IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 7 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 6 Chapter-6 (राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य)
यह अध्याय “राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य” हमें बताता है कि कैसे लगभग 3,000 से 2,500 साल पहले छोटे कबीलों (जनों) से बड़े संगठित राज्यों का उदय हुआ और शासन की विभिन्न प्रणालियाँ विकसित हुईं।
1. नए राजाओं का उदय
लगभग 3,000 साल पहले, राजा बनने की प्रक्रिया में बदलाव आया। अब कुछ लोग बड़े-बड़े यज्ञों का आयोजन करके राजा के रूप में प्रतिष्ठित होने लगे।
- अश्वमेध यज्ञ (घोड़े की बलि): यह एक प्रमुख अनुष्ठान था जिसमें एक घोड़े को राजा के आदमियों की देखरेख में स्वतंत्र घूमने के लिए छोड़ दिया जाता था।
- यज्ञ का महत्व: यदि कोई दूसरा राजा घोड़े को रोकता था, तो उसे युद्ध करना पड़ता था; यदि वे उसे जाने देते थे, तो इसका अर्थ था कि उन्होंने यज्ञ करने वाले राजा को अधिक शक्तिशाली स्वीकार कर लिया है।
- राजा की भूमिका: वह इस आयोजन का मुख्य केंद्र होता था। वह अक्सर एक विशेष सिंहासन या बाघ की खाल पर बैठता था, जबकि उसका सारथी युद्ध के मैदान में उसकी वीरता की कहानियाँ सुनाता था।
- वर्ण व्यवस्था (The Varna System): पुरोहितों ने समाज को चार समूहों में विभाजित किया था जिन्हें ‘वर्ण’ कहा जाता था। प्रत्येक वर्ण के कार्य जन्म के आधार पर निर्धारित थे:
- ब्राह्मण: वे वेदों का अध्ययन-अध्यापन और यज्ञ करते थे, जिसके लिए उन्हें उपहार मिलते थे।
- क्षत्रिय (शासक): इनका काम युद्ध करना और लोगों की रक्षा करना था।
- वैश्य (कृषक/व्यापारी): इनमें किसान, पशुपालक और व्यापारी आते थे। क्षत्रिय और वैश्य दोनों ही यज्ञ कर सकते थे।
- शूद्र: इन्हें अन्य तीन समूहों की सेवा करनी पड़ती थी। ये कोई अनुष्ठान नहीं कर सकते थे और न ही वेद पढ़ सकते थे।
- अछूत: बाद के समय में शिल्पकारों, शिकारियों और शवों को दफनाने वालों के एक समूह को अछूत माना जाने लगा।
2. जनपद और महाजनपद
जैसे-जैसे राजाओं ने बड़े यज्ञ किए, उन्हें अब केवल कबीलों का राजा न मानकर ‘जनपदों’ (जहाँ ‘जन’ ने अपने पैर रखे और बस गए) का राजा माना जाने लगा।
- जनपद: पुरातत्वविदों ने पुराना किला (दिल्ली) और हस्तिनापुर (मेरठ के पास) जैसी बस्तियों की खोज की है। यहाँ लोग झोपड़ियों में रहते थे और चावल, गेहूँ, गन्ना जैसी फसलें उगाते थे।
- महाजनपद: लगभग 2,500 साल पहले, कुछ जनपद अन्य की तुलना में अधिक शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हो गए। इन्हें ‘महाजनपद’ कहा गया।
- किलेबंदी (Fortification): अधिकांश महाजनपदों की राजधानियों के चारों ओर लकड़ी, ईंट या पत्थर की ऊँची और मज़बूत दीवारें बनाई गई थीं। ये सुरक्षा के लिए, शक्ति के प्रदर्शन के लिए और जनसंख्या पर नियंत्रण रखने के लिए बनाई जाती थीं।
- सेना और कर (Taxes): राजाओं ने अब नियमित और वेतनभोगी सेनाएँ रखना शुरू कर दिया। किलों के निर्माण और सेना के खर्च के लिए, वे अब उपहारों के बजाय नियमित कर वसूलने लगे।
3. अर्थव्यवस्था और कृषि में परिवर्तन
कृषि में दो बड़े बदलाव आए जिससे खाद्य उत्पादन में वृद्धि हुई:
- लोहे के हल के फाल: अब लकड़ी के हल के स्थान पर लोहे के फाल का उपयोग होने लगा, जिससे कठोर जमीन को आसानी से जोता जा सका और अधिक अनाज पैदा हुआ।
- धान का प्रत्यारोपण (Transplantation): बीजों को बिखेरने के बजाय, अब धान के पौधे तैयार कर उन्हें खेतों में लगाया जाने लगा। इससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ गई और पैदावार अधिक हुई।
- कर (Tax): किसान अपनी उपज का 1/6 हिस्सा कर के रूप में देते थे, जिसे ‘भाग’ कहा जाता था। शिल्पकार श्रम के रूप में कर चुकाते थे, जबकि पशुपालक जानवरों या पशु उत्पादों के रूप में कर देते थे।
4. केस स्टडी: मगध और वज्जि
अध्याय में शासन की दो अलग-अलग प्रणालियों का उल्लेख है: राजतंत्र और गणतंत्र।
A. मगध (राजतंत्र – Monarchy)
- भूगोल: मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया। गंगा और सोन नदियाँ यहाँ से बहती थीं, जो परिवहन, जल आपूर्ति और जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए महत्वपूर्ण थीं।
- संसाधन: यहाँ के जंगलों से सेना के लिए हाथी और इमारतों के निर्माण के लिए लकड़ी मिलती थी। लोहे की खदानों से मज़बूत हथियार बनाने के लिए लोहा मिलता था।
- शासक: बिम्बिसार, अजातशत्रु और महापद्म नन्द जैसे शक्तिशाली राजाओं ने इस साम्राज्य का विस्तार किया।
- राजधानी: पहले राजगृह (बिहार) मगध की राजधानी थी, जिसे बाद में पाटलिपुत्र (पटना) स्थानांतरित कर दिया गया।
B. वज्जि (गण या संघ – Republic)
- अलग शासन व्यवस्था: मगध के विपरीत, वज्जि में ‘गण’ या ‘संघ’ शासन प्रणाली थी, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
- कई शासक: गण या संघ में एक नहीं बल्कि कई शासक (राजा) होते थे जो मिलकर शासन करते थे।
- सभाएँ: ये राजा सभाओं में मिलते थे और चर्चा तथा बहस के माध्यम से निर्णय लेते थे।
- वर्जित: महिलाओं, दासों और ‘कम्मकारों’ (मजदूरों) को इन सभाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।
5. महत्वपूर्ण तिथियाँ (महत्वपूर्ण घटनाक्रम)
| समय | घटना |
| लगभग 3000 साल पहले | यज्ञों के माध्यम से नए प्रकार के राजाओं का उदय। |
| लगभग 2500 साल पहले | महाजनपदों का उदय और किलेबंद शहरों का विकास। |
| लगभग 2300 साल पहले | सिकंदर का आक्रमण और बौद्ध ग्रंथों का लेखन। |
| लगभग 1500 साल पहले | गुप्त शासकों द्वारा गणों/संघों पर विजय और उनका अंत। |
👑 राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य
• क्षत्रिय: युद्ध करना और रक्षा करना
• वैश्य: किसान, पशुपालक और व्यापारी
• शूद्र: अन्य तीन वर्गों की सेवा करना
1. लोहे के फाल: कठोर जमीन को आसानी से जोता जाने लगा।
2. धान का प्रत्यारोपण: बीजों को छिड़कने के बजाय पौधों को रोपकर खेती शुरू हुई, जिससे पैदावार बढ़ गई।
वज्जि: यहाँ शासन का स्वरूप गण या संघ था, जहाँ कई शासक (राजा) मिलकर सभाओं में चर्चा के जरिए निर्णय लेते थे।
कक्षा-6 इतिहास अध्याय-6 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: राज्य, राजा और एक प्राचीन गणराज्य
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: भारत में नागरिकता (अनुच्छेद 5–11)
भारतीय संवैधानिक और कानूनी ढांचे के आधार पर, नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता प्राप्त करने के पाँच तरीके और इसे खोने के तीन तरीके बताता है।
नागरिकता प्राप्त करने के तरीके (Acquisition of Citizenship)
1. जन्म से (By Birth):
- 1 जुलाई, 1987 से पहले: भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, चाहे उसके माता-पिता की राष्ट्रीयता कुछ भी हो।
- 1 जुलाई, 1987 – 3 दिसंबर, 2004: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक होगा यदि जन्म के समय उसके माता-पिता में से कम से कम कोई एक भारत का नागरिक हो।
- 3 दिसंबर, 2004 के बाद: भारत में जन्मा व्यक्ति तभी नागरिक माना जाएगा यदि उसके दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों, या एक नागरिक हो और दूसरा ‘अवैध प्रवासी’ (Illegal migrant) न हो।
2. वंश के आधार पर (By Descent):
- यह भारत के बाहर पैदा हुए लोगों पर लागू होता है।
- यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है, तो वह भारत का नागरिक हो सकता है यदि उसके पिता (1992 के बाद माता-पिता में से कोई भी) जन्म के समय भारत के नागरिक थे।
- 3 दिसंबर, 2004 के बाद, ऐसे जन्मों का पंजीकरण एक वर्ष के भीतर भारतीय वाणिज्य दूतावास (Consulate) में कराना अनिवार्य है।
3. पंजीकरण द्वारा (By Registration):
केंद्र सरकार आवेदन पर किसी भी व्यक्ति (अवैध प्रवासी को छोड़कर) को नागरिक के रूप में पंजीकृत कर सकती है, यदि वे निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैं:
- भारतीय मूल के व्यक्ति (PIO) जो सात साल से भारत में सामान्य रूप से निवासी रहे हों।
- वे व्यक्ति जो भारतीय नागरिकों से विवाहित हैं और पंजीकरण से पहले सात साल से भारत में रह रहे हों।
- भारतीय नागरिकों के नाबालिग बच्चे।
4. प्राकृतिक रूप से/देशीयकरण द्वारा (By Naturalization):
कोई भी विदेशी नागरिक नागरिकता प्राप्त कर सकता है यदि वह 12 वर्षों से भारत में रह रहा हो (आवेदन से ठीक 1 वर्ष पहले और पिछले 14 वर्षों में से कुल 11 वर्ष) और निम्नलिखित योग्यताएं रखता हो:
- उसका चरित्र अच्छा हो।
- संविधान की आठवीं अनुसूची में निर्दिष्ट किसी एक भाषा का ज्ञान हो।
- उसका इरादा भारत में ही रहने का हो।
5. क्षेत्र समाविष्टि द्वारा (By Incorporation of Territory):
यदि कोई विदेशी क्षेत्र भारत का हिस्सा बनता है (जैसे पुडुचेरी या गोवा का संघ में शामिल होना), तो भारत सरकार उन व्यक्तियों को निर्दिष्ट करती है जो भारत के नागरिक होंगे।
नागरिकता खोने के तरीके (Loss of Citizenship)
1. स्वैच्छिक त्याग द्वारा (By Renunciation):
- कोई भी वयस्क भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता त्यागने की घोषणा कर सकता है।
- जब कोई व्यक्ति नागरिकता त्यागता है, तो उस व्यक्ति का प्रत्येक नाबालिग बच्चा भी अपनी भारतीय नागरिकता खो देता है (हालाँकि, बच्चा 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर इसे पुनः प्राप्त कर सकता है)।
2. बर्खास्तगी/समाप्ति द्वारा (By Termination):
- भारत ‘एकल नागरिकता’ के सिद्धांत का पालन करता है।
- यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वचालित रूप से समाप्त हो जाती है।
3. वंचित किए जाने द्वारा (By Deprivation):
केंद्र सरकार द्वारा निम्नलिखित आधारों पर किसी व्यक्ति की नागरिकता अनिवार्य रूप से समाप्त की जा सकती है:
- यदि नागरिकता धोखाधड़ी (Fraud) से प्राप्त की गई हो।
- नागरिक ने भारत के संविधान के प्रति अनिष्ठा (Disloyalty) दिखाई हो।
- युद्ध के दौरान नागरिक ने शत्रु के साथ अवैध रूप से व्यापार या संचार किया हो।
- पंजीकरण या देशीयकरण के पाँच वर्षों के भीतर, उस नागरिक को किसी भी देश में दो साल के लिए जेल हुई हो।
🇮🇳 नागरिकता अधिनियम, 1955
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (07 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (07 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. चुनाव आयोग द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) का बचाव
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था और शासन; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)
- संदर्भ: भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने मतदाता सूचियों के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का बचाव करते हुए इसे “समांतर NRC” (parallel NRC) होने के दावों को खारिज कर दिया।
- मुख्य बिंदु:
- संवैधानिक कर्तव्य: आयोग का तर्क है कि अनुच्छेद 324 के तहत उसका यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोई भी विदेशी देश की मतदाता सूची में स्थान न पाए।
- NRC से भिन्नता: आयोग के अनुसार NRC में सभी नागरिकों का पंजीकरण होता है, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से ऊपर के स्वस्थ दिमाग वाले नागरिकों को ही शामिल किया जाता है।
- बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अकेले उत्तर प्रदेश में 2.89 करोड़ नाम हटाए गए (कुल सूची का 18.7%), जिसका मुख्य कारण स्थायी प्रवास और मृत्यु बताया गया है।
- UPSC प्रासंगिकता: “संवैधानिक निकाय (चुनाव आयोग)”, “चुनावी सुधार” और “नागरिकता कानून” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- नागरिक-केंद्रित शासन: आयोग के वकील ने तर्क दिया कि संविधान “नागरिक-केंद्रित” है, जिससे चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी के लिए नागरिकता मुख्य आधार बन जाती है।
- राजनीतिक विरोध: पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने तकनीकी खामियों का आरोप लगाया है और कहा है कि आयोग एक राजनीतिक दल द्वारा विकसित ऐप का उपयोग कर रहा है।
2. डिस्कनेक्ट होने का अधिकार (शशि थरूर का निजी सदस्य विधेयक)
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन; सामाजिक न्याय) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था- श्रम सुधार)
- संदर्भ: एक निजी सदस्य विधेयक के माध्यम से भारत के कार्यबल में ‘बर्नआउट’ (काम का अत्यधिक तनाव) और मानसिक स्वास्थ्य संकट को दूर करने के लिए ‘डिस्कनेक्ट होने के अधिकार’ (Right to Disconnect) की मांग की गई है।
- मुख्य बिंदु:
- बर्नआउट डेटा: ILO के अनुसार, भारत का 51% कार्यबल प्रति सप्ताह 49 घंटे से अधिक काम करता है (वैश्विक स्तर पर दूसरा), और 78% कर्मचारी काम के तनाव (Burnout) की रिपोर्ट करते हैं।
- प्रस्तावित संरक्षण: विधेयक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि निर्धारित घंटों के बाद काम के कॉल या मैसेज का जवाब न देने पर कर्मचारियों को दंडित न किया जाए।
- वैश्विक उदाहरण: फ्रांस (2017 से), पुर्तगाल, इटली और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने अपने श्रम कानूनों में इसे पहले ही शामिल कर लिया है।
- UPSC प्रासंगिकता: “श्रम सुधार”, “मानसिक स्वास्थ्य” और “कार्य-जीवन संतुलन” (Work-Life Balance) के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- कानूनी कमियाँ: ‘व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (2020)’ अक्सर अनुबंधात्मक और ‘गिग’ श्रमिकों (Gig workers) को शोषणकारी घंटों से बचाने में विफल रहती है।
- उत्पादकता का भ्रम: संपादकीय का तर्क है कि थका हुआ कर्मचारी कम उत्पादक होता है; विश्राम का समय स्थायी आर्थिक विकास के लिए एक अनिवार्य शर्त है।
3. वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप: अंतरराष्ट्रीय कानून का अपमान
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)
- संदर्भ: अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
- मुख्य बिंदु:
- बल का अवैध प्रयोग: संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 2(4) बल प्रयोग को प्रतिबंधित करता है (सिवाय आत्मरक्षा या सुरक्षा परिषद की अनुमति के), जो इस मामले में लागू नहीं थे।
- राज्य प्रमुख की उन्मुक्ति (Immunity): अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, राज्य प्रमुखों को विदेशी अदालतों के आपराधिक क्षेत्राधिकार से व्यक्तिगत उन्मुक्ति प्राप्त होती है।
- चीन का झुकाव: वेनेजुएला का झुकाव चीन की ओर बढ़ा है; 2014 से वेनेजुएला के कुल हथियार आयात का 46% चीन से रहा है।
- UPSC प्रासंगिकता: “अंतरराष्ट्रीय कानून”, “वैश्विक भू-राजनीति” और “भारत की विदेश नीति की चुनौतियां” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- डिजिटल संप्रभुता: यह गिरफ्तारी दर्शाती है कि राजनीतिक संप्रभुता डिजिटल संप्रभुता से अलग नहीं है; विदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचे पर निर्भरता नेतृत्व को ‘ट्रैकिंग’ के प्रति असुरक्षित बनाती है।
- आर्थिक वर्चस्व: इस कदम को ‘मोनरो डॉक्ट्रिन’ (Monroe Doctrine) के पुनरुद्धार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करना है।
4. घास के मैदान: उपेक्षित कार्बन सिंक (Carbon Sink)
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी; संरक्षण; जलवायु परिवर्तन)
- संदर्भ: एक विश्लेषण कि क्यों घास के मैदानों और सवाना को जंगलों के साथ राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजनाओं (NDCs) में एकीकृत किया जाना चाहिए।
- मुख्य बिंदु:
- कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration): घास के मैदान जंगलों की तुलना में बेहतर और अधिक स्थिर कार्बन सिंक हो सकते हैं, फिर भी उन्हें COP30 जैसी वार्ताओं से बाहर रखा गया है।
- नीतिगत समस्या: भारत में घास के मैदान 18 अलग-अलग मंत्रालयों के अंतर्गत आते हैं और अक्सर उन्हें “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में लेबल किया जाता है।
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता: संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘चरागाहों और चरवाहों का अंतरराष्ट्रीय वर्ष’ घोषित किया है।
- UPSC प्रासंगिकता: “जैव विविधता संरक्षण”, “जलवायु शमन रणनीतियाँ” और “चरवाहों के अधिकार” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- भारत के लिए अवसर: अपने NDCs में घास के मैदानों को मान्यता देकर, भारत अपने जलवायु शमन प्रयासों को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दे सकता है।
- सामाजिक न्याय: चरागाहों की रक्षा करना स्वदेशी लोगों के क्षेत्रीय अधिकारों को मान्यता देने से जुड़ा एक सामाजिक न्याय का मुद्दा भी है।
5. चौराहे पर ईरान का संकट
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध; पश्चिम एशिया)
- संदर्भ: ईरान में राष्ट्रव्यापी आर्थिक विरोध प्रदर्शनों और इसके राजनीतिक जोखिमों का विश्लेषण।
- मुख्य बिंदु:
- आर्थिक तनाव: ईरान में खाद्य मुद्रास्फीति 64% तक पहुँच गई है और जून 2025 से रियाल की कीमत में 60% की गिरावट आई है।
- दैनिक कठिनाइयाँ: बिजली कटौती एक दैनिक वास्तविकता बन गई है और सरकार “फंसी हुई” महसूस कर रही है।
- दमन का चक्र: बिगड़ती अर्थव्यवस्था और बाहरी खतरों के बीच सरकार का दमनकारी रुख एक “संकट का चक्र” पैदा कर रहा है।
- UPSC प्रासंगिकता: “पश्चिम एशिया भू-राजनीति” और “ईरान में भारत के रणनीतिक हित” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- सुधार की अनिवार्यता: संपादकीय का तर्क है कि गहराते आर्थिक संकट के सामने धर्म और राष्ट्रवाद जनता को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते।
- अमेरिकी नीति की आलोचना: वाशिंगटन की “आर्थिक दबाव” की नीति आम ईरानियों की पीड़ा को बढ़ा रही है और शासन को अधिक संदिग्ध बना रही है।
- आगे की राह: स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ईरान के नेतृत्व को आंतरिक सुधार शुरू करने और भ्रष्टाचार से निपटने की आवश्यकता है।
संपादकीय विश्लेषण
07 जनवरी, 2026Mapping:
1. प्रमुख नदी प्रणालियाँ (Major River Systems)
भारत का भूगोल उसके विशाल जल निकासी बेसिनों (Drainage Basins) द्वारा परिभाषित है:
हिमालयी नदियाँ (The Himalayan Rivers):
- सिंधु प्रणाली (Indus System): इसमें सिंधु और उसकी पाँच मुख्य सहायक नदियाँ शामिल हैं: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
- गंगा प्रणाली (Ganga System): यह भागीरथी और अलकनंदा के मिलने से बनती है। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी और सोन हैं।
- ब्रह्मपुत्र प्रणाली (Brahmaputra System): यह अरुणाचल प्रदेश के माध्यम से भारत में प्रवेश करती है और असम से होकर बहती है।
प्रायद्वीपीय नदियाँ (The Peninsular Rivers):
- पश्चिम की ओर बहने वाली: नर्मदा और तापी (ये अरब सागर में गिरती हैं)।
- पूर्व की ओर बहने वाली: महानदी, गोदावरी (प्रायद्वीप की सबसे लंबी नदी), कृष्णा और कावेरी (ये बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं)।
2. बाघ अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान (Tiger Reserves & National Parks)
जैव विविधता के संरक्षण के लिए ये क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
बाघ अभयारण्य (Project Tiger):
- कॉर्बेट (उत्तराखंड): भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य।
- कान्हा और बांधवगढ़ (मध्य प्रदेश): उच्च बाघ घनत्व के लिए प्रसिद्ध।
- रणथंभौर (राजस्थान): अपने शुष्क पर्णपाती आवास के लिए जाना जाता है।
- सुंदरवन (पश्चिम बंगाल): दुनिया का एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास।
- पेरियार (केरल): एक अनूठा जंगल और झील आधारित रिजर्व।
प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव:
- काजीरंगा (असम): ‘एक सींग वाले गेंडे’ के लिए प्रसिद्ध।
- गिर (गुजरात): ‘एशियाई शेरों’ का अंतिम निवास स्थान।
- केवलादेव (राजस्थान): एक प्रमुख पक्षी अभयारण्य और आर्द्रभूमि (Wetland)।
3. प्राकृतिक और ऊर्जा संसाधन (Natural & Energy Resources)
खनिजों और ईंधन में भारत की संपदा का मानचित्रण:
तेल और प्राकृतिक गैस भंडार:
- अपतटीय (Offshore): बॉम्बे हाई (महाराष्ट्र) सबसे बड़ा क्षेत्र है।
- ओंशोर (Onshore): डिगबोई (असम) सबसे पुराना है; बाड़मेर (राजस्थान) और खंभात (गुजरात) प्रमुख आधुनिक क्षेत्र हैं।
लौह अयस्क और कोयला:
- लोहा: छोटा नागपुर पठार (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़) में केंद्रित है।
- कोयला: गोंदवाना क्षेत्रों में पाया जाता है (दामोदर घाटी—झरिया, रानीगंज)।
बॉक्साइट और तांबा:
- बॉक्साइट: ओडिशा और गुजरात की पहाड़ियों में पाया जाता है।
- तांबा: बालाघाट (मध्य प्रदेश) और खेतड़ी (राजस्थान)।
🌍 त्वरित भूगोल संदर्भ तालिका (Quick Reference Table)
| विशेषता | उदाहरण | मुख्य स्थान |
| प्रमुख नदियाँ | सिंधु, गंगा, गोदावरी | उत्तरी और मध्य भारत के मैदान |
| बाघ अभयारण्य | जिम कॉर्बेट, सरिस्का, वाल्मीकि | हिमालय की तराई और मध्य भारत |
| तेल भंडार | मुंबई हाई, कृष्णा-गोदावरी बेसिन | अपतटीय और पश्चिमी भारत |
| वन्यजीव | शेर, गेंडा, हाथी | गुजरात, असम, कर्नाटक |
💡 मैपिंग टिप:
UPSC के लिए नदियों के उत्तर-से-दक्षिण क्रम और टाइगर रिजर्व के पूर्व-से-पश्चिम क्रम को मानचित्र पर जरूर देखें।
भारतीय भूगोल (Indian Geography)
| विशेषता | प्रमुख उदाहरण | स्थान फोकस |
|---|---|---|
| प्रमुख नदियाँ | सिंधु, गंगा, गोदावरी | उत्तरी और मध्य मैदान |
| बाघ अभयारण्य | जिम कॉर्बेट, सरिस्का | तलहटी और मध्य भारत |
| तेल भंडार | मुंबई हाई, डिगबोई | अपतटीय और उत्तर-पूर्व |
| वन्यजीव | शेर, गैंडे, हाथी | गुजरात, असम, दक्षिण भारत |