक्करणीयता का सिद्धांत (Doctrine of Severability): यदि किसी कानून का एक हिस्सा असंवैधानिक है, तो केवल वही हिस्सा रद्द किया जाएगा, पूरा कानून नहीं। (बशर्ते वैध हिस्सा अवैध हिस्से के बिना जीवित रह सके)।
      2. आच्छादन का सिद्धांत (Doctrine of Eclipse): मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला संविधान-पूर्व कानून पूरी तरह खत्म नहीं होता; वह केवल मौलिक अधिकारों द्वारा “ढक” लिया जाता है। यदि बाद में संविधान संशोधन द्वारा वह बाधा हट जाए, तो कानून पुनः सक्रिय हो जाता है।
      3. त्याग का सिद्धांत (Doctrine of Waiver): कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को अपनी मर्जी से छोड़ (Waive) नहीं सकता, क्योंकि ये अधिकार केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि लोक हित के लिए दिए गए हैं।

      अनुच्छेद 14 भारतीय संविधान का हृदय है। यह गारंटी देता है: “राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।”

      विधि के समक्ष समता (Equality Before Law)विधियों का समान संरक्षण (Equal Protection of Laws)
      यह ब्रिटिश सामान्य विधि से लिया गया है।यह अमेरिकी संविधान से लिया गया है।
      नकारात्मक अवधारणा: किसी व्यक्ति के लिए विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति।सकारात्मक अवधारणा: समान परिस्थितियों में समान व्यवहार सुनिश्चित करना।
      इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।इसका अर्थ है “समान लोगों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।”
      यह ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) पर केंद्रित है।यह ‘वास्तविक समानता’ (Substantive Equality) पर केंद्रित है।

      अनुच्छेद 14 ‘वर्ग-विधान’ (बिना कारण किसी समूह को लाभ देना) का निषेध करता है लेकिन ‘तर्कसंगत वर्गीकरण’ की अनुमति देता है। चूँकि लोग अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में हैं, इसलिए कानून सबके साथ बिल्कुल एक जैसा व्यवहार नहीं कर सकता।

      वर्गीकरण की कसौटी:

      1. बोधगम्य अंतरक (Intelligible Differentia): उन समूहों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए जिनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है।
      2. तार्किक संबंध (Rational Nexus): उस अंतर का उस लक्ष्य से तार्किक संबंध होना चाहिए जिसे कानून प्राप्त करना चाहता है।

      नया सिद्धांत (मनमानापन – Arbitrariness):
      ई.पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 14 का विस्तार करते हुए कहा कि “समानता और मनमानापन एक-दूसरे के विरोधी हैं।” यदि राज्य की कोई कार्रवाई अनुचित, अतार्किक या मनमानी है, तो वह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

      अनुच्छेदमुख्य केंद्रलोकतंत्र में भूमिका
      12राज्य की परिभाषाउन संस्थाओं की पहचान करना जो मौलिक अधिकारों को मानने के लिए बाध्य हैं।
      13न्यायिक समीक्षामौलिक अधिकारों को नए या पुराने कानूनों द्वारा कमजोर होने से बचाना।
      14समानता का अधिकारनिष्पक्षता सुनिश्चित करना और भेदभाव व मनमानी सरकारी कार्रवाई को रोकना।

      ⚖️ मूल अधिकार ढांचा

      🏛️ अनुच्छेद 12: “राज्य”
      उन संस्थाओं को परिभाषित करता है जिनके विरुद्ध मूल अधिकार लागू होते हैं: संघ और राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और अन्य प्राधिकारी। निजी संस्थाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं यदि वे राज्य के नियंत्रण में हों।
      🛡️ अनुच्छेद 13: न्यायिक समीक्षा
      यह अधिकारों का रक्षक है। मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाली विधियां शून्य होंगी। इसमें पृथक्करणीयता का सिद्धांत (केवल खराब हिस्सा हटाना) और आच्छादन का सिद्धांत शामिल हैं।
      🤝 अनु. 14: समानता के स्तंभ
      1. विधि के समक्ष समता: नकारात्मक अवधारणा (UK); कानून से ऊपर कोई नहीं।
      2. विधियों का समान संरक्षण: सकारात्मक अवधारणा (USA); समान परिस्थितियों में समान व्यवहार।
      🔍 वर्गीकरण और मनमानापन
      यह तर्कसंगत वर्गीकरण की अनुमति देता है यदि वह बोधगम्य अंतरक पर आधारित हो। रॉयप्पा केस के अनुसार, समानता मनमानेपन (Arbitrariness) की विरोधी है।
      📜 “विधि” क्या है? (अनु. 13)
      इसमें अध्यादेश, उप-नियम, नियम, अधिसूचनाएं और यहां तक कि कानून की शक्ति रखने वाली रूढ़ियां भी शामिल हैं। राज्य कार्यकारी आदेशों के जरिए अधिकारों को नहीं छीन सकता।
      🚫 परित्याग का सिद्धांत
      भारत में कोई व्यक्ति अपने मूल अधिकारों का परित्याग नहीं कर सकता। चूंकि ये अधिकार सार्वजनिक हित के लिए हैं, संविधान आपकी रक्षा आपकी अपनी सहमति (अधिकार छोड़ने की) से भी करता है।
      निष्कर्ष अनुच्छेद 12 लक्ष्य की पहचान करता है, अनुच्छेद 13 रक्षा कवच (न्यायिक समीक्षा) प्रदान करता है, और अनुच्छेद 14 भारतीय लोकतंत्र में निष्पक्षता की भावना स्थापित करता है।

      यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (08 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

      पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (जनसंख्या और संबंधित मुद्दे); GS पेपर 2 (शासन; नीतियां और हस्तक्षेप)।

      • संदर्भ: भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने अधिसूचित किया है कि जनगणना 2027 का पहला चरण—मकान सूचीकरण (Houselisting Operations – HLO)—1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक चलेगा।
      • मुख्य बिंदु:
        • डिजिटल जनगणना: यह भारत के इतिहास की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
        • जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार, फरवरी 2027 में दूसरे चरण के दौरान जातिगत पहचान की गणना की जाएगी।
        • मकान सूचीकरण चरण: प्रत्येक राज्य में 30 दिनों की अवधि में आयोजित, इसमें आवास संरचना, अनाज की खपत और पीने के पानी के स्रोत जैसे 35 प्रश्न शामिल होंगे।
        • स्व-गणना (Self-Enumeration): घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों के पास खुद से जानकारी भरने (Self-enumeration) का विकल्प होगा।
      • UPSC प्रासंगिकता: “जनसांख्यिकी”, “सामाजिक न्याय (जाति जनगणना)” और “डिजिटल गवर्नेंस” के लिए महत्वपूर्ण।
      • विस्तृत विश्लेषण:
        • लॉजिस्टिक पैमाना: डेटा संग्रह और पर्यवेक्षण के लिए गणनाकारों और पर्यवेक्षकों सहित लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
        • योजना का आधार: जनगणना के आंकड़े विभिन्न गणनाओं और अनुपातों का आधार बनते हैं, जिनका उपयोग केंद्रीय बजट तैयार करने और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।

      पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां)।

      • संदर्भ: नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के विस्तार और इसके निरीक्षण के लिए किसी वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) की कमी की आलोचना।
      • मुख्य बिंदु:
        • पहुंच का विस्तार: इसका उपयोग काफी बढ़ गया है, प्रति माह लगभग 45,000 अनुरोध आ रहे हैं। अब पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर तक के अधिकारियों को इसकी पहुंच दी गई है।
        • NPR एकीकरण: रिपोर्टों के अनुसार NATGRID को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 119 करोड़ निवासियों का विवरण है।
        • “गांडीव” (Gandiva) इंजन: एक विश्लेषणात्मक इंजन का उपयोग किया जा रहा है जो बिखरे हुए रिकॉर्ड्स को जोड़कर व्यक्तियों की सटीक पहचान करने में सक्षम है।
      • UPSC प्रासंगिकता: “निगरानी बनाम निजता”, “मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)” और “आंतरिक सुरक्षा बुनियादी ढांचा”।
      • विस्तृत विश्लेषण:
        • वैधानिक निरीक्षण की कमी: नेटग्रिड को संसद के अधिनियम के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से मंजूरी दी गई थी, जिससे स्वतंत्र निरीक्षण पर संवैधानिक प्रश्न उठते हैं।
        • पक्षपात का जोखिम: संपादकीय चेतावनी देता है कि एल्गोरिदम डेटा में मौजूद सामाजिक पूर्वाग्रहों (जाति, धर्म या भूगोल) को दोहरा सकते हैं, जिससे गलत पहचान और उत्पीड़न की संभावना बढ़ सकती है।

      पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; विकास)।

      • संदर्भ: केंद्र सरकार के प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.5% से अधिक है।
      • मुख्य बिंदु:
        • विकास पथ: जहाँ वर्ष की पहली छमाही में विकास दर 7.8% और 8.2% रही, वहीं दूसरी छमाही में इसके घटकर 6.8% रहने की उम्मीद है।
        • बाहरी चुनौतियाँ: कपड़ा, परिधान और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
        • क्षेत्रीय प्रदर्शन: सेवा क्षेत्र (Tertiary Sector) में 9.1% की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि खनन क्षेत्र में 0.7% की गिरावट का अनुमान है।
      • UPSC प्रासंगिकता: “आर्थिक विकास”, “निर्यात क्षेत्र की चुनौतियां” और “बजटीय गणना”।
      • विस्तृत विश्लेषण:
        • उपभोक्ता व्यय: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) के 7% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष के 7.2% से थोड़ा कम है।
        • बजट का आधार: प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) अब तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पूरे वर्ष के विकास का पूर्वानुमान है और यह केंद्रीय बजट की तैयारी का आधार बनता है।

      पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; जलवायु परिवर्तन)।

      • संदर्भ: पेरिस सम्मेलन की प्रतिबद्धताओं पर भारत की प्रगति का मूल्यांकन, जिसमें उत्सर्जन तीव्रता (Intensity) में कमी और पूर्ण उत्सर्जन (Absolute Emissions) के बीच संघर्ष को रेखांकित किया गया है।
      • मुख्य बिंदु:
        • उत्सर्जन तीव्रता: भारत ने 2020 तक अपनी उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36% की कमी की (2005 के आधार पर), जिससे अपना मूल लक्ष्य समय से पहले ही पूरा कर लिया।
        • उत्पादन अंतराल: जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 51% तक पहुँचने के बावजूद, बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी अभी भी 70% से अधिक है क्योंकि यह “बेसलोड” बिजली प्रदान करता है।
        • वन क्षेत्र की परिभाषा: ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023’ की आलोचना की गई है क्योंकि इसमें एकल-कृषि (Monocultures) और वृक्षारोपण को भी वन क्षेत्र में शामिल किया गया है।
      • UPSC प्रासंगिकता: “जलवायु परिवर्तन शमन”, “नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति” और “सतत विकास लक्ष्य”।
      • विस्तृत विश्लेषण:
        • भंडारण की समस्या: स्थापित क्षमता को निरंतर बिजली उत्पादन में बदलने के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के बड़े पैमाने पर विस्तार की आवश्यकता है। वर्तमान में यह केवल 500 MWh है, जबकि 2029-30 तक लक्ष्य 336 GWh का है।
        • पूर्ण उत्सर्जन: जीडीपी विकास उत्सर्जन वृद्धि से तेज रही है, जिसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में कुल उत्सर्जन कम हुए बिना उत्सर्जन तीव्रता में गिरावट आई है।

      पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)।

      • संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मन की बात” संबोधन के बाद सूक्ष्मजीवरोधी प्रतिरोध (AMR) पर कार्रवाई तेज करने की आवश्यकता पर चर्चा।
      • मुख्य बिंदु:
        • तर्कहीन उपयोग: भारत में AMR का सबसे बड़ा कारण जनता द्वारा एंटीबायोटिक्स का बिना सोचे-समझे और अंधाधुंध उपयोग है।
        • निगरानी अंतराल: वर्तमान में AMR की निगरानी मुख्य रूप से शहरी और बड़े मेडिकल कॉलेजों (60 लैब) तक सीमित है, जबकि ग्रामीण और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को छोड़ दिया गया है।
        • ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण: इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की अंतर्संबंधता को पहचानना आवश्यक है।
      • UPSC प्रासंगिकता: “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति”, “संक्रामक रोग” और “सरकारी जागरूकता अभियान”।
      • विस्तृत विश्लेषण:
        • कार्रवाई का आह्वान: विशेषज्ञों का तर्क है कि एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटासेट में निजी अस्पतालों और प्राथमिक केंद्रों का डेटा भी शामिल होना चाहिए ताकि प्रतिरोध की सही तस्वीर सामने आए।
        • नीतिगत प्रभाव: पीएम के संबोधन से इस विषय के मुख्यधारा में आने की उम्मीद है, जिससे प्रयोगशाला आधारित चेतावनियों को व्यापक सार्वजनिक आंदोलन में बदला जा सकेगा।

      संपादकीय विश्लेषण

      08 जनवरी, 2026
      GS-1 समाज
      📊 जनगणना 2027: डिजिटल मील का पत्थर
      भारत की पहली डिजिटल जनगणना अधिसूचित; हाउसलिस्टिंग अप्रैल 2026 में शुरू होगी। बड़ी उपलब्धि: स्वतंत्र भारत में पहली बार दूसरे चरण में जाति गणना की जाएगी। 30 लाख कर्मी उपभोग और आवास सहित 35 मापदंडों पर डेटा एकत्र करेंगे।
      GS-3 सुरक्षा
      👁️ नेटग्रिड (NATGRID): निगरानी बनाम कानून
      नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को NPR (119 करोड़ निवासी) के साथ एकीकृत किया गया। “गांडीव” इंजन खंडित रिकॉर्ड के मिलान में सक्षम। मुख्य चिंता: प्रति माह 45,000 अनुरोधों तक पहुँचने के बावजूद इसके स्वतंत्र निरीक्षण के लिए वैधानिक ढांचे की कमी।
      GS-3 अर्थव्यवस्था
      📈 GDP आउटलुक: 7.4% वृद्धि का अनुमान
      FAE ने वित्त वर्ष 26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान लगाया है। चुनौतियां: कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर 50% अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव। सेवा क्षेत्र (9.1%) और खनन (-0.7%) में भारी अंतर।
      GS-3 पर्यावरण
      🔋 जलवायु लक्ष्य और भंडारण अंतराल
      उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी। समस्या: ‘बेसलोड’ बिजली के रूप में कोयला अब भी 70% उत्पादन करता है। मुख्य बाधा: अक्षय ऊर्जा के लिए भारत को अपनी भंडारण क्षमता वर्तमान 500 MWh से बढ़ाकर 2030 तक 336 GWh करनी होगी।
      GS-2 स्वास्थ्य
      💊 AMR: शहरी केंद्रों से परे निगरानी
      प्रधानमंत्री के “मन की बात” संबोधन का उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को मुख्यधारा में लाना है। निगरानी अंतराल: वर्तमान में केवल 60 शहरी लैब तक सीमित। समाधान: प्राथमिक स्वास्थ्य और निजी डेटासेट को एकीकृत करने वाला “वन हेल्थ” दृष्टिकोण।

      यहाँ भारत की भू-राजनीतिक सीमाओं, पर्वतीय दर्रों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमियों (Wetlands) का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

      भारत सात देशों के साथ अपनी जमीनी सीमाएँ साझा करता है। ये सीमाएँ लंबाई और भौगोलिक भू-भाग के मामले में काफी भिन्न हैं।

      रैंकपड़ोसी देशसीमा की लंबाई (लगभग)मुख्य साझा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
      1बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
      2चीन3,488 किमीलद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
      3पाकिस्तान3,323 किमीगुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख
      4नेपाल1,751 किमीउत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम
      5म्यांमार1,643 किमीअरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम
      6भूटान699 किमीसिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश
      7अफगानिस्तान106 किमीलद्दाख (पी.ओ.के. क्षेत्र)

      पर्वतीय दर्रे (ला) पर्वत श्रृंखलाओं के बीच के प्राकृतिक मार्ग होते हैं। ये व्यापार, यात्रा और सैन्य रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

      • लद्दाख और जम्मू-कश्मीर:
        • ज़ोजिला (Zoji La): श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
        • खारदुंग ला (Khardung La): दुनिया की सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़कों में से एक के रूप में जाना जाता है।
        • बनिहाल दर्रा (Banihal Pass): कश्मीर घाटी को बाहरी हिमालय (जम्मू) से जोड़ता है।
      • हिमाचल प्रदेश:
        • रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass): कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है।
        • शिपकी ला (Shipki La): हिमाचल प्रदेश को तिब्बत (चीन) से जोड़ता है।
      • सिक्किम:
        • नाथू ला (Nathu La): एक प्राचीन सिल्क रूट शाखा जो सिक्किम को तिब्बत से जोड़ती है।
        • जेलेप ला (Jelep La): सिक्किम को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है।
      • अरunachal प्रदेश:
        • बोमडिला (Bomdi La): अरुणाचल प्रदेश को ल्हासा से जोड़ता है।

      आर्द्रभूमियाँ “जैविक सुपरमार्केट” हैं जो विशाल खाद्य जाल और जल शुद्धिकरण प्रदान करती हैं। भारत में 80 से अधिक रामसर स्थल हैं।

      • चिल्का झील (ओडिशा): भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रवास स्थल।
      • केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान): एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि और प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य (जिसे पहले भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था)।
      • वुलर झील (जम्मू और कश्मीर): एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की झीलों में से एक, जो विवर्तनिक गतिविधि (Tectonic activity) से बनी है और झेलम नदी द्वारा पोषित है।
      • सांभर झील (राजस्थान): भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय नमक की झील।
      • अष्टमुडी आर्द्रभूमि (केरल): एक अद्वितीय ताड़ के आकार का मुहाना (Estuary), जो स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
      • भोज आर्द्रभूमि (मध्य प्रदेश): भोपाल शहर में स्थित दो झीलें, जो निवासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराती हैं।
      श्रेणीमुख्य बिंदुभौगोलिक केंद्र
      सबसे लंबी सीमाबांग्लादेशपूर्वी भारत
      सबसे ऊँचा दर्राखारदुंग लालद्दाख श्रेणी
      सबसे बड़ी आर्द्रभूमिसुंदरबन / चिल्कातटीय क्षेत्र
      सबसे छोटी सीमाअफगानिस्तानउत्तर-पश्चिमी लद्दाख

      मानचित्र पर पड़ोसी देशों के साथ लगने वाले राज्यों के क्रम (उत्तर-से-दक्षिण और पूर्व-से-पश्चिम) को ध्यान से देखें, क्योंकि UPSC अक्सर ऐसे प्रश्न पूछता है।

      सीमाएँ और प्रवेश द्वार

      भू-राजनीति
      🚩 राष्ट्रीय सीमाएँ
      भारत सात देशों के साथ थल सीमा साझा करता है, विशाल 4,096 किमी बांग्लादेश सीमा से लेकर 106 किमी की छोटी अफगानिस्तान पट्टी तक।
      देश लंबाई प्रमुख साझा क्षेत्र
      बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य
      चीन3,488 किमीलद्दाख, अरुणाचल प्रदेश
      पाकिस्तान3,323 किमीराजस्थान, पंजाब, J&K
      🎯 मिशन: नेपाल के साथ सीमा साझा करने वाले पांच भारतीय राज्यों की पहचान करें।
      मार्ग (Navigation)
      🏔️ पर्वतीय दर्रे (La)
      नाथू ला और ज़ोजी ला जैसे रणनीतिक प्रवेश द्वार दुनिया की सबसे ऊँची श्रेणियों के बीच महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग प्रदान करते हैं।
      🎯 मिशन: खारदुंग ला को लोकेट करें और एक मोटर योग्य सड़क के रूप में इसके महत्व को नोट करें।
      पारिस्थितिकी
      🦆 रामसर आर्द्रभूमि (Wetlands)
      भारत के ‘जैविक सुपरमार्केट’ में चिल्का झील और वुलर झील जैसे पारिस्थितिक रूप से समृद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
      🎯 मिशन: झेलम नदी के मार्ग को वुलर झील के साथ उसके जुड़ाव तक ट्रैक करें।

      Dainik CSAT Quiz in Hindi – January 8, 2026

      Dainik CSAT Quiz (8 January 2026)
      दैनिक CSAT क्विज़

      दैनिक CSAT क्विज़

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        Dainik GS Quiz in Hindi – January 8, 2026

        Dainik GS Quiz (8 January 2026)
        दैनिक GS क्विज़

        दैनिक GS क्विज़

        8:00

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          IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 7 जनवरी 2026 (Hindi)

          यह अध्याय “राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य” हमें बताता है कि कैसे लगभग 3,000 से 2,500 साल पहले छोटे कबीलों (जनों) से बड़े संगठित राज्यों का उदय हुआ और शासन की विभिन्न प्रणालियाँ विकसित हुईं।

          लगभग 3,000 साल पहले, राजा बनने की प्रक्रिया में बदलाव आया। अब कुछ लोग बड़े-बड़े यज्ञों का आयोजन करके राजा के रूप में प्रतिष्ठित होने लगे।

          • अश्वमेध यज्ञ (घोड़े की बलि): यह एक प्रमुख अनुष्ठान था जिसमें एक घोड़े को राजा के आदमियों की देखरेख में स्वतंत्र घूमने के लिए छोड़ दिया जाता था।
          • यज्ञ का महत्व: यदि कोई दूसरा राजा घोड़े को रोकता था, तो उसे युद्ध करना पड़ता था; यदि वे उसे जाने देते थे, तो इसका अर्थ था कि उन्होंने यज्ञ करने वाले राजा को अधिक शक्तिशाली स्वीकार कर लिया है।
          • राजा की भूमिका: वह इस आयोजन का मुख्य केंद्र होता था। वह अक्सर एक विशेष सिंहासन या बाघ की खाल पर बैठता था, जबकि उसका सारथी युद्ध के मैदान में उसकी वीरता की कहानियाँ सुनाता था।
          • वर्ण व्यवस्था (The Varna System): पुरोहितों ने समाज को चार समूहों में विभाजित किया था जिन्हें ‘वर्ण’ कहा जाता था। प्रत्येक वर्ण के कार्य जन्म के आधार पर निर्धारित थे:
            1. ब्राह्मण: वे वेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करते थे, जिसके लिए उन्हें उपहार मिलते थे।
            2. क्षत्रिय (शासक): इनका काम युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।
            3. वैश्य (कृषक/व्यापारी): इनमें किसान, पशुपालक और व्यापारी आते थे। क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही यज्ञ कर सकते थे।
            4. शूद्र: इन्हें अन्य तीन समूहों की सेवा करनी पड़ती थी। ये कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे और न ही वेद पढ़ सकते थे।
            5. अछूत: बाद के समय में शिल्पकारों, शिकारियों और शवों को दफनाने वालों के एक समूह को अछूत माना जाने लगा।

          जैसे-जैसे राजाओं ने बड़े यज्ञ किए, उन्हें अब केवल कबीलों का राजा न मानकर ‘जनपदों’ (जहाँ ‘जन’ ने अपने पैर रखे और बस गए) का राजा माना जाने लगा।

          • जनपद: पुरातत्वविदों ने पुराना किला (दिल्ली) और हस्तिनापुर (मेरठ के पास) जैसी बस्तियों की खोज की है। यहाँ लोग झोपड़ियों में रहते थे और चावल, गेहूँ, गन्ना जैसी फसलें उगाते थे।
          • महाजनपद: लगभग 2,500 साल पहले, कुछ जनपद अन्य की तुलना में अधिक शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हो गए। इन्हें ‘महाजनपद’ कहा गया।
          • किलेबंदी (Fortification): अधिकांश महाजनपदों की राजधानियों के चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊँची और मज़बूत दीवारें बनाई गई थीं। ये सुरक्षा के लिए, शक्ति के प्रदर्शन के लिए और जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए बनाई जाती थीं।
          • सेना और कर (Taxes): राजाओं ने अब नियमित और वेतनभोगी सेनाएँ रखना शुरू कर दिया। किलों के निर्माण और सेना के खर्च के लिए, वे अब उपहारों के बजाय नियमित कर वसूलने लगे।

          कृषि में दो बड़े बदलाव आए जिससे खाद्य उत्पादन में वृद्धि हुई:

          1. लोहे के हल के फाल: अब लकड़ी के हल के स्थान पर लोहे के फाल का उपयोग होने लगा, जिससे कठोर जमीन को आसानी से जोता जा सका और अधिक अनाज पैदा हुआ।
          2. धान का प्रत्यारोपण (Transplantation): बीजों को बिखेरने के बजाय, अब धान के पौधे तैयार कर उन्हें खेतों में लगाया जाने लगा। इससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ गई और पैदावार अधिक हुई।
          • कर (Tax): किसान अपनी उपज का 1/6 हिस्सा कर के रूप में देते थे, जिसे ‘भाग’ कहा जाता था। शिल्पकार श्रम के रूप में कर चुकाते थे, जबकि पशुपालक जानवरों या पशु उत्पादों के रूप में कर देते थे।

          अध्याय में शासन की दो अलग-अलग प्रणालियों का उल्लेख है: राजतंत्र और गणतंत्र

          • भूगोल: मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया। गंगा और सोन नदियाँ यहाँ से बहती थीं, जो परिवहन, जल आपूर्ति और जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण थीं।
          • संसाधन: यहाँ के जंगलों से सेना के लिए हाथी और इमारतों के निर्माण के लिए लकड़ी मिलती थी। लोहे की खदानों से मज़बूत हथियार बनाने के लिए लोहा मिलता था।
          • शासक: बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्म नन्द जैसे शक्तिशाली राजाओं ने इस साम्राज्य का विस्तार किया।
          • राजधानी: पहले राजगृह (बिहार) मगध की राजधानी थी, जिसे बाद में पाटलिपुत्र (पटना) स्थानांतरित कर दिया गया।
          • अलग शासन व्यवस्था: मगध के विपरीत, वज्जि में ‘गण’ या ‘संघ’ शासन प्रणाली थी, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
          • कई शासक: गण या संघ में एक नहीं बल्कि कई शासक (राजा) होते थे जो मिलकर शासन करते थे।
          • सभाएँ: ये राजा सभाओं में मिलते थे और चर्चा तथा बहस के माध्यम से निर्णय लेते थे।
          • वर्जित: महिलाओं, दासों और ‘कम्मकारों’ (मजदूरों) को इन सभाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।
          समयघटना
          लगभग 3000 साल पहलेयज्ञों के माध्यम से नए प्रकार के राजाओं का उदय।
          लगभग 2500 साल पहलेमहाजनपदों का उदय और किलेबंद शहरों का विकास।
          लगभग 2300 साल पहलेसिकंदर का आक्रमण और बौद्ध ग्रंथों का लेखन।
          लगभग 1500 साल पहलेगुप्त शासकों द्वारा गणों/संघों पर विजय और उनका अंत।

          👑 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

          🔱 अनुष्ठान और वर्ण
          राजाओं का चुनाव अश्वमेध जैसे यज्ञों द्वारा होने लगा। समाज जन्म के आधार पर 4 वर्णों में विभाजित था:
          ब्राह्मण: वेदों का अध्ययन/यज्ञ करना
          क्षत्रिय: युद्ध करना और रक्षा करना
          वैश्य: किसान, पशुपालक और व्यापारी
          शूद्र: अन्य तीन वर्गों की सेवा करना
          🧱 महाजनपद
          2,500 साल पहले कुछ जनपद अधिक महत्वपूर्ण हो गए, जिन्हें महाजनपद कहा गया। इनकी विशाल किलेबंदी होती थी और नियमित सेनाओं के लिए भाग (उपज का 1/6 हिस्सा) नामक कर लिया जाता था।
          🌾 कृषि में परिवर्तन
          दो बड़े बदलाव आए:
          1. लोहे के फाल: कठोर जमीन को आसानी से जोता जाने लगा।
          2. धान का प्रत्यारोपण: बीजों को छिड़कने के बजाय पौधों को रोपकर खेती शुरू हुई, जिससे पैदावार बढ़ गई।
          ⚖️ सत्ता के दो रूप
          मगध: नदियों और लोहे की खानों के कारण सबसे शक्तिशाली राजतंत्र बना।
          वज्जि: यहाँ शासन का स्वरूप गण या संघ था, जहाँ कई शासक (राजा) मिलकर सभाओं में चर्चा के जरिए निर्णय लेते थे।
          समयरेखा 3,000y पहले: नए राजाओं का उदय • 2,500y पहले: महाजनपदों का काल • 2,300y पहले: सिकंदर का आक्रमण • 1,500y पहले: गण या संघों का अंत।
          📂

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          सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य

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          भारतीय संवैधानिक और कानूनी ढांचे के आधार पर, नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके और इसे खोने के तीन तरीके बताता है।

          • 1 जुलाई, 1987 से पहले: भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, चाहे उसके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
          • 1 जुलाई, 1987 – 3 दिसंबर, 2004: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक होगा यदि जन्म के समय उसके माता-पिता में से कम से कम कोई एक भारत का नागरिक हो।
          • 3 दिसंबर, 2004 के बाद: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक माना जाएगा यदि उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा ‘अवैध प्रवासी’ (Illegal migrant) न हो।
          • यह भारत के बाहर पैदा हुए लोगों पर लागू होता है।
          • यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है, तो वह भारत का नागरिक हो सकता है यदि उसके पिता (1992 के बाद माता-पिता में से कोई भी) जन्म के समय भारत के नागरिक थे।
          • 3 दिसंबर, 2004 के बाद, ऐसे जन्मों का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास (Consulate) में कराना अनिवार्य है।

          केंद्र सरकार आवेदन पर किसी भी व्यक्ति (अवैध प्रवासी को छोड़कर) को नागरिक के रूप में पंजीकृत कर सकती है, यदि वे निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:

          • भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) जो सात साल से भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हों।
          • वे व्यक्ति जो भारतीय नागरिकों से विवाहित हैं और पंजीकरण से पहले सात साल से भारत में रह रहे हों।
          • भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।

          कोई भी विदेशी नागरिक नागरिकता प्राप्त कर सकता है यदि वह 12 वर्षों से भारत में रह रहा हो (आवेदन से ठीक 1 वर्ष पहले और पिछले 14 वर्षों में से कुल 11 वर्ष) और निम्नलिखित योग्यताएं रखता हो:

          • उसका चरित्र अच्छा हो।
          • संविधान की आठवीं अनुसूची में निर्दिष्ट किसी एक भाषा का ज्ञान हो।
          • उसका इरादा भारत में ही रहने का हो।

          यदि कोई विदेशी क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पुडुचेरी या गोवा का संघ में शामिल होना), तो भारत सरकार उन व्यक्तियों को निर्दिष्ट करती है जो भारत के नागरिक होंगे।

          • कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता त्यागने की घोषणा कर सकता है।
          • जब कोई व्यक्ति नागरिकता त्यागता है, तो उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिग बच्चा भी अपनी भारतीय नागरिकता खो देता है (हालाँकि, बच्चा 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर इसे पुनः प्राप्त कर सकता है)।
          • भारत ‘एकल नागरिकता’ के सिद्धांत का पालन करता है।
          • यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वचालित रूप से समाप्त हो जाती है।

          केंद्र सरकार द्वारा निम्नलिखित आधारों पर किसी व्यक्ति की नागरिकता अनिवार्य रूप से समाप्त की जा सकती है:

          • यदि नागरिकता धोखाधड़ी (Fraud) से प्राप्त की गई हो।
          • नागरिक ने भारत के संविधान के प्रति अनिष्ठा (Disloyalty) दिखाई हो।
          • युद्ध के दौरान नागरिक ने शत्रु के साथ अवैध रूप से व्यापार या संचार किया हो।
          • पंजीकरण या देशीयकरण के पाँच वर्षों के भीतर, उस नागरिक को किसी भी देश में दो साल के लिए जेल हुई हो।

          🇮🇳 नागरिकता अधिनियम, 1955

          👶 अर्जन: जन्म द्वारा
          मानदंड मिट्टी के अधिकार (Jus Soli) से रक्त के अधिकार (Jus Sanguinis) की ओर विकसित हुए। 2004 के बाद, दोनों माता-पिता नागरिक होने चाहिए, या एक नागरिक और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।
          ✈️ अर्जन: वंश द्वारा
          भारत के बाहर जन्मे लोगों के लिए। 1992 से, माता या पिता में से कोई भी नागरिक हो सकता है। 2004 के बाद के जन्मों का 1 वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास में पंजीकरण अनिवार्य है।
          ✍️ पंजीकरण द्वारा
          भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIOs) या भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी पर लागू। आवेदन करने से पहले भारत में 7 वर्ष तक सामान्य निवास आवश्यक है।
          🏛️ प्राकृतिकरण द्वारा
          भारत में 12 वर्ष से रह रहे विदेशियों के लिए। अच्छा चरित्र और 8वीं अनुसूची की किसी भाषा का ज्ञान होना आवश्यक है।
          🗺️ क्षेत्र समावेश और त्याग
          क्षेत्र समावेश: नए क्षेत्र के भारत में मिलने पर सरकार नागरिकता देती है। स्वेच्छा से त्याग: अपनी इच्छा से नागरिकता छोड़ना; बच्चों की नागरिकता भी समाप्त हो जाती है।
          🚫 अनिवार्य समाप्ति
          बर्खास्तगी: विदेशी नागरिकता लेने पर स्वतः अंत। वंचित करना: धोखाधड़ी, संविधान के प्रति अनादर या युद्ध के समय शत्रु की मदद करने पर सरकार द्वारा निष्कासन।
          विशेष तथ्य नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) ने पड़ोसी देशों के कुछ धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए प्राकृतिकरण की अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया है।

          यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (07 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

          पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था और शासन; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)

          • संदर्भ: भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए इसे “समांतर NRC” (parallel NRC) होने के दावों को खारिज कर दिया।
          • मुख्य बिंदु:
            • संवैधानिक कर्तव्य: आयोग का तर्क है कि अनुच्छेद 324 के तहत उसका यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी विदेशी देश की मतदाता सूची में स्थान न पाए।
            • NRC से भिन्नता: आयोग के अनुसार NRC में सभी नागरिकों का पंजीकरण होता है, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से ऊपर के स्वस्थ दिमाग वाले नागरिकों को ही शामिल किया जाता है।
            • बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अकेले उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए (कुल सूची का 18.7%), जिसका मुख्य कारण स्थायी प्रवास और मृत्यु बताया गया है।
          • UPSC प्रासंगिकता: “संवैधानिक निकाय (चुनाव आयोग)”, “चुनावी सुधार” और “नागरिकता कानून” के लिए महत्वपूर्ण।
          • विस्तृत विश्लेषण:
            • नागरिक-केंद्रित शासन: आयोग के वकील ने तर्क दिया कि संविधान “नागरिक-केंद्रित” है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी के लिए नागरिकता मुख्य आधार बन जाती है।
            • राजनीतिक विरोध: पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने तकनीकी खामियों का आरोप लगाया है और कहा है कि आयोग एक राजनीतिक दल द्वारा विकसित ऐप का उपयोग कर रहा है।

          पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन; सामाजिक न्याय) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था- श्रम सुधार)

          • संदर्भ: एक निजी सदस्य विधेयक के माध्यम से भारत के कार्यबल में ‘बर्नआउट’ (काम का अत्यधिक तनाव) और मानसिक स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए ‘डिस्कनेक्ट होने के अधिकार’ (Right to Disconnect) की मांग की गई है।
          • मुख्य बिंदु:
            • बर्नआउट डेटा: ILO के अनुसार, भारत का 51% कार्यबल प्रति सप्ताह 49 घंटे से अधिक काम करता है (वैश्विक स्तर पर दूसरा), और 78% कर्मचारी काम के तनाव (Burnout) की रिपोर्ट करते हैं।
            • प्रस्तावित संरक्षण: विधेयक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निर्धारित घंटों के बाद काम के कॉल या मैसेज का जवाब न देने पर कर्मचारियों को दंडित न किया जाए।
            • वैश्विक उदाहरण: फ्रांस (2017 से), पुर्तगाल, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने श्रम कानूनों में इसे पहले ही शामिल कर लिया है।
          • UPSC प्रासंगिकता: “श्रम सुधार”, “मानसिक स्वास्थ्य” और “कार्य-जीवन संतुलन” (Work-Life Balance) के लिए महत्वपूर्ण।
          • विस्तृत विश्लेषण:
            • कानूनी कमियाँ: ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (2020)’ अक्सर अनुबंधात्मक और ‘गिग’ श्रमिकों (Gig workers) को शोषणकारी घंटों से बचाने में विफल रहती है।
            • उत्पादकता का भ्रम: संपादकीय का तर्क है कि थका हुआ कर्मचारी कम उत्पादक होता है; विश्राम का समय स्थायी आर्थिक विकास के लिए एक अनिवार्य शर्त है।

          पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)

          • संदर्भ: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
          • मुख्य बिंदु:
            • बल का अवैध प्रयोग: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है (सिवाय आत्मरक्षा या सुरक्षा परिषद की अनुमति के), जो इस मामले में लागू नहीं थे।
            • राज्य प्रमुख की उन्मुक्ति (Immunity): अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, राज्य प्रमुखों को विदेशी अदालतों के आपराधिक क्षेत्राधिकार से व्यक्तिगत उन्मुक्ति प्राप्त होती है।
            • चीन का झुकाव: वेनेजुएला का झुकाव चीन की ओर बढ़ा है; 2014 से वेनेजुएला के कुल हथियार आयात का 46% चीन से रहा है।
          • UPSC प्रासंगिकता: “अंतरराष्ट्रीय कानून”, “वैश्विक भू-राजनीति” और “भारत की विदेश नीति की चुनौतियां” के लिए महत्वपूर्ण।
          • विस्तृत विश्लेषण:
            • डिजिटल संप्रभुता: यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि राजनीतिक संप्रभुता डिजिटल संप्रभुता से अलग नहीं है; विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता नेतृत्व को ‘ट्रैकिंग’ के प्रति असुरक्षित बनाती है।
            • आर्थिक वर्चस्व: इस कदम को ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ (Monroe Doctrine) के पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करना है।

          पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; संरक्षण; जलवायु परिवर्तन)

          • संदर्भ: एक विश्लेषण कि क्यों घास के मैदानों और सवाना को जंगलों के साथ राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं (NDCs) में एकीकृत किया जाना चाहिए।
          • मुख्य बिंदु:
            • कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration): घास के मैदान जंगलों की तुलना में बेहतर और अधिक स्थिर कार्बन सिंक हो सकते हैं, फिर भी उन्हें COP30 जैसी वार्ताओं से बाहर रखा गया है।
            • नीतिगत समस्या: भारत में घास के मैदान 18 अलग-अलग मंत्रालयों के अंतर्गत आते हैं और अक्सर उन्हें “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में लेबल किया जाता है।
            • अंतरराष्ट्रीय मान्यता: संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किया है।
          • UPSC प्रासंगिकता: “जैव विविधता संरक्षण”, “जलवायु शमन रणनीतियाँ” और “चरवाहों के अधिकार” के लिए महत्वपूर्ण।
          • विस्तृत विश्लेषण:
            • भारत के लिए अवसर: अपने NDCs में घास के मैदानों को मान्यता देकर, भारत अपने जलवायु शमन प्रयासों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दे सकता है।
            • सामाजिक न्याय: चरागाहों की रक्षा करना स्वदेशी लोगों के क्षेत्रीय अधिकारों को मान्यता देने से जुड़ा एक सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है।

          पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; पश्चिम एशिया)

          • संदर्भ: ईरान में राष्ट्रव्यापी आर्थिक विरोध प्रदर्शनों और इसके राजनीतिक जोखिमों का विश्लेषण।
          • मुख्य बिंदु:
            • आर्थिक तनाव: ईरान में खाद्य मुद्रास्फीति 64% तक पहुँच गई है और जून 2025 से रियाल की कीमत में 60% की गिरावट आई है।
            • दैनिक कठिनाइयाँ: बिजली कटौती एक दैनिक वास्तविकता बन गई है और सरकार “फंसी हुई” महसूस कर रही है।
            • दमन का चक्र: बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बाहरी खतरों के बीच सरकार का दमनकारी रुख एक “संकट का चक्र” पैदा कर रहा है।
          • UPSC प्रासंगिकता: “पश्चिम एशिया भू-राजनीति” और “ईरान में भारत के रणनीतिक हित” के लिए महत्वपूर्ण।
          • विस्तृत विश्लेषण:
            • सुधार की अनिवार्यता: संपादकीय का तर्क है कि गहराते आर्थिक संकट के सामने धर्म और राष्ट्रवाद जनता को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते।
            • अमेरिकी नीति की आलोचना: वाशिंगटन की “आर्थिक दबाव” की नीति आम ईरानियों की पीड़ा को बढ़ा रही है और शासन को अधिक संदिग्ध बना रही है।
            • आगे की राह: स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान के नेतृत्व को आंतरिक सुधार शुरू करने और भ्रष्टाचार से निपटने की आवश्यकता है।

          संपादकीय विश्लेषण

          07 जनवरी, 2026
          GS-2 राजव्यवस्था
          🗳️ मतदाता सूची बनाम NRC का डर
          चुनाव आयोग (EC) अनुच्छेद 324 के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करता है। मुख्य प्रवृत्ति: “नागरिक-केंद्रित” सूची सुनिश्चित करने के लिए यूपी में 2.89 करोड़ नाम (सूची का 18.7%) हटाए गए। EC आयु और मानसिक क्षमता के आधार पर मतदाता सूची को NRC से अलग मानता है।
          GS-2 सामाजिक
          📵 ‘राइट टू डिस्कनेक्ट’ विधेयक
          शशि थरूर का विधेयक भारत के ‘बर्नआउट’ संकट को संबोधित करता है जहाँ 51% कर्मचारी सप्ताह में 49 घंटे से अधिक काम करते हैं। प्रस्ताव: काम के घंटों के बाद कॉल इग्नोर करने पर कर्मचारियों को दंड से कानूनी सुरक्षा। लक्ष्य: शोषणकारी श्रम से सतत आर्थिक विकास की ओर बढ़ना।
          GS-2 अंत. संबंध
          🇻🇪 संप्रभुता और अंतर्राष्ट्रीय कानून
          वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की हिरासत की संयुक्त राष्ट्र चार्टर अनुच्छेद 2(4) के उल्लंघन के रूप में आलोचना। यह कदम “डिजिटल संप्रभुता” के जोखिमों को भी उजागर करता है। ध्यान दें: चीन अब वेनेजुएला को 46% हथियारों का निर्यात करता है, जो भू-राजनीतिक बदलाव का संकेत है।
          GS-3 पर्यावरण
          🌾 घास के मैदान: अदृश्य कार्बन सिंक
          घास के मैदान वनों की तुलना में अधिक स्थिर कार्बन सिंक हैं, फिर भी भारत में इन्हें ‘बंजर भूमि’ माना जाता है। UN ने 2026 को अंतर्राष्ट्रीय रेंगलैंड्स (चरागाह) वर्ष घोषित किया है। नीतिगत आवश्यकता: NDCs में घास के मैदानों को शामिल करने के लिए 18 मंत्रालयों का एकीकृत प्रबंधन।
          GS-2 अंत. संबंध
          🇮🇷 ईरान का “संकट चक्र”
          खाद्य मुद्रास्फीति 64% तक पहुँच गई है, जबकि रियाल ने 6 महीने में 60% मूल्य खो दिया है। संपादकीय चेतावनी देता है कि अब धर्म या राष्ट्रवाद आर्थिक दुर्दशा की भरपाई नहीं कर सकते, जिससे दमन के बजाय आंतरिक सुधार आवश्यक हो गए हैं।

          भारत का भूगोल उसके विशाल जल निकासी बेसिनों (Drainage Basins) द्वारा परिभाषित है:

          हिमालयी नदियाँ (The Himalayan Rivers):

          • सिंधु प्रणाली (Indus System): इसमें सिंधु और उसकी पाँच मुख्य सहायक नदियाँ शामिल हैं: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
          • गंगा प्रणाली (Ganga System): यह भागीरथी और अलकनंदा के मिलने से बनती है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन हैं।
          • ब्रह्मपुत्र प्रणाली (Brahmaputra System): यह अरुणाचल प्रदेश के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है और असम से होकर बहती है।

          प्रायद्वीपीय नदियाँ (The Peninsular Rivers):

          • पश्चिम की ओर बहने वाली: नर्मदा और तापी (ये अरब सागर में गिरती हैं)।
          • पूर्व की ओर बहने वाली: महानदी, गोदावरी (प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी), कृष्णा और कावेरी (ये बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं)।

          जैव विविधता के संरक्षण के लिए ये क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

          बाघ अभयारण्य (Project Tiger):

          • कॉर्बेट (उत्तराखंड): भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य।
          • कान्हा और बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश): उच्च बाघ घनत्व के लिए प्रसिद्ध।
          • रणथंभौर (राजस्थान): अपने शुष्क पर्णपाती आवास के लिए जाना जाता है।
          • सुंदरवन (पश्चिम बंगाल): दुनिया का एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास।
          • पेरियार (केरल): एक अनूठा जंगल और झील आधारित रिजर्व।

          प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव:

          • काजीरंगा (असम): ‘एक सींग वाले गेंडे’ के लिए प्रसिद्ध।
          • गिर (गुजरात): ‘एशियाई शेरों’ का अंतिम निवास स्थान।
          • केवलादेव (राजस्थान): एक प्रमुख पक्षी अभयारण्य और आर्द्रभूमि (Wetland)।

          खनिजों और ईंधन में भारत की संपदा का मानचित्रण:

          तेल और प्राकृतिक गैस भंडार:

          • अपतटीय (Offshore): बॉम्बे हाई (महाराष्ट्र) सबसे बड़ा क्षेत्र है।
          • ओंशोर (Onshore): डिगबोई (असम) सबसे पुराना है; बाड़मेर (राजस्थान) और खंभात (गुजरात) प्रमुख आधुनिक क्षेत्र हैं।

          लौह अयस्क और कोयला:

          • लोहा: छोटा नागपुर पठार (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़) में केंद्रित है।
          • कोयला: गोंदवाना क्षेत्रों में पाया जाता है (दामोदर घाटी—झरिया, रानीगंज)।

          बॉक्साइट और तांबा:

          • बॉक्साइट: ओडिशा और गुजरात की पहाड़ियों में पाया जाता है।
          • तांबा: बालाघाट (मध्य प्रदेश) और खेतड़ी (राजस्थान)।
          विशेषताउदाहरणमुख्य स्थान
          प्रमुख नदियाँसिंधु, गंगा, गोदावरीउत्तरी और मध्य भारत के मैदान
          बाघ अभयारण्यजिम कॉर्बेट, सरिस्का, वाल्मीकिहिमालय की तराई और मध्य भारत
          तेल भंडारमुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी बेसिनअपतटीय और पश्चिमी भारत
          वन्यजीवशेर, गेंडा, हाथीगुजरात, असम, कर्नाटक

          UPSC के लिए नदियों के उत्तर-से-दक्षिण क्रम और टाइगर रिजर्व के पूर्व-से-पश्चिम क्रम को मानचित्र पर जरूर देखें।

          भारतीय भूगोल (Indian Geography)

          जल विज्ञान
          🌊 नदी प्रणालियाँ
          भारत का भू-दृश्य सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी हिमालयी नदियों और गोदावरी एवं नर्मदा जैसी प्रायद्वीपीय नदियों द्वारा निर्मित है।
          अभ्यास: पूर्व की ओर बहने वाली नदियों (बंगाल की खाड़ी) और पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों (अरब सागर) के बीच अंतर स्पष्ट करें।
          संरक्षण
          🐯 जैव विविधता हॉटस्पॉट
          काजीरंगा के गैंडों से लेकर गिर के शेरों और जिम कॉर्बेट के बाघों तक, भारत के राष्ट्रीय उद्यान अद्वितीय पारिस्थितिक क्षेत्रों की रक्षा करते हैं।
          अभ्यास: मानचित्र पर सुंदरबन को खोजें और दुनिया के एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास को देखें।
          संसाधन
          ⛏️ खनिज और ऊर्जा संपदा
          ऊर्जा का मुख्य स्रोत बॉम्बे हाई जैसे अपतटीय क्षेत्र और दामोदर घाटी की कोयला खदानें हैं, जबकि छोटा नागपुर पठार लौह अयस्क का हृदय स्थल है।
          अभ्यास: असम के डिगबोई में ‘सबसे पुराने तेल क्षेत्र’ और राजस्थान के खेतड़ी में तांबे की खदानों की पहचान करें।
          त्वरित संदर्भ तालिका
          विशेषता प्रमुख उदाहरण स्थान फोकस
          प्रमुख नदियाँ सिंधु, गंगा, गोदावरी उत्तरी और मध्य मैदान
          बाघ अभयारण्य जिम कॉर्बेट, सरिस्का तलहटी और मध्य भारत
          तेल भंडार मुंबई हाई, डिगबोई अपतटीय और उत्तर-पूर्व
          वन्यजीव शेर, गैंडे, हाथी गुजरात, असम, दक्षिण भारत

          Dainik CSAT Quiz in Hindi – January 7, 2026

          Dainik CSAT Quiz (7 January 2026)
          दैनिक CSAT क्विज़

          दैनिक CSAT क्विज़

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            Dainik GS Quiz in Hindi – January 7, 2026

            Dainik GS Quiz (7 January 2026)
            दैनिक GS क्विज़

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              IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 6 जनवरी 2026 (Hindi)

              यह अध्याय हमें यह समझने में मदद करता है कि प्राचीन साहित्य (वेद) और पुरातात्विक कब्रें (महापाषाण) हज़ारों साल पहले के लोगों के जीवन, विश्वास और सामाजिक संरचनाओं के बारे में क्या जानकारी देती हैं।

              वेद प्राचीन धार्मिक ग्रंथों का एक संग्रह हैं। वेद चार हैं: ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद।

              • ऋग्वेद: यह सबसे पुराना वेद है, जिसकी रचना लगभग 3,500 वर्ष पहले हुई थी। इसमें एक हज़ार से अधिक प्रार्थनाएँ हैं जिन्हें ‘सूक्त’ (जिसका अर्थ है “अच्छी तरह से बोला गया”) कहा जाता है।
              • देवता: ये सूक्त विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति में रचे गए हैं। मुख्य रूप से तीन देवता महत्वपूर्ण थे: अग्नि (आग के देवता), इंद्र (युद्ध के देवता) और सोम (एक पौधा जिससे एक विशेष पेय बनाया जाता था)।
              • मौखिक परंपरा: ऋग्वेद को मूल रूप से पढ़ा नहीं जाता था; इसे उच्चारण और श्रवण (सुनकर) के माध्यम से याद किया जाता था। ऋषि अपने शिष्यों को अक्षरों और शब्दों को बहुत सावधानी से याद करना सिखाते थे। इसे छापा तो केवल 200 साल से भी कम समय पहले गया है।
              • भाषा: इसकी भाषा ‘वैदिक संस्कृत’ है, जो ‘भारोपीय’ (Indo-European) भाषा परिवार का हिस्सा है।

              ऋग्वेद में लोगों का वर्गीकरण उनके काम और समुदाय के आधार पर किया गया है।

              • व्यावसायिक समूह:
                • ब्राह्मण (पुरोहित): वे अनुष्ठान और यज्ञ करते थे।
                • राजा: ये बाद के समय के राजाओं जैसे नहीं थे। इनके पास न तो बड़े महल थे, न ही स्थायी सेना, और न ही वे कर (Tax) वसूलते थे। उस समय राजा का पद वंशानुगत भी नहीं था।
              • समुदाय के लिए शब्द: पूरे समुदाय या जनता के लिए दो शब्दों का प्रयोग होता था— ‘जन’ और ‘विश’ (जिससे वैश्य शब्द निकला है)।
              • आर्य और दास: प्रार्थनाओं की रचना करने वाले स्वयं को ‘आर्य’ कहते थे और अपने विरोधियों को ‘दास’ या ‘दस्यु’ कहते थे। दासों को अक्सर युद्ध में बंदी बनाया जाता था और उन्हें उनके मालिकों की संपत्ति माना जाता था।
              • युद्ध: युद्ध मवेशियों (गायों), उपजाऊ जमीन (चारागाह), पानी और लोगों को बंदी बनाने के लिए लड़े जाते थे। युद्ध में जीते गए धन का कुछ हिस्सा नेताओं के पास रहता था, कुछ पुरोहितों को दिया जाता था और बाकी आम जनता में बाँट दिया जाता था।

              जिस समय उत्तर-पश्चिम में वेदों की रचना हो रही थी, उसी समय दक्कन, दक्षिण भारत, उत्तर-पूर्व और कश्मीर में लोग ‘महापाषाण’ (Megaliths – बड़े पत्थर) बनाने की परंपरा विकसित कर रहे थे।

              • उद्देश्य: इन बड़े पत्थरों को कब्रगाहों को चिह्नित करने के लिए लगाया जाता था। कुछ जमीन के ऊपर दिखते थे और कुछ जमीन के अंदर होते थे।
              • सिस्ट (Cists): कुछ महापाषाणों को ‘सिस्ट’ कहा जाता है, जिनमें ‘पोर्ट-होल’ (एक बड़ा छेद) होता था, जिसका उपयोग बाद में मरने वाले परिवार के सदस्यों के शवों को अंदर लाने के लिए प्रवेश द्वार के रूप में किया जाता था।
              • कब्रों में वस्तुएं: मृतकों को विशेष प्रकार के मिट्टी के बर्तनों के साथ दफनाया जाता था जिन्हें ‘काले और लाल मृदभांड’ (Black and Red Ware) कहा जाता है। इन कब्रों में लोहे के औजार, घोड़े के उपकरण और सोने व पत्थर के गहने भी मिले हैं।
              • सामाजिक अंतर: कब्रों में मिली वस्तुओं से पता चलता है कि समाज में अमीर-गरीब का अंतर था। उदाहरण के लिए, ब्रह्मगिरि में एक व्यक्ति की कब्र में 33 सोने के मनके और शंख मिले हैं, जबकि दूसरी कब्रों में केवल कुछ मिट्टी के बर्तन ही मिले हैं।

              इनामगाँव (घोड़ नदी के किनारे) एक विशिष्ट पुरास्थल है जहाँ लोग 3,600 से 2,700 साल पहले रहते थे।

              • दफनाने की प्रथा: वयस्कों को आमतौर पर जमीन में सीधा लिटाकर दफनाया जाता था, जिनका सिर उत्तर की ओर होता था।
              • विशेष कब्र: एक व्यक्ति को पाँच कमरों वाले घर के आंगन में मिट्टी के एक बड़े जार में बैठा हुआ (पालथी मारकर) दफनाया गया था। इस घर में एक अन्नागार (Granary) भी था, जिससे पता चलता है कि वह शायद गाँव का कोई सरदार रहा होगा।
              • आहार और व्यवसाय: साक्ष्यों से पता चलता है कि वे गेहूँ, जौ, चावल, दाल और जानवरों का मांस (गाय, बकरी, मछली आदि) खाते थे। वे बेर, आँवला और जामुन जैसे फल भी इकट्ठा करते थे।

              लगभग 2,000 साल पहले, चरक नाम के एक प्रसिद्ध चिकित्सक ने ‘चरक संहिता’ नामक पुस्तक लिखी थी। उन्होंने बताया कि मनुष्य के शरीर में 360 हड्डियाँ होती हैं (दांतों, जोड़ों और कार्टिलेज को जोड़कर), जो आधुनिक शरीर रचना विज्ञान द्वारा पहचानी गई 206 हड्डियों से काफी अधिक हैं।

              📖 क्या बताती हैं हमें किताबें और कब्रें

              📜 वेद और ऋग्वेद
              सबसे पुराना वेद ऋग्वेद है (3,500 साल पहले रचना)। इसमें 1000 से ज्यादा प्रार्थनाएँ हैं जिन्हें सूक्त (अच्छी तरह बोला गया) कहते हैं। यह मौखिक परंपरा थी जिसे पढ़ने के बजाय सुना और याद किया जाता था।
              👥 वैदिक समाज
              लोगों का वर्गीकरण काम के आधार पर था: ब्राह्मण (पुरोहित) और राजा। पूरी जनता के लिए जन या ‘विश’ शब्द का प्रयोग होता था, जबकि विरोधियों को दस्यु या ‘दास’ कहा जाता था।
              🪨 महापाषाण (Megaliths)
              कब्रों को चिह्नित करने के लिए इस्तेमाल किए गए “बड़े पत्थर”। कब्रों में अक्सर काले-लाल मिट्टी के बर्तन और लोहे के औजार मिलते थे। ब्रह्मगिरि जैसे स्थलों से दबे लोगों की सामाजिक असमानता का पता चलता है।
              🏺 इनामगाँव और विज्ञान
              घोड़ नदी के तट पर स्थित एक स्थल जहाँ वयस्कों को घर में ही दफनाया जाता था। प्रसिद्ध चिकित्सक चरक (2,000 साल पहले) ने चरक संहिता लिखी और मानव शरीर में 360 हड्डियों की पहचान की।
              समयरेखा 3,500 वर्ष पूर्व: वेदों की रचना शुरू • 3,000 वर्ष पूर्व: महापाषाणों का निर्माण • 2,000 वर्ष पूर्व: चरक की चिकित्सा पुस्तक।
              📂

              कक्षा-6 इतिहास अध्याय-5 PDF

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              नागरिकता व्यक्ति और राज्य के बीच के संबंधों को दर्शाती है। भारत ‘एकल नागरिकता’ (Single Citizenship) का प्रावधान करता है, जिसका अर्थ है कि यहाँ राज्यों के लिए अलग नागरिकता नहीं होती।

              यह अनुच्छेद उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जिनका 26 जनवरी, 1950 को भारत में अधिवास (Domicile) था और जो निम्नलिखित में से कोई एक शर्त पूरी करते थे:

              1. उनका जन्म भारत में हुआ हो।
              2. उनके माता-पिता में से किसी एक का जन्म भारत में हुआ हो।
              3. संविधान लागू होने के ठीक पहले वे कम से कम पांच वर्ष तक भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हों।

              यह उन लोगों से संबंधित है जो पाकिस्तान से भारत आए थे। एक व्यक्ति भारतीय नागरिक बन गया यदि:

              • वह या उसके माता-पिता/दादा-दादी में से कोई अविभाजित भारत में पैदा हुआ हो।
              • यदि वह 19 जुलाई, 1948 से पहले आया हो: वह प्रवास की तिथि से ही सामान्य रूप से भारत का निवासी रहा हो।
              • यदि वह 19 जुलाई, 1948 के बाद आया हो: उसे भारत सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी के पास पंजीकरण कराना आवश्यक था, जिसके लिए उसे कम से कम छह महीने भारत में निवास करना पड़ता था।

              यह अनुच्छेद 5 और 6 के प्रावधानों पर प्रभावी होता है।

              • यदि कोई व्यक्ति 1 मार्च, 1947 के बाद भारत से पाकिस्तान चला गया, तो वह भारत का नागरिक नहीं रहा।
              • हालाँकि, यदि ऐसा व्यक्ति पुनर्वास (Resettlement) के परमिट के तहत भारत वापस आया, तो वह नागरिक बन सकता था (वही नियम लागू होते थे जो 19 जुलाई, 1948 के बाद आने वालों पर लागू थे)।

              यह विदेश (जैसे ब्रिटेन या अमेरिका) में रहने वाले उन लोगों के लिए था जो भारतीय नागरिकता का दावा करना चाहते थे।

              • यदि कोई व्यक्ति या उसके माता-पिता/दादा-दादी अविभाजित भारत में पैदा हुए थे, तो वह उस देश के भारतीय राजनयिक या कांसुलर प्रतिनिधि के पास पंजीकरण कराकर भारत का नागरिक बन सकता था।

              यह एकल नागरिकता के संबंध में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अनुच्छेद है।

              • यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता ग्रहण कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वचालित रूप से समाप्त हो जाती है। भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता।

              यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति, जो उपर्युक्त अनुच्छेदों के तहत भारत का नागरिक है या माना जाता है, वह ऐसा नागरिक बना रहेगा (संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन)।

              अनुच्छेद 5 से 10 केवल संविधान के प्रारंभ (1950) के समय की नागरिकता से संबंधित थे।

              • अनुच्छेद 11 भारत की संसद को यह सर्वोच्च शक्ति देता है कि वह नागरिकता के अर्जन (Acquisition), समाप्ति (Termination) और नागरिकता से जुड़े अन्य सभी मामलों के लिए कानून बना सके।
              • इसी शक्ति के प्रयोग से संसद ने ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ पारित किया।

              संविधान के अनुच्छेद केवल 1950 की स्थिति बताते हैं, जबकि यह अधिनियम वर्तमान में नागरिकता के नियमों को परिभाषित करता है:

              1. जन्म से (By Birth): जन्म की तारीख और माता-पिता की नागरिकता के आधार पर।
              2. वंश के आधार पर (By Descent): भारत के बाहर जन्मे उन लोगों के लिए जिनके माता-पिता भारतीय हों।
              3. पंजीकरण द्वारा (By Registration): भारतीय मूल के व्यक्तियों (PIO) या भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी के लिए (भारत में एक निश्चित अवधि तक रहने के बाद)।
              4. प्राकृतिक रूप से/देशीयकरण द्वारा (By Naturalization): उन विदेशियों के लिए जो 12 वर्षों से भारत में रह रहे हों और विशिष्ट योग्यताएं पूरी करते हों।
              5. क्षेत्र समाविष्टि द्वारा (By Incorporation of Territory): यदि कोई नया क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पुडुचेरी), तो सरकार निर्दिष्ट करती है कि कौन नागरिक बनेगा।
              1. त्याग द्वारा (Renunciation): स्वेच्छा से नागरिकता छोड़ना।
              2. समाप्ति द्वारा (Termination): दूसरे देश की नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता का स्वतः समाप्त होना।
              3. वंचित किए जाने द्वारा (Deprivation): सरकार द्वारा अनिवार्य रूप से नागरिकता छीनना (जैसे यदि नागरिकता धोखाधड़ी से प्राप्त की गई हो)।

              🇮🇳 नागरिकता (अनुच्छेद 5–11)

              📜 अनुच्छेद 5: संविधान का प्रारंभ
              26 जनवरी, 1950 को भारत में अधिवास (Domicile) रखने वाले व्यक्तियों के लिए, जो भारत में जन्मे हों या जिनके माता-पिता भारतीय हों।
              🔄 अनुच्छेद 6 और 7: प्रवासन
              पाकिस्तान से भारत आने वाले और भारत से पाकिस्तान जाने वाले प्रवासियों के अधिकार। 19 जुलाई, 1948 इसके लिए मुख्य कट-ऑफ तिथि है।
              🌍 वैश्विक और एकल नियम
              अनुच्छेद 8 विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (PIOs) के बारे में है। अनुच्छेद 9 के अनुसार, विदेशी नागरिकता लेने पर भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।
              ⚖️ अनुच्छेद 11: संसद की शक्ति
              संविधान ने केवल 1950 की स्थिति को संभाला। संसद के पास नागरिकता के अर्जन और समाप्ति को विनियमित करने की सर्वोच्च शक्ति है, जिससे नागरिकता अधिनियम, 1955 बना।
              ➕ नागरिकता अर्जन के तरीके
              1955 के अधिनियम के तहत: जन्म, वंशानुगत, पंजीकरण, प्राकृतिकरण और क्षेत्र का समावेश (जैसे- पांडिचेरी)।
              ➖ नागरिकता की समाप्ति
              समाप्ति के तीन तरीके: स्वेच्छा से त्याग (Renunciation), बर्खास्तगी (Termination- अन्य देश की नागरिकता लेने पर) या वंचित किया जाना (Deprivation)।
              विशेष तथ्य भारत राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए एकल नागरिकता (Single Citizenship) का पालन करता है, अमेरिका के विपरीत जहाँ दोहरी नागरिकता होती है।

              यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (06 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (ऊर्जा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और उनके अनुप्रयोग)

              • संदर्भ: संसद ने ‘भारत में परमाणु ऊर्जा का सतत दोहन और उन्नति’ (SHANTI) विधेयक पारित कर दिया है, जिससे परमाणु क्षेत्र में दशकों पुराने सरकारी एकाधिकार का अंत हो गया है।
              • मुख्य बिंदु:
                • निजी और विदेशी भागीदारी: यह विधेयक निजी भारतीय कंपनियों और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को खोलता है, जिससे NPCIL का एकाधिकार समाप्त हो गया है।
                • नियंत्रण तंत्र: यह 49% तक निजी भागीदारी की अनुमति देता है, जबकि केंद्र सरकार ईंधन उत्पादन, सुरक्षा और रणनीतिक निरीक्षण जैसे संवेदनशील कार्यों पर 51% नियंत्रण बनाए रखेगी।
                • AERB को वैधानिक दर्जा: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक दर्जा दिया गया है और अब यह केवल कार्यपालिका के बजाय संसद के प्रति जवाबदेह होगा।
                • पारदर्शी उत्तरदायित्व (Liability): बड़े संयंत्रों के लिए उत्तरदायित्व सीमा ₹3,000 करोड़ और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के लिए ₹100 करोड़ निर्धारित की गई है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “ऊर्जा सुरक्षा”, “रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर भारत” और “परमाणु दायित्व कानून” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • रणनीतिक ऊर्जा मिश्रण: इस विधेयक का लक्ष्य 2070 तक भारत के ‘नेट-जीरो’ लक्ष्यों को प्राप्त करना है। यह कोयला आधारित बिजली की तुलना में स्वच्छ और 24 घंटे उपलब्ध रहने वाली ‘बेसलोड पावर’ प्रदान करके ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाएगा।
                • जवाबदेही संबंधी चिंताएँ: विपक्ष का तर्क है कि यह विधेयक आपूर्तिकर्ता की जिम्मेदारी को हटाकर और ऑपरेटर की जिम्मेदारी को वास्तविक आपदा लागत (जैसे फुकुशिमा) से बहुत कम रखकर जवाबदेही को कमजोर करता है।
                • पारदर्शिता का टकराव: विधेयक की धारा 39 ‘आरटीआई अधिनियम 2005’ के प्रभाव को खत्म करने का प्रयास करती है, जिससे इस क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जनता के लिए प्रतिबंधित हो सकती है।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था और शासन; शासन, पारदर्शिता और जवाबदेही)

              • संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के साजिश मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर निर्णय लेने के लिए “भागीदारी का पदानुक्रम” (Hierarchy of Participation) ढांचा विकसित किया है।
              • मुख्य बिंदु:
                • मास्टरमाइंड बनाम सहायक: कोर्ट ने उमर खालिद और शारजील इमाम को “कथित मास्टरमाइंड” बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
                • जमानत मंजूर: पांच अन्य सह-आरोपियों को सशर्त जमानत दी गई क्योंकि उनकी भूमिका “सहायक” पाई गई।
                • UAPA प्रतिबंध: कोर्ट ने UAPA की धारा 43D(5) के तहत सख्त जमानत प्रतिबंधों को बरकरार रखा।
                • देरी ‘ट्रम्प कार्ड’ नहीं: यह फैसला दिया गया कि यदि आतंकी कृत्य में केंद्रीय भूमिका का प्रमाण है, तो केवल मुकदमे में देरी जमानत का आधार नहीं हो सकती।
              • UPSC प्रासंगिकता: “मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)”, “UAPA और नागरिक स्वतंत्रता” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • आतंक की परिभाषा: कोर्ट ने व्याख्या की है कि ‘आतंकी कृत्य’ में न केवल अंतिम हिंसा शामिल है, बल्कि पूरी साजिश रचना और आवश्यक आपूर्ति में बाधा डालना भी शामिल है।
                • व्यक्तिगत मूल्यांकन: साजिश के मामले में सभी आरोपियों के साथ एक जैसा व्यवहार करना अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रबंधकीय जिम्मेदारी का अलग से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
                • संवैधानिक चिंता: मुख्य आरोपियों को जमानत न देते हुए भी, पीठ ने स्वीकार किया कि छह साल की बिना मुकदमे की हिरासत एक “संवैधानिक चिंता” है और निचली अदालत को कार्यवाही तेज करने का निर्देश दिया।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां)

              • संदर्भ: पुलिस बुनियादी ढांचे के आंकड़ों का विश्लेषण भारत भर में समर्पित सोशल मीडिया निगरानी सेल में 39% की वृद्धि दर्शाता है।
              • मुख्य बिंदु:
                • बुनियादी ढांचे में वृद्धि: समर्पित निगरानी सेल 2020 में 262 से बढ़कर 2024 में 365 हो गए।
                • अग्रणी राज्य: बिहार (52) और महाराष्ट्र (50) परिचालन सेल की संख्या में सबसे आगे हैं।
                • संघर्ष क्षेत्रों में निगरानी: मणिपुर में इंटरनेट शटडाउन के बावजूद निगरानी सेल 3 से बढ़कर 16 हो गए।
                • उभरते रुझान: व्हाट्सएप, एक्स (X) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर अपराध के रुझानों को रोकने के लिए इन इकाइयों का विस्तार किया गया है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “साइबर सुरक्षा”, “निगरानी बनाम निजता” और “पुलिस व्यवस्था में तकनीक की भूमिका” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • विशिष्ट कार्यात्मक इकाइयाँ: 2021 के बाद से, ये सेल सामान्य साइबर अपराध स्टेशनों के बजाय अलग इकाइयों के रूप में कार्य करने लगे हैं।
                • तकनीकी एकीकरण: यह डिजिटल विस्तार एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें 2024 तक पुलिस बलों के पास 1,147 ड्रोन की उपलब्धता भी शामिल है।
                • प्रशासनिक अंतर: डिजिटल निगरानी में यह वृद्धि तब हो रही है जब देश भर में लगभग 5.93 लाख पुलिस पद अभी भी खाली पड़े हैं।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; निर्यात प्रदर्शन; विकसित देशों की नीतियों के प्रभाव)

              • संदर्भ: नवंबर 2025 के व्यापार आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि कैसे भारतीय निर्यातक विविधीकरण के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहे हैं।
              • मुख्य बिंदु:
                • स्मार्टफोन का सहारा: अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में 237% की वृद्धि ने टैरिफ से प्रभावित अन्य क्षेत्रों की गिरावट को छिपा दिया।
                • नए बाजार: निर्यातकों ने चीन और यूरोपीय संघ (स्पेन, बेल्जियम और जर्मनी) की ओर रुख किया है।
                • मुद्रा सहायता: डॉलर के मुकाबले रुपये का ₹90 के स्तर पर होना निर्यातकों के लिए नए बाजारों में प्रवेश करने में मददगार साबित हो रहा है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “भारत का विदेशी व्यापार”, “व्यापार युद्ध और संरक्षणवाद” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • रणनीतिक बदलाव: कुछ वस्तुओं के लिए, अमेरिकी टैरिफ के झटके को आंशिक रूप से अवशोषित कर लिया गया, जबकि अन्य के लिए, सफल बाजार विविधीकरण के कारण कुल निर्यात में वृद्धि हुई।
                • नीतिगत सिफारिश: उद्योग निकाय सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि वे पारंपरिक बाजारों से बाहर इस गति को बनाए रखने के लिए अधिक ‘मुक्त व्यापार समझौतों’ (FTAs) पर काम करें।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां)

              • संदर्भ: जनरेटिव एआई चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) द्वारा नैतिक सुरक्षा उपायों की कमी की आलोचना।
              • मुख्य बिंदु:
                • समस्या: ग्रोक को जानबूझकर सुरक्षा उपायों की कमी के साथ पेश किया जा रहा है, जो एक लापरवाह रवैये को जन्म देता है।
                • चिंताजनक व्यवहार: चैटबॉट द्वारा महिलाओं की बिना सहमति के अश्लील छवियां उत्पन्न करने की खबरें आई हैं।
                • सरकारी हस्तक्षेप: भारत सरकार ने ‘एक्स’ से ऐसी छवि निर्माण को रोकने की मांग की है और इसे आपराधिक कृत्य बताया है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “एआई में नैतिकता”, “महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध” और “बिग टेक का विनियमन” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • साइबर-शत्रुता: संपादकीय का तर्क है कि ‘ग्रोक’ जैसे उपकरण इंटरनेट पर महिलाओं के लिए शत्रुतापूर्ण वातावरण बनाते हैं, जहाँ यौन हिंसा की धमकियाँ बिना किसी सजा के दी जाती हैं।
                • भू-राजनीतिक कवच: मंच की इस लापरवाही को इस धारणा से जोड़ा गया है कि अमेरिकी शक्ति इसे अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचा लेगी।
                • नीतिगत अनिवार्यता: संपादकीय सरकार से आग्रह करता है कि वह न केवल प्लेटफार्मों पर दबाव डाले, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी मुकदमा चलाए जो ऐसी सामग्री को प्रसारित करते हैं।

              संपादकीय विश्लेषण

              06 जनवरी, 2026
              GS-3 ऊर्जा
              ⚛️ SHANTI विधेयक: परमाणु विनियंत्रण
              49% निजी भागीदारी की अनुमति देकर NPCIL के एकाधिकार को समाप्त करता है। मुख्य सुधार: AERB को वैधानिक दर्जा दिया गया। चिंता: धारा 39 RTI अधिनियम को ओवरराइड करती है, जिससे सुरक्षा निरीक्षण में पारदर्शिता सीमित हो सकती है।
              GS-2 राजव्यवस्था
              ⚖️ UAPA: ‘भागीदारी का पदानुक्रम’
              सुप्रीम कोर्ट ने जमानत के लिए नया ढांचा विकसित किया: मुख्य साजिशकर्ताओं को सहायक अभिनेताओं से अलग करना। धारा 43D(5) को बरकरार रखते हुए, कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपियों के साथ एक जैसा व्यवहार अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है।
              GS-3 सुरक्षा
              📱 डिजिटल निगरानी का विस्तार
              2020 से सोशल मीडिया निगरानी सेल में 39% की वृद्धि हुई है। विरोधाभास: हाई-टेक विस्तार (1,147 ड्रोन) के बावजूद पुलिस में 5.93 लाख पद खाली हैं, जो डिजिटल निगरानी और जमीनी पुलिसिंग के बीच की खाई को दर्शाता है।
              GS-3 अर्थव्यवस्था
              🚢 निर्यात लचीलापन: ‘पिवट’ रणनीति
              भारतीय निर्यातक स्मार्टफोन निर्यात में 237% की वृद्धि और चीन की ओर रुख (समुद्री निर्यात +23%) के माध्यम से अमेरिकी टैरिफ का मुकाबला कर रहे हैं। ₹90/USD पर रुपया बाजार विविधीकरण के लिए एक प्रतिस्पर्धी उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है।
              GS-3 तकनीक
              🤖 AI नीतिशास्त्र: ‘गार्डरेल’ की खामियां
              बिना “गार्डरेल” के विपणन किए जा रहे जनरेटिव AI मॉडल गैर-सहमति वाली AI छवियों को बढ़ावा दे रहे हैं। नीतिगत अनिवार्यता: प्लेटफॉर्म चेतावनियों से आगे बढ़कर डीपफेक फैलाने वाले व्यक्तियों के कठोर अभियोजन की आवश्यकता है।

              वैदिक और महापाषाण काल के भूगोल को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि उपमहाद्वीप में अलग-अलग संस्कृतियाँ कैसे उभरीं। ऋग्वेद की रचना उत्तर-पश्चिम में हुई, जबकि महापाषाण संस्कृति दक्षिण और मध्य भारत के क्षेत्रों में फली-फूली।

              ऋग्वेद के सूक्त (प्रार्थनाएँ) उस परिदृश्य का नक्शा प्रदान करते हैं जहाँ प्रारंभिक आर्य रहते थे।

              • सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ: ऋग्वेद में सिंधु और उसकी सहायक नदियों जैसे व्यास और सतलुज का बार-बार उल्लेख मिलता है।
              • व्यास और सतलुज: इन नदियों को देवियों के रूप में पूजा जाता था और उनकी तुलना “दो फुर्तीले घोड़ों” और “दो चमकती गायों” से की गई है।
              • सरस्वती: सूक्तों में इस नदी की भी अत्यधिक प्रशंसा की गई है और इसे पवित्र माना गया है।
              • गंगा और यमुना: उत्तर-पश्चिमी नदियों के विपरीत, ऋग्वेद में गंगा और यमुना का नाम केवल एक बार आया है। यह दर्शाता है कि उस समय मुख्य सभ्यता अभी पूर्वी मैदानों (गंगा घाटी) में गहराई तक नहीं पहुँची थी।

              जिस समय उत्तर-पश्चिम में ऋग्वेद की रचना हो रही थी, उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों में महापाषाण (Megalithic) कब्र बनाने की प्रथा प्रचलित थी।

              • दक्कन और दक्षिण भारत: यह महापाषाण संस्कृति का प्राथमिक क्षेत्र था। यहाँ ब्रह्मगिरि जैसे प्रसिद्ध स्थल हैं, जहाँ सोने के मनकों वाली समृद्ध कब्रें मिली हैं।
              • इनामगाँव: यह महाराष्ट्र में घोड़ नदी (भीमा की सहायक नदी) के तट पर स्थित है।
              • उत्तर-पूर्व और कश्मीर: उपमहाद्वीप के इन सुदूर कोनों में भी महापाषाण संरचनाएँ पाई गई हैं।

              इनामगाँव प्राचीन जीवन का एक विशिष्ट भौगोलिक संदर्भ प्रदान करता है।

              • घोड़ नदी: यह बस्ती इसी सहायक नदी के किनारे बसी थी।
              • केंद्रीय आवास: महत्वपूर्ण व्यक्ति, संभवतः सरदार, बस्ती के केंद्र में स्थित बड़े घरों में दफनाए गए थे, जिनमें अक्सर अन्नागार (अनाज भंडार) जैसी संरचनाएँ भी शामिल होती थीं।

              पाठ के आधार पर, आप मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को खोजने का अभ्यास कर सकते हैं:

              1. नदियाँ: सिंधु, व्यास और सतलुज को चिह्नित करें यह देखने के लिए कि ऋग्वैदिक सूक्तों की रचना संभवतः कहाँ हुई थी।
              2. कब्रगाह स्थल: महापाषाण और उत्तर-हड़प्पा संस्कृतियों के विस्तार को समझने के लिए ब्रह्मगिरि और इनामगाँव को खोजें।
              3. गंगा और यमुना: इन नदियों के मार्ग को देखें और समझें कि क्यों ऋग्वेद के समय इनका महत्व कम था।

              प्राचीन भौगोलिक परिदृश्य

              ऋग्वैदिक काल
              🛶 उत्तर-पश्चिमी हृदयस्थल
              प्रारंभिक आर्यों ने सिंधु, ब्यास और सतलज की भूमि पर निवास किया। जबकि इन नदियों की देवी के रूप में पूजा की जाती थी, गंगा और यमुना का उल्लेख केवल एक बार मिलता है, जो उनके शुरुआती विस्तार की सीमा को दर्शाता है।
              अभ्यास: उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए सिंधु, ब्यास और सतलज को लोकेट करें जहाँ ऋग्वेद के सूक्तों की रचना की गई थी।
              महापाषाणिक संस्कृति
              🪨 मूक प्रहरी
              जहाँ उत्तर-पश्चिम सूक्तों से गूँज रहा था, वहीं दक्कन और दक्षिण भारत में महापाषाणिक कब्रें फल-फूल रही थीं। ब्रह्मगिरि जैसे स्थल सोने के मनकों और पत्थर के घेरों वाली समृद्ध कब्रों को उजागर करते हैं।
              अभ्यास: दक्कन के पठार पर महापाषाणिक संस्कृति के प्रसार को समझने के लिए दक्षिण भारत के मानचित्र पर ब्रह्मगिरि को खोजें।
              बस्ती अध्ययन
              🏠 घोड़ नदी पर जीवन
              महाराष्ट्र में स्थित, इनामगाँव घोड़ नदी (भीमा की सहायक नदी) के तट पर स्थित था। यहाँ विशिष्ट केंद्रीय आवास और प्रभावशाली सरदारों से संबंधित अन्नागार पाए गए हैं।
              अभ्यास: घोड़ नदी के मार्ग को ट्रेस करें और इनामगाँव को लोकेट करें ताकि यह समझा जा सके कि सहायक नदियों ने विशिष्ट प्राचीन बस्तियों को कैसे सहारा दिया।

              IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 5 जनवरी 2026 (Hindi)

              लगभग 4,700 वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ सबसे पुराने नगरों का विकास हुआ, जिन्हें हम हड़प्पा सभ्यता के नाम से जानते हैं।

              • आकस्मिक खोज: लगभग 150 साल पहले, जब पंजाब (अब पाकिस्तान में) में पहली बार रेलवे लाइनें बिछाई जा रही थीं, तो इंजीनियरों को अचानक हड़प्पा का पुरास्थल मिला।
              • विरासत का नुकसान: उन्होंने इसे ईंटों का एक तैयार स्रोत समझा और हज़ारों ईंटें उखाड़ लीं, जिससे कई प्राचीन इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं।
              • पुरातत्व मान्यता: लगभग 80 साल पहले पुरातत्वविदों ने इस स्थल को खोजा और महसूस किया कि यह उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक था।
              • समयरेखा: इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले हुआ था।
              • दो भागों में विभाजन: अधिकांश नगरों को दो भागों में बांटा गया था: एक छोटा लेकिन ऊंचाई पर बना पश्चिमी भाग जिसे ‘नगर दुर्ग’ (Citadel) कहा जाता था, और एक बड़ा लेकिन निचले इलाके में बना पूर्वी भाग जिसे ‘निचला शहर’ (Lower Town) कहा जाता था।
              • मजबूत दीवारें: दोनों हिस्सों की दीवारें पकी हुई ईंटों से बनी थीं। ईंटें इतनी अच्छी तरह पकी थीं कि वे हज़ारों सालों बाद भी टिकी रहीं। उन्हें ‘इंटरलॉकिंग’ तरीके से लगाया गया था जिससे दीवारें मज़बूत रहती थीं।
              • महान स्नानागार (मोहनजोदड़ो): नगर दुर्ग में एक विशेष तालाब बनाया गया था। इसमें ईंटों और प्लास्टर का उपयोग किया गया था और पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्राकृतिक तार (Natural Tar/Bitumen) की परत चढ़ाई गई थी। इसमें उतरने के लिए दो तरफ से सीढ़ियाँ थीं।
              • उन्नत जल निकासी: नालियाँ सीधी रेखा में बनाई गई थीं और पानी के बहाव के लिए उनमें हल्की ढलान थी। नालियाँ ढकी हुई थीं और नियमित सफाई के लिए जगह-जगह पर ‘मेनहोल’ (निरीक्षण छेद) बनाए गए थे।
              • घर: घर आमतौर पर एक या दो मंजिला होते थे, जिनमें एक आंगन के चारों ओर कमरे बने होते थे। अधिकांश घरों में अलग स्नानघर और अपने कुएं होते थे।
              • प्रमुख व्यवसाय:
                • शासक: वे लोग जो विशेष इमारतों के निर्माण की योजना बनाते थे और संसाधनों को जुटाते थे।
                • लिपिक (Scribes): वे लोग जो लिखना जानते थे और मुहरों को तैयार करने में मदद करते थे।
                • शिल्पकार: पुरुष और महिलाएं जो घरों या विशेष कार्यशालाओं में सभी प्रकार की चीजें बनाते थे।
              • विशेष शिल्प:
                • पत्थर के बाट: ये चर्ट (Chert) पत्थर से बने होते थे और बहुमूल्य धातुओं या पत्थरों को तौलने के लिए सटीक आकार में बनाए गए थे।
                • मनके (Beads): सुंदर लाल कार्नेलियन पत्थरों को काटकर, तराशकर और पॉलिश करके आभूषण बनाए जाते थे।
                • मुहरें (Seals): पत्थर की आयताकार मुहरों पर आमतौर पर जानवरों के चित्र और एक लिपि होती थी जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है।
                • फयेंस (Faience): यह एक कृत्रिम रूप से तैयार पदार्थ था जिसका उपयोग मनके, चूड़ियाँ और छोटे बर्तन बनाने के लिए किया जाता था।

              हड़प्पा के लोग दूर-दराज के स्थानों से कच्चा माल प्राप्त करते थे:

              • तांबा: वर्तमान राजस्थान और ओमान से।
              • टीन: वर्तमान अफगानिस्तान और ईरान से (तांबे के साथ मिलाकर कांसा बनाने के लिए)।
              • सोना: वर्तमान कर्नाटक से।
              • बहुमूल्य पत्थर: वर्तमान गुजरात, ईरान और अफगानिस्तान से।
              • फसलें: वे गेहूं, जौ, दालें, मटर, धान, तिल, अलसी और सरसों उगाते थे।
              • हल: मिट्टी को जोतने और बीज बोने के लिए लकड़ी के हल का उपयोग किया जाता था।
              • सिंचाई: चूंकि इस क्षेत्र में भारी वर्षा नहीं होती थी, इसलिए पानी का संचय किया जाता था और आवश्यकता पड़ने पर खेतों में आपूर्ति की जाती थी।
              • पशुपालन: वे गाय, भैंस, भेड़ और बकरी पालते थे।
              • धौलावीरा: कच्छ के रण में स्थित यह शहर अद्वितीय था क्योंकि यह तीन भागों (दो नहीं) में विभाजित था और इसमें प्रवेश के लिए बड़े पत्थर के प्रवेश द्वार थे। यहाँ से हड़प्पा लिपि के बड़े अक्षरों के अवशेष भी मिले हैं।
              • लोथल: खंभात की खाड़ी के पास स्थित यह शहर पत्थर, शंख और धातु की चीजें बनाने का केंद्र था। यहाँ एक बड़ा गोदीवाड़ा (Dockyard/बंदरगाह) था जहाँ जहाजों से माल उतारा और चढ़ाया जाता था।

              लगभग 3,900 वर्ष पहले, इन नगरों में बड़े बदलाव आने शुरू हुए:

              • विनाश के संकेत: जल निकासी प्रणाली खराब हो गई, सड़कों पर कचरा जमा होने लगा और लोगों ने लेखन, मुहरों और बाटों का उपयोग बंद कर दिया।
              • संभावित कारण: इतिहासकारों के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे: नदियों का सूख जाना, जंगलों का विनाश (ईंटें पकाने के लिए ईंधन की कमी), बाढ़ आना या शासकों का नियंत्रण समाप्त हो जाना।

              🧱 आरंभिक नगर

              🏗️ नगर नियोजन
              नगरों में एक ऊँचा नगर दुर्ग और एक निचला नगर होता था। दीवारें इंटरलॉकिंग पकी हुई ईंटों से बनी थीं, जिसने इन्हें 4,700 वर्षों तक मजबूती प्रदान की।
              💧 इंजीनियरिंग के चमत्कार
              महान स्नानागार को प्राकृतिक चारकोल की परत से वाटर-टाइट बनाया गया था। सड़कों के किनारे ढकी हुई नालियाँ थीं जिनमें सफाई के लिए मैनहोल भी थे।
              ⚒️ शिल्प और व्यापार
              कार्नेलियन (लाल पत्थर) के मनके और फ़यॉन्स (कृत्रिम पत्थर) प्रसिद्ध थे। लोथल गोदीबाड़े (Dockyard) के जरिए अन्य देशों से कच्चा माल मंगाया जाता था।
              🔍 रहस्यमय अंत
              लगभग 3,900 वर्ष पूर्व सभ्यता का पतन शुरू हुआ। इसके संभावित कारणों में वनों का विनाश, बाढ़, या नदियों का सूखना शामिल माना जाता है।
              परीक्षा तथ्य हड़प्पा की मुहरें आयताकार होती थीं जिन पर जानवरों के चित्र और एक लिपि होती थी, जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है
              📂

              कक्षा-6 इतिहास अध्याय-4 PDF

              सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: आरंभिक नगर

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              भारत के संघ और उसके क्षेत्र को समझने के लिए हमें भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1 से 4) को देखना होगा। यह भाग भारत की पहचान, उसके दायरे और संसद को देश की भौगोलिक सीमाओं को फिर से आकार देने की शक्ति को परिभाषित करता है।

              अनुच्छेद 1 सबसे मौलिक है क्योंकि यह परिभाषित करता है कि भारत क्या है।

              • अनुच्छेद 1(1): इसमें कहा गया है कि “इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ (Union of States) होगा।”
              • “यूनियन” (संघ) बनाम “फेडरेशन” (महासंघ): डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत एक “यूनियन” है क्योंकि:
                1. भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसा कि अमेरिका में है)।
                2. किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secede) का अधिकार नहीं है।
              • अनुच्छेद 1(3) – भारत का क्षेत्र: इसमें तीन श्रेणियां शामिल हैं:
                1. राज्यों के क्षेत्र: पहली अनुसूची में उल्लिखित राज्य (जैसे पंजाब, राजस्थान, गुजरात)।
                2. संघ राज्य क्षेत्र (UTs): केंद्र सरकार द्वारा सीधे प्रशासित क्षेत्र।
                3. अधिग्रहित क्षेत्र: वे क्षेत्र जिन्हें भारत भविष्य में अधिग्रहित कर सकता है (जैसे संधि या खरीद के माध्यम से)।

              यह अनुच्छेद संसद को उन नए राज्यों को संघ में शामिल करने की शक्ति देता है जो पहले भारत का हिस्सा नहीं थे।

              • प्रवेश (Admission): पहले से अस्तित्व में रहे किसी बाहरी राज्य को शामिल करना (जैसे सिक्किम का प्रवेश)।
              • स्थापना (Establishment): ऐसे क्षेत्र में राज्य बनाना जहाँ पहले कोई राज्य नहीं था।

              जहाँ अनुच्छेद 2 बाहरी क्षेत्रों से संबंधित है, वहीं अनुच्छेद 3 संसद को भारत के आंतरिक मानचित्र पर पूर्ण अधिकार देता है।

              • अनुच्छेद 3 के तहत संसद की शक्तियाँ:
                1. नया राज्य बनाना: किसी राज्य से क्षेत्र अलग करके या दो राज्यों को मिलाकर।
                2. क्षेत्र बढ़ाना/घटाना: किसी भी राज्य के भौतिक आकार को बदलना।
                3. सीमाओं में परिवर्तन: राज्यों के बीच की सीमा रेखाओं को बदलना।
                4. नाम बदलना: उदाहरण के लिए, ‘उड़ीसा’ से ‘ओडिशा’ या ‘पांडिचेरी’ से ‘पुडुचेरी’।
              • शर्तें और प्रक्रिया:
                • राष्ट्रपति की सिफारिश: इन परिवर्तनों के लिए विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही पेश किया जा सकता है।
                • राज्यों की राय: राष्ट्रपति को संबंधित राज्य विधानमंडल को एक निश्चित समय के भीतर अपनी राय देने के लिए विधेयक भेजना होता है।
                • संसद सर्वोच्च है: संसद राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। वह उनके सुझावों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।

              यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तनों को लागू करना आसान हो।

              • साधारण बहुमत: नए राज्यों के निर्माण या नाम बदलने के कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत ‘संवैधानिक संशोधन’ की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें किसी भी सामान्य कानून की तरह साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
              • स्वचालित परिवर्तन: ऐसे कानून स्वचालित रूप से पहली अनुसूची (राज्यों की सूची) और चौथी अनुसूची (राज्यसभा में सीटों का आवंटन) में संशोधन की अनुमति देते हैं।
              चरणमुख्य घटना / समितिपरिणाम
              1948धर आयोग (Dhar Commission)प्रशासनिक सुविधा के आधार पर पुनर्गठन की सिफारिश की, भाषा के आधार पर नहीं।
              1949JVP समितिराज्यों के आधार के रूप में भाषा को खारिज कर दिया।
              1953आंध्र राज्य का गठनभाषाई आधार पर बनाया गया पहला राज्य (पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद)।
              1956राज्य पुनर्गठन अधिनियमभारत को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया।

              ⚖️ संघ और उसके क्षेत्र

              📜 अनुच्छेद 1: संघ की प्रकृति
              भारत राज्यों का संघ है, न कि राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम। राज्यों को संघ से विभक्त होने का अधिकार नहीं है। इसमें राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और अर्जित क्षेत्र शामिल हैं।
              🌍 अनुच्छेद 2 और 3: सीमाएँ
              अनुच्छेद 2 नए राज्यों (बाहरी क्षेत्रों) के प्रवेश से संबंधित है। अनुच्छेद 3 संसद को विद्यमान राज्यों के नाम बदलने, विभाजन करने या आंतरिक पुनर्गठन की शक्ति देता है।
              ⚡ पुनर्गठन प्रक्रिया
              इसके लिए राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य है। संबंधित राज्य की राय मांगी जाती है, लेकिन वह संसद पर बाध्यकारी नहीं है। आंतरिक मानचित्र को बदलने में संसद सर्वोच्च है।
              ⚖️ अनुच्छेद 4: कानूनी सरलता
              अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तन केवल साधारण बहुमत द्वारा किए जा सकते हैं। इन्हें अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन नहीं माना जाता है।
              परीक्षा तथ्य 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम द्वारा 14 राज्य और 6 UT बनाए गए थे। भाषाई आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य आंध्र राज्य (1953) था।

              यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (05 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और इसके पड़ोसी देश)

              • संदर्भ: 2026 की शुरुआत में चीन की रणनीतिक स्थिति और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक स्थिति पर इसके प्रभाव का विश्लेषण।
              • मुख्य बिंदु:
                • एक राष्ट्रीय विरोधाभास: चीन वर्तमान में गहरे आंतरिक आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन साथ ही विदेशों में रणनीतिक आत्मविश्वास और राजनयिक पहुंच का प्रदर्शन कर रहा है।
                • आर्थिक रणनीति (चीन शॉक 2.0): कमजोर घरेलू मांग की भरपाई के लिए, बीजिंग इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे “उच्च गुणवत्ता” वाले निर्यात को प्राथमिकता दे रहा है, जो वैश्विक व्यापार को बाधित कर रहा है।
                • सैन्य आक्रामकता: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपनी पारंपरिक और परमाणु क्षमताओं का विस्तार करना जारी रखे हुए है।
                • भारत-चीन संबंध: 2025 में संबंधों में थोड़ी स्थिरता देखी गई लेकिन संरचनात्मक मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। ‘बफर जोन’ के कारण भारत के गश्त अधिकारों पर प्रतिबंध जारी हैं।
              • UPSC प्रासंगिकता: “भारत-चीन संबंध”, “हिंद-प्रशांत भू-राजनीति” और “रणनीतिक स्वायत्तता” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • भारत पर प्रभाव: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में चीन के प्रभुत्व ने व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है (2025 में $110 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद)। फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की निर्भरता बनी हुई है।
                • रणनीतिक दृष्टिकोण: भारत को ‘रणनीतिक धैर्य’ (Strategic Patience) रखना चाहिए और दीर्घकालिक संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा करने में गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भूमिका)

              • संदर्भ: दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों (Security Camps) की स्थापना ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) को कैसे कम किया है।
              • मुख्य बिंदु:
                • सांख्यिकीय गिरावट: 2010 से 2025 के बीच माओवादी हिंसा में लगभग 90% की कमी आई है।
                • प्रभावित क्षेत्रों में कमी: LWE प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में 126 से घटकर अक्टूबर 2025 तक केवल 11 रह गई है।
                • शिविरों की भूमिका: सुरक्षा शिविरों ने सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई है, प्रतिक्रिया समय कम किया है और मानवीय खुफिया जानकारी (HUMINT) में सुधार किया है।
                • बुनियादी ढांचे का विकास: ये शिविर सड़क निर्माण और मोबाइल टावरों के केंद्र बन गए हैं, जिससे स्थानीय जीवनशैली बदल गई है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां”, “LWE और विकास” और “जनजातीय क्षेत्रों में शासन” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • प्रशासन की पहुंच: अब कलेक्टर, तहसीलदार और पटवारी उन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं जहां पहले केवल पुलिस या वन रक्षक ही जाते थे।
                • भावी चुनौतियां: स्थायी शांति तभी संभव है जब पेसा (PESA) अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम जैसी संवैधानिक गारंटी के माध्यम से संरचनात्मक मुद्दों को हल किया जाए।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (सामाजिक मुद्दे; महिलाओं की भूमिका) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था; रोजगार)

              • संदर्भ: महिलाओं के अवैतनिक देखभाल (Unpaid Care) और भावनात्मक श्रम के व्यवस्थित अवमूल्यन और संस्थागत मान्यता की आवश्यकता पर चर्चा।
              • मुख्य बिंदु:
                • देखभाल अंतराल (Care Gap): 2023 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम पर 2.8 घंटे अधिक समय बिताती हैं।
                • नीतिगत पूर्वाग्रह: आर्थिक प्राथमिकताओं ने देखभाल कार्य को “उत्पादक” श्रम (जो पारंपरिक रूप से पुरुष करते हैं) की तुलना में गौण माना है।
                • भारतीय न्यायिक रुख: कन्नन नायडू बनाम कमसाला अम्मल (2023) मामले में, मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी के घरेलू कर्तव्य पारिवारिक संपत्ति में योगदान करते हैं, जिससे वह संपत्ति में समान हिस्से की हकदार है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “महिला सशक्तिकरण”, “जेंडर बजटिंग” और “समावेशी विकास” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • अदृश्य श्रम: परिवारों को बनाए रखने में लगने वाले भावनात्मक और मानसिक श्रम को नीतिगत ढांचे में शायद ही कभी मापा या पुरस्कृत किया जाता है।
                • परिवर्तन की आवश्यकता: महिलाओं के श्रम को मान्यता देने के साथ-साथ पुरुषों को भी देखभाल की जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आपदा प्रबंधन; प्राकृतिक आपदाओं का आर्थिक प्रभाव)

              • संदर्भ: भारत को प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रतिवर्ष महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान होता है, जिससे आपदा जोखिम वित्त की ओर बदलाव आवश्यक हो गया है।
              • मुख्य बिंदु:
                • आर्थिक प्रभाव: 1990 से 2024 तक, भारत को अपनी जीडीपी के 0.4% के बराबर औसत वार्षिक आपदा संबंधी नुकसान हुआ।
                • खतरों की प्रकृति: भारत की संवेदनशीलता मुख्य रूप से जल विज्ञान संबंधी (बाढ़ और भूस्खलन) है, जबकि चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों में भूकंपीय जोखिम अधिक है।
                • उच्च जोखिम रैंकिंग: ‘विश्व जोखिम सूचकांक 2025’ में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में फिलीपींस के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “आपदा प्रबंधन रणनीतियाँ” और “जलवायु परिवर्तन का आर्थिक प्रभाव” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • क्षेत्रीय खतरा: उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती आपदाओं का सामना कर रही हैं। पिछले दशक में, इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 100 आपदाएं आईं, जिससे लगभग 8 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
                • नीतिगत अनिवार्यता: आर्थिक नुकसान बढ़ने के साथ ही, प्रभावी और डेटा-संचालित प्रतिक्रिया के लिए ‘डिजास्टर रिस्क फाइनेंस’ क्षेत्रीय नीति के केंद्र में आ गया है।

              पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (सुरक्षा; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण)

              • संदर्भ: बेंगलुरु में ‘हल्के लड़ाकू विमान’ (LCA) तेजस की 25 साल की उड़ान का जश्न मनाने और भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए एक राष्ट्रीय सेमिनार।
              • मुख्य बिंदु:
                • तेजस का मील का पत्थर: LCA तेजस ने 25 साल पूरे कर लिए हैं और 5,600 से अधिक सफल परीक्षण उड़ानें भरी हैं।
                • स्वदेशी तकनीक: कार्बन कंपोजिट, ‘फ्लाई-बाय-वायर’ फ्लाइट कंट्रोल और डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकों ने तेजस को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना दिया है।
                • आयात पर निर्भरता कम करना: ‘एरोनॉटिक्स 2047’ का लक्ष्य विदेशी आयात पर निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक विकसित करना है।
              • UPSC प्रासंगिकता: “रक्षा स्वदेशीकरण”, “रक्षा में मेक इन इंडिया” और “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए महत्वपूर्ण।
              • विस्तृत विश्लेषण:
                • भविष्य के लक्ष्य: अब ध्यान अगली पीढ़ी के विमानों, डिजिटल विनिर्माण और विमान डिजाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण की ओर बढ़ रहा है।
                • पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: इस कार्यक्रम ने 100 से अधिक डिजाइन केंद्रों को सफलतापूर्वक जोड़ा है, जिससे एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस ईकोसिस्टम तैयार हुआ है।

              संपादकीय विश्लेषण

              05 जनवरी, 2026
              GS-2 अंत. संबंध
              🇨🇳 चीन का विरोधाभास और “शॉक 2.0”
              बीजिंग अपनी घरेलू कमजोरी का मुकाबला आक्रामक उच्च गुणवत्ता वाले निर्यात (EVs, सेमीकंडक्टर) के साथ कर रहा है। प्रभाव: 2025 में भारत का व्यापार घाटा $110 बिलियन के पार जाने की आशंका। रणनीति: “रणनीतिक धैर्य” और असममित निवारण।
              GS-3 सुरक्षा
              🛡️ LWE: सुरक्षा शिविर क्रांति
              2010 के बाद से माओवादी हिंसा में 90% की गिरावट आई है। प्रभावित जिलों की संख्या 2025 में घटकर सिर्फ 11 रह गई है। सुरक्षा शिविर अब ‘ग्रे ज़ोन’ में नागरिक प्रशासन, सड़कों और डिजिटल कनेक्टिविटी के केंद्र बन गए हैं।
              GS-1 समाज
              👩‍🍳 देखभाल की अदृश्य अर्थव्यवस्था
              महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल पर 2.8 गुना अधिक समय खर्च करती हैं। महत्वपूर्ण बदलाव: मद्रास HC (2023) ने घरेलू कर्तव्यों को पारिवारिक संपत्ति में आर्थिक योगदान माना। नीतिगत आवश्यकता: GDP-केंद्रित से देखभाल-समावेशी विकास की ओर बढ़ना।
              GS-3 आपदा
              🌊 आपदा जोखिम वित्तपोषण (DRF)
              भारत प्राकृतिक आपदाओं के कारण सालाना GDP का 0.4% खो देता है। जोखिम के मामले में एशिया में दूसरे स्थान पर है। बदलाव की जरूरत: प्रतिक्रियाशील राहत से हटकर सक्रिय, डेटा-संचालित आपदा जोखिम वित्तपोषण और मुकाबला करने की क्षमता विकसित करना।
              GS-3 स्वदेशी
              ✈️ वैमानिकी 2047: तेजस और उससे आगे
              LCA तेजस ने 5,600+ उड़ान परीक्षणों के साथ 25 वर्ष पूरे किए। अब ध्यान 5वीं पीढ़ी की तकनीक और AI एकीकरण पर है। लक्ष्य: 2047 तक एयरोस्पेस इकोसिस्टम में आयात निर्भरता खत्म करने के लिए “तकनीकी संप्रभुता” प्राप्त करना।

              आरंभिक नगरों के भूगोल को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि हड़प्पा सभ्यता अपनी नदी प्रणालियों से किस प्रकार अटूट रूप से जुड़ी हुई थी। इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले सिंधु और उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में हुआ था।

              • स्थान: हड़प्पा वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।
              • खोज: यह इस सभ्यता का खोजा गया पहला शहर था, इसी कारण पुरातत्वविदों ने इसके बाद मिलने वाले सभी समान स्थलों को “हड़प्पा” स्थल कहा।
              • महत्व: लगभग 150 साल पहले रेलवे लाइन बिछाते समय इंजीनियरों को यह स्थल मिला था, और उन्होंने अनजाने में इसकी उच्च गुणवत्ता वाली प्राचीन ईंटों का उपयोग निर्माण के लिए कर लिया था।
              • स्थान: यह स्थल वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुख्य सिंधु नदी के किनारे स्थित है।
              • वास्तुकला: यह अपने ‘महान स्नानागार’ (Great Bath) के लिए प्रसिद्ध है, जो ईंटों से बना एक जलरोधी तालाब था जिसमें प्राकृतिक तार (bitumen) की परत चढ़ाई गई थी।
              • शहरी जीवन: यहाँ की खुदाई से उन्नत जल निकासी प्रणाली का पता चला है, जहाँ घरों की नालियाँ सड़कों की बड़ी नालियों से जुड़ी थीं।
              • स्थान: यह भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है।
              • नदी संदर्भ: यह घग्गर-हाकरा नदी प्रणाली (जिसे अक्सर प्राचीन सरस्वती नदी से जोड़ा जाता है) के तट पर स्थित था।
              • विशेष विशेषताएं: अन्य नगरों के विपरीत, कालीबंगन (और लोथल) में अग्निकुंड (Fire Altars) मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि यहाँ धार्मिक अनुष्ठान या यज्ञ किए जाते होंगे।

              💡 मानचित्र कार्य (Mapping Task):

              अपने मानचित्र पर इन तीन मुख्य केंद्रों के साथ-साथ गुजरात के लोथल (खंभात की खाड़ी) और धौलावीरा (कच्छ के रण) को भी चिह्नित करें, जो इस सभ्यता के महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र थे।

              नदियों का मानचित्रण

              स्थल: हड़प्पा
              🧱 पंजाब सीमांत
              पाकिस्तान के साहीवाल जिले में स्थित। यह शहर कृषि और व्यापार के लिए रावी नदी के उपजाऊ मैदानी इलाकों पर निर्भर था।
              अभ्यास: मानचित्र पर रावी नदी को खोजें और हिमालय (हिमाचल प्रदेश) में इसके उद्गम की पहचान करें।
              स्थल: मोहनजोदड़ो
              🌊 सिंध महानगर
              सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा शहर, जो विशाल सिंधु नदी के दाहिने तट पर रणनीतिक रूप से बनाया गया था।
              अभ्यास: सिंधु नदी के मुख्य मार्ग को खोजें और देखें कि यह पंजाब के उत्तरी स्थलों को अरब सागर से कैसे जोड़ती है।
              स्थल: कालीबंगा
              🏺 राजस्थान बेसिन
              अग्निकुंडों और जुते हुए खेतों के लिए प्रसिद्ध, यह स्थल अब मौसमी घग्गर-हकरा नदी तंत्र द्वारा पोषित था।
              अभ्यास: राजस्थान में घग्गर नदी के सूखे मार्ग को ट्रेस करें और प्राचीन सरस्वती नदी के साथ इसके ऐतिहासिक संबंध को पहचानें।

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