IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 17 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 7 Chapter-3 (दिल्ली के सुल्तान)
यह अध्याय दिल्ली के एक शक्तिशाली राजधानी के रूप में परिवर्तन और 12वीं से 15वीं शताब्दी के बीच दिल्ली सल्तनत के विस्तार का विवरण देता है।
1. दिल्ली एक राजधानी के रूप में
दिल्ली पहली बार तोमर राजपूतों के काल में किसी राज्य की राजधानी बनी, जिन्हें 12वीं शताब्दी के मध्य में अजमेर के चौहानों ने पराजित किया।
- वाणिज्यिक केंद्र: तोमरों और चौहानों के शासनकाल में दिल्ली एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन गई।
- देहलीवाल: शहर में रहने वाले समृद्ध जैन व्यापारियों ने कई मंदिरों का निर्माण कराया और यहाँ ‘देहलीवाल’ नाम के सिक्के ढाले जाते थे, जिनका व्यापक प्रचलन था।
- सल्तनत की स्थापना: 13वीं शताब्दी की शुरुआत में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ दिल्ली का नियंत्रण उपमहाद्वीप के विशाल क्षेत्रों पर हो गया। सुल्तानों ने इस क्षेत्र में कई शहर बसाए, जैसे देहली-ए-कुहना, सीरी और जहाँपनाह।
2. दिल्ली के सुल्तानों के बारे में जानकारी
इतिहासकार अभिलेखों, सिक्कों और स्थापत्य (भवन निर्माण कला) पर भरोसा करते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण स्रोत ‘तवारीख़’ (एकवचन: तारीख) हैं। ये सुल्तानों के शासनकाल में प्रशासन की भाषा फारसी में लिखे गए इतिहास हैं।
- तवारीख़ के लेखक: ये शिक्षित व्यक्ति—सचिव, प्रशासक, कवि और दरबारी होते थे—जो शहरों (मुख्यतः दिल्ली) में रहते थे।
- शासकों को सलाह: वे अक्सर सुल्तानों के लिए पुरस्कार की आशा में लिखते थे और उन्हें ‘जन्मसिद्ध अधिकार’ और ‘लिंग भेद’ पर आधारित एक “आदर्श” सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने की सलाह देते थे।
- रज़िया सुल्तान: 1236 में सुल्तान इल्तुतमिश की बेटी, रज़िया, सुल्तान बनी। हालाँकि वह अपने भाइयों से अधिक योग्य थी, लेकिन एक महिला शासक होने के कारण दरबारी और दरबारी रईस (अमीर) असहज थे, जिसके कारण 1240 में उसे सिंहासन से हटा दिया गया।
3. सल्तनत का विस्तार
सल्तनत का नियंत्रण दो मुख्य सीमाओं के माध्यम से फैला:
- आंतरिक सीमा (Internal Frontier): इन अभियानों का लक्ष्य ‘ग़ैरिसन शहरों’ (सैनिकों वाली किलेबंद बसावट) के भीतरी क्षेत्रों (Hinterlands) को मजबूत करना था। इसके तहत गंगा-यमुना दोआब से जंगलों को साफ किया गया और कृषि को बढ़ावा देने के लिए शिकारी-संग्राहकों और चरवाहों को वहां से खदेड़ दिया गया।
- बाहरी सीमा (External Frontier): दक्षिण भारत में सैन्य अभियान अलाउद्दीन ख़लजी के शासनकाल में शुरू हुए और मुहम्मद तुग़लक़ के समय अपनी चरम सीमा पर पहुँच गए। इन सेनाओं ने हाथियों, घोड़ों और दासों पर कब्जा किया और बहुमूल्य धातुओं को लूटा।
4. प्रशासन और सुदृढ़ीकरण
इतने विशाल साम्राज्य को संगठित करने के लिए सुल्तानों को विश्वसनीय गवर्नरों और प्रशासकों की आवश्यकता थी।
- बंदगी (Bandagan): शुरुआती सुल्तानों (विशेषकर इल्तुतमिश) ने कुलीन वर्ग के बजाय सैन्य सेवा के लिए खरीदे गए विशेष दासों को प्राथमिकता दी, जिन्हें फारसी में ‘बंदगी’ कहा जाता था। उन्हें महत्वपूर्ण पदों के लिए प्रशिक्षित किया जाता था और वे पूरी तरह अपने मालिक पर निर्भर होते थे।
- इक्ता प्रणाली (Iqta System): ख़लजी और तुग़लक़ शासकों ने सैन्य कमांडरों को विभिन्न क्षेत्रों के गवर्नर के रूप में नियुक्त किया, जिन्हें ‘इक्ता’ कहा जाता था।
- मुक्ती (Muqtis): इन इक्ता के धारकों को ‘मुक्ती’ या ‘इक्तादार’ कहा जाता था। उनका कर्तव्य सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना और अपने इक्ता में कानून-व्यवस्था बनाए रखना था। इसके बदले में, वे वेतन के रूप में राजस्व (Tax) वसूलते थे।
- नियंत्रण: मुक्ती को शक्तिशाली होने से रोकने के लिए उनका पद अनुवांशिक नहीं होता था और उन्हें थोड़े समय के लिए ही इक्ता दिया जाता था। राजस्व की जाँच के लिए राज्य द्वारा लेखाकार (Accountants) नियुक्त किए जाते थे।
5. चुनौतियाँ और आक्रमण
- स्थानीय सामंत: अलाउद्दीन ख़लजी जैसे सुल्तानों ने स्थानीय सामंतों और जमींदारों को अपनी सत्ता स्वीकार करने और कर देने के लिए मजबूर किया। राज्य ने राजस्व निर्धारण और संग्रह को अपने नियंत्रण में ले लिया।
- मंगोल आक्रमण: अलाउद्दीन ख़लजी और मुहम्मद तुग़लक़ के शासनकाल में अफगानिस्तान की ओर से मंगोल आक्रमण बढ़ गए।
- अलाउद्दीन ख़लजी ने रक्षात्मक रुख अपनाया, एक नया ग़ैरिसन शहर (सीरी) बनवाया और एक बड़ी स्थायी सेना रखी।
- मुहम्मद तुग़लक़ ने आक्रामक योजना बनाई और एक विशाल सेना तैयार की। हालाँकि, राजधानी को दौलताबाद स्थानांतरित करना और ‘सांकेतिक मुद्रा’ (Token Currency) चलाना जैसे उनके प्रशासनिक प्रयोग विफल रहे।
6. 15वीं और 16वीं शताब्दी में सल्तनत
तुग़लक़ों के बाद, सैयद और लोदी राजवंशों ने 1526 तक दिल्ली और आगरा से शासन किया।
- नए राज्य: इस समय तक जौनपुर, बंगाल, मालवा, गुजरात, राजस्थान और दक्षिण भारत में स्वतंत्र शासकों ने शक्तिशाली राज्य स्थापित कर लिए थे।
- शेर शाह सूरी: एक छोटे से इलाके के प्रबंधक से शुरुआत करके, उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूँ को चुनौती दी और पराजित किया। हालाँकि सूरी वंश ने केवल 15 वर्षों तक शासन किया, लेकिन इसकी प्रशासनिक व्यवस्था इतनी उत्कृष्ट थी कि बाद में महान सम्राट अकबर ने इसे अपने मॉडल के रूप में अपनाया।
📅 महत्वपूर्ण क्रम:
- राजपूत राजवंश (तोमर और चौहान)
- प्रारंभिक तुर्की शासक (कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, रज़िया, बलबन)
- ख़लजी वंश (जलालुद्दीन और अलाउद्दीन)
- तुग़लक़ वंश (ग़यासुद्दीन, मुहम्मद और फ़िरोज़ शाह)
- सैयद और लोदी वंश
- सूरी वंश (शेर शाह सूरी)
🕌 दिल्ली के सुल्तान (12वीं-15वीं शताब्दी)
कक्षा-7 इतिहास अध्याय-3 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: दिल्ली के सुल्तान
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12-35)
मौलिक अधिकारों का वर्णन संविधान के भाग III में किया गया है। इन्हें अक्सर “भारत का मैग्ना कार्टा” कहा जाता है। ये अधिकार नागरिकों के भौतिक और नैतिक विकास के लिए आवश्यक बुनियादी स्थितियाँ प्रदान करते हैं। ये अधिकार वाद-योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनका उल्लंघन होने पर इन्हें अदालतों (उच्चतम और उच्च न्यायालय) के माध्यम से लागू करवाया जा सकता है।
1. सामान्य प्रावधान (अनुच्छेद 12 और 13)
- अनुच्छेद 12: “राज्य” की परिभाषा
मौलिक अधिकारों को लागू करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि जवाबदेह कौन है। इसके अंतर्गत ‘राज्य’ में शामिल हैं:- संघ की विधायी और कार्यकारी अंग: संसद, मंत्रालय, राष्ट्रपति।
- राज्यों की विधायी और कार्यकारी अंग: विधानसभा, राज्यपाल।
- स्थानीय प्राधिकारी: नगरपालिकाएं, पंचायतें।
- अन्य निकाय: वैधानिक और गैर-वैधानिक निकाय जैसे LIC, ONGC और SAIL।
- प्रमुख मामला: अजय हासिया बनाम खालिद मुजीब मामले में ‘इंस्ट्रुमेंटालिटी टेस्ट’ (उपकरण परीक्षण) स्थापित किया गया।
- अनुच्छेद 13: मूल अधिकारों से असंगत विधियाँ
यह अनुच्छेद न्यायपालिका को ‘न्यायिक समीक्षा’ (Judicial Review) की शक्ति देता है।- 13(1): संविधान पूर्व की वे विधियाँ जो मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, शून्य हो जाएंगी (आच्छादन का सिद्धांत – Doctrine of Eclipse)।
- 13(2): राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो मौलिक अधिकारों को छीनती या कम करती हो (पृथक्करणीयता का सिद्धांत – Doctrine of Severability)।
- 13(3): “विधि” शब्द को व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है जिसमें अध्यादेश, आदेश, उपविधि, नियम, विनियम, अधिसूचना और रूढ़ियाँ शामिल हैं।
2. समता का अधिकार (अनुच्छेद 14–18)
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता
- विधि के समक्ष समता: कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है (ब्रिटिश अवधारणा)।
- विधियों का समान संरक्षण: समान परिस्थितियों में सभी के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए (अमेरिकी अवधारणा)।
- तर्कसंगत वर्गीकरण: कानून अलग-अलग समूहों के साथ अलग व्यवहार कर सकता है, यदि वह वर्गीकरण तर्कसंगत हो और मनमाना न हो।
- अनुच्छेद 15: भेदभाव का प्रतिषेध
- राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।
- अपवाद: महिलाओं, बच्चों, SC/ST और OBC के सामाजिक उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए जा सकते हैं।
- अनुच्छेद 16: लोक नियोजन में अवसर की समता
- सरकारी नौकरियों में सभी नागरिकों को समान अवसर सुनिश्चित करता है।
- अपवाद: यदि किसी पिछड़े वर्ग का राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, तो उनके लिए आरक्षण का प्रावधान किया जा सकता है।
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत
- अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया गया है और इसका किसी भी रूप में अभ्यास एक दंडनीय अपराध है। यह एक ‘पूर्ण अधिकार’ (Absolute Right) है।
- अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत
- राज्य सेना या शिक्षा संबंधी सम्मान के अलावा कोई अन्य उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
- भारत का कोई भी नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता।
- नोट: राष्ट्रीय पुरस्कार (भारत रत्न, पद्म पुरस्कार आदि) वैध हैं, लेकिन इन्हें नाम के आगे या पीछे (उपसर्ग/प्रत्यय) के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता।
3. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19–22)
- अनुच्छेद 19: 6 स्वतंत्रताओं का संरक्षण
- भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (इसमें प्रेस की स्वतंत्रता शामिल है)।
- शांतिपूर्वक और बिना हथियारों के एकत्रित होने की स्वतंत्रता।
- संघ या संगठन (सहकारी समितियाँ भी) बनाने की स्वतंत्रता।
- भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र में अबाध संचरण (घूमने) की स्वतंत्रता।
- भारत के किसी भी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता।
- कोई भी पेशा, व्यवसाय या व्यापार करने की स्वतंत्रता।
- नोट: ये स्वतंत्रताएँ निरपेक्ष नहीं हैं और इन पर ‘तर्कसंगत प्रतिबंध’ (जैसे देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था आदि) लगाए जा सकते हैं।
- अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण
- कार्योत्तर विधि (Ex-Post-Facto Law): किसी व्यक्ति को तब तक दंडित नहीं किया जा सकता जब तक उसने किसी प्रभावी कानून का उल्लंघन न किया हो।
- दोहरा दंड (Double Jeopardy): एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दंडित नहीं किया जाएगा।
- आत्म-अभिशंसन (Self-Incrimination): किसी को स्वयं के विरुद्ध गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
- अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
- किसी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जाएगा।
- विस्तृत दायरा: इसमें निजता का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण, स्वास्थ्य और त्वरित सुनवाई का अधिकार भी शामिल है।
- अनुच्छेद 21A: 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार।
- अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण
- दंडात्मक निरोध (Punitive Detention): गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताना होगा, वकील से परामर्श का अधिकार देना होगा और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।
- निवारक निरोध (Preventive Detention): भविष्य में अपराध रोकने के लिए बिना मुकदमे के हिरासत (सलाहकार बोर्ड की समीक्षा के बिना अधिकतम 3 महीने)।
4. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23–24)
- अनुच्छेद 23: मानव तस्करी और बलात श्रम का निषेध
- मानव तस्करी, बेगार (बिना भुगतान के श्रम) और जबरन श्रम के अन्य रूपों को प्रतिबंधित करता है।
- अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध
- 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खानों या किसी भी जोखिम भरे काम में लगाने पर रोक लगाता है।
5. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25–28)
- अनुच्छेद 25: अंतःकरण की और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन और संपत्ति रखने का सामूहिक अधिकार।
- अनुच्छेद 27: किसी विशिष्ट धर्म की उन्नति के लिए कर (Tax) देने की अनिवार्यता से मुक्ति।
- अनुच्छेद 28: पूर्णतः सरकारी निधि से संचालित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा देने पर रोक।
6. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29–30)
- अनुच्छेद 29: नागरिकों के किसी भी अनुभाग (अल्पसंख्यकों) की विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार।
- अनुच्छेद 30: धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार।
- अनुच्छेद 31: इसे निरस्त कर दिया गया है (संपत्ति का अधिकार अब अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार है)।
7. अनुच्छेद 32–35
- अनुच्छेद 32: संवैधानिक उपचारों का अधिकार
- डॉ. अंबेडकर ने इसे संविधान का “हृदय और आत्मा” कहा है। यह नागरिकों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
- उच्चतम न्यायालय 5 प्रकार की रिट (Writs) जारी कर सकता है:
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus): “शरीर को प्रस्तुत करना”।
- परमादेश (Mandamus): “हम आदेश देते हैं” (सार्वजनिक कर्तव्य पालन के लिए)।
- प्रतिषेध (Prohibition): निचली अदालत को रोकने के लिए।
- उत्प्रेषण (Certiorari): आदेश को रद्द करने के लिए।
- अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto): “किस अधिकार से” (सार्वजनिक पद की वैधता की जांच)।
- अनुच्छेद 33: संसद को सशस्त्र बलों/पुलिस के मौलिक अधिकारों को सीमित करने की शक्ति देता है ताकि अनुशासन बना रहे।
- अनुच्छेद 34: किसी क्षेत्र में ‘मार्शल लॉ’ (सैनिक शासन) लागू होने पर अधिकारों पर प्रतिबंध।
- अनुच्छेद 35: केवल संसद के पास मौलिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कानून बनाने की शक्ति है (राज्य विधानमंडलों के पास नहीं)।
संशोधन हेतु सारांश तालिका
| समूह | अनुच्छेद | मुख्य सार |
| समता (Equality) | 14–18 | सामाजिक और कानूनी निष्पक्षता। |
| स्वतंत्रता (Freedom) | 19–22 | व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संरक्षण। |
| शोषण के विरुद्ध | 23–24 | मानवीय गरिमा की रक्षा। |
| धर्म (Religion) | 25–28 | धर्मनिरपेक्षता और विश्वास। |
| शिक्षा/संस्कृति | 29–30 | अल्पसंख्यक पहचान। |
| उपचार (Remedies) | 32–35 | न्यायिक संरक्षण (हृदय और आत्मा)। |
अनुच्छेद 12-35 को याद रखने की शॉर्ट-ट्रिक्स (Exam Hacks)
इन ट्रिक्स के माध्यम से आप अनुच्छेद संख्या को मुख्य शब्दों से जोड़ सकते हैं।
ट्रिक 1: “हिंग्लिश” तुकबंदी (अनुच्छेद 14–24)
यह क्रम को याद रखने का सबसे लोकप्रिय तरीका है:
- 12-13: 12 में ‘State’ बताया, 13 में ‘Law’ सुधार दिया।
- 14-18 (समता): सब Barabar (14), No Bhedbhav (15), Job का Mauka (16), Chhuachhoot खत्म (17), Title खत्म (18)।
- 19-22 (स्वतंत्रता): 19 Bola, 20 Bach gaya (दोषसिद्धि), 21 Jeeya (जीवन), 22 Reha hua (गिरफ्तारी)।
- 23-24 (शोषण): 23 Badi तस्करी (बड़ों का शोषण), 24 Chhote बच्चे (बाल श्रम)।
ट्रिक 2: “E-DOUT” Acronym (समता का अधिकार)
यह पहले क्लस्टर (14–18) के क्रम को याद रखने में मदद करता है:
E — D — O — U — T
- E – Equality before law (विधि के समक्ष समता – 14)
- D – Discrimination prohibition (भेदभाव का निषेध – 15)
- O – Opportunity in employment (अवसर की समता – 16)
- U – Untouchability abolition (अस्पृश्यता का अंत – 17)
- T – Titles abolition (उपाधियों का अंत – 18)
ट्रिक 3: “S-OLEA” एक्रोनिम (स्वतंत्रता क्लस्टर)
अनुच्छेद 19(1) के तहत 6 स्वतंत्रताओं के लिए:
S – O – L – E – A — (P)
- S – Speech (भाषण)
- O – Organize (सम्मेलन/एकत्रित होना)
- L – League (संघ/Association बनाना)
- E – Everywhere movement (कहीं भी घूमना)
- A – Anywhere residence (कहीं भी बसना)
- P – Profession (पेशा/व्यवसाय)
ट्रिक 4: धर्म और शिक्षा (अनुच्छेद 25–30)
अल्पसंख्यक स्कूल की एक छोटी कहानी के रूप में:
- 25-28 (धर्म): “मानो (Believe-25), प्रबंध करो (Manage-26), टैक्स मत दो (No Tax-27), प्रार्थना का दबाव नहीं (No Prayer-28)।”
- 29-30 (अल्पसंख्यक): “संस्कृति बचाओ (Save Culture-29), स्कूल खोलो (Open School-30)।”
ट्रिक 5: कानूनी उपचार (अनुच्छेद 32–35)
“कोर्ट की पुकार” के रूप में सोचें:
- 32: डॉक्टर (उपचार – “हृदय और आत्मा”)
- 33: सैनिक (सशस्त्र बल सीमाएँ)
- 34: मार्शल (सैनिक शासन)
- 35: संसद (मौलिक अधिकारों के लिए कानून बनाने की शक्ति)
मास्टर चीट शीट (त्वरित पुनरीक्षण)
| अनुच्छेद श्रेणी | निमोनिक (Trick) | विषय |
| 14–18 | E-DOUT | समता |
| 19 | S-OLEA | 6 स्वतंत्रताएँ |
| 23–24 | बड़ा vs छोटा | शोषण |
| 25–28 | मानो और प्रबंध करो | धर्म |
| 32 | डॉक्टर (इलाज) | रिट्स (Writs) |
🇮🇳 मौलिक अधिकार (भाग III)
| वर्ग (Cluster) | अनुच्छेद | मुख्य सार |
|---|---|---|
| समानता | 14–18 | सामाजिक और कानूनी न्याय। |
| स्वतंत्रता | 19–22 | व्यक्तिगत आजादी और सुरक्षा। |
| धर्म | 25–28 | पंथनिरपेक्षता और विश्वास। |
| उपचार | 32–35 | संविधान का “हृदय और आत्मा”। |
🧠 एग्जाम हैक्स और ट्रिक्स
14-18: सब बराबर, जॉब मौका, छुआछूत खत्म!
19-22: 19 बोला, 20 बचा, 21 जिया, 22 रिहा हुआ।
S-OLEA: Speech, Organize, League, Everywhere, Anywhere.
33: सैनिक (सशस्त्र बल)
34: मार्शल (सेना कानून)
35: संसद (कानून बनाने की शक्ति)
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (17 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (17 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. मौन मुद्रा में: भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर दबाव
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव; द्विपक्षीय संबंध)।
- संदर्भ: ट्रम्प प्रशासन द्वारा की गई हालिया आक्रामक और एकपक्षीय भू-राजनीतिक कार्रवाइयों (विशेष रूप से ईरान और वेनेजुएला के संबंध में) पर भारत की “मौन” प्रतिक्रियाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण।
- मुख्य बिंदु:
- भू-राजनीतिक उथल-पुथल: संपादकीय अमेरिकी कार्रवाइयों की एक श्रृंखला पर प्रकाश डालता है: वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी, दक्षिण अमेरिका में शासन परिवर्तन की धमकियाँ, ग्रीनलैंड के अधिग्रहण की योजना और रूसी तेल व यूरेनियम पर 500% टैरिफ का प्रस्ताव।
- ईरान का दबाव: अमेरिका कथित तौर पर भारत पर चाबहार पोर्ट में परिचालन बंद करने का दबाव बना रहा है, जहाँ भारत ने करोड़ों का निवेश किया है। साथ ही ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी दी गई है।
- नई दिल्ली का रुख: भारत की प्रतिक्रिया को “कमजोर” या “मौन” बताया गया है। हालाँकि विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर “गहरी चिंता” व्यक्त की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए अमेरिका का नाम लेने से परहेज किया।
- UPSC प्रासंगिकता: “रणनीतिक स्वायत्तता”, “भारत-अमेरिका संबंध” और “पश्चिम एशिया भू-राजनीति”।
- विस्तृत विश्लेषण:
- 2019 का सबक: संपादकीय चेतावनी देता है कि 2019 में अमेरिकी दबाव में ईरानी और वेनेजुएला का तेल खरीदना बंद करने का भारत का निर्णय एक “सबक” होना चाहिए कि तुष्टीकरण से राष्ट्रीय हितों की रक्षा नहीं की जा सकती।
- प्रतिष्ठा का जोखिम: चूंकि भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन पर उसकी चुप्पी ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के भागीदारों के बीच उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती है।
2. कांग्रेस @ 140: संरचनात्मक संकट
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (राजव्यवस्था; जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएं; शासन के महत्वपूर्ण पहलू)।
- संदर्भ: 28 दिसंबर, 2025 को अपनी 140वीं वर्षगांठ के बाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थागत क्षरण और संरचनात्मक गिरावट का विश्लेषण।
- मुख्य बिंदु:
- गिरावट की जड़ें: लेखिका (ज़ोया हसन) का तर्क है कि भाजपा और कांग्रेस को समान मानना एक गलती है। भाजपा के पास RSS जैसा एक ठोस वैचारिक और कैडर आधार है, जो चुनाव चक्रों से स्वतंत्र होकर नेतृत्व को पुनर्जीवित करता है।
- संगठनात्मक क्षरण: दशकों से कांग्रेस एक मजबूत जमीनी संगठन से हटकर शीर्ष पर केंद्रित सत्ता वाली पार्टी बन गई है, जिससे स्थानीय नेतृत्व कमजोर हुआ है।
- खुलेपन का विरोधाभास: अन्य दलों के विपरीत, कांग्रेस आंतरिक असहमति (जैसे G-23) को सहन करती है, लेकिन इस खुलेपन को अक्सर गुटबाजी और अनिर्णय के रूप में देखा जाता है।
- UPSC प्रासंगिकता: “राजनीतिक दल और शासन”, “राजनीतिक संस्थानों में आंतरिक लोकतंत्र” और “विपक्ष की चुनौतियां”।
- विस्तृत विश्लेषण:
- विकेंद्रीकरण का मिथक: जहाँ भाजपा अपनी राज्य इकाइयों पर कड़ा केंद्रीय नियंत्रण रखती है, वहीं कांग्रेस अक्सर विकेंद्रीकृत प्रबंधन की अनुमति देती है, जो भाजपा की “चुनावी मशीनरी” के सामने एक कमजोरी बन जाती है।
- सुधार में बाधा: राहुल गांधी के पार्टी सुधार के प्रयासों को अक्सर उन वरिष्ठ नेताओं द्वारा रोक दिया जाता है जो यथास्थिति से लाभान्वित होते हैं।
3. बजट 2026-27: विकास की गति को बनाए रखना
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; संसाधनों का संग्रहण; विकास)।
- संदर्भ: फिक्की (FICCI) की महानिदेशक ज्योति विज की सिफारिशें कि आगामी केंद्रीय बजट वैश्विक बाधाओं के बीच घरेलू विकास को कैसे मजबूत कर सकता है।
- मुख्य बिंदु:
- प्रेरक के रूप में रक्षा: बजट में रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत परिव्यय (Capital Outlay) की हिस्सेदारी 26.4% से बढ़ाकर 30% करनी चाहिए और DRDO के आवंटन में कम से कम ₹10,000 करोड़ की वृद्धि करनी चाहिए।
- खनिज सुरक्षा: ‘राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन’ (NCMM) को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सामग्री सुरक्षित करने हेतु विशेष वित्तपोषण की आवश्यकता है।
- निर्यात प्रतिस्पर्धा: वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए RoDTEP योजना (निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट) के आवंटन में बड़ी वृद्धि की आवश्यकता है।
- ड्रोन इकोसिस्टम: सरकार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए ₹1,000 करोड़ का ‘ड्रोन R&D फंड’ बनाना चाहिए।
- UPSC प्रासंगिकता: “आर्थिक योजना”, “रक्षा स्वदेशीकरण” और “औद्योगिक नीति”।
4. झारखंड में हाथियों का आतंक: जैव विविधता के लिए खतरा
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (पर्यावरण; संरक्षण; मानव-वन्यजीव संघर्ष)।
- संदर्भ: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक हाथी द्वारा कम से कम 20 लोगों की जान लेने की घटना पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
- मुख्य बिंदु:
- संघर्ष का पैमाना: हमले मुख्य रूप से रात में हुए हैं, जिससे ग्रामीणों में व्यापक दहशत है। ग्रामीण अब समूहों में या ऊंचे स्थानों पर सोने को मजबूर हैं।
- आवास क्षरण (Habitat Degradation): ‘भारतीय वन्यजीव संस्थान’ (WII) का अध्ययन बताता है कि सारंडा के जंगलों में लौह अयस्क के अत्यधिक खनन के कारण हाथियों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए हैं।
- खंडित परिदृश्य: झारखंड में हाथियों की संख्या 2017 के 678 से गिरकर आज केवल 217 रह गई है। जीवित हाथी खंडित क्षेत्रों में सीमित हैं जहाँ उनकी आहार संबंधी ज़रूरतें पूरी नहीं हो पातीं।
- UPSC प्रासंगिकता: “मानव-वन्यजीव संघर्ष”, “खनन का पर्यावरणीय प्रभाव” और “जैव विविधता संरक्षण”।
5. मतदाता सूची पुनरीक्षण: उत्तर प्रदेश में बड़ी कटौती
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (चुनावी सुधार; संवैधानिक निकाय; नागरिकता)।
- संदर्भ: उत्तर प्रदेश में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के पहले मसौदे के दौरान 2.89 करोड़ (कुल का 18.7%) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
- मुख्य बिंदु:
- शहरी प्रभाव: लखनऊ (30%) और गाजियाबाद (28%) जैसे शहरी क्षेत्रों में नाम हटाए जाने की दर सबसे अधिक है। इनमें वे लोग शामिल हैं जो काम के लिए पलायन कर गए थे लेकिन अपने मूल स्थान पर संपत्ति रखते थे।
- नागरिकता का मुद्दा: इस पुनरीक्षण ने नागरिकता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो 2003 की मतदाता सूची से खुद को नहीं जोड़ पा रहे हैं और उन्हें अब सुनवाई में अनिवार्य दस्तावेज पेश करने होंगे।
- सिस्टम की खामियां: मतदाता शिकायत कर रहे हैं कि निर्वाचन आयोग (EC) प्रविष्टियों में सुधार के लिए ‘फॉर्म 8’ तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन “निवास परिवर्तन” के लिए नहीं, जिससे परिवारों को नए सिरे से पंजीकरण करने और पुराने रिकॉर्ड हटाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
- UPSC प्रासंगिकता: “चुनावी अखंडता”, “प्रवासी श्रमिकों के अधिकार” और “निर्वाचन आयोग की भूमिका”।
🚀 त्वरित तथ्य (Quick Value Addition – Prelims Special)
- इंसुरेक्शन एक्ट (Insurrection Act): अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने बड़े विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सेना तैनात करने के लिए इस 19वीं शताब्दी के कानून को लागू करने की धमकी दी है।
- बीज विधेयक (Seeds Bill): बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता (QR कोड के माध्यम से) सुनिश्चित करने के लिए आगामी बजट सत्र में पेश होने की संभावना।
- SPREE योजना: ‘नियोक्ताओं/कर्मचारियों के पंजीकरण को बढ़ावा देने की योजना’ (SPREE) ने 1.03 करोड़ नए श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा (ESIC) के दायरे में लाया है।
- जल्लीकट्टू (Jallikattu): पोंगल के अवसर पर तमिलनाडु (पालमेडु) और आंध्र प्रदेश (पुल्लैयागरीपल्ले) में पारंपरिक सांडों को वश में करने वाले खेल शुरू हुए।
- इरीना क्रश (Irina Krush): शतरंज ग्रैंडमास्टर बनने वाली एकमात्र अमेरिकी महिला, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में अपनी शुरुआत भारत के कोझिकोड से की थी।
संपादकीय विश्लेषण
17 जनवरी, 2026Mapping:
यहाँ भारत के प्रमुख जलप्रपातों (Waterfalls), द्वीप भूगोल, और प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़ एवं सूखा प्रवण क्षेत्र) का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:
1. भारत के प्रमुख जलप्रपात (Major Waterfalls)
भारत में जलप्रपात मुख्य रूप से पश्चिमी घाट और छोटा नागपुर पठार में केंद्रित हैं, जिसका कारण यहाँ की खड़ी ढलान और कठोर चट्टानी संरचनाएँ हैं।
| जलप्रपात | नदी | राज्य | मुख्य विशेषता |
| कुंचिकल जलप्रपात | वाराही | कर्नाटक | भारत का सबसे ऊँचा सोपानी (Tiered) जलप्रपात। |
| जोग जलप्रपात | शरावती | कर्नाटक | इसे ‘गरसोप्पा’ भी कहते हैं; यह राजा, रानी, रोअर और रॉकेट नामक चार धाराओं के लिए प्रसिद्ध है। |
| दूधसागर जलप्रपात | मांडवी | गोवा | इसे “दूध का सागर” कहा जाता है; यह गोवा-कर्नाटक सीमा पर स्थित है। |
| शिवसमुद्रम | कावेरी | कर्नाटक | एशिया के पहले जल-विद्युत स्टेशनों में से एक यहाँ स्थित है। |
| हुंडरू जलप्रपात | सुवर्णरेखा | झारखंड | खनिज समृद्ध छोटा नागपुर पठार में स्थित एक प्रसिद्ध “निक-पॉइंट” (Knick-point) प्रपात। |
2. द्वीप समूहों का विस्तृत मानचित्रण
भारत के द्वीप न केवल पर्यटन स्थल हैं, बल्कि रणनीतिक सैन्य और पारिस्थितिक संपत्ति भी हैं।
- अंडमान और निकोबार (ज्वालामुखी मूल):
- सैडल पीक (Saddle Peak): उत्तरी अंडमान में स्थित द्वीप समूह का सबसे ऊँचा बिंदु।
- इंदिरा पॉइंट: भारत के क्षेत्र का सबसे दक्षिणी बिंदु (ग्रेट निकोबार में स्थित)।
- डंकन पैसेज (Duncan Passage): एक रणनीतिक जलडमरूमध्य जो दक्षिण अंडमान को लिटिल अंडमान से अलग करता है।
- 10 डिग्री चैनल: अंडमान द्वीप समूह को निकोबार समूह से अलग करता है।
- लक्षद्वीप (प्रवाल/मूँगा मूल):
- कवरत्ती: लक्षद्वीप की प्रशासनिक राजधानी।
- पिट्टी द्वीप: एक निर्जन द्वीप जो एक समर्पित पक्षी अभयारण्य के रूप में कार्य करता है।
- एंड्रोट (Andrott): लक्षद्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप।
3. प्राकृतिक आपदाएँ: बाढ़ और सूखा क्षेत्र
वर्ष 2026 की आपदा प्रबंधन तैयारी के लिए इन क्षेत्रों का मानचित्रण अनिवार्य है।
- बाढ़-प्रवण क्षेत्र (Flood-Prone Zones):
- ब्रह्मपुत्र बेसिन: भारी वर्षा और नदी के मार्ग बदलने की प्रवृत्ति के कारण असम अत्यधिक संवेदनशील है।
- गंगा के मैदान: उत्तरी बिहार (कोसी नदी – “बिहार का शोक”) और पश्चिम बंगाल।
- तटीय डेल्टा: चक्रवात के मौसम के दौरान ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र।
- सूखा-प्रवण क्षेत्र (Drought-Prone Zones):
- वृष्टि छाया क्षेत्र (Rain Shadow Region): पश्चिमी घाट के पूर्व का क्षेत्र (महाराष्ट्र का मराठवाड़ा, उत्तरी कर्नाटक)।
- शुष्क पश्चिम: पश्चिमी राजस्थान और गुजरात का कच्छ क्षेत्र।
- कालाहांडी बेल्ट: ओडिशा के वे हिस्से जहाँ पूर्व में होने के बावजूद अक्सर वर्षा की विफलता देखी जाती है।
🌍 मानचित्रण सारांश चेकलिस्ट (Summary Checklist)
| श्रेणी | मानचित्रण मुख्य बिंदु | मुख्य स्थान |
| सबसे ऊँचा जलप्रपात | कुंचिकल जलप्रपात | कर्नाटक |
| सबसे दक्षिणी बिंदु | इंदिरा पॉइंट | ग्रेट निकोबार |
| बिहार का शोक | कोसी नदी | उत्तरी बिहार |
| सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप | अंडमान सागर |
💡 मैपिंग टिप:
कोसी नदी को मैप पर देखते समय उसकी सात मुख्य धाराओं (सप्तकोसी) पर ध्यान दें। लक्षद्वीप के द्वीपों को उत्तर से दक्षिण के क्रम (अमीनीदिवि → लक्कादिवि → मिनिकॉय) में याद रखें।
झरने और तट (Cascades & Coasts)
| जलप्रपात | नदी | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| जोग जलप्रपात | शरावती | चार धाराओं (राजा, रानी, आदि) का समूह |
| दूधसागर | मांडवी | गोवा-कर्नाटक सीमा पर ‘क्षीर सागर’ जैसा दृश्य |
| हुंडरू प्रपात | सुवर्णरेखा | झारखंड में ‘निक-पॉइंट’ का उदाहरण |
| श्रेणी | मैपिंग हाइलाइट | प्रमुख स्थान |
|---|---|---|
| सबसे ऊँचा झरना | कुंचिकल प्रपात | कर्नाटक |
| सबसे दक्षिणी बिंदु | इंदिरा पॉइंट | ग्रेट निकोबार |
| बिहार का शोक | कोसी नदी | उत्तरी बिहार |
| पक्षी अभयारण्य | पिट्टी द्वीप | लक्षद्वीप |