IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 5 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 6 Chapter-4 (आरंभिक नगर)
लगभग 4,700 वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप में कुछ सबसे पुराने नगरों का विकास हुआ, जिन्हें हम हड़प्पा सभ्यता के नाम से जानते हैं।
1. हड़प्पा की खोज
- आकस्मिक खोज: लगभग 150 साल पहले, जब पंजाब (अब पाकिस्तान में) में पहली बार रेलवे लाइनें बिछाई जा रही थीं, तो इंजीनियरों को अचानक हड़प्पा का पुरास्थल मिला।
- विरासत का नुकसान: उन्होंने इसे ईंटों का एक तैयार स्रोत समझा और हज़ारों ईंटें उखाड़ लीं, जिससे कई प्राचीन इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई थीं।
- पुरातत्व मान्यता: लगभग 80 साल पहले पुरातत्वविदों ने इस स्थल को खोजा और महसूस किया कि यह उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक था।
- समयरेखा: इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले हुआ था।
2. उत्कृष्ट नगर नियोजन और वास्तुकला
- दो भागों में विभाजन: अधिकांश नगरों को दो भागों में बांटा गया था: एक छोटा लेकिन ऊंचाई पर बना पश्चिमी भाग जिसे ‘नगर दुर्ग’ (Citadel) कहा जाता था, और एक बड़ा लेकिन निचले इलाके में बना पूर्वी भाग जिसे ‘निचला शहर’ (Lower Town) कहा जाता था।
- मजबूत दीवारें: दोनों हिस्सों की दीवारें पकी हुई ईंटों से बनी थीं। ईंटें इतनी अच्छी तरह पकी थीं कि वे हज़ारों सालों बाद भी टिकी रहीं। उन्हें ‘इंटरलॉकिंग’ तरीके से लगाया गया था जिससे दीवारें मज़बूत रहती थीं।
- महान स्नानागार (मोहनजोदड़ो): नगर दुर्ग में एक विशेष तालाब बनाया गया था। इसमें ईंटों और प्लास्टर का उपयोग किया गया था और पानी के रिसाव को रोकने के लिए प्राकृतिक तार (Natural Tar/Bitumen) की परत चढ़ाई गई थी। इसमें उतरने के लिए दो तरफ से सीढ़ियाँ थीं।
- उन्नत जल निकासी: नालियाँ सीधी रेखा में बनाई गई थीं और पानी के बहाव के लिए उनमें हल्की ढलान थी। नालियाँ ढकी हुई थीं और नियमित सफाई के लिए जगह-जगह पर ‘मेनहोल’ (निरीक्षण छेद) बनाए गए थे।
- घर: घर आमतौर पर एक या दो मंजिला होते थे, जिनमें एक आंगन के चारों ओर कमरे बने होते थे। अधिकांश घरों में अलग स्नानघर और अपने कुएं होते थे।
3. शहर का जीवन और कार्य
- प्रमुख व्यवसाय:
- शासक: वे लोग जो विशेष इमारतों के निर्माण की योजना बनाते थे और संसाधनों को जुटाते थे।
- लिपिक (Scribes): वे लोग जो लिखना जानते थे और मुहरों को तैयार करने में मदद करते थे।
- शिल्पकार: पुरुष और महिलाएं जो घरों या विशेष कार्यशालाओं में सभी प्रकार की चीजें बनाते थे।
- विशेष शिल्प:
- पत्थर के बाट: ये चर्ट (Chert) पत्थर से बने होते थे और बहुमूल्य धातुओं या पत्थरों को तौलने के लिए सटीक आकार में बनाए गए थे।
- मनके (Beads): सुंदर लाल कार्नेलियन पत्थरों को काटकर, तराशकर और पॉलिश करके आभूषण बनाए जाते थे।
- मुहरें (Seals): पत्थर की आयताकार मुहरों पर आमतौर पर जानवरों के चित्र और एक लिपि होती थी जिसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है।
- फयेंस (Faience): यह एक कृत्रिम रूप से तैयार पदार्थ था जिसका उपयोग मनके, चूड़ियाँ और छोटे बर्तन बनाने के लिए किया जाता था।
4. व्यापार और कच्चा माल
हड़प्पा के लोग दूर-दराज के स्थानों से कच्चा माल प्राप्त करते थे:
- तांबा: वर्तमान राजस्थान और ओमान से।
- टीन: वर्तमान अफगानिस्तान और ईरान से (तांबे के साथ मिलाकर कांसा बनाने के लिए)।
- सोना: वर्तमान कर्नाटक से।
- बहुमूल्य पत्थर: वर्तमान गुजरात, ईरान और अफगानिस्तान से।
5. कृषि और भोजन
- फसलें: वे गेहूं, जौ, दालें, मटर, धान, तिल, अलसी और सरसों उगाते थे।
- हल: मिट्टी को जोतने और बीज बोने के लिए लकड़ी के हल का उपयोग किया जाता था।
- सिंचाई: चूंकि इस क्षेत्र में भारी वर्षा नहीं होती थी, इसलिए पानी का संचय किया जाता था और आवश्यकता पड़ने पर खेतों में आपूर्ति की जाती थी।
- पशुपालन: वे गाय, भैंस, भेड़ और बकरी पालते थे।
6. गुजरात में हड़प्पा के नगर
- धौलावीरा: कच्छ के रण में स्थित यह शहर अद्वितीय था क्योंकि यह तीन भागों (दो नहीं) में विभाजित था और इसमें प्रवेश के लिए बड़े पत्थर के प्रवेश द्वार थे। यहाँ से हड़प्पा लिपि के बड़े अक्षरों के अवशेष भी मिले हैं।
- लोथल: खंभात की खाड़ी के पास स्थित यह शहर पत्थर, शंख और धातु की चीजें बनाने का केंद्र था। यहाँ एक बड़ा गोदीवाड़ा (Dockyard/बंदरगाह) था जहाँ जहाजों से माल उतारा और चढ़ाया जाता था।
7. पतन का रहस्य
लगभग 3,900 वर्ष पहले, इन नगरों में बड़े बदलाव आने शुरू हुए:
- विनाश के संकेत: जल निकासी प्रणाली खराब हो गई, सड़कों पर कचरा जमा होने लगा और लोगों ने लेखन, मुहरों और बाटों का उपयोग बंद कर दिया।
- संभावित कारण: इतिहासकारों के अनुसार इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे: नदियों का सूख जाना, जंगलों का विनाश (ईंटें पकाने के लिए ईंधन की कमी), बाढ़ आना या शासकों का नियंत्रण समाप्त हो जाना।
🧱 आरंभिक नगर
कक्षा-6 इतिहास अध्याय-4 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: आरंभिक नगर
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: संघ और उसके क्षेत्र (अनुच्छेद 1-4)
भारत के संघ और उसके क्षेत्र को समझने के लिए हमें भारतीय संविधान के भाग I (अनुच्छेद 1 से 4) को देखना होगा। यह भाग भारत की पहचान, उसके दायरे और संसद को देश की भौगोलिक सीमाओं को फिर से आकार देने की शक्ति को परिभाषित करता है।
अनुच्छेद 1: संघ का नाम और प्रकार
अनुच्छेद 1 सबसे मौलिक है क्योंकि यह परिभाषित करता है कि भारत क्या है।
- अनुच्छेद 1(1): इसमें कहा गया है कि “इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ (Union of States) होगा।”
- “यूनियन” (संघ) बनाम “फेडरेशन” (महासंघ): डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने स्पष्ट किया कि भारत एक “यूनियन” है क्योंकि:
- भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसा कि अमेरिका में है)।
- किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secede) का अधिकार नहीं है।
- अनुच्छेद 1(3) – भारत का क्षेत्र: इसमें तीन श्रेणियां शामिल हैं:
- राज्यों के क्षेत्र: पहली अनुसूची में उल्लिखित राज्य (जैसे पंजाब, राजस्थान, गुजरात)।
- संघ राज्य क्षेत्र (UTs): केंद्र सरकार द्वारा सीधे प्रशासित क्षेत्र।
- अधिग्रहित क्षेत्र: वे क्षेत्र जिन्हें भारत भविष्य में अधिग्रहित कर सकता है (जैसे संधि या खरीद के माध्यम से)।
अनुच्छेद 2: नए क्षेत्रों का प्रवेश
यह अनुच्छेद संसद को उन नए राज्यों को संघ में शामिल करने की शक्ति देता है जो पहले भारत का हिस्सा नहीं थे।
- प्रवेश (Admission): पहले से अस्तित्व में रहे किसी बाहरी राज्य को शामिल करना (जैसे सिक्किम का प्रवेश)।
- स्थापना (Establishment): ऐसे क्षेत्र में राज्य बनाना जहाँ पहले कोई राज्य नहीं था।
अनुच्छेद 3: राज्यों का आंतरिक पुनर्गठन
जहाँ अनुच्छेद 2 बाहरी क्षेत्रों से संबंधित है, वहीं अनुच्छेद 3 संसद को भारत के आंतरिक मानचित्र पर पूर्ण अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 3 के तहत संसद की शक्तियाँ:
- नया राज्य बनाना: किसी राज्य से क्षेत्र अलग करके या दो राज्यों को मिलाकर।
- क्षेत्र बढ़ाना/घटाना: किसी भी राज्य के भौतिक आकार को बदलना।
- सीमाओं में परिवर्तन: राज्यों के बीच की सीमा रेखाओं को बदलना।
- नाम बदलना: उदाहरण के लिए, ‘उड़ीसा’ से ‘ओडिशा’ या ‘पांडिचेरी’ से ‘पुडुचेरी’।
- शर्तें और प्रक्रिया:
- राष्ट्रपति की सिफारिश: इन परिवर्तनों के लिए विधेयक केवल राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति से ही पेश किया जा सकता है।
- राज्यों की राय: राष्ट्रपति को संबंधित राज्य विधानमंडल को एक निश्चित समय के भीतर अपनी राय देने के लिए विधेयक भेजना होता है।
- संसद सर्वोच्च है: संसद राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिए बाध्य नहीं है। वह उनके सुझावों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।
अनुच्छेद 4: परिवर्तनों की कानूनी स्थिति
यह अनुच्छेद सुनिश्चित करता है कि अनुच्छेद 2 और 3 के तहत किए गए परिवर्तनों को लागू करना आसान हो।
- साधारण बहुमत: नए राज्यों के निर्माण या नाम बदलने के कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत ‘संवैधानिक संशोधन’ की आवश्यकता नहीं होती। इन्हें किसी भी सामान्य कानून की तरह साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है।
- स्वचालित परिवर्तन: ऐसे कानून स्वचालित रूप से पहली अनुसूची (राज्यों की सूची) और चौथी अनुसूची (राज्यसभा में सीटों का आवंटन) में संशोधन की अनुमति देते हैं।
संघ का विकास: एक सारांश तालिका
| चरण | मुख्य घटना / समिति | परिणाम |
| 1948 | धर आयोग (Dhar Commission) | प्रशासनिक सुविधा के आधार पर पुनर्गठन की सिफारिश की, भाषा के आधार पर नहीं। |
| 1949 | JVP समिति | राज्यों के आधार के रूप में भाषा को खारिज कर दिया। |
| 1953 | आंध्र राज्य का गठन | भाषाई आधार पर बनाया गया पहला राज्य (पोट्टी श्रीरामुलु की मृत्यु के बाद)। |
| 1956 | राज्य पुनर्गठन अधिनियम | भारत को 14 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। |
⚖️ संघ और उसके क्षेत्र
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (05 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (05 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. चीन का विरोधाभास: बदलता नजरिया
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और इसके पड़ोसी देश)
- संदर्भ: 2026 की शुरुआत में चीन की रणनीतिक स्थिति और भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा तथा वैश्विक स्थिति पर इसके प्रभाव का विश्लेषण।
- मुख्य बिंदु:
- एक राष्ट्रीय विरोधाभास: चीन वर्तमान में गहरे आंतरिक आर्थिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन साथ ही विदेशों में रणनीतिक आत्मविश्वास और राजनयिक पहुंच का प्रदर्शन कर रहा है।
- आर्थिक रणनीति (चीन शॉक 2.0): कमजोर घरेलू मांग की भरपाई के लिए, बीजिंग इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और सेमीकंडक्टर जैसे “उच्च गुणवत्ता” वाले निर्यात को प्राथमिकता दे रहा है, जो वैश्विक व्यापार को बाधित कर रहा है।
- सैन्य आक्रामकता: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपनी पारंपरिक और परमाणु क्षमताओं का विस्तार करना जारी रखे हुए है।
- भारत-चीन संबंध: 2025 में संबंधों में थोड़ी स्थिरता देखी गई लेकिन संरचनात्मक मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। ‘बफर जोन’ के कारण भारत के गश्त अधिकारों पर प्रतिबंध जारी हैं।
- UPSC प्रासंगिकता: “भारत-चीन संबंध”, “हिंद-प्रशांत भू-राजनीति” और “रणनीतिक स्वायत्तता” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- भारत पर प्रभाव: वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में चीन के प्रभुत्व ने व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है (2025 में $110 बिलियन से अधिक होने की उम्मीद)। फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत की निर्भरता बनी हुई है।
- रणनीतिक दृष्टिकोण: भारत को ‘रणनीतिक धैर्य’ (Strategic Patience) रखना चाहिए और दीर्घकालिक संघर्ष के लिए तैयार रहना चाहिए।
2. सुरक्षा शिविर: माओवादी लड़ाई में ‘गेम चेंजर’
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां पैदा करने में गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भूमिका)
- संदर्भ: दूरदराज के क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों (Security Camps) की स्थापना ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) को कैसे कम किया है।
- मुख्य बिंदु:
- सांख्यिकीय गिरावट: 2010 से 2025 के बीच माओवादी हिंसा में लगभग 90% की कमी आई है।
- प्रभावित क्षेत्रों में कमी: LWE प्रभावित जिलों की संख्या 2018 में 126 से घटकर अक्टूबर 2025 तक केवल 11 रह गई है।
- शिविरों की भूमिका: सुरक्षा शिविरों ने सुरक्षा बलों की उपस्थिति बढ़ाई है, प्रतिक्रिया समय कम किया है और मानवीय खुफिया जानकारी (HUMINT) में सुधार किया है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: ये शिविर सड़क निर्माण और मोबाइल टावरों के केंद्र बन गए हैं, जिससे स्थानीय जीवनशैली बदल गई है।
- UPSC प्रासंगिकता: “आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां”, “LWE और विकास” और “जनजातीय क्षेत्रों में शासन” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- प्रशासन की पहुंच: अब कलेक्टर, तहसीलदार और पटवारी उन क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं जहां पहले केवल पुलिस या वन रक्षक ही जाते थे।
- भावी चुनौतियां: स्थायी शांति तभी संभव है जब पेसा (PESA) अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम जैसी संवैधानिक गारंटी के माध्यम से संरचनात्मक मुद्दों को हल किया जाए।
3. महिला श्रम की गणना: एक नीतिगत बदलाव
पाठ्यक्रम: GS पेपर 1 (सामाजिक मुद्दे; महिलाओं की भूमिका) और GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था; रोजगार)
- संदर्भ: महिलाओं के अवैतनिक देखभाल (Unpaid Care) और भावनात्मक श्रम के व्यवस्थित अवमूल्यन और संस्थागत मान्यता की आवश्यकता पर चर्चा।
- मुख्य बिंदु:
- देखभाल अंतराल (Care Gap): 2023 की संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर महिलाएं पुरुषों की तुलना में अवैतनिक देखभाल और घरेलू काम पर 2.8 घंटे अधिक समय बिताती हैं।
- नीतिगत पूर्वाग्रह: आर्थिक प्राथमिकताओं ने देखभाल कार्य को “उत्पादक” श्रम (जो पारंपरिक रूप से पुरुष करते हैं) की तुलना में गौण माना है।
- भारतीय न्यायिक रुख: कन्नन नायडू बनाम कमसाला अम्मल (2023) मामले में, मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी के घरेलू कर्तव्य पारिवारिक संपत्ति में योगदान करते हैं, जिससे वह संपत्ति में समान हिस्से की हकदार है।
- UPSC प्रासंगिकता: “महिला सशक्तिकरण”, “जेंडर बजटिंग” और “समावेशी विकास” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- अदृश्य श्रम: परिवारों को बनाए रखने में लगने वाले भावनात्मक और मानसिक श्रम को नीतिगत ढांचे में शायद ही कभी मापा या पुरस्कृत किया जाता है।
- परिवर्तन की आवश्यकता: महिलाओं के श्रम को मान्यता देने के साथ-साथ पुरुषों को भी देखभाल की जिम्मेदारियों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।
4. उभरते एशिया में आपदा जोखिम वित्तपोषण (Disaster Risk Finance)
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आपदा प्रबंधन; प्राकृतिक आपदाओं का आर्थिक प्रभाव)
- संदर्भ: भारत को प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रतिवर्ष महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान होता है, जिससे आपदा जोखिम वित्त की ओर बदलाव आवश्यक हो गया है।
- मुख्य बिंदु:
- आर्थिक प्रभाव: 1990 से 2024 तक, भारत को अपनी जीडीपी के 0.4% के बराबर औसत वार्षिक आपदा संबंधी नुकसान हुआ।
- खतरों की प्रकृति: भारत की संवेदनशीलता मुख्य रूप से जल विज्ञान संबंधी (बाढ़ और भूस्खलन) है, जबकि चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों में भूकंपीय जोखिम अधिक है।
- उच्च जोखिम रैंकिंग: ‘विश्व जोखिम सूचकांक 2025’ में एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में फिलीपींस के बाद भारत दूसरे स्थान पर है।
- UPSC प्रासंगिकता: “आपदा प्रबंधन रणनीतियाँ” और “जलवायु परिवर्तन का आर्थिक प्रभाव” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- क्षेत्रीय खतरा: उभरती एशियाई अर्थव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती आपदाओं का सामना कर रही हैं। पिछले दशक में, इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष औसतन 100 आपदाएं आईं, जिससे लगभग 8 करोड़ लोग प्रभावित हुए।
- नीतिगत अनिवार्यता: आर्थिक नुकसान बढ़ने के साथ ही, प्रभावी और डेटा-संचालित प्रतिक्रिया के लिए ‘डिजास्टर रिस्क फाइनेंस’ क्षेत्रीय नीति के केंद्र में आ गया है।
5. विमानन 2047: तकनीकी संप्रभुता की ओर
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (सुरक्षा; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण)
- संदर्भ: बेंगलुरु में ‘हल्के लड़ाकू विमान’ (LCA) तेजस की 25 साल की उड़ान का जश्न मनाने और भविष्य के लक्ष्यों को निर्धारित करने के लिए एक राष्ट्रीय सेमिनार।
- मुख्य बिंदु:
- तेजस का मील का पत्थर: LCA तेजस ने 25 साल पूरे कर लिए हैं और 5,600 से अधिक सफल परीक्षण उड़ानें भरी हैं।
- स्वदेशी तकनीक: कार्बन कंपोजिट, ‘फ्लाई-बाय-वायर’ फ्लाइट कंट्रोल और डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम जैसी तकनीकों ने तेजस को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बना दिया है।
- आयात पर निर्भरता कम करना: ‘एरोनॉटिक्स 2047’ का लक्ष्य विदेशी आयात पर निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीक विकसित करना है।
- UPSC प्रासंगिकता: “रक्षा स्वदेशीकरण”, “रक्षा में मेक इन इंडिया” और “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- भविष्य के लक्ष्य: अब ध्यान अगली पीढ़ी के विमानों, डिजिटल विनिर्माण और विमान डिजाइन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण की ओर बढ़ रहा है।
- पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: इस कार्यक्रम ने 100 से अधिक डिजाइन केंद्रों को सफलतापूर्वक जोड़ा है, जिससे एक मजबूत घरेलू एयरोस्पेस ईकोसिस्टम तैयार हुआ है।
संपादकीय विश्लेषण
05 जनवरी, 2026Mapping:
आरंभिक नगरों के भूगोल को समझने के लिए, हमें यह देखना होगा कि हड़प्पा सभ्यता अपनी नदी प्रणालियों से किस प्रकार अटूट रूप से जुड़ी हुई थी। इन नगरों का विकास लगभग 4,700 वर्ष पहले सिंधु और उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में हुआ था।
प्रमुख हड़प्पा स्थल और उनकी नदियाँ
1. हड़प्पा (रावी नदी के तट पर)
- स्थान: हड़प्पा वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।
- खोज: यह इस सभ्यता का खोजा गया पहला शहर था, इसी कारण पुरातत्वविदों ने इसके बाद मिलने वाले सभी समान स्थलों को “हड़प्पा” स्थल कहा।
- महत्व: लगभग 150 साल पहले रेलवे लाइन बिछाते समय इंजीनियरों को यह स्थल मिला था, और उन्होंने अनजाने में इसकी उच्च गुणवत्ता वाली प्राचीन ईंटों का उपयोग निर्माण के लिए कर लिया था।
2. मोहनजोदड़ो (सिंधु नदी के तट पर)
- स्थान: यह स्थल वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुख्य सिंधु नदी के किनारे स्थित है।
- वास्तुकला: यह अपने ‘महान स्नानागार’ (Great Bath) के लिए प्रसिद्ध है, जो ईंटों से बना एक जलरोधी तालाब था जिसमें प्राकृतिक तार (bitumen) की परत चढ़ाई गई थी।
- शहरी जीवन: यहाँ की खुदाई से उन्नत जल निकासी प्रणाली का पता चला है, जहाँ घरों की नालियाँ सड़कों की बड़ी नालियों से जुड़ी थीं।
3. कालीबंगन (घग्गर नदी के तट पर)
- स्थान: यह भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है।
- नदी संदर्भ: यह घग्गर-हाकरा नदी प्रणाली (जिसे अक्सर प्राचीन सरस्वती नदी से जोड़ा जाता है) के तट पर स्थित था।
- विशेष विशेषताएं: अन्य नगरों के विपरीत, कालीबंगन (और लोथल) में अग्निकुंड (Fire Altars) मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि यहाँ धार्मिक अनुष्ठान या यज्ञ किए जाते होंगे।
💡 मानचित्र कार्य (Mapping Task):
अपने मानचित्र पर इन तीन मुख्य केंद्रों के साथ-साथ गुजरात के लोथल (खंभात की खाड़ी) और धौलावीरा (कच्छ के रण) को भी चिह्नित करें, जो इस सभ्यता के महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र थे।