इतिहास हमें अपने पूर्वजों के जीवन के कई पहलुओं को समझने में मदद करता है:

  • जीवनशैली: लोग क्या खाते थे, कैसे कपड़े पहनते थे और किस तरह के घरों में रहते थे।
  • व्यवसाय: शिकारियों (आखेटकों), पशुपालकों, कृषकों, शासकों, व्यापारियों, पुरोहितों, शिल्पकारों, कलाकारों और संगीतकारों के जीवन के बारे में जानकारी मिलती है।
  • बच्चों का जीवन: उस समय बच्चे कौन से खेल खेलते थे, कौन सी कहानियाँ सुनते थे और कौन से गीत गाते थे।

प्राचीन काल में लोग संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में बसे:

  • नर्मदा नदी: कई लाख साल पहले लोग इस नदी के तट पर रहते थे। वे कुशल संग्राहक (gatherers) थे, जो जंगलों की विशाल संपदा से परिचित थे और जानवरों का शिकार भी करते थे।
  • सुलेमान और किरथर पहाड़ियाँ (उत्तर-पश्चिम): यहाँ लगभग 8000 वर्ष पहले स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ और जौ जैसी फसलें उगाना शुरू किया। उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालना भी शुरू किया।
  • गारो पहाड़ियाँ और विंध्य पर्वतमाला: यहाँ भी कृषि का विकास हुआ। विंध्य के उत्तर में सबसे पहले चावल उपजाया गया।
  • सिंधु और इसकी सहायक नदियाँ: लगभग 4700 वर्ष पूर्व, इन्हीं नदियों के किनारे आरंभिक नगर फले-फूले।
  • गंगा घाटी: लगभग 2500 वर्ष पूर्व गंगा और इसकी सहायक नदियों के किनारे नगरों का विकास हुआ। गंगा के दक्षिण में एक शक्तिशाली राज्य मगध स्थापित हुआ।

पहाड़ों, रेगिस्तानों और समुद्रों जैसी भौगोलिक बाधाओं के बावजूद लोग एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करते थे:

  • यात्रा के कारण: लोग काम की तलाश में या प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, सूखा) से बचने के लिए यात्रा करते थे।
  • अभियान: सेनाएँ दूसरे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त करने के लिए जाती थीं, जबकि व्यापारी काफिलों या जहाजों के माध्यम से मूल्यवान वस्तुओं का व्यापार करते थे।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: धार्मिक गुरु लोगों को शिक्षा और सलाह देने के लिए गाँव-गाँव घूमते थे। इन यात्राओं से हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ समृद्ध हुईं और लोगों ने पत्थर तराशने, संगीत रचने और भोजन बनाने के नए तरीके सीखे।

हमारे देश के लिए अक्सर ‘इण्डिया’ (India) और ‘भारत’ (Bharat) जैसे नामों का प्रयोग होता है:

  • इण्डिया: यह शब्द ‘इंडस’ (Indus) से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। लगभग 2500 वर्ष पहले उत्तर-पश्चिम से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को ‘हिन्दोस’ या ‘इन्दोस’ कहा, और इस नदी के पूर्व में स्थित भूमि को ‘इण्डिया’ कहा गया।
  • भारत: ‘भरत’ नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था, जिनका उल्लेख संस्कृत की सबसे पुरानी कृति ऋग्वेद (लगभग 3500 वर्ष पुरानी) में मिलता है। बाद में इसका प्रयोग पूरे देश के लिए होने लगा।

इतिहासकार और पुरातत्वविद अतीत को जानने के लिए मुख्य रूप से इन स्रोतों का उपयोग करते हैं:

  • पांडुलिपियाँ (Manuscripts): ये हाथ से लिखी गई पुस्तकें होती थीं। इन्हें अक्सर ताड़पत्रों अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले ‘भूर्ज’ नामक पेड़ की छाल से तैयार भोजपत्र पर लिखा जाता था। इनमें धार्मिक मान्यताओं, राजाओं के जीवन, औषधियों और विज्ञान आदि का विवरण मिलता है।
  • अभिलेख (Inscriptions): ये पत्थर अथवा धातु जैसी कठोर सतहों पर उत्कीर्ण (लिखे) किए गए लेख होते हैं। राजा अक्सर अपने आदेशों या विजयों का विवरण इन पर लिखवाते थे ताकि लोग उन्हें देख और पढ़ सकें।
  • पुरातत्व (Archaeology): पुरातत्वविद पत्थर और ईंट से बनी इमारतों के अवशेषों, चित्रों और मूर्तियों का अध्ययन करते हैं। वे औजारों, हथियारों, बर्तनों, आभूषणों और सिक्कों की प्राप्ति के लिए खुदाई (उत्खनन) भी करते हैं। वे जानवरों की हड्डियों और अनाज के दानों का अध्ययन करके यह भी पता लगाते हैं कि लोग क्या खाते थे।

इतिहास में तिथियों की गणना ईसाई धर्म के प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म की तारीख से की जाती है:

  • ई.पू. / BC / BCE: ‘ईसा पूर्व’ (Before Christ) या ‘Before Common Era’। यह समय पीछे की ओर गिना जाता है।
  • ईस्वी / AD / CE: ‘ईस्वी’ (Anno Domini – प्रभु के वर्ष में) या ‘Common Era’। यह ईसा मसीह के जन्म के बाद का समय है।

🏹 आरंभिक मानव की खोज में

🏃‍♂️ खानाबदोश गतिशीलता
आरंभिक मानव प्रवासी जानवरों के पीछे चलने, पौधों के मौसमी चक्र को समझने और सूखी ऋतु में मौसमी नदियों में पानी की तलाश के कारण लगातार घूमते रहते थे।
⚒️ पाषाण तकनीक
औजारों को पत्थर से पत्थर टकराकर और दबाव शल्क तकनीक से बनाया जाता था। मध्यपाषाण काल में छोटे औजारों का उपयोग बढ़ा, जिन्हें लघुपाषाण (Microliths) कहा जाता है।
📍 रणनीतिक पुरास्थल
कुरनूल की गुफाओं में आग के साक्ष्य (राख) मिले हैं, हुँसगी में चूना पत्थर के औजार और भीमबेटका में प्राचीन शैल चित्र (आवास) पाए गए हैं।
🌍 पर्यावरणीय बदलाव
लगभग 12,000 वर्ष पूर्व जलवायु में आए बदलावों से घास के मैदानों का विकास हुआ, जिससे शाकाहारी जानवरों और प्राकृतिक रूप से उगने वाले गेहूँ व जौ की मात्रा में वृद्धि हुई।
UPSC विशेष पुरापाषाण काल (Palaeolithic) मानव इतिहास की 99% कहानी समेटे हुए है, जो 20 लाख साल पहले से 12,000 साल पहले तक फैला है।
📂

कक्षा-6 इतिहास अध्याय-2 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: आरंभिक मानव की खोज में

अभी डाउनलोड करें

प्रस्तावना संविधान के परिचय या भूमिका को कहते हैं। इसमें संविधान का सार या संक्षिप्त विवरण होता है। प्रसिद्ध न्यायविद एन.ए. पालकीवाला ने प्रस्तावना को ‘संविधान का परिचय पत्र’ कहा है।

प्रस्तावना चार महत्वपूर्ण बातों को स्पष्ट करती है:

  1. अधिकार का स्रोत: यह बताता है कि संविधान अपनी शक्ति ‘भारत की जनता’ से प्राप्त करता है।
  2. भारतीय राज्य की प्रकृति: यह घोषणा करती है कि भारत एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष), लोकतांत्रिक और गणतांत्रिक व्यवस्था वाला देश है।
  3. संविधान के उद्देश्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व संविधान के मूल उद्देश्य हैं।
  4. संविधान अपनाने की तिथि: यह 26 नवंबर, 1949 की तारीख का उल्लेख करती है।
  • संप्रभु (Sovereign): भारत न तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और न ही किसी अन्य देश का डोमिनियन है। यह अपने आंतरिक और बाहरी मामलों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
  • समाजवादी (Socialist): भारत ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ को अपनाता है, जिसका उद्देश्य गरीबी, अज्ञानता, बीमारी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है।
  • पंथनिरपेक्ष/धर्मनिरपेक्ष (Secular): हमारे देश में सभी धर्मों को समान दर्जा प्राप्त है और उन्हें राज्य का समान समर्थन मिलता है।
  • लोकतांत्रिक (Democratic): सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथ में है। भारत में प्रतिनिधि संसदीय लोकतंत्र है।
  • गणराज्य (Republic): इसका अर्थ है कि राज्य का प्रमुख (राष्ट्रपति) हमेशा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से एक निश्चित समय के लिए चुना जाता है (वंशानुगत नहीं होता)।
  • न्याय (Justice): सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय (मौलिक अधिकारों और नीति निर्देशक तत्वों के माध्यम से सुनिश्चित)।
  • स्वतंत्रता (Liberty): विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता।
  • समता (Equality): स्थिति और अवसर की समानता।
  • बंधुत्व (Fraternity): व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली भाईचारे की भावना।
  • प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार 42वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) द्वारा संशोधन किया गया है।
  • इस संशोधन के माध्यम से तीन नए शब्द जोड़े गए: समाजवादी (Socialist), पंथनिरपेक्ष (Secular) और अखंडता (Integrity)
  • बेरुबारी संघ मामला (1960): उच्चतम न्यायालय ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है।
  • केशवानंद भारती मामला (1973): उच्चतम न्यायालय ने पूर्व के फैसले को पलट दिया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक हिस्सा है
  • वर्तमान स्थिति: यह संविधान का हिस्सा है लेकिन यह ‘गैर-न्यायिक’ (non-justiciable) है, यानी इसके प्रावधानों को कानून की अदालतों में लागू नहीं करवाया जा सकता।
  • तथ्य 1: प्रस्तावना पंडित नेहरू द्वारा तैयार और पेश किए गए ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objectives Resolution) पर आधारित है।
  • तथ्य 2: 42वें संशोधन द्वारा ‘समाजवादी’, ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’ शब्द जोड़े गए थे। (इसे याद रखने के लिए ‘SSI’ शॉर्टकट का उपयोग कर सकते हैं)।

संप्रभु • समाजवादी • पंथनिरपेक्ष

संप्रभु (Sovereign)
भारत एक स्वतंत्र सत्ता है। यह न तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और न ही किसी अन्य देश का डोमिनियन। यह अपने आंतरिक और वैश्विक मामलों के संचालन के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
समाजवादी (Socialist)
भारतीय संविधान लोकतांत्रिक समाजवाद में विश्वास रखता है। इसका उद्देश्य गरीबी और अवसर की असमानता को समाप्त करना है। यह मार्क्सवाद और गांधीवाद का एक अनूठा मिश्रण है, जिसमें गांधीवाद की ओर गहरा झुकाव है।
पंथनिरपेक्ष (Secular)
भारत सकारात्मक पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत का पालन करता है: राज्य की नजर में सभी धर्म समान हैं और उन्हें समान समर्थन प्राप्त है। यह अनुच्छेद 25–28 के तहत मौलिक अधिकारों द्वारा संरक्षित है।

यहां 1 जनवरी, 2026 के The Hindu के संपादकीय लेखों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है, जिसे UPSC की तैयारी के लिए पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन व्यवस्था; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951)

  • संदर्भ: 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की आलोचना।
  • प्रक्रियात्मक अराजकता:
    • पश्चिम बंगाल: बुजुर्ग निवासियों को दूर-दराज के स्थानों पर सुनवाई के लिए बुलाया गया, लेकिन भारी सार्वजनिक विरोध के बाद इसे ‘होम वेरिफिकेशन’ (घर पर सत्यापन) में बदला गया।
    • बिहार: सॉफ्टवेयर की खामियों के कारण डेटा में विसंगतियां देखी गईं।
  • बड़े पैमाने पर नाम हटाना: अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, पूरे भारत में 6.5 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं।
    • उत्तर प्रदेश: 2.89 करोड़।
    • तमिलनाडु और गुजरात: क्रमशः 97 लाख और 73.7 लाख (इन राज्यों में उच्च प्रवासी आबादी के बावजूद)।
  • चिंताएँ: संपादकीय के अनुसार, इस अभियान का उपयोग अनौपचारिक रूप से ‘नागरिकता स्क्रीनिंग’ के रूप में किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। यह सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार की अवधारणा का उल्लंघन है।
  • आगे की राह: निर्वाचन आयोग को एक पारदर्शी और सहभागी तंत्र अपनाना चाहिए, जहाँ नाम हटाने से पहले मतदाताओं को सक्रिय रूप से सूचित किया जाए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष जागरूकता; स्वदेशीकरण)

  • संदर्भ: भारत का संसाधन-सीमित अन्वेषण से ‘न्यू स्पेस’ युग के वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में परिवर्तन।
  • प्रमुख उपलब्धियां:
    • चंद्रयान-3 (2023): चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश।
    • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (2025): ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने ISS पर तिरंगा लहराया।
    • मंगलयान: अपने पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला एशियाई देश।
  • रणनीतिक रोडमैप:
    • गगनयान: भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन (लक्ष्य: 2027)।
    • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS): 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य।
    • चंद्रमा पर मानव: 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य।
  • वाणिज्यिक विकास: यह क्षेत्र निजी खिलाड़ियों के लिए खुल गया है, जिसमें अब 350 से अधिक स्टार्टअप हैं। भारत 2030 तक 400 बिलियन डॉलर के वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का 10% हिस्सा हासिल करना चाहता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; औद्योगिक नीति और विकास)

  • संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अक्टूबर 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100% टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है।
  • भेद्यता (Vulnerability): भारत “दुनिया की दवा की दुकान” है, जो अमेरिका की 40% जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति करता है। हालांकि जेनेरिक दवाओं को अभी छोड़ दिया गया है, लेकिन तनाव बढ़ने से निर्यात राजस्व में 10-15% की गिरावट आ सकती है और GDP विकास दर में 0.2-0.3% की कमी हो सकती है।
  • चीन कारक: भारत अपनी ‘एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स’ (API) के लिए 72% चीन पर निर्भर है, जो आपूर्ति श्रृंखला के लिए जोखिम है।
  • घरेलू सुरक्षा कवच: सितंबर 2025 में GST युक्तिकरण के कारण दवाओं पर दरें 12% से घटाकर 5% कर दी गईं, जिससे उपभोक्ताओं को $1.2 बिलियन की बचत हुई और घरेलू खपत बढ़ी।
  • सुझाव: भारत को यूरोपीय संघ, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में निर्यात का विविधीकरण करना चाहिए और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए बल्क ड्रग्स हेतु PLI योजनाओं में तेजी लानी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत और उसके पड़ोसी)

  • संदर्भ: खालिदा जिया का निधन (30 दिसंबर, 2025) और शेख हसीना का निर्वासन, फरवरी 2026 के चुनावों से पहले बांग्लादेश की राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है।
  • भारत के लिए सुरक्षा जोखिम: जमात-ए-इस्लामी जैसे कट्टरपंथी तत्व मजबूत हो रहे हैं। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा के लिए एक स्थिर बांग्लादेश का होना अनिवार्य है।
  • राजनयिक रणनीति: भारत को केवल अवामी लीग के भरोसे न रहकर ढाका के व्यापक राजनीतिक स्पेक्ट्रम के साथ जुड़ना चाहिए, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक कनेक्टिविटी (जैसे अखौरा-अगरतला रेल लिंक) सुनिश्चित करनी चाहिए।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 4 (नीतिशास्त्र); GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय)

  • संदर्भ: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे की गणना के पीछे कानूनी और नैतिक सिद्धांतों का विश्लेषण।
  • मुद्दा: वर्तमान में सड़क दुर्घटना मुआवजे की गणना पीड़ित की भविष्य की आय (Multiplicand Method) के आधार पर की जाती है।
  • नैतिक असमानता: यह तरीका एक CEO के जीवन को दैनिक वेतनभोगी मजदूर की तुलना में अधिक मूल्यवान मानता है, जो अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमा) का उल्लंघन है।
  • प्रस्तावित सुधार: संपादकीय एक ‘गरिमा आधार’ (Dignity Floor) की वकालत करता है—अर्थात आय के बावजूद प्रत्येक मृत्यु के लिए एक समान न्यूनतम आधारभूत मुआवजा होना चाहिए।

द हिंदू विश्लेषण

02 जनवरी, 2026
शहरी संकट GS-1 और GS-3
🏙️ आवास वहनीयता संकट
टियर-1 शहरों में घर की कीमत और आय का अनुपात 10.0 को पार कर गया है, जिससे घेतोकरण (Ghettoization) बढ़ रहा है। कामकाजी वर्ग को हाशिये पर धकेला जा रहा है, जो आवास को बुनियादी जरूरत के बजाय एक सट्टा संपत्ति (Speculative Asset) के रूप में देख रहे हैं।
कमजोर वर्ग GS-2 और नीतिशास्त्र
🩺 ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य सेवा
नैदानिक असंवेदनशीलता और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) की कमी के कारण प्रणालीगत बहिष्कार। मुख्य समाधान: जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर-विशिष्ट क्लीनिक स्थापित करना और MBBS पाठ्यक्रम में बदलाव करना।
सार्वजनिक सत्यनिष्ठा GS-2 और GS-4
⚖️ व्यय में नैतिकता
लोकपाल की लग्जरी कार निविदा रद्द होना इस बात को रेखांकित करता है कि कानूनी कार्रवाइयों का नैतिक होना भी अनिवार्य है। संस्थागत मूल्यों (जैसे मितव्ययिता) को केवल कानूनी अनुमतियों से ऊपर होना चाहिए।
तकनीकी युद्ध GS-2 और GS-3
🚁 असममित ड्रोन युद्ध
सस्ते $500 के ड्रोन द्वारा करोड़ों डॉलर की संपत्तियों को नष्ट करना एक बड़ा बदलाव है। भारत का जवाब: iDEX के माध्यम से ड्रोन झुंड (Drone Swarms) और एंटी-ड्रोन प्रणालियों का विस्तार करना।
क्षेत्रीय स्थिरता GS-3
🏞️ J&K शांति लाभांश
गुलमर्ग में होटलों की पूरी बुकिंग विकास-आधारित एकीकरण की ओर बदलाव का संकेत देती है। अब मुख्य ध्यान आर्थिक सामान्य स्थिति के माध्यम से युवाओं के कट्टरपंथ को समाप्त करने पर है।
🎯
मुख्य परीक्षा फोकस: GS-3 सुरक्षा के लिए “शासन में मितव्ययिता” और “आधुनिक ड्रोन युद्ध की असमिति” पर संक्षिप्त नोट्स तैयार करें।

आज की अध्ययन सामग्री उन विशिष्ट भौगोलिक स्थानों पर प्रकाश डालती है जो आपके मानचित्र अभ्यास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:

  • संदर्भ: लगभग 4700 वर्ष पहले यहाँ प्राचीन नगरों का उदय हुआ था।
  • मुख्य स्थान: राखीगढ़ी (हरियाणा) – यह वर्तमान में सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) का सबसे बड़ा स्थल है।
  • मैपिंग कार्य: सिंधु की पांच प्रमुख सहायक नदियों की स्थिति मानचित्र पर देखें: झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलुज।
  • संदर्भ: लगभग 2500 वर्ष पूर्व, गंगा के दक्षिण के क्षेत्र में ‘मगध’ नामक एक शक्तिशाली साम्राज्य विकसित हुआ था।
  • महत्व: यह प्राचीन भारत का पहला सबसे बड़ा और शक्तिशाली साम्राज्य था।
  • मैपिंग कार्य: सोन और गंगा नदियों के संगम (मिलन स्थल) को चिह्नित करें, जहाँ मगध का हृदय स्थल (वर्तमान बिहार का क्षेत्र) स्थित था।
  • संदर्भ: भारत 23 अगस्त, 2023 को चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला विश्व का पहला देश बना।
  • महत्व: इस मिशन ने चंद्रमा की सतह और वहाँ पानी के अणुओं (water molecules) की उपस्थिति के बारे में अभूतपूर्व जानकारी प्रदान की है।
  • मैपिंग कार्य: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की स्थिति और वहां स्थित ‘शिव शक्ति पॉइंट’ (जहाँ चंद्रयान-3 लैंड हुआ था) को ध्यान में रखें।

मानचित्रण

J&K स्थिरता
🏞️ गुलमर्ग और पहलगाम
कश्मीर में सामान्य स्थिति का सूचकांक। मुख्य विशेषताएं: पीर पंजाल श्रेणी और लिद्दर नदी का संगम।
मिशन: लिद्दर नदी के मार्ग को रेखांकित करें और मानचित्र पर अनंतनाग जिले को अंकित करें।
वैश्विक संघर्ष
🌍 खेरसॉन (यूक्रेन)
नीपर नदी (Dnieper) पर स्थित एक रणनीतिक बंदरगाह शहर। यह क्रीमिया और काला सागर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
मिशन: नीपर अपवाह तंत्र का अध्ययन करें और क्रीमिया से खेरसॉन की दूरी का पता लगाएं।
शहरीकरण
🏙️ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)
4 राज्यों में इसके विस्तार को देखें। उप-क्षेत्रीय आर्थिक विकास के नए चालक के रूप में दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर ध्यान दें।
मिशन: राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले NCR के प्रमुख जिलों को अंकित करें।

History

Geography

Indian Polity

Indian Economy

Environment & Ecology

Science & Technology

Art & Culture

Static GK

Current Affairs

Quantitative Aptitude

Reasoning

General English

History

Geography

Indian Polity

Indian Economy

Environment & Ecology

Science & Technology

Art & Culture

Static GK

Current Affairs

Quantitative Aptitude

Reasoning

General English