यह अध्याय लगभग 2,500 वर्ष पहले भारत में उभरे नए धार्मिक और दार्शनिक विचारों के बारे में है।

बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे और वे तीव्र सामाजिक परिवर्तनों के काल में जीवित थे।

  • प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पहले ‘सिद्धार्थ’ (जिन्हें गौतम के नाम से भी जाना जाता है) के रूप में हुआ था। वे शाक्य गण के एक क्षत्रिय थे।
  • गृहत्याग: युवावस्था में ही जीवन के सच्चे अर्थ की तलाश में उन्होंने घर के सुख-सुविधाओं को छोड़ दिया।
  • ज्ञान प्राप्ति (Enlightenment): कई वर्षों तक भ्रमण और चर्चा के बाद, उन्होंने बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया, जहाँ उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • शिक्षा: उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ (वाराणसी के पास) में दिया और अपना शेष जीवन पैदल यात्रा करते हुए लोगों को शिक्षा देने में बिताया। उनकी मृत्यु कुशीनारा में हुई।
  • मुख्य दर्शन:
    • उन्होंने सिखाया कि जीवन दुखों और कष्टों से भरा है, जिसका कारण हमारी असीमित इच्छाएँ और लालसाएँ हैं, जिसे उन्होंने ‘तन्हा’ (तृष्णा) कहा है।
    • इन इच्छाओं को दूर करने के लिए उन्होंने ‘आत्म-संयम’ (moderation) का मार्ग अपनाने की सलाह दी।
    • उन्होंने कर्म के महत्व पर जोर दिया और बताया कि हमारे कार्यों का फल हमें इस जीवन और अगले जीवन दोनों में मिलता है।
    • उन्होंने अपने उपदेश उस समय की आम भाषा प्राकृत में दिए, ताकि हर कोई उन्हें समझ सके।

इसी समय, अन्य विचारक मृत्यु के बाद के जीवन और यज्ञों के उद्देश्य जैसे कठिन प्रश्नों के उत्तर खोज रहे थे।

  • आत्मा और ब्रह्म: इन विचारकों का मानना था कि ब्रह्मांड में कुछ ऐसा है जो स्थायी है। उन्होंने इसे ‘आत्मा’ (व्यक्तिगत आत्मा) और ‘ब्रह्म’ (सार्वभौमिक आत्मा) के रूप में वर्णित किया और निष्कर्ष निकाला कि अंततः ये दोनों एक ही हैं।
  • ग्रंथ: उनके विचारों को ‘उपनिषदों’ में संकलित किया गया। उपनिषद् का शाब्दिक अर्थ है “गुरु के समीप बैठना”। इन ग्रंथों में अक्सर शिक्षकों और छात्रों के बीच बातचीत के रूप में विचार दिए गए हैं।
  • विचारक: इनमें मुख्य रूप से ब्राह्मण और राजा शामिल थे, लेकिन गार्गी जैसी कुछ महिला विचारकों का भी उल्लेख मिलता है। सत्यकाम जाबाल (एक दासी का पुत्र) भी एक प्रसिद्ध विचारक बने, जिन्हें गौतम नाम के एक ब्राह्मण शिक्षक ने अपना शिष्य बनाया था।
  • भारतीय दर्शन की छह पद्धतियाँ: भारत के बौद्धिक विकास का प्रतिनिधित्व छह दर्शनों द्वारा किया जाता है: वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा और वेदांत (उत्तर मीमांसा)

जैनों के 24वें तीर्थंकर वर्धमान महावीर ने भी इसी समय अपने विचारों का प्रसार किया।

  • पृष्ठभूमि: वे वज्जि संघ के ‘लिच्छवि’ कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया और जंगल में रहने लगे।
  • मुख्य सिद्धांत: महावीर ने सिखाया कि सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने अहिंसा के नियम का कड़ाई से पालन करने को कहा (अर्थात किसी भी जीव को कष्ट न देना)।
  • जीवन का तरीका: अनुयायियों (जैनों) को बहुत सादा जीवन जीना पड़ता था, भोजन के लिए भिक्षा मांगनी पड़ती थी, पूरी तरह ईमानदार रहना पड़ता था और चोरी न करने की सख्त हिदायत थी। उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था और पुरुषों को वस्त्रों सहित सब कुछ त्यागना पड़ता था।
  • प्रसार: जैन धर्म को मुख्य रूप से व्यापारियों का समर्थन मिला। किसानों के लिए इन नियमों का पालन करना कठिन था क्योंकि फसल की रक्षा के लिए उन्हें कीड़े-मकोड़ों को मारना पड़ता था।

महावीर और बुद्ध दोनों का मानना था कि सच्चा ज्ञान केवल वही प्राप्त कर सकते हैं जो अपना घर छोड़ देते हैं।

  • संघ: यह उन लोगों का एक संगठन था जिन्होंने घर का त्याग किया था।
    • बौद्ध संघ के नियम ‘विनय पिटक’ नामक ग्रंथ में मिलते हैं।
    • संघ के सदस्यों को ‘भिक्खु’ और ‘भिक्खुणी’ (भिखारी के लिए प्राकृत शब्द) कहा जाता था।
    • इसमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, व्यापारी, मजदूर और दास (अनुमति लेकर) शामिल हो सकते थे।
  • विहार (Monasteries): भिक्खु-भिक्खुणी पूरे साल यात्रा करते थे, केवल वर्षा ऋतु को छोड़कर। समय के साथ उनके लिए स्थायी शरण स्थल बनाए गए जिन्हें ‘विहार’ कहा गया। ये लकड़ी, ईंट या पहाड़ों को काटकर (जैसे कार्ले की गुफाएँ) बनाए गए थे।

जैन और बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के समय, ब्राह्मणों ने जीवन के चार चरणों की एक व्यवस्था विकसित की जिसे ‘आश्रम’ कहा गया:

आश्रमअपेक्षित जीवनशैली
ब्रह्मचर्यसादा जीवन बिताना और वेदों का अध्ययन करना।
गृहस्थविवाह करना और एक गृहस्थ के रूप में रहना।
वानप्रस्थजंगल में रहना और साधना करना।
संन्याससब कुछ त्याग कर संन्यासी बन जाना।

☸️ नए प्रश्न नए विचार

🧘 बुद्ध का मार्ग
सिद्धार्थ गौतम ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने सिखाया कि दुख का कारण तन्हा (लालसा) है। जनसाधारण तक पहुँचने के लिए उन्होंने प्राकृत भाषा का प्रयोग किया। उनका प्रथम उपदेश सारनाथ में हुआ।
🕯️ उपनिषदिक विचार
विचारकों ने आत्मा (व्यक्तिगत आत्मा) और ब्रह्म (सार्वभौमिक आत्मा) के बारे में चर्चा की। इनमें गार्गी जैसी महिला विचारकों और सत्यकाम जाबाल जैसे जिज्ञासुओं ने भाग लिया।
🐜 जैन धर्म और महावीर
वर्धमान महावीर ने अहिंसा (कठोर जीव हत्या निषेध) पर जोर दिया। उनके अनुयायी ‘जैन’ कहलाए, जो भोजन के लिए भिक्षा माँगते थे और पूर्ण ईमानदारी का पालन करते थे। इसे व्यापारी वर्ग का भारी समर्थन मिला।
🏘️ संघ और विहार
घर त्यागने वाले लोग संघ में रहते थे, जिसके नियम विनय पिटक में मिलते हैं। वर्षा ऋतु के दौरान भिक्खु-भिक्खुनी विहारों (शरण स्थलों) में रहते थे, जो अक्सर चट्टानों को काटकर बनाए जाते थे।
आश्रम व्यवस्था ब्रह्मचर्य (सादा जीवन/अध्ययन) • गृहस्थ (विवाह/घर) • वानप्रस्थ (जंगल में साधना) • संन्यास (सब कुछ त्याग देना)।
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कक्षा-6 इतिहास अध्याय-7 PDF

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भारतीय संविधान का भाग III नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों की गहराई में जाने से पहले, उस ढांचे को समझना आवश्यक है जो इन्हें नियंत्रित करता है। अनुच्छेद 12 बताता है कि ये अधिकार किसके विरुद्ध लागू हैं; अनुच्छेद 13 अन्य कानूनों पर इन अधिकारों की सर्वोच्चता सुनिश्चित करता है; और अनुच्छेद 14 समानता के उस मूल सिद्धांत को स्थापित करता है जो राष्ट्र को बांधता है।

मौलिक अधिकार मुख्य रूप से सरकार द्वारा शक्ति के मनमाने उपयोग के विरुद्ध संरक्षण हैं। इसलिए, अनुच्छेद 12 संविधान के भाग III के उद्देश्यों के लिए “राज्य” शब्द को परिभाषित करता है।

अनुच्छेद 12 के अनुसार, ‘राज्य’ में शामिल हैं:

  1. भारत की सरकार और संसद: संघ के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे मंत्रालय, राष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा)।
  2. राज्यों की सरकारें और विधानमंडल: प्रत्येक राज्य के कार्यकारी और विधायी अंग (जैसे विधानसभा, राज्यपाल)।
  3. स्थानीय प्राधिकारी: नगरपालिकाएं, पंचायतें, जिला बोर्ड, सुधार न्यास (Improvement Trusts) आदि।
  4. अन्य प्राधिकारी: यह सबसे अधिक चर्चित श्रेणी है, जिसकी व्याख्या न्यायपालिका द्वारा समय-समय पर की गई है।

उच्चतम न्यायालय ने अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब जैसे मामलों में यह स्थापित किया कि कोई निजी संस्था या निगम भी “राज्य” माना जा सकता है यदि वह सरकार के एक उपकरण या एजेंसी के रूप में कार्य करता है।

कसौटी (Criteria):

  • यदि संपूर्ण शेयर पूंजी सरकार के पास है।
  • यदि वित्तीय सहायता इतनी अधिक है कि वह लगभग पूरे खर्च को पूरा करती है।
  • यदि संस्था को राज्य द्वारा संरक्षित ‘एकाधिकार’ प्राप्त है।
  • यदि राज्य का गहरा और व्यापक नियंत्रण (Pervasive Control) है।
  • यदि संस्था के कार्य सार्वजनिक महत्व के हैं और सरकारी कार्यों से जुड़े हैं।

नोट: LIC, ONGC और SAIL जैसे निकायों को “राज्य” माना जाता है, जबकि BCCI और NCERT को सामान्यतः इस परिभाषा से बाहर रखा गया है।

अनुच्छेद 13 मौलिक अधिकारों का “द्वारपाल” है। यह न्यायपालिका को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति देता है, जिससे अदालतें उन कानूनों को रद्द कर सकती हैं जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

  • अनुच्छेद 13(1): संविधान पूर्व कानूनों (Pre-Constitutional Laws) से संबंधित है। 1950 से पहले के कानून यदि मौलिक अधिकारों के साथ असंगत हैं, तो वे उस सीमा तक शून्य (Void) हो जाएंगे।
  • अनुच्छेद 13(2): संविधान के बाद के कानूनों से संबंधित है। यह राज्य को ऐसा कोई भी कानून बनाने से रोकता है जो मौलिक अधिकारों को छीनता या कम करता हो।
  • अनुच्छेद 13(3): “विधि” (Law) शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित करता है। इसमें शामिल हैं:
    • अध्यादेश (Ordinances)
    • आदेश, उपविधि (Bye-laws), नियम, विनियम (Regulations)
    • अधिसूचनाएं (Notifications)
    • रूढ़ि या प्रथाएं (Customs) जिनका कानून जैसा प्रभाव हो।
  1. पृथक्करणीयता का सिद्धांत (Doctrine of Severability): यदि किसी कानून का एक हिस्सा असंवैधानिक है, तो केवल वही हिस्सा रद्द किया जाएगा, पूरा कानून नहीं। (बशर्ते वैध हिस्सा अवैध हिस्से के बिना जीवित रह सके)।
  2. आच्छादन का सिद्धांत (Doctrine of Eclipse): मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला संविधान-पूर्व कानून पूरी तरह खत्म नहीं होता; वह केवल मौलिक अधिकारों द्वारा “ढक” लिया जाता है। यदि बाद में संविधान संशोधन द्वारा वह बाधा हट जाए, तो कानून पुनः सक्रिय हो जाता है।
  3. त्याग का सिद्धांत (Doctrine of Waiver): कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को अपनी मर्जी से छोड़ (Waive) नहीं सकता, क्योंकि ये अधिकार केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि लोक हित के लिए दिए गए हैं।

अनुच्छेद 14 भारतीय संविधान का हृदय है। यह गारंटी देता है: “राज्य, भारत के राज्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।”

विधि के समक्ष समता (Equality Before Law)विधियों का समान संरक्षण (Equal Protection of Laws)
यह ब्रिटिश सामान्य विधि से लिया गया है।यह अमेरिकी संविधान से लिया गया है।
नकारात्मक अवधारणा: किसी व्यक्ति के लिए विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति।सकारात्मक अवधारणा: समान परिस्थितियों में समान व्यवहार सुनिश्चित करना।
इसका अर्थ है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।इसका अर्थ है “समान लोगों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।”
यह ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) पर केंद्रित है।यह ‘वास्तविक समानता’ (Substantive Equality) पर केंद्रित है।

अनुच्छेद 14 ‘वर्ग-विधान’ (बिना कारण किसी समूह को लाभ देना) का निषेध करता है लेकिन ‘तर्कसंगत वर्गीकरण’ की अनुमति देता है। चूँकि लोग अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में हैं, इसलिए कानून सबके साथ बिल्कुल एक जैसा व्यवहार नहीं कर सकता।

वर्गीकरण की कसौटी:

  1. बोधगम्य अंतरक (Intelligible Differentia): उन समूहों के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए जिनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है।
  2. तार्किक संबंध (Rational Nexus): उस अंतर का उस लक्ष्य से तार्किक संबंध होना चाहिए जिसे कानून प्राप्त करना चाहता है।

नया सिद्धांत (मनमानापन – Arbitrariness):
ई.पी. रॉयप्पा बनाम तमिलनाडु राज्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 14 का विस्तार करते हुए कहा कि “समानता और मनमानापन एक-दूसरे के विरोधी हैं।” यदि राज्य की कोई कार्रवाई अनुचित, अतार्किक या मनमानी है, तो वह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

अनुच्छेदमुख्य केंद्रलोकतंत्र में भूमिका
12राज्य की परिभाषाउन संस्थाओं की पहचान करना जो मौलिक अधिकारों को मानने के लिए बाध्य हैं।
13न्यायिक समीक्षामौलिक अधिकारों को नए या पुराने कानूनों द्वारा कमजोर होने से बचाना।
14समानता का अधिकारनिष्पक्षता सुनिश्चित करना और भेदभाव व मनमानी सरकारी कार्रवाई को रोकना।

⚖️ मूल अधिकार ढांचा

🏛️ अनुच्छेद 12: “राज्य”
उन संस्थाओं को परिभाषित करता है जिनके विरुद्ध मूल अधिकार लागू होते हैं: संघ और राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय और अन्य प्राधिकारी। निजी संस्थाएं भी इसमें शामिल हो सकती हैं यदि वे राज्य के नियंत्रण में हों।
🛡️ अनुच्छेद 13: न्यायिक समीक्षा
यह अधिकारों का रक्षक है। मूल अधिकारों का उल्लंघन करने वाली विधियां शून्य होंगी। इसमें पृथक्करणीयता का सिद्धांत (केवल खराब हिस्सा हटाना) और आच्छादन का सिद्धांत शामिल हैं।
🤝 अनु. 14: समानता के स्तंभ
1. विधि के समक्ष समता: नकारात्मक अवधारणा (UK); कानून से ऊपर कोई नहीं।
2. विधियों का समान संरक्षण: सकारात्मक अवधारणा (USA); समान परिस्थितियों में समान व्यवहार।
🔍 वर्गीकरण और मनमानापन
यह तर्कसंगत वर्गीकरण की अनुमति देता है यदि वह बोधगम्य अंतरक पर आधारित हो। रॉयप्पा केस के अनुसार, समानता मनमानेपन (Arbitrariness) की विरोधी है।
📜 “विधि” क्या है? (अनु. 13)
इसमें अध्यादेश, उप-नियम, नियम, अधिसूचनाएं और यहां तक कि कानून की शक्ति रखने वाली रूढ़ियां भी शामिल हैं। राज्य कार्यकारी आदेशों के जरिए अधिकारों को नहीं छीन सकता।
🚫 परित्याग का सिद्धांत
भारत में कोई व्यक्ति अपने मूल अधिकारों का परित्याग नहीं कर सकता। चूंकि ये अधिकार सार्वजनिक हित के लिए हैं, संविधान आपकी रक्षा आपकी अपनी सहमति (अधिकार छोड़ने की) से भी करता है।
निष्कर्ष अनुच्छेद 12 लक्ष्य की पहचान करता है, अनुच्छेद 13 रक्षा कवच (न्यायिक समीक्षा) प्रदान करता है, और अनुच्छेद 14 भारतीय लोकतंत्र में निष्पक्षता की भावना स्थापित करता है।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (08 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (जनसंख्या और संबंधित मुद्दे); GS पेपर 2 (शासन; नीतियां और हस्तक्षेप)।

  • संदर्भ: भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने अधिसूचित किया है कि जनगणना 2027 का पहला चरण—मकान सूचीकरण (Houselisting Operations – HLO)—1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 तक चलेगा।
  • मुख्य बिंदु:
    • डिजिटल जनगणना: यह भारत के इतिहास की पहली डिजिटल जनगणना होगी।
    • जाति गणना: स्वतंत्र भारत में पहली बार, फरवरी 2027 में दूसरे चरण के दौरान जातिगत पहचान की गणना की जाएगी।
    • मकान सूचीकरण चरण: प्रत्येक राज्य में 30 दिनों की अवधि में आयोजित, इसमें आवास संरचना, अनाज की खपत और पीने के पानी के स्रोत जैसे 35 प्रश्न शामिल होंगे।
    • स्व-गणना (Self-Enumeration): घर-घर जाकर डेटा एकत्र करने की प्रक्रिया शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों के पास खुद से जानकारी भरने (Self-enumeration) का विकल्प होगा।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जनसांख्यिकी”, “सामाजिक न्याय (जाति जनगणना)” और “डिजिटल गवर्नेंस” के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • लॉजिस्टिक पैमाना: डेटा संग्रह और पर्यवेक्षण के लिए गणनाकारों और पर्यवेक्षकों सहित लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा।
    • योजना का आधार: जनगणना के आंकड़े विभिन्न गणनाओं और अनुपातों का आधार बनते हैं, जिनका उपयोग केंद्रीय बजट तैयार करने और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां)।

  • संदर्भ: नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के विस्तार और इसके निरीक्षण के लिए किसी वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) की कमी की आलोचना।
  • मुख्य बिंदु:
    • पहुंच का विस्तार: इसका उपयोग काफी बढ़ गया है, प्रति माह लगभग 45,000 अनुरोध आ रहे हैं। अब पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर तक के अधिकारियों को इसकी पहुंच दी गई है।
    • NPR एकीकरण: रिपोर्टों के अनुसार NATGRID को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 119 करोड़ निवासियों का विवरण है।
    • “गांडीव” (Gandiva) इंजन: एक विश्लेषणात्मक इंजन का उपयोग किया जा रहा है जो बिखरे हुए रिकॉर्ड्स को जोड़कर व्यक्तियों की सटीक पहचान करने में सक्षम है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “निगरानी बनाम निजता”, “मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 21)” और “आंतरिक सुरक्षा बुनियादी ढांचा”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • वैधानिक निरीक्षण की कमी: नेटग्रिड को संसद के अधिनियम के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से मंजूरी दी गई थी, जिससे स्वतंत्र निरीक्षण पर संवैधानिक प्रश्न उठते हैं।
    • पक्षपात का जोखिम: संपादकीय चेतावनी देता है कि एल्गोरिदम डेटा में मौजूद सामाजिक पूर्वाग्रहों (जाति, धर्म या भूगोल) को दोहरा सकते हैं, जिससे गलत पहचान और उत्पीड़न की संभावना बढ़ सकती है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; विकास)।

  • संदर्भ: केंद्र सरकार के प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 6.5% से अधिक है।
  • मुख्य बिंदु:
    • विकास पथ: जहाँ वर्ष की पहली छमाही में विकास दर 7.8% और 8.2% रही, वहीं दूसरी छमाही में इसके घटकर 6.8% रहने की उम्मीद है।
    • बाहरी चुनौतियाँ: कपड़ा, परिधान और इंजीनियरिंग सामान जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ से भारत को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
    • क्षेत्रीय प्रदर्शन: सेवा क्षेत्र (Tertiary Sector) में 9.1% की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि खनन क्षेत्र में 0.7% की गिरावट का अनुमान है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आर्थिक विकास”, “निर्यात क्षेत्र की चुनौतियां” और “बजटीय गणना”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • उपभोक्ता व्यय: निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) के 7% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष के 7.2% से थोड़ा कम है।
    • बजट का आधार: प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) अब तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पूरे वर्ष के विकास का पूर्वानुमान है और यह केंद्रीय बजट की तैयारी का आधार बनता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; जलवायु परिवर्तन)।

  • संदर्भ: पेरिस सम्मेलन की प्रतिबद्धताओं पर भारत की प्रगति का मूल्यांकन, जिसमें उत्सर्जन तीव्रता (Intensity) में कमी और पूर्ण उत्सर्जन (Absolute Emissions) के बीच संघर्ष को रेखांकित किया गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • उत्सर्जन तीव्रता: भारत ने 2020 तक अपनी उत्सर्जन तीव्रता में लगभग 36% की कमी की (2005 के आधार पर), जिससे अपना मूल लक्ष्य समय से पहले ही पूरा कर लिया।
    • उत्पादन अंतराल: जून 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 51% तक पहुँचने के बावजूद, बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी अभी भी 70% से अधिक है क्योंकि यह “बेसलोड” बिजली प्रदान करता है।
    • वन क्षेत्र की परिभाषा: ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023’ की आलोचना की गई है क्योंकि इसमें एकल-कृषि (Monocultures) और वृक्षारोपण को भी वन क्षेत्र में शामिल किया गया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “जलवायु परिवर्तन शमन”, “नवीकरणीय ऊर्जा रणनीति” और “सतत विकास लक्ष्य”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • भंडारण की समस्या: स्थापित क्षमता को निरंतर बिजली उत्पादन में बदलने के लिए ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) के बड़े पैमाने पर विस्तार की आवश्यकता है। वर्तमान में यह केवल 500 MWh है, जबकि 2029-30 तक लक्ष्य 336 GWh का है।
    • पूर्ण उत्सर्जन: जीडीपी विकास उत्सर्जन वृद्धि से तेज रही है, जिसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था में कुल उत्सर्जन कम हुए बिना उत्सर्जन तीव्रता में गिरावट आई है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)।

  • संदर्भ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मन की बात” संबोधन के बाद सूक्ष्मजीवरोधी प्रतिरोध (AMR) पर कार्रवाई तेज करने की आवश्यकता पर चर्चा।
  • मुख्य बिंदु:
    • तर्कहीन उपयोग: भारत में AMR का सबसे बड़ा कारण जनता द्वारा एंटीबायोटिक्स का बिना सोचे-समझे और अंधाधुंध उपयोग है।
    • निगरानी अंतराल: वर्तमान में AMR की निगरानी मुख्य रूप से शहरी और बड़े मेडिकल कॉलेजों (60 लैब) तक सीमित है, जबकि ग्रामीण और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को छोड़ दिया गया है।
    • ‘वन हेल्थ’ (One Health) दृष्टिकोण: इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की अंतर्संबंधता को पहचानना आवश्यक है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति”, “संक्रामक रोग” और “सरकारी जागरूकता अभियान”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • कार्रवाई का आह्वान: विशेषज्ञों का तर्क है कि एक विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटासेट में निजी अस्पतालों और प्राथमिक केंद्रों का डेटा भी शामिल होना चाहिए ताकि प्रतिरोध की सही तस्वीर सामने आए।
    • नीतिगत प्रभाव: पीएम के संबोधन से इस विषय के मुख्यधारा में आने की उम्मीद है, जिससे प्रयोगशाला आधारित चेतावनियों को व्यापक सार्वजनिक आंदोलन में बदला जा सकेगा।

संपादकीय विश्लेषण

08 जनवरी, 2026
GS-1 समाज
📊 जनगणना 2027: डिजिटल मील का पत्थर
भारत की पहली डिजिटल जनगणना अधिसूचित; हाउसलिस्टिंग अप्रैल 2026 में शुरू होगी। बड़ी उपलब्धि: स्वतंत्र भारत में पहली बार दूसरे चरण में जाति गणना की जाएगी। 30 लाख कर्मी उपभोग और आवास सहित 35 मापदंडों पर डेटा एकत्र करेंगे।
GS-3 सुरक्षा
👁️ नेटग्रिड (NATGRID): निगरानी बनाम कानून
नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड को NPR (119 करोड़ निवासी) के साथ एकीकृत किया गया। “गांडीव” इंजन खंडित रिकॉर्ड के मिलान में सक्षम। मुख्य चिंता: प्रति माह 45,000 अनुरोधों तक पहुँचने के बावजूद इसके स्वतंत्र निरीक्षण के लिए वैधानिक ढांचे की कमी।
GS-3 अर्थव्यवस्था
📈 GDP आउटलुक: 7.4% वृद्धि का अनुमान
FAE ने वित्त वर्ष 26 के लिए वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान लगाया है। चुनौतियां: कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर 50% अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव। सेवा क्षेत्र (9.1%) और खनन (-0.7%) में भारी अंतर।
GS-3 पर्यावरण
🔋 जलवायु लक्ष्य और भंडारण अंतराल
उत्सर्जन तीव्रता में 36% की कमी। समस्या: ‘बेसलोड’ बिजली के रूप में कोयला अब भी 70% उत्पादन करता है। मुख्य बाधा: अक्षय ऊर्जा के लिए भारत को अपनी भंडारण क्षमता वर्तमान 500 MWh से बढ़ाकर 2030 तक 336 GWh करनी होगी।
GS-2 स्वास्थ्य
💊 AMR: शहरी केंद्रों से परे निगरानी
प्रधानमंत्री के “मन की बात” संबोधन का उद्देश्य एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को मुख्यधारा में लाना है। निगरानी अंतराल: वर्तमान में केवल 60 शहरी लैब तक सीमित। समाधान: प्राथमिक स्वास्थ्य और निजी डेटासेट को एकीकृत करने वाला “वन हेल्थ” दृष्टिकोण।

यहाँ भारत की भू-राजनीतिक सीमाओं, पर्वतीय दर्रों और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील आर्द्रभूमियों (Wetlands) का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

भारत सात देशों के साथ अपनी जमीनी सीमाएँ साझा करता है। ये सीमाएँ लंबाई और भौगोलिक भू-भाग के मामले में काफी भिन्न हैं।

रैंकपड़ोसी देशसीमा की लंबाई (लगभग)मुख्य साझा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
1बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम
2चीन3,488 किमीलद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश
3पाकिस्तान3,323 किमीगुजरात, राजस्थान, पंजाब, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख
4नेपाल1,751 किमीउत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम
5म्यांमार1,643 किमीअरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम
6भूटान699 किमीसिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश
7अफगानिस्तान106 किमीलद्दाख (पी.ओ.के. क्षेत्र)

पर्वतीय दर्रे (ला) पर्वत श्रृंखलाओं के बीच के प्राकृतिक मार्ग होते हैं। ये व्यापार, यात्रा और सैन्य रणनीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

  • लद्दाख और जम्मू-कश्मीर:
    • ज़ोजिला (Zoji La): श्रीनगर को कारगिल और लेह से जोड़ता है।
    • खारदुंग ला (Khardung La): दुनिया की सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़कों में से एक के रूप में जाना जाता है।
    • बनिहाल दर्रा (Banihal Pass): कश्मीर घाटी को बाहरी हिमालय (जम्मू) से जोड़ता है।
  • हिमाचल प्रदेश:
    • रोहतांग दर्रा (Rohtang Pass): कुल्लू घाटी को लाहौल और स्पीति घाटियों से जोड़ता है।
    • शिपकी ला (Shipki La): हिमाचल प्रदेश को तिब्बत (चीन) से जोड़ता है।
  • सिक्किम:
    • नाथू ला (Nathu La): एक प्राचीन सिल्क रूट शाखा जो सिक्किम को तिब्बत से जोड़ती है।
    • जेलेप ला (Jelep La): सिक्किम को ल्हासा (तिब्बत) से जोड़ता है।
  • अरunachal प्रदेश:
    • बोमडिला (Bomdi La): अरुणाचल प्रदेश को ल्हासा से जोड़ता है।

आर्द्रभूमियाँ “जैविक सुपरमार्केट” हैं जो विशाल खाद्य जाल और जल शुद्धिकरण प्रदान करती हैं। भारत में 80 से अधिक रामसर स्थल हैं।

  • चिल्का झील (ओडिशा): भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून और प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण शीतकालीन प्रवास स्थल।
  • केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान): एक मानव निर्मित आर्द्रभूमि और प्रसिद्ध पक्षी अभयारण्य (जिसे पहले भरतपुर पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था)।
  • वुलर झील (जम्मू और कश्मीर): एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की झीलों में से एक, जो विवर्तनिक गतिविधि (Tectonic activity) से बनी है और झेलम नदी द्वारा पोषित है।
  • सांभर झील (राजस्थान): भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय नमक की झील।
  • अष्टमुडी आर्द्रभूमि (केरल): एक अद्वितीय ताड़ के आकार का मुहाना (Estuary), जो स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भोज आर्द्रभूमि (मध्य प्रदेश): भोपाल शहर में स्थित दो झीलें, जो निवासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराती हैं।
श्रेणीमुख्य बिंदुभौगोलिक केंद्र
सबसे लंबी सीमाबांग्लादेशपूर्वी भारत
सबसे ऊँचा दर्राखारदुंग लालद्दाख श्रेणी
सबसे बड़ी आर्द्रभूमिसुंदरबन / चिल्कातटीय क्षेत्र
सबसे छोटी सीमाअफगानिस्तानउत्तर-पश्चिमी लद्दाख

मानचित्र पर पड़ोसी देशों के साथ लगने वाले राज्यों के क्रम (उत्तर-से-दक्षिण और पूर्व-से-पश्चिम) को ध्यान से देखें, क्योंकि UPSC अक्सर ऐसे प्रश्न पूछता है।

सीमाएँ और प्रवेश द्वार

भू-राजनीति
🚩 राष्ट्रीय सीमाएँ
भारत सात देशों के साथ थल सीमा साझा करता है, विशाल 4,096 किमी बांग्लादेश सीमा से लेकर 106 किमी की छोटी अफगानिस्तान पट्टी तक।
देश लंबाई प्रमुख साझा क्षेत्र
बांग्लादेश4,096 किमीपश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य
चीन3,488 किमीलद्दाख, अरुणाचल प्रदेश
पाकिस्तान3,323 किमीराजस्थान, पंजाब, J&K
🎯 मिशन: नेपाल के साथ सीमा साझा करने वाले पांच भारतीय राज्यों की पहचान करें।
मार्ग (Navigation)
🏔️ पर्वतीय दर्रे (La)
नाथू ला और ज़ोजी ला जैसे रणनीतिक प्रवेश द्वार दुनिया की सबसे ऊँची श्रेणियों के बीच महत्वपूर्ण प्राकृतिक मार्ग प्रदान करते हैं।
🎯 मिशन: खारदुंग ला को लोकेट करें और एक मोटर योग्य सड़क के रूप में इसके महत्व को नोट करें।
पारिस्थितिकी
🦆 रामसर आर्द्रभूमि (Wetlands)
भारत के ‘जैविक सुपरमार्केट’ में चिल्का झील और वुलर झील जैसे पारिस्थितिक रूप से समृद्ध क्षेत्र शामिल हैं।
🎯 मिशन: झेलम नदी के मार्ग को वुलर झील के साथ उसके जुड़ाव तक ट्रैक करें।

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