IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 3 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 6 Chapter-3 (भोजन: संग्रह से उत्पादन तक)
मानव इतिहास में खानाबदोश (शिकारी-संग्राहक) जीवन से एक बसे हुए कृषि जीवन की ओर संक्रमण एक बहुत बड़ा मोड़ था।
1. खेती और पशुपालन की शुरुआत
- किसान बनना: जैसे-जैसे दुनिया की जलवायु बदली, मनुष्यों ने खाने योग्य पौधों का अवलोकन किया और देखा कि कैसे बीज से नए पौधे उगते हैं। उन्होंने इन पौधों को पक्षियों और जानवरों से बचाना शुरू किया और अंततः किसान बन गए।
- पशुपालक बनना: लोगों ने अपने आश्रयों (गुफाओं/घरों) के पास भोजन छोड़कर जानवरों को पालतू बनाना शुरू किया। सबसे पहले जिस जानवर को पालतू बनाया गया वह कुत्ते का जंगली पूर्वज था। बाद में, उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे शांत जानवरों को पाला जो घास खाते थे और झुंड में रहते थे।
- बसने की प्रक्रिया (Domestication): यह वह प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य पौधे उगाते हैं और जानवरों की देखभाल करते हैं। पालतू बनाए गए पौधे और जानवर जंगली किस्मों से भिन्न हो गए; उदाहरण के लिए, पालतू जानवरों के दांत और सींग जंगली जानवरों की तुलना में छोटे होते हैं।
2. एक नवीन जीवनशैली
फसलें उगाने के लिए लोगों को एक ही स्थान पर लंबे समय तक रहना पड़ता था ताकि वे अनाज के पकने तक पौधों को पानी दे सकें, निराई कर सकें और उनकी रक्षा कर सकें।
- भंडारण (Storage): अनाज को भोजन और बीज दोनों के रूप में संग्रहित किया जाता था। शुरुआती इंसानों ने भंडारण के लिए मिट्टी के बड़े बर्तन बनाए, टोकरियाँ बुनीं या जमीन में गड्ढे खोदे।
- ‘चलते-फिरते’ खाद्य भंडार के रूप में पशु: पशुपालन से दूध और मांस की निरंतर आपूर्ति होती थी, जो एक जीवित “खाद्य भंडार” के रूप में कार्य करते थे।
3. शुरुआती कृषकों और पशुपालकों के बारे में जानना
पुरातत्वविदों को पूरे उपमहाद्वीप में जले हुए अनाज और जानवरों की हड्डियों के माध्यम से शुरुआती बस्तियों के प्रमाण मिलते हैं।
| साक्ष्य (अनाज और हड्डियाँ) | प्रमुख नवपाषाणिक (Neolithic) स्थल |
| गेहूँ, जौ, भेड़, बकरी, मवेशी | मेहरगढ़ (आधुनिक पाकिस्तान) |
| चावल, जानवरों की हड्डियों के टुकड़े | कोल्डीहवा (आधुनिक उत्तर प्रदेश) |
| गेहूँ और दलहन, कुत्ता, मवेशी, भेड़, बकरी | बुर्जहोम (आधुनिक कश्मीर) |
| गेहूँ, हरा चना, जौ, भैंस, बैल | चिरांद (आधुनिक बिहार) |
| ज्वार-बाजरा, मवेशी, भेड़, बकरी, सुअर | हल्लूर (आधुनिक आंध्र प्रदेश/कर्नाटक) |
4. स्थायी जीवन की ओर
- आवास: बुर्जहोम में लोग जमीन के नीचे ‘गर्तवास’ (Pit-houses) बनाकर रहते थे, जिसमें नीचे जाने के लिए सीढ़ियाँ होती थीं। घर के अंदर और बाहर दोनों जगह खाना पकाने के चूल्हे मिले हैं, जो संकेत देते हैं कि मौसम के अनुसार लोग खाना पकाते थे।
- नवपाषाणिक औजार: पुरापाषाण (Palaeolithic) औजारों के विपरीत, ये औजार अधिक पैने और पॉलिश किए हुए होते थे। अनाज पीसने के लिए ओखली और मूसल का विकास हुआ।
- मिट्टी के बर्तन: खाना पकाने और अनाज रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया जाता था। इन्हें कभी-कभी सजाया भी जाता था।
- बुनाई: कपास की खेती शुरू होने के साथ ही लोगों ने कपड़े बुनना शुरू कर दिया।
5. सूक्ष्म निरीक्षण: जनजातीय जीवन और प्रमुख स्थल
- जनजातियाँ (Tribes): शुरुआती किसान और पशुपालक समूहों में रहते थे जिन्हें ‘जनजाति’ कहा जाता था। वे जमीन, जंगलों और पानी को सामूहिक संपत्ति मानते थे, और उनमें अमीर-गरीब का कोई बड़ा अंतर नहीं था।
- मेहरगढ़: यह बोलन दर्रे (Bolan Pass) के पास स्थित है और सबसे शुरुआती ज्ञात गाँवों में से एक है। यहाँ चौकोर या आयताकार घर मिले हैं। कब्रों में मृतकों के साथ बकरी को भी दफनाया जाता था (शायद अगले जन्म में भोजन के रूप में)।
- दाओजली हेडिंग: यह ब्रह्मपुत्र घाटी में चीन की ओर जाने वाले रास्तों पर स्थित है। यहाँ खरल-मूसल और ‘जेडाइट’ (Jadeite) पत्थर मिले हैं (जो संभवतः चीन से आया था)।
📅 याद रखने योग्य महत्वपूर्ण तिथियाँ
- बसने की प्रक्रिया (Domestication) की शुरुआत: लगभग 12,000 साल पहले।
- मेहरगढ़ में बस्ती का आरंभ: लगभग 8,000 साल पहले।
भोजन: संग्रह से उत्पादन तक
यहाँ के लोग जमीन के नीचे गर्त-वास (Pit-houses) बनाकर रहते थे, जिनमें सीढ़ियाँ होती थीं।
यहाँ चौकोर तथा आयतकार घर मिले हैं, जिनमें 4 या उससे अधिक कमरे होते थे।
यहाँ जेडाइट (Jadeite) पत्थर मिला है, जिससे चीन के साथ संपर्क का संकेत मिलता है।
कक्षा-6 इतिहास अध्याय-3 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: भोजन: संग्रह से उत्पादन तक
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: प्रस्तावना के मुख्य शब्द
1. लोकतांत्रिक (Democratic)
प्रस्तावना एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना करती है जो लोकप्रिय संप्रभुता (शक्ति जनता के हाथों में) के सिद्धांत पर आधारित है।
- प्रतिनिधि लोकतंत्र: भारत एक ‘अप्रत्यक्ष लोकतंत्र’ का पालन करता है जहाँ कार्यपालिका अपनी सभी नीतियों और कार्यों के लिए विधायिका के प्रति जवाबदेह होती है।
- व्यापक दायरा: UPSC के संदर्भ में, प्रस्तावना में “लोकतंत्र” शब्द का अर्थ केवल राजनीतिक लोकतंत्र नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी है।
- मुख्य तत्व: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार, समय-समय पर चुनाव, कानून का शासन और न्यायपालिका की स्वतंत्रता।
2. गणतंत्र (Republic)
‘गणतंत्र’ शब्द दो विशिष्ट चीजों को दर्शाता है:
- निर्वाचित प्रमुख: राजशाही (जैसे ब्रिटेन) के विपरीत, भारतीय राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) एक निश्चित कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
- राजनीतिक संप्रभुता: यह किसी एक व्यक्ति (जैसे राजा) के बजाय जनता में निहित होती है। इसका अर्थ यह भी है कि किसी भी विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग की अनुपस्थिति; सभी सार्वजनिक कार्यालय बिना किसी भेदभाव के प्रत्येक नागरिक के लिए खुले हैं।
🎯 संविधान के उद्देश्य (Objectives of the Constitution)
3. न्याय (Justice)
प्रस्तावना तीन अलग-अलग रूपों में न्याय सुरक्षित करने का प्रयास करती है, जिन्हें मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से हासिल किया जाता है:
- सामाजिक न्याय: जाति, रंग, नस्ल, धर्म या लिंग के आधार पर बिना किसी सामाजिक भेदभाव के सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार।
- आर्थिक न्याय: आर्थिक कारकों (संपत्ति/आय) के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव न करना।
- राजनीतिक न्याय: सभी नागरिकों को समान राजनीतिक अधिकार, सभी राजनीतिक कार्यालयों तक समान पहुंच और सरकार में समान आवाज प्राप्त होना।
- नोट: न्याय का आदर्श (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) 1917 की रूसी क्रांति से लिया गया था।
4. स्वतंत्रता (Liberty)
स्वतंत्रता का अर्थ है व्यक्तियों की गतिविधियों पर रोक-टोक की अनुपस्थिति और साथ ही व्यक्तिगत व्यक्तित्व के विकास के लिए अवसर प्रदान करना।
- विशिष्ट स्वतंत्रताएं: प्रस्तावना विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता सुरक्षित करती है।
- सीमित, निरपेक्ष नहीं: स्वतंत्रता का अर्थ कुछ भी करने का ‘लाइसेंस’ नहीं है। इसका प्रयोग संविधान में वर्णित सीमाओं के भीतर ही किया जाता है।
- स्रोत: स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी क्रांति से लिए गए हैं।
5. समता (Equality)
समता का अर्थ है समाज के किसी भी वर्ग के लिए विशेष विशेषाधिकारों की अनुपस्थिति और बिना किसी भेदभाव के सभी व्यक्तियों के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करना। इसके तीन आयाम हैं:
- नागरिक (Civic): अनुच्छेद 14 से 18 (कानून के समक्ष समानता, भेदभाव का निषेध, आदि)।
- राजनीतिक (Political): कोई भी व्यक्ति चुनावी नामावली में शामिल होने के लिए अपात्र नहीं होगा (अनुच्छेद 325) और वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनाव (अनुच्छेद 326)।
- आर्थिक (Economic): नीति निर्देशक तत्व (अनुच्छेद 39) पर्याप्त आजीविका के समान अधिकार और समान काम के लिए समान वेतन सुरक्षित करते हैं।
6. बंधुत्व (Fraternity)
बंधुत्व का अर्थ है भाईचारे की भावना। संविधान ‘एकल नागरिकता’ की प्रणाली के माध्यम से इसे बढ़ावा देता है।
- व्यक्ति की गरिमा: प्रस्तावना घोषणा करती है कि बंधुत्व को व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करनी होगी।
- राष्ट्र की एकता: यह राष्ट्र की एकता और अखंडता को भी सुनिश्चित करता है। “अखंडता” (Integrity) शब्द को 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा जोड़ा गया था।
💡 UPSC रणनीति टिप
लक्ष्मीकांत (M. Laxmikanth) से इन शब्दों का अध्ययन करते समय, हमेशा प्रेरणा के स्रोत को याद रखें:
- न्याय (Justice): रूसी क्रांति (Russian Revolution)।
- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity): फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution)।
प्रस्तावना: दार्शनिक स्तंभ
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (01 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (03 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. संपादकीय: मशीनों से पस्त एक प्राचीन पर्वत श्रृंखला (अरावली का संकट)
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी; संरक्षण, प्रदूषण और क्षरण)
- संदर्भ: अवैध खनन और औद्योगिक गतिविधियों के कारण अरावली पर्वतमाला के पारिस्थितिक विनाश पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
- मुख्य बिंदु:
- पारिस्थितिक बफर: अरावली भारत-गंगा के मैदानों के मरुस्थलीकरण (Desertification) के खिलाफ एक अवरोधक के रूप में कार्य करती है।
- जैव विविधता का नुकसान: तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं।
- भूजल की कमी: खनन ने उन प्राकृतिक जलभृतों (Aquifers) को बाधित कर दिया है जो दिल्ली-NCR क्षेत्र को रिचार्ज करते हैं।
- UPSC प्रासंगिकता: “पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)”, “सतत विकास” और “न्यायिक सक्रियता (NGT की भूमिका)” से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- संकट: उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंधों के बावजूद, हरियाणा और राजस्थान में “पहाड़ों को कुचलने वाली” मशीनें काम कर रही हैं, जिससे कई पहाड़ियाँ गायब हो गई हैं।
- मानवीय क्षति: पत्थरों की धूल से स्थानीय लोगों को सांस की बीमारियाँ हो रही हैं और पहाड़ियों द्वारा वर्षा जल न रोक पाने के कारण जल संकट गहरा गया है।
- नीतिगत आवश्यकता: ‘ग्रीन वॉल’ परियोजना और ‘वन संरक्षण अधिनियम’ को सख्ती से लागू करने की तत्काल आवश्यकता है।
2. संपादकीय: शिक्षा में ओपन स्कूलिंग और AI का उदारीकरण
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)
- संदर्भ: केंद्र सरकार द्वारा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS) के मानदंडों में ढील देने और शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को एकीकृत करने की योजना।
- मुख्य बिंदु:
- लचीलापन: माध्यमिक शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने के लिए नियमों को सरल बनाना।
- AI एकीकरण: व्यक्तिगत शिक्षण (Personalized learning) और तकनीकी शिक्षा मानकों को तैयार करने के लिए AI का उपयोग।
- रोजगार क्षमता: रटकर सीखने (Rote learning) के बजाय कौशल-आधारित शिक्षा पर जोर।
- UPSC प्रासंगिकता: “राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020” के कार्यान्वयन और “डिजिटल इंडिया” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- डिजिटल छलांग: सरकार AI के माध्यम से छात्रों के सीखने की कमियों (Learning gaps) को स्वचालित रूप से पहचानने का लक्ष्य रखती है।
- शिक्षा का लोकतंत्रीकरण: ओपन स्कूलिंग के नियमों में ढील देने से स्कूल छोड़ने वाले (Dropouts) और कामकाजी पेशेवरों को अपनी शिक्षा पूरी करने में मदद मिलेगी।
- मानकीकरण: डिग्री और नौकरी के बीच के अंतर (Degree-job mismatch) को खत्म करने के लिए नए तकनीकी मानक तैयार किए जा रहे हैं।
3. संपादकीय: आतंकवाद के खिलाफ भारत का आत्मरक्षा का अधिकार
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा) और GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध)
- संदर्भ: विदेश मंत्री द्वारा सीमा पार आतंकवाद पर भारत के रुख के संबंध में एक मजबूत नीतिगत बयान।
- मुख्य बिंदु:
- संप्रभु अधिकार: भारत का तर्क है कि आत्मरक्षा केवल एक नीति नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत एक संप्रभु अधिकार है।
- आतंकवाद विरोधी ढांचा: ‘अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन’ (CCIT) के लिए भारत का निरंतर प्रयास।
- निवारक कार्रवाई: यह बयान ‘प्रतिक्रियात्मक’ (Reactive) के बजाय ‘सक्रिय’ (Pro-active) सुरक्षा उपायों की ओर बदलाव का संकेत देता है।
- UPSC प्रासंगिकता: “भारत-पाकिस्तान संबंध”, “UNSC सुधार” और “राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- कानूनी आधार: विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का उल्लेख किया, जो देशों को आत्मरक्षा का अधिकार देता है। यह भविष्य में भारत की “सर्जिकल स्ट्राइक” जैसी कार्रवाइयों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
- राजनयिक संदेश: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंकवाद “कम लागत वाला युद्ध” (Low-cost war) नहीं रहेगा।
- रणनीतिक स्वायत्तता: भारत यह संकेत दे रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देगा।
4. संपादकीय: इलेक्ट्रॉनिक पुर्जा विनिर्माण: ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव)
- संदर्भ: केंद्र ने SPECS (इलेक्ट्रॉनिक घटकों और सेमीकंडक्टर्स के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना) के तहत 22 नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
- मुख्य बिंदु:
- आयात में कमी: चीन और वियतनाम पर निर्भरता कम कर भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनाना।
- रोजगार सृजन: इन परियोजनाओं से हाई-टेक क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
- पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण: केवल “असेंबली” (जोड़ना) से आगे बढ़कर “कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग” (पुर्जा निर्माण) पर ध्यान केंद्रित करना।
- UPSC प्रासंगिकता: “आत्मनिर्भर भारत”, “सेमीकंडक्टर मिशन” और “विनिर्माण क्षेत्र” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- रणनीतिक बदलाव: भारत अब तक स्मार्टफोन असेंबली का केंद्र रहा है, लेकिन उच्च-मूल्य वाले पुर्जे (जैसे PCB, सेंसर) आयात किए जाते थे। ये 22 परियोजनाएं उस “मूल्यवर्धन” (Value-addition) की कमी को पूरा करेंगी।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा: “चीन प्लस वन” (China Plus One) रणनीति के बीच, यह कदम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गजों के लिए एक स्थिर विकल्प के रूप में स्थापित करता है।
5. संपादकीय: बुलेट ट्रेन का मील का पत्थर: पहली पहाड़ी सुरंग पूरी हुई
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (बुनियादी ढांचा: रेलवे; निवेश मॉडल)
- संदर्भ: मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर में पहली पहाड़ी सुरंग का निर्माण कार्य पूरा।
- मुख्य बिंदु:
- अभियांत्रिकी चमत्कार: भारत में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ (NATM) का उपयोग।
- समय की बचत: बुलेट ट्रेन के शुरू होने पर यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर 2 घंटे रह जाएगा।
- UPSC प्रासंगिकता: “विकास के लिए बुनियादी ढांचा” और “जापान-भारत रणनीतिक साझेदारी” पर उत्तर लिखने के लिए उपयोगी।
- विस्तृत विश्लेषण:
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: यह परियोजना केवल गति के बारे में नहीं है, बल्कि जापान से भारतीय इंजीनियरों तक ‘शिनकानसेन’ (Shinkansen) तकनीक के हस्तांतरण के बारे में भी है।
- आर्थिक प्रभाव: यह कॉरिडोर प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ेगा, जिससे एक “मेगा-रीजन” बनेगा जो महाराष्ट्र और गुजरात दोनों की GDP को बढ़ावा दे सकता है।
संपादकीय विश्लेषण
03 जनवरी, 2026Mapping:
आज की अध्ययन सामग्री उन विशिष्ट भौगोलिक स्थानों और रणनीतिक क्षेत्रों पर प्रकाश डालती है जो आपकी UPSC परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं:
1. अरावली पर्वतमाला (पारिस्थितिक अवरोध – Ecological Barrier)
- भौगोलिक विस्तार: यह लगभग 670 किमी लंबी श्रृंखला है जो चार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैली हुई है: गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली।
- रणनीतिक महत्व: यह एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक बफर के रूप में कार्य करती है, जो थार मरुस्थल के पूर्व की ओर उपजाऊ सिंधु-गंगा के मैदानों में विस्तार को रोकती है।
- संकट: अवैध खनन और “पहाड़-तोड़ने” वाली मशीनों के कारण कई पहाड़ियाँ गायब हो गई हैं, जिससे दिल्ली-NCR क्षेत्र के प्राकृतिक भूजल पुनर्भरण (groundwater recharge) में बाधा आ रही है।
2. मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR)
- बुनियादी ढांचा मील का पत्थर: इस कॉरिडोर में पहली पहाड़ी सुरंग का पूरा होना एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है।
- NATM तकनीक: ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ का उपयोग जापान से भारत में एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण है।
- मैपिंग कार्य: वित्तीय राजधानी (मुंबई) को वस्त्र हब (अहमदाबाद) से जोड़ने वाले मार्ग की पहचान करें, जो महाराष्ट्र और गुजरात के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है। इसमें साबरमती, वडोदरा, भरूच, सूरत और वापी जैसे प्रमुख स्टेशनों को चिह्नित करें।
3. आंतरिक सुरक्षा: अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC)
- रणनीतिक संदर्भ: ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ पर हालिया नीतिगत बयान के बाद, अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) का भूगोल महत्वपूर्ण हो गया है।
- फोकस क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर और पंजाब सीमाओं के साथ संवेदनशील ‘लॉन्च पैड’ और आतंकवाद विरोधी नोड्स (counter-terror nodes) का मानचित्रण करना।
- अंतर समझें:
- LoC (Line of Control): जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच की सैन्य नियंत्रण रेखा (यह औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है)।
- IB (International Border): दोनों देशों के बीच आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय सीमा (जैसे पंजाब, राजस्थान और गुजरात सीमा)।