यह अध्याय “नए साम्राज्य और राज्य” गुप्त वंश के उदय, हर्षवर्धन के शासन और दक्षिण भारत के शक्तिशाली राज्यों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

गुप्त शासकों के बारे में हमें मुख्य रूप से ‘प्रशस्तियों’ से जानकारी मिलती है। प्रशस्ति एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘प्रशंसा में’

  • समुद्रगुप्त का अभिलेख: समुद्रगुप्त की एक प्रसिद्ध प्रशस्ति इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में अशोक स्तंभ पर खुदी हुई है। इसकी रचना उनके दरबारी कवि और मंत्री हरिषेण ने की थी।
  • योद्धा के रूप में राजा: कवि ने समुद्रगुप्त का वर्णन एक महान योद्धा के रूप में किया है, जिनका शरीर युद्ध में कुल्हाड़ियों, तीरों और भालों के घावों के निशानों से ढका हुआ था।
  • संगीत प्रेमी राजा: उस काल के सिक्कों पर समुद्रगुप्त को वीणा बजाते हुए दिखाया गया है, जो संगीत और कविता के प्रति उनकी रुचि को दर्शाता है।
  1. आर्यावर्त (उत्तर भारत): यहाँ के नौ शासकों को उखाड़ फेंका गया और उनके राज्यों को साम्राज्य का हिस्सा बना लिया गया।
  2. दक्षिणापथ (दक्षिण भारत): यहाँ के बारह शासकों ने हार के बाद आत्मसमर्पण किया; समुद्रगुप्त ने उन्हें फिर से शासन करने की अनुमति दी (अधीनता स्वीकार करने पर)।
  3. आंतरिक घेरा: असम, नेपाल और उत्तर-पश्चिम के गण संघ जैसे राज्य कर देते थे और उनके आदेशों का पालन करते थे।
  4. बाहरी इलाके: कुषाण, शक और श्रीलंका के शासकों ने उनकी अधीनता स्वीकार की और अपनी बेटियों का विवाह उनसे किया।

गुप्त प्रशस्तियों में अक्सर परिवार के उदय को दिखाने के लिए पूर्वजों की सूची (वंशावली) दी जाती है।

  • सम्मान की उपाधियाँ: समुद्रगुप्त के पिता, चंद्रगुप्त, पहले शासक थे जिन्होंने ‘महाराजाधिराज’ जैसी बड़ी उपाधि धारण की। उनके पूर्वजों को केवल ‘महाराजा’ कहा जाता था।
  • चंद्रगुप्त द्वितीय: समुद्रगुप्त के पुत्र ने पश्चिम भारत में सैन्य अभियान का नेतृत्व किया और अंतिम ‘शक’ शासक को हराया। उन्हें ‘विक्रम संवत्’ (58 ईसा पूर्व से शुरू) और ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि से जोड़ा जाता है। उनके दरबार में कवि कालिदास और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट रहते थे।

गुप्तों के बारे में जहाँ हमें सिक्कों और अभिलेखों से पता चलता है, वहीं राजा हर्षवर्धन (जिन्होंने 1400 साल पहले शासन किया) के बारे में हमें उनकी जीवनियों से जानकारी मिलती है।

  • हर्षचरित: उनके दरबारी कवि बाणभट्ट द्वारा संस्कृत में लिखी गई हर्षवर्धन की जीवनी।
  • सत्ता तक पहुँच: पिता और बड़े भाई की मृत्यु के बाद हर्ष थानेसर के राजा बने। बाद में, जब उनके बहनोई (कन्नौज के शासक) को बंगाल के शासक ने मार दिया, तो हर्ष ने कन्नौज पर भी कब्जा कर लिया।
  • विस्तार और पराजय: हर्ष ने मगध और बंगाल को जीता, लेकिन जब उन्होंने दक्कन की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो उन्हें चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर रोक दिया।
  • श्वेन त्सांग: चीनी तीर्थयात्री हर्ष के दरबार में रहे और उन्होंने वहाँ के प्रशासन और समाज का विस्तृत विवरण दिया।

इस काल में दक्षिण भारत में ये दो प्रमुख राजवंश थे।

  • पल्लव: उनका राज्य उनकी राजधानी कांचीपुरम् के आसपास केंद्रित था और कावेरी डेल्टा तक फैला हुआ था।
  • चालुक्य: इनका राज्य कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच ‘रायचूर दोआब’ में स्थित था। उनकी राजधानी ऐहोल (Aihole) एक समृद्ध व्यापारिक और धार्मिक केंद्र थी।
  • पुलकेशिन द्वितीय: सबसे प्रसिद्ध चालुक्य राजा। उनके दरबारी कवि रविकर्ति ने एक प्रशस्ति लिखी, जिसमें उनके सैन्य अभियानों का वर्णन है।

राजाओं ने शक्तिशाली पुरुषों (सामंतों और मंत्रियों) का समर्थन हासिल करने के लिए नई व्यवस्थाएँ विकसित कीं।

  • अनुवांशिक पद: कुछ प्रशासनिक पद पिता से पुत्र को मिलने लगे। जैसे हरिषेण अपने पिता की तरह ‘महादंडनायक’ (मुख्य न्यायिक अधिकारी) थे।
  • एक व्यक्ति, कई पद: अक्सर एक व्यक्ति के पास कई पद होते थे। हरिषेण महादंडनायक के साथ-साथ ‘कुमारमात्य’ (महत्वपूर्ण मंत्री) और ‘संधिविग्रहिक’ (युद्ध और शांति का मंत्री) भी थे।
  • सामंत: ये सैन्य नेता थे जो राजा को सेना उपलब्ध कराते थे। उन्हें वेतन के बजाय अक्सर भूमि दी जाती थी, जिससे वे राजस्व (Tax) वसूलते थे और अपनी सेना का रखरखाव करते थे।
  • दक्षिण की सभाएँ: पल्लव अभिलेखों में ‘सभा’ (ब्राह्मण भूस्वामियों का संगठन), ‘ऊर’ (गैर-ब्राह्मण ग्राम सभा) और ‘नगरम’ (व्यापारियों का संगठन) का उल्लेख मिलता है।
  • भाषा और स्थिति: कालिदास के नाटकों (जैसे अभिज्ञान शाकुन्तलम्) में राजा और ब्राह्मण संस्कृत बोलते हैं, जबकि आम पुरुष और महिलाएँ प्राकृत भाषा का प्रयोग करते हैं।
  • अस्पृश्यता (Untouchability): चीनी तीर्थयात्री फा-शिएन ने ध्यान दिया कि अछूतों को शहरों के बाहर रहना पड़ता था। जब वे शहर में आते थे, तो उन्हें लकड़ी के टुकड़े पर चोट करके आवाज़ करनी पड़ती थी ताकि दूसरे लोग उनके संपर्क से बच सकें।
  • राजा की सेना: जब सेना चलती थी, तो वह संगीतकारों, सैनिकों और जानवरों का एक विशाल जुलूस होता था। ग्रामीणों को सेना के लिए भोजन, उपहार और चारे की व्यवस्था करनी पड़ती थी।
  • गुप्त वंश का आरंभ: लगभग 1700 साल पहले।
  • हर्षवर्धन का शासन: लगभग 1400 साल पहले।

📜 नए साम्राज्य और राज्य

🔱 गुप्त वंश और प्रशस्तियाँ
राजाओं के बारे में जानकारी प्रशस्तियों (प्रशंसा में लिखे अभिलेख) से मिलती है। हरिषेण ने समुद्रगुप्त को एक योद्धा और संगीतज्ञ बताया। उनके पुत्र चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की।
🦁 राजा हर्षवर्धन
1,400 साल पहले कन्नौज से शासन किया। बाणभट्ट ने उनकी जीवनी हर्षचरित संस्कृत में लिखी। उन्होंने विस्तार की कोशिश की, लेकिन चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने उन्हें नर्मदा तट पर रोक दिया।
🏛️ दक्षिण के राज्य
दक्षिण में पल्लव (काँचीपुरम्) और चालुक्य (ऐहोल) शक्तिशाली थे। स्थानीय शासन में सभा (ब्राह्मण भूस्वामी), उर (ग्राम सभा) और नगरम (व्यापारियों का संगठन) जैसे निकाय महत्वपूर्ण थे।
⚔️ प्रशासन व्यवस्था
प्रशासनिक पद आनुवंशिक होने लगे (जैसे हरिषेण पिता की तरह महादंडनायक बने)। शक्तिशाली सेनापतियों को सामंत कहा जाता था, जिन्हें भूमि दी जाती थी और वे जरूरत पड़ने पर राजा को सैन्य सहायता देते थे।
सामाजिक तथ्य अभिजात वर्ग संस्कृत बोलता था, जबकि आम लोग प्राकृत। चीनी यात्री फा-शिएन (फाह्यान) के अनुसार, ‘अछूतों’ को शहर से बाहर रहना पड़ता था और आते समय सूचना देनी पड़ती थी।
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कक्षा-6 इतिहास अध्याय-11 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: नए साम्राज्य और राज्य

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जहाँ पिछले अनुच्छेद व्यक्ति को राज्य के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करते हैं, वहीं अनुच्छेद 23 और 24 अक्सर व्यक्ति को निजी शोषण से बचाते हैं, और अनुच्छेद 25 व्यक्ति की आध्यात्मिक स्वायत्तता (Spiritual Autonomy) स्थापित करता है।

अनुच्छेद 23 एक व्यापक “शोषण के विरुद्ध अधिकार” है। यह इस मामले में अद्वितीय है कि यह राज्य और निजी व्यक्तियों दोनों के विरुद्ध लागू होता है।

  • मानव तस्करी (Human Trafficking): व्यावसायिक यौन शोषण, गुलामी या जबरन श्रम के उद्देश्यों के लिए मनुष्यों का अवैध व्यापार।
  • बेगार (Begar): जबरन श्रम का एक रूप जहाँ किसी व्यक्ति को बिना किसी भुगतान के काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह रियासतों में एक आम ऐतिहासिक प्रथा थी।
  • बलात श्रम (Forced Labour): किसी भी दंड की धमकी के तहत किसी व्यक्ति से कराया गया कार्य या सेवा, जिसके लिए उस व्यक्ति ने स्वेच्छा से स्वयं को प्रस्तुत नहीं किया है।

पीयूडीआर बनाम भारत संघ (एशियाड श्रमिक मामला) में सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुच्छेद का विस्तार किया।

  • फैसला: अदालत ने कहा कि “बल” (Force) केवल शारीरिक या कानूनी नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति गरीबी या भूख के कारण न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम करने को मजबूर है, तो उसे भी अनुच्छेद 23 के तहत “बलात श्रम” माना जाएगा।

राज्य ‘सार्वजनिक उद्देश्यों’ के लिए अनिवार्य सेवा (जैसे सैन्य भर्ती या अनिवार्य सामाजिक सेवा) लागू कर सकता है।

  • शर्त: ऐसा करते समय, राज्य केवल धर्म, मूलवंश, जाति या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता।

अनुच्छेद 24 एक “सामाजिक अधिदेश” है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत के नागरिकों का बचपन श्रम की भेंट न चढ़ जाए।

यह 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निम्नलिखित स्थानों पर काम पर रखने से रोकता है:

  • कारखाने (Factories)
  • खदानें (Mines)
  • जोखिम भरे रोजगार (जैसे निर्माण कार्य, रेलवे, पटाखा निर्माण)।
  • बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम, 2016: इसने अनुच्छेद 24 की खामियों को दूर किया। यह 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सभी व्यवसायों में काम करने से रोकता है (सिर्फ स्कूल के बाद पारिवारिक व्यवसाय में मदद को छोड़कर)। इसने “किशोर” (14-18 वर्ष) की एक नई श्रेणी भी पेश की, जिन्हें जोखिम भरे कामों में प्रतिबंधित किया गया है।
  • एम.सी. मेहता बनाम तमिलनाडु राज्य (1996): सुप्रीम कोर्ट ने ‘बाल श्रम पुनर्वास कल्याण कोष’ बनाने का निर्देश दिया। उल्लंघन करने वाले नियोक्ता को प्रति बच्चा ₹20,000 इस कोष में जमा करने होंगे।

अनुच्छेद 25 भारतीय धर्मनिरपेक्षता (Secularism) का आधार है। यह प्रत्येक व्यक्ति को अपने विश्वासों को मानने और पालन करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

  1. अंतःकरण की स्वतंत्रता (Conscience): किसी भी भगवान को मानने या न मानने की पूर्ण आंतरिक स्वतंत्रता।
  2. मानने का अधिकार (Profess): अपने विश्वास और आस्था की सार्वजनिक घोषणा करना।
  3. आचरण का अधिकार (Practice): पूजा-पाठ, परंपराएं और अनुष्ठान करने का अधिकार (जैसे पगड़ी पहनना या क्रॉस पहनना)।
  4. प्रचार का अधिकार (Propagate): अपने विचारों का प्रसार करना।
    • धर्मांतरण की सीमा: स्टेनिस्लॉस बनाम मध्य प्रदेश राज्य में कोर्ट ने कहा कि “प्रचार” के अधिकार में “धर्मांतरण” का अधिकार शामिल नहीं है। जबरन या धोखाधड़ी से कराया गया धर्मांतरण संवैधानिक रूप से सुरक्षित नहीं है।

न्यायपालिका ने यह तय करने के लिए एक सिद्धांत विकसित किया है कि धर्म के किन हिस्सों को सुरक्षा दी जाए। केवल वही प्रथाएं संरक्षित हैं जो धर्म का अभिन्न या अनिवार्य हिस्सा हैं।

  • उदाहरण: तीन तलाक को इस्लाम की अनिवार्य प्रथा नहीं माना गया, इसलिए इसे समाप्त किया जा सका। इसी तरह, अजान या भजन के लिए लाउडस्पीकर के उपयोग को विनियमित किया जा सकता है।

राज्य धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकता है:

  • सामाजिक सुधार: हिंदू मंदिरों को सभी जातियों (दलितों) के लिए खोलना।
  • धर्मनिरपेक्ष गतिविधियाँ: धार्मिक ट्रस्ट के वित्तीय या राजनीतिक कार्यों को विनियमित करना।
  • नोट: यहाँ “हिंदू” शब्द के दायरे में सिख, जैन और बौद्ध भी शामिल हैं।
विशेषताअनुच्छेद 23अनुच्छेद 24अनुच्छेद 25
श्रेणीशोषण के विरुद्ध अधिकारशोषण के विरुद्ध अधिकारधार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
मुख्य केंद्रबलात श्रम और तस्करीबाल श्रम (14 से कम)व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता
लक्ष्यवयस्क और बच्चेविशेष रूप से बच्चेसभी व्यक्ति (व्यक्तिगत रूप से)
मुख्य सीमासार्वजनिक सेवा का अपवादकोई नहीं (पूर्ण निषेध)सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य

🛡️ अनुच्छेद 23, 24 और 25

🚫 अनु. 23: मानव तस्करी
यह बेगार और बलात् श्रम (Forced Labour) को प्रतिबंधित करता है। ‘एशियाड वर्कर्स’ मामले के अनुसार, गरीबी के कारण न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान करना भी बलात् श्रम की श्रेणी में आता है।
🧒 अनु. 24: बाल श्रम निषेध
14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों या खानों में काम पर रखने पर रोक। 2016 के अधिनियम ने इसे सभी व्यवसायों तक बढ़ा दिया और किशोरों (14-18 वर्ष) के लिए सुरक्षा जोड़ी।
🙏 अनु. 25: व्यक्तिगत आस्था
चार स्वतंत्रताएं देता है: 1. अंतःकरण (आंतरिक विश्वास), 2. मानने, 3. आचरण, और 4. प्रचार करने का अधिकार। यह नागरिकों और विदेशियों दोनों के लिए उपलब्ध है।
⚖️ अनिवार्य प्रथाएं
राज्य केवल अनिवार्य धार्मिक प्रथाओं की रक्षा करता है। अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन हैं। जबरन धर्म परिवर्तन कोई मौलिक अधिकार नहीं है।
🛠️ राज्य का हस्तक्षेप
राज्य धर्म के धर्मनिरपेक्ष पहलुओं को नियंत्रित कर सकता है और सामाजिक सुधार लागू कर सकता है (जैसे मंदिरों को सभी के लिए खोलना)। यहाँ ‘हिन्दू’ शब्द में सिख, जैन और बौद्ध शामिल हैं।
📖 ऐतिहासिक निर्णय
स्टैनिसलॉस केस: दूसरों को धर्मांतरित करने का अधिकार नहीं। एम.सी. मेहता: बाल श्रम कल्याण कोष की स्थापना। तीन तलाक: इसे गैर-अनिवार्य प्रथा घोषित किया गया।
विशेष तथ्य जहाँ अनुच्छेद 23 को “सार्वजनिक उद्देश्यों” (जैसे अनिवार्य सैन्य सेवा) के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है, वहीं अनुच्छेद 24 जोखिम भरे कार्यों में बच्चों के लिए पूर्ण निषेध है।

यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (13 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; अंतरिक्ष क्षेत्र में जागरूकता)।

  • संदर्भ: इसरो (ISRO) का PSLV-C62 मिशन, जो रणनीतिक उपग्रह EOS-NI को ले जा रहा था, 12 जनवरी को तीसरे चरण (third-stage) की खराबी के कारण विफल हो गया।
  • मुख्य बिंदु:
    • विसंगति: इसरो ने पुष्टि की कि तीसरे चरण (PS3) के अंत में “रोल रेट डिस्टर्बेंस” (roll rate disturbance) हुआ, जिससे रॉकेट अनियंत्रित होकर घूमने लगा और अपने मार्ग से भटक गया।
    • दोहराव: यह पीएसएलवी की लगातार दूसरी विफलता है; मई 2025 में पीएसएलवी-सी61 मिशन के दौरान भी तीसरे चरण में ऐसी ही समस्या आई थी।
    • रणनीतिक क्षति: प्राथमिक पेलोड, EOS-NI, डीआरडीओ (DRDO) द्वारा निर्मित एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह था, जिसे विशेष रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए बनाया गया था।
  • UPSC प्रासंगिकता: “विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां”, “स्वदेशीकरण” और “अंतरिक्ष अन्वेषण में चुनौतियां”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • गुणवत्ता आश्वासन संकट: चूंकि पीएसएलवी एक पुरानी और भरोसेमंद तकनीक है, इसलिए लगातार विफलताएं डिजाइन की खामियों के बजाय गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) प्रोटोकॉल में व्यवस्थागत चूक का संकेत देती हैं।
    • पारदर्शिता और जांच: 2025 की विफलता के बाद की रिपोर्ट को ‘वर्गीकृत’ (Classified) रखा गया था। संपादकीय का तर्क है कि बाहरी जांच की कमी ने C62 लॉन्च से पहले सुधारों में बाधा डाली।
    • व्यावसायिक प्रतिष्ठा: इसरो ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ (NSIL) के माध्यम से पीएसएलवी का विपणन करता है। इन विफलताओं से अंतरराष्ट्रीय बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है, जिससे यह वैश्विक बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; भारत से जुड़े द्विपक्षीय समूह और समझौते)।

  • संदर्भ: अमेरिका के आगामी राजदूत सर्जियो गोर ने घोषणा की है कि भारत को अगले महीने ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
  • मुख्य बिंदु:
    • गठबंधन: यह अमेरिका के नेतृत्व वाली एक व्यवस्था है जो सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित है।
    • रणनीतिक साझेदार: भारत इसमें जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई, इजराइल और नीदरलैंड जैसे देशों के साथ शामिल होगा।
    • राजनयिक संदर्भ: यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका व्यापारिक तनाव (भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ) और रूसी तेल आयात पर मतभेदों से जूझ रहे हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव”, “भारत-अमेरिका संबंध” और “महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी शासन”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • रणनीतिक आवश्यकता: दिसंबर में वाशिंगटन में इसके लॉन्च के समय भारत गायब था; अब इसका शामिल होना दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश को वैश्विक हाई-टेक आपूर्ति श्रृंखला में एकीकृत करने की रणनीतिक जरूरत को दर्शाता है।
    • व्यापार वार्ता के लिए उत्प्रेरक: यह निमंत्रण लंबे समय से लंबित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को सुलझाने के लिए आवश्यक गति प्रदान कर सकता है।
    • क्षेत्रीय स्थिरता: राजदूत गोर दक्षिण और मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं, जो संकेत देता है कि तकनीकी सहयोग को पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयासों के साथ जोड़ा जाएगा।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (सामाजिक न्याय; स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित मुद्दे)।

  • संदर्भ: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और विकास (ECCD) पर एक राष्ट्रीय मिशन की वकालत, ताकि भारत के $30 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को सुरक्षित किया जा सके।
  • मुख्य बिंदु:
    • 3,000 दिनों का विंडो: गर्भधारण से पहले 1,000 दिन मस्तिष्क के विकास (80-85%) के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, उसके बाद के 2,000 दिन सामाजिक और संज्ञानात्मक कौशल को आकार देते हैं।
    • आर्थिक तर्क: ECCD में निवेश एक रणनीतिक कदम है जो भविष्य में उपचारात्मक शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाले खर्च को कम करता है।
    • सार्वभौमिक दृष्टिकोण: लेखक का तर्क है कि ECCD को केवल गरीब वर्ग तक सीमित रखने के बजाय ‘सार्वभौमिक’ होना चाहिए, क्योंकि सभी आय स्तरों के बच्चे ‘स्क्रीन एक्सपोजर’ और मोटापे जैसे जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “मानव पूंजी निर्माण”, “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति” और “सतत विकास लक्ष्य”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • छूटा हुआ अवसर: वर्तमान में सरकारी हस्तक्षेप 30-36 महीनों (आंगनवाड़ी) से शुरू होता है, लेकिन पहले 1,000 दिन—जहाँ उपेक्षा अक्सर अपरिवर्तनीय क्षति पहुँचाती है—अभी भी नीतिगत कमी का हिस्सा हैं।
    • एकीकृत ढांचा: एक प्रस्तावित ECCD मिशन के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होगी।
    • माता-पिता का सशक्तिकरण: माता-पिता कोresponsive देखभाल के बारे में शिक्षित करना एक प्रमुख स्तंभ है, जो टीकाकरण जितना ही प्रभावी हो सकता है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन; शिक्षा नीति)।

  • संदर्भ: ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ का विश्लेषण, जिसका उद्देश्य भारतीय उच्च शिक्षा की देखरेख को एकीकृत और आधुनिक बनाना है।
  • मुख्य बिंदु:
    • एकीकृत निकाय: विधेयक UGC, AICTE और NCTE को समाप्त कर एक एकल निकाय, ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान’ बनाने का प्रस्ताव करता है।
    • भूमिकाओं का पृथक्करण: यह विनियमन, प्रत्यायन (Accreditation) और मानकों के लिए तीन अलग-अलग परिषदों का निर्माण करता है ताकि हितों के टकराव को कम किया जा सके।
    • पारदर्शिता मॉडल: यह वित्त, परिणामों और संकाय डेटा के सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण (self-disclosure) पर आधारित एक तकनीक-सक्षम ‘सिंगल-विंडो’ प्रणाली की परिकल्पना करता है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “शिक्षा सुधार”, “जवाबदेही” और “NEP 2020 का कार्यान्वयन”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • “लाइट बट टाइट” (Light but Tight): विधेयक NEP 2020 के अनुरूप है, जो निरीक्षणों के “जाल” को कम करता है ताकि संस्थान अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित कर सकें, साथ ही उच्च मानकों को भी बनाए रखता है।
    • स्वायत्तता: यह अच्छा प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को अधिक स्वतंत्रता देता है, जिससे स्वायत्तता को उत्कृष्टता के उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सके।
    • छात्र सशक्तिकरण: मजबूत शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से छात्रों को सक्रिय हितधारक बनाया गया है।

पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (शासन; ई-गवर्नेंस; नीतियां और हस्तक्षेप)।

  • संदर्भ: कर्नाटक का ‘भूमि’ (Bhoomi) प्रोजेक्ट, जिसने भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया, 2025 में 25 वर्ष पूरे कर रहा है।
  • मुख्य बिंदु:
    • विवेकाधिकार का अंत: वर्ष 2000 में शुरू किए गए इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य ग्रामीण लेखाकारों के हस्तलिखित रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत करना और उनके व्यक्तिगत विवेकाधिकार (Discretion) को समाप्त करना था।
    • प्रभाव: 25 वर्षों में 3.5 करोड़ किसानों को 39.8 करोड़ से अधिक RTC (अधिकार, किरायेदारी और फसल का रिकॉर्ड) जारी किए गए हैं।
    • एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र: आज भूमि प्रोजेक्ट पंजीकरण प्रणाली (कावेरी), सर्वेक्षण (मोजिनी) और पीएम-किसान जैसी कल्याणकारी योजनाओं के साथ एकीकृत है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “ई-गवर्नेंस और विकास”, “भूमि सुधार” और “प्रशासनिक सुधार केस स्टडी”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • सांस्कृतिक बदलाव: इस सफलता के लिए लगभग 18,000 कर्मियों को डिजिटल प्रणालियों के उपयोग के लिए प्रशिक्षित किया गया।
    • भ्रष्टाचार में कमी: पंजीकरण को भूमि रिकॉर्ड से जोड़कर, इस परियोजना ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन को काफी कम कर दिया और बिचौलियों को समाप्त कर दिया।
    • विश्वास का सुदृढ़ीकरण: तकनीक से परे, इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि राजस्व प्रशासन को अधिक विश्वसनीय बनाकर सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास को मजबूत करना है।

संपादकीय विश्लेषण

13 जनवरी, 2026
GS-3 अंतरिक्ष
🚀 PSLV-C62: प्रणालियों की विफलता का विश्लेषण
स्टेज-3 में ‘रोल रेट डिस्टर्बेंस’ के कारण लगातार दूसरी विफलता। नुकसान: रणनीतिक उपग्रह EOS-NI। आलोचना: विफलता रिपोर्टों को “वर्गीकृत” (Classified) रखना बाहरी विशेषज्ञों की समीक्षा को रोकता है, जिससे वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में इसरो की प्रतिष्ठा को खतरा है।
GS-2 अंत. संबंध
💻 ‘पैक्स सिलिका’ और उच्च-तकनीक कूटनीति
भारत को सेमीकंडक्टर और AI के लिए अमेरिकी नेतृत्व वाले ब्लॉक में शामिल होने का निमंत्रण। रणनीतिक कदम: व्यापार तनाव से बचने के लिए भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करना। अवसर: भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ गतिरोध को सुलझाने के लिए तकनीकी संबंधों का उपयोग करना।
GS-2 सामाजिक
👶 ECCD: 3,000 दिनों का महत्वपूर्ण पथ
जीवन के पहले 1,000 दिनों में मस्तिष्क का विकास 80-85% तक पूर्ण हो जाता है। 3 वर्ष की आयु से पहले के “मिसिंग विंडो” को भरने के लिए राष्ट्रीय मिशन की आवश्यकता। फोकस: विकसित भारत के लिए मानव पूंजी निर्माण सुनिश्चित करने हेतु सार्वभौमिक बाल्यावस्था देखभाल।
GS-2 शिक्षा
🎓 उच्च शिक्षा विनियमन में सुधार
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक द्वारा UGC, AICTE और NCTE को एकीकृत करने का प्रयास। संरचनात्मक बदलाव: विनियमन (Regulation) को प्रत्यायन (Accreditation) से अलग करना। लक्ष्य: सार्वजनिक प्रकटीकरण पर आधारित “लाइट बट टाइट” निरीक्षण की ओर बढ़ना।
GS-2 ई-गवर्नेंस
📜 भूमि (Bhoomi) के 25 वर्ष: भू-अभिलेख सफलता
कर्नाटक के डिजिटलीकरण का मील का पत्थर: 39.8 करोड़ RTC जारी किए गए। प्रशासनिक बदलाव: मानवीय विवेक के स्थान पर स्वचालित नियमों का उपयोग। एकीकृत इकोसिस्टम भू-अभिलेखों को कावेरी (पंजीकरण) और PM-किसान से जोड़ता है, जिससे ग्रामीण भ्रष्टाचार में भारी कमी आई है।

यहाँ भारत के नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों (सौर और पवन पार्क)राष्ट्रीय जलमार्गों और प्रमुख बांध परियोजनाओं का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

भारत ने अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का काफी विस्तार किया है, विशेष रूप से उन राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया है जहाँ सौर विकिरण अधिक है और पवन की गति तेज़ है।

  • भड़ला सोलर पार्क (राजस्थान): वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक, जो थार मरुस्थल के शुष्क क्षेत्र में स्थित है।
  • पावागढ़ सोलर पार्क (कर्नाटक): दक्षिण भारत के तुमकुरु जिले में स्थित एक विशाल सौर स्थापना।
  • कुरनूल अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क (आंध्र प्रदेश): एक प्रमुख चालू पार्क जो दक्षिणी ग्रिड में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
  • मुप्पंडल विंड फार्म (तमिलनाडु): भारत का सबसे बड़ा चालू ‘ओंशोर’ (तटवर्ती) पवन फार्म, जो कन्याकुमारी क्षेत्र में हवा की गति का लाभ उठाता है।
  • जैसलमेर विंड पार्क (राजस्थान): देश के सबसे बड़े पवन फार्मों में से एक, जो पश्चिमी राजस्थान के विशाल खुले स्थानों का उपयोग करता है।

अंतर्देशीय जल परिवहन परिवहन का एक किफायती और पर्यावरण के अनुकूल माध्यम है। सरकार ने कई नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है।

  • NW-1 (गंगा-भागीरथी-हुगली): यह प्रयागराज (इलाहाबाद) को हल्दिया से जोड़ता है; यह सबसे लंबा और सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो ऐतिहासिक मगध क्षेत्र से होकर बहता है।
  • NW-2 (ब्रह्मपुत्र): उत्तर-पूर्व (असम) में सादिया से धुबरी को जोड़ता है।
  • NW-3 (पश्चिमी तट नहर): केरल में स्थित, कोट्टापुरम से कोल्लम को जोड़ता है।
  • NW-4 (गोदावरी-कृष्णा): पूर्वी तट के साथ काकीनाडा से पुडुचेरी को जोड़ता है।

बांध बहुउद्देशीय परियोजनाएं हैं जिनका उपयोग सिंचाई, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण के लिए किया जाता है।

  • भाखड़ा नांगल बांध (हिमाचल प्रदेश/पंजाब): सतलुज नदी पर निर्मित, यह दुनिया के सबसे ऊँचे गुरुत्वीय बांधों (Gravity dams) में से एक है और पंजाब क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • टिहरी बांध (उत्तराखंड): भागीरथी नदी पर स्थित भारत का सबसे ऊँचा बांध
  • हीराकुंड बांध (ओडिशा): महानदी पर निर्मित, दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों (Earthen dams) में से एक है।
  • सरदार सरोवर बांध (गुजरात): नर्मदा नदी पर स्थित, जो राजस्थान और गुजरात को पानी और बिजली प्रदान करता है।
  • नागार्जुन सागर बांध (तेलंगाना/आंध्र प्रदेश): कृष्णा नदी पर निर्मित, सबसे बड़े चिनाई वाले बांधों (Masonry dams) में से एक है।
श्रेणीमुख्य बिंदुभौगोलिक स्थिति
सबसे बड़ा सौर पार्कभड़ला सोलर पार्कराजस्थान (पश्चिम)
सबसे लंबा जलमार्गNW-1 (गंगा नदी)उत्तर/पूर्व भारत
सबसे ऊँचा बांधटिहरी बांधउत्तराखंड (हिमालय)
सबसे लंबा बांधहीराकुंड बांधओडिशा (पूर्वी तट)

नदियों और उन पर बने बांधों के युग्म (Pairs) को याद रखें, जैसे: सतलुज → भाखड़ा नांगलभागीरथी → टिहरीमहानदी → हीराकुंडनर्मदा → सरदार सरोवरकृष्णा → नागार्जुन सागर। UPSC अक्सर मैच-द-फॉलोइंग (Match the following) में ऐसे प्रश्न पूछता है।

सतत विकास एवं संसाधन

स्वच्छ ऊर्जा
☀️ सौर एवं पवन पार्क
थार मरुस्थल में स्थित विश्व स्तरीय भादला सोलर पार्क से लेकर कन्याकुमारी के पास विशाल मुप्पंडल पवन फार्म तक, भारत का ऊर्जा मानचित्र अब ‘ग्रीन’ हो रहा है।
अभ्यास: कर्नाटक में पावगडा सोलर पार्क को खोजें और इसकी जलवायु की तुलना थार मरुस्थल के शुष्क क्षेत्र से करें।
नौवहन
🛶 राष्ट्रीय जलमार्ग
अंतर्देशीय परिवहन गंगा (NW-1), ब्रह्मपुत्र (NW-2) और केरल की पश्चिमी तट नहर (NW-3) जैसी नदियों पर विकसित हो रहा है।
अभ्यास: उत्तर-पूर्वी मैदानों के मानचित्र पर प्रयागराज से हल्दिया तक NW-1 के मार्ग को ट्रेस करें।
इंजीनियरिंग
🏗️ प्रमुख बांध परियोजनाएं
बहुउद्देशीय परियोजनाएं जैसे टिहरी (सबसे ऊँचा), हीराकुंड (सबसे लंबा), और भाखड़ा नांगल सिंचाई और बिजली के लिए जीवन रेखा का कार्य करती हैं।
अभ्यास: नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध की पहचान करें और उन राज्यों के नाम लिखें जिन्हें यह जल पहुँचाता है।
मानचित्रण सारांश
श्रेणी मुख्य विशेषता भौगोलिक केंद्र
सौर ऊर्जाभादला सोलर पार्कराजस्थान (थार मरुस्थल)
अंतर्देशीय जलमार्गNW-1 (गंगा)प्रयागराज से हल्दिया
सबसे ऊँचा बांधटिहरी बांधउत्तराखंड (भागीरथी नदी)
पवन ऊर्जामुप्पंडल फार्मतमिलनाडु (दक्षिणी सिरा)

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