यह अध्याय “उपनिवेशवाद और शहर” मुख्य रूप से दिल्ली के उदाहरण के माध्यम से बताता है कि औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय शहरों में किस तरह के बदलाव आए।

ब्रिटिश शासन के तहत, व्यापार और सत्ता के समीकरण बदलने से भारतीय शहरों का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।

  • औद्योगिक शहरों का विकास: पश्चिम (जैसे इंग्लैंड) में, औद्योगीकरण के कारण लीड्स और मैनचेस्टर जैसे शहर तेज़ी से बढ़े। इसके विपरीत, 19वीं शताब्दी में भारतीय शहरों का विस्तार उतनी तेज़ी से नहीं हुआ।
  • प्रेसीडेंसी शहरों का उदय: कलकत्ता, बंबई और मद्रास ‘प्रेसीडेंसी शहर’ बन गए। ये ब्रिटिश सत्ता, व्यापार और प्रशासन के मुख्य केंद्र थे।
  • वि-शहरीकरण: कई पुराने विनिर्माण (Manufacturing) और बंदरगाह वाले शहरों का पतन हुआ।
    • पतन के कारण: खास चीजों की मांग में कमी, व्यापार का नए ब्रिटिश बंदरगाहों की ओर मुड़ जाना और स्थानीय शासकों की हार के बाद क्षेत्रीय सत्ता केंद्रों का ढह जाना।
    • प्रभावित शहर: 19वीं शताब्दी में मछलीपट्टनम, सूरत और श्रीरंगपट्टनम वि-शहरीकरण के प्रमुख उदाहरण थे।

अंग्रेजों द्वारा किए गए बदलावों से पहले, दिल्ली का सबसे प्रसिद्ध स्वरूप ‘शाहजहानाबाद’ था, जिसे शाहजहाँ ने 1639 में बनवाना शुरू किया था।

  • संरचना: इसमें लाल किला (महल परिसर) और उससे सटा हुआ 14 द्वारों वाला एक ‘किलेबंद शहर’ शामिल था।
  • मुख्य स्थल:
    • जामा मस्जिद: भारत की सबसे बड़ी और भव्य मस्जिदों में से एक। उस समय पूरे शहर में इस मस्जिद से ऊँचा कोई स्थान नहीं था।
    • चाँदनी चौक: एक चौड़ी मुख्य सड़क जिसके बीचों-बीच एक नहर बहती थी।
  • संस्कृति: यह शहर सूफी संस्कृति का केंद्र था, जहाँ दरगाहें, खानकाहें और ईदगाहें बड़ी संख्या में थीं।
  • सामाजिक विभाजन: इसकी सुंदरता के बावजूद, अमीर (जो ‘हवेलियों’ में रहते थे) और गरीब (जो मिट्टी के घरों में रहते थे) के बीच गहरा अंतर था।

अंग्रेजों ने 1803 में दिल्ली पर नियंत्रण प्राप्त किया। शुरुआत में, उनका दृष्टिकोण अन्य औपनिवेशिक शहरों की तुलना में थोड़ा अलग था।

  • प्रारंभिक सह-अस्तित्व: 19वीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में, अंग्रेज किलेबंद शहर के भीतर ही धनी भारतीयों के साथ रहते थे और उर्दू/फारसी संस्कृति का आनंद लेते थे।
  • दिल्ली पुनर्जागरण: 1830 से 1857 की अवधि को अक्सर ‘पुनर्जागरण’ (Renaissance) कहा जाता है, क्योंकि दिल्ली कॉलेज में विज्ञान और मानविकी के क्षेत्र में बौद्धिक विकास हुआ था।
  • 1857 का प्रभाव: 1857 के विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने दिल्ली के मुगल अतीत को मिटाने की कोशिश की।
    • उन्होंने लाल किले के आसपास के इलाकों को साफ कर दिया, उद्यानों और मंडपों को नष्ट कर दिया।
    • मस्जिदों का उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया गया; जैसे जीनत-अल-मस्जिद को बेकरी में बदल दिया गया।
    • शहर का एक तिहाई हिस्सा ढहा दिया गया और अंग्रेज उत्तर में स्थित ‘सिविल लाइन्स’ (Civil Lines) क्षेत्र में चले गए।

1911 में, अंग्रेजों ने राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की।

  • वास्तुकार: एडवर्ड लुटियंस और हर्बर्ट बेकर को रायसीना हिल पर 10 वर्ग मील के नए शहर को डिजाइन करने का काम सौंपा गया।
  • सत्ता का प्रतीक: इमारतों को ब्रिटिश महत्व को दर्शाने के लिए डिजाइन किया गया था।
    • वाइसराय पैलेस (अब राष्ट्रपति भवन) को जानबूझकर जामा मस्जिद से ऊँचा बनाया गया था।
    • वास्तुकला की शैलियों में प्राचीन यूनान (Greece), सांची के बौद्ध स्तूप और मुगलों की जालियों का मिश्रण था।
  • डिजाइन दर्शन: पुराने शहर की “अराजकता” और “भीड़भाड़ वाले मोहल्लों” के विपरीत, नई दिल्ली में चौड़ी, सीधी सड़कें और बड़े बंगले थे।
  • स्वास्थ्य और स्वच्छता: नई दिल्ली को एक “स्वच्छ और स्वस्थ स्थान” के रूप में नियोजित किया गया था, जिसमें बेहतर जल आपूर्ति, जल निकासी और ताजी हवा के लिए हरे-भरे पेड़ थे।

1947 में भारत के विभाजन ने दिल्ली की जनसंख्या और संस्कृति को पूरी तरह बदल दिया।

  • जनसंख्या परिवर्तन: हज़ारों मुसलमान पाकिस्तान चले गए, जबकि पंजाब से सिख और हिंदू शरणार्थी दिल्ली में आ गए। दिल्ली की आबादी रातों-रात बढ़ गई।
  • शरणार्थी जीवन: लगभग 5,00,000 प्रवासियों को बसाने के लिए लाजपत नगर और तिलक नगर जैसी नई कॉलोनियाँ बनीं।
  • सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन: प्रवासियों के व्यवसाय (जमींदार, वकील, व्यापारी) उन कारीगरों और मजदूरों से अलग थे जिनकी जगह उन्होंने ली थी। उर्दू आधारित शहरी संस्कृति की जगह पंजाब से आए खान-पान, पहनावे और कला के नए रुझानों ने ले ली।
विशेषताहवेली (मुगलकालीन हवेली)औपनिवेशिक बंगला (Colonial Bungalow)
निवासीकई परिवार एक साथ रहते थे।केवल एक नाभिकीय (छोटा) परिवार।
डिजाइनआंगन और फव्वारों के साथ ऊँची दीवारों वाले घेरे।ढलवाँ छत और चौड़े बरामदे वाला एक मंजिला घर।
लैंगिक स्थानपुरुषों के लिए बाहरी आंगन; महिलाओं के लिए भीतरी हिस्सा।अलग लिविंग रूम, डाइनिंग रूम और बेडरूम।
परिसरशहर के भीतर घनी आबादी के बीच स्थित।एक या दो एकड़ के खुले मैदान में बना।
  1. खानकाह: यात्रियों के विश्राम के लिए सूफी सराय।
  2. ईदगाह: मुसलमानों का खुला प्रार्थना स्थल।
  3. दरगाह: सूफी संत का मकबरा।
  4. कुल-दे-सैक (Cul-de-sac): ऐसी सड़क जो आगे जाकर बंद हो जाती है।
NCERT इतिहास   •   कक्षा-8
अध्याय – 6

उपनिवेशवाद और शहर

शहरी परिवर्तन
प्रेसीडेंसी शहर: कलकत्ता, बंबई और मद्रास व्यापारिक केंद्रों के रूप में उभरे, जबकि सूरत जैसे पुराने बंदरगाहों का पतन हुआ (वि-शहरीकरण)।
शाहजहानाबाद: लाल किले और जामा मस्जिद के साथ 1639 में निर्मित; सूफी संस्कृति और भव्य हवेलियों का केंद्र।
पुनर्जागरण
1830–1857: दिल्ली कॉलेज में बौद्धिक विकास का काल। 1857 के विद्रोह के बाद यह अचानक समाप्त हो गया जब अंग्रेजों ने पुराने शहर को खाली करा दिया।
नई दिल्ली का निर्माण
1911 राजधानी परिवर्तन: अंग्रेजों ने अपनी शाही वैधता को पुनः स्थापित करने के लिए राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित किया।
वास्तुकला की दृष्टि: एडवर्ड लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने रायसीना हिल्स पर नई दिल्ली का डिजाइन तैयार किया, जिसमें सीधी चौड़ी सड़कों और स्वास्थ्य-केंद्रित योजना पर जोर दिया गया।
सत्ता का प्रतीक: वायसराय पैलेस को जामा मस्जिद से ऊँचा बनाया गया ताकि मुगल अतीत पर ब्रिटिश प्रभुत्व का प्रतीक दिखे।
विभाजन (1947): मुस्लिम निवासियों के पाकिस्तान पलायन और पंजाब से आए 5,00,000 हिंदू और सिख शरणार्थियों के कारण शहर की संस्कृति बदल गई।
नया शहरी स्वरूप: लाजपत नगर जैसी शरणार्थी कॉलोनियां उभरीं, और एक नई पंजाबी-प्रभावित संस्कृति ने पुरानी उर्दू-आधारित परंपराओं की जगह ले ली।

हवेली

मुगलकालीन हवेलियां जिनमें आंगन और कई परिवारों के लिए अलग-अलग स्थान होते थे।

बंगला

औपनिवेशिक एकल-परिवार घर जिनमें ढालू छतें, बरामदे और विशाल खुले मैदान होते थे।

गुलिस्तां

पुरानी दिल्ली की बगीचे जैसी गुणवत्ता, जिसका अधिकांश हिस्सा 1857 के बाद नष्ट कर दिया गया था।

दोहरे शहर
औपनिवेशिक दिल्ली दो शहरों की कहानी थी: भीड़भाड़ वाला, ऐतिहासिक शाहजहानाबाद और विस्तृत, व्यवस्थित नई दिल्ली। यह बदलाव मुगल परंपरा को एक ‘आधुनिक’ शाही व्यवस्था से बदलने की ब्रिटिश इच्छा को दर्शाता था।
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कक्षा-8 इतिहास अध्याय-6 PDF

सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स:उपनिवेशवाद और शहर

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भारतीय संविधान के अंतर्गत, संसद केवल दो सदनों से मिलकर नहीं बनी है; यह एक तीन-भाग वाला निकाय है।
संसद = राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा।

यह अनुच्छेद निर्दिष्ट करता है कि संघ के लिए एक संसद होगी, जिसमें राष्ट्रपति और दो सदन शामिल होंगे, जिन्हें क्रमशः राज्यसभा (राज्यों की परिषद) और लोकसभा (लोगों का सदन) के रूप में जाना जाएगा।

  • विशेष नोट: यद्यपि राष्ट्रपति किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता है, फिर भी वह संसद का एक अभिन्न अंग है क्योंकि राष्ट्रपति की सहमति के बिना कोई भी विधेयक कानून नहीं बन सकता है।

राज्यसभा एक स्थायी निकाय है और इसे भंग (Dissolve) नहीं किया जा सकता। यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है।

  • अधिकतम सदस्य संख्या: 250
    • 238 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि होते हैं (अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित)।
    • 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं (कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र से)।
  • वर्तमान सदस्य संख्या: 245 (233 निर्वाचित + 12 मनोनीत)।
  • निर्वाचन प्रक्रिया:
    • राज्यों के प्रतिनिधियों का चुनाव राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों (MLAs) द्वारा किया जाता है।
    • पद्धति: एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व।
  • प्रतिनिधित्व: सीटें राज्यों को उनकी जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाती हैं। (अमेरिकी सीनेट के विपरीत, जहाँ प्रत्येक राज्य को बराबर प्रतिनिधित्व मिलता है)।

लोकसभा ‘लोकप्रिय सदन’ है, जो समग्र रूप से भारत की जनता का प्रतिनिधित्व करती है।

  • अधिकतम सदस्य संख्या: 550 (पहले यह 552 थी, लेकिन 104वें संविधान संशोधन द्वारा एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षित 2 सीटों को समाप्त कर दिया गया है)।
    • 530 सदस्य राज्यों के प्रतिनिधि।
    • 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि।
  • वर्तमान सदस्य संख्या: 543 (सभी निर्वाचित)।
  • निर्वाचन प्रक्रिया:
    • सदस्यों का चुनाव ‘सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार’ के आधार पर सीधे जनता द्वारा किया जाता है।
    • प्रत्येक नागरिक जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है (61वां संशोधन अधिनियम, 1988), उसे वोट देने का अधिकार है।
  • प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र: प्रत्येक राज्य को प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों में इस प्रकार विभाजित किया जाता है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या और उसे आवंटित सीटों की संख्या का अनुपात पूरे राज्य में समान रहे।
विशेषताराज्यसभा (राज्यों की परिषद)लोकसभा (लोगों का सदन)
सामान्य नामउच्च सदन / बुजुर्गों का सदननिम्न सदन / लोकप्रिय सदन
कार्यकालस्थायी निकाय (1/3 सदस्य हर दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं)5 वर्ष (समय से पहले भंग की जा सकती है)
पीठासीन अधिकारीउपराष्ट्रपति (पदेन सभापति)अध्यक्ष (स्पीकर)
न्यूनतम आयु30 वर्ष25 वर्ष
अधिकतम संख्या250550
चुनाव का प्रकारअप्रत्यक्ष (विधायकों द्वारा)प्रत्यक्ष (जनता द्वारा)
  • राज्यसभा: यह एक स्थायी सदन है। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य प्रत्येक दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
  • लोकसभा: इसका सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है। हालाँकि, राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में, संसद कानून बनाकर इसके कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ा सकती है (इसकी कोई अधिकतम सीमा नहीं है, लेकिन आपातकाल खत्म होने के बाद यह 6 महीने से अधिक नहीं बढ़ सकता)।

राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व जनसंख्या पर आधारित है, इसीलिए उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सीटें अधिक हैं और छोटे राज्यों की कम। इसके विपरीत, अमेरिका में प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या की परवाह किए बिना सीनेट में 2 सीटें दी जाती हैं।

संघीय विधायिका • भाग V • अनु. 79-83
भारत का संविधान

संसद का गठन

अनुच्छेद 79
संसद राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा से मिलकर बनती है। राष्ट्रपति की सहमति के बिना कोई भी विधेयक कानून नहीं बनता।
अवधि (अनु. 83)
RS: स्थायी सदन।
LS: 5 साल का कार्यकाल (राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान बढ़ाया जा सकता है)।
राज्यसभा (अनु. 80)
संख्या: अधिकतम 250 (वर्तमान 245)। इसमें कला, विज्ञान, साहित्य और समाज सेवा में उत्कृष्टता के लिए राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्य मनोनीत किए जाते हैं।
निर्वाचन: राज्यों के विधायकों (MLAs) द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से अप्रत्यक्ष चुनाव। सीटें जनसंख्या के आधार पर आवंटित की जाती हैं।
लोकसभा (अनु. 81)
संख्या: अधिकतम 550। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (आयु 18+) के आधार पर जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव।
संरचना: राज्यों से 530 प्रतिनिधि + केंद्र शासित प्रदेशों से 20। निर्वाचन क्षेत्रों को समान जनसंख्या-सीट अनुपात बनाए रखने के लिए विभाजित किया गया है।

न्यूनतम आयु

सदस्य बनने के लिए, राज्यसभा के लिए 30 वर्ष और लोकसभा के लिए 25 वर्ष की आयु आवश्यक है।

सदनों के नाम

RS: उच्च सदन / राज्यों की परिषद।
LS: निम्न सदन / जनता का सदन।

पीठासीन अधिकारी

RS: उपराष्ट्रपति (पदेन सभापति)।
LS: अध्यक्ष/स्पीकर (सदस्यों द्वारा निर्वाचित)।

प्रमुख
संशोधन
61वें संशोधन (1988) ने मतदान की आयु 21 से घटाकर 18 कर दी। हाल ही में, 104वें संशोधन अधिनियम ने लोकसभा में आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया, जिससे अधिकतम संख्या 552 से घटकर 550 हो गई।

यहाँ द हिंदू‘ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (2 फ़रवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; सरकारी बजट; संसाधनों का संग्रहण)।

  • संदर्भ: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 21वीं सदी की दूसरी तिमाही का पहला केंद्रीय बजट 2026 प्रस्तुत किया है, जिसमें मुख्य रूप से उत्पादकता में वृद्धि और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • राजकोषीय विवेक: इस बजट में किसी भी “बड़े बदलाव” (Big Bang) वाले सुधारों या प्रत्यक्ष करों में किसी बड़ी छूट से परहेज किया गया है। इसके बजाय, मध्यम अवधि के विकास को गति देने के लिए एक संतुलित और निरंतर दृष्टिकोण अपनाया गया है।
    • पूंजीगत व्यय का विस्तार: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 12.2 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया है, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 4.4 प्रतिशत है। यह पिछले कम से कम 10 वर्षों में पूंजीगत निवेश का उच्चतम स्तर है।
    • राजकोषीय घाटा: वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 4.4 प्रतिशत के अनुमान से कम है।
    • अप्रत्यक्ष करों में राहत: समुद्री उत्पादों, चमड़ा उद्योग और कपड़ा क्षेत्रों के निर्यात को बढ़ावा देने और ऊर्जा संक्रमण का समर्थन करने के लिए सीमा शुल्क (Customs Duty) में महत्वपूर्ण कटौती की गई है।
    • नया आयकर अधिनियम: ‘आयकर अधिनियम 2025’ आधिकारिक रूप से 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। इसका मुख्य उद्देश्य प्रत्यक्ष कर कानूनों को संक्षिप्त, स्पष्ट और समझने में आसान बनाना है।
  • UPSC प्रासंगिकता: यह “समष्टि आर्थिक स्थिरता”, “पूंजीगत व्यय के आर्थिक प्रभाव” और “राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग” से संबंधित प्रश्नों के लिए अनिवार्य है।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • तीन ‘कर्तव्य’: संपूर्ण बजट को तीन मुख्य कर्तव्यों के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है: निरंतर विकास सुनिश्चित करना, जन-आकांक्षाओं को पूरा करना और देश के सभी क्षेत्रों व आर्थिक वर्गों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना।
    • कर राजस्व का अनुमान: सरकार ने कर संग्रह के मामले में बहुत ही यथार्थवादी और सतर्क अनुमान लगाए हैं। कॉर्पोरेट कर में 14 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जबकि पिछले वर्ष दी गई रियायतों के कारण व्यक्तिगत आयकर की वृद्धि दर को 1.9 प्रतिशत पर ही सीमित रखा गया है।
    • मुआवजा उपकर की समाप्ति: वस्तु एवं सेवा कर (GST) से होने वाले राजस्व में 13.5 प्रतिशत की कमी का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण ‘GST मुआवजा उपकर’ (Compensation Cess) की समाप्ति और वर्ष 2025 में की गई कर दरों की युक्तिकरण प्रक्रिया है।

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (औद्योगिक नीति; विनिर्माण क्षेत्र; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)।

  • संदर्भ: यह बजट भारत की क्षमताओं को उच्च-मूल्य वाले और प्रौद्योगिकी-प्रधान क्षेत्रों में और अधिक गहरा करने की सरकार की मंशा को स्पष्ट करता है।
  • मुख्य बिंदु:
    • रणनीतिक क्षेत्र: बजट में सात अत्यंत महत्वपूर्ण उद्योगों को प्राथमिकता दी गई है: जैव-भेषज (Biopharma), सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earths), रसायन, पूंजीगत वस्तुएं और कपड़ा उद्योग।
    • बायोफार्मा शक्ति (SHAKTI) योजना: ‘बायोलॉजिक्स’ और ‘बायोसिमिलर्स’ के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इसके साथ ही तीन नए ‘राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (NIPER) स्थापित किए जाएंगे।
    • भारत सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: इस मिशन के दूसरे चरण का उद्देश्य केवल चिप निर्माण (Fabrication) तक सीमित न रहकर उपकरणों और कच्ची सामग्रियों के घरेलू उत्पादन को भी विकसित करना है।
    • दुर्लभ मृदा तत्व गलियारे: इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में विशेष आर्थिक गलियारे प्रस्तावित किए गए हैं।
    • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सहायता: इन उद्योगों के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एक नया ‘SME ग्रोथ फंड’ बनाया गया है जो इक्विटी सहायता प्रदान करेगा। साथ ही 200 पारंपरिक औद्योगिक समूहों का पुनरुद्धार किया जाएगा।
  • UPSC प्रासंगिकता: “आत्मनिर्भर भारत अभियान”, “महत्वपूर्ण खनिज सुरक्षा” और “भारत का औद्योगिक रूपांतरण” जैसे विषयों के लिए महत्वपूर्ण।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • मूल्य श्रृंखला में उन्नति: यह कदम भारत के निर्यात ढांचे को कम मूल्य वाले सामान्य माल से बदलकर उच्च-तकनीकी और जटिल उत्पादों (जैसे प्रिसिजन इंजीनियरिंग) की ओर ले जाने का एक संगठित प्रयास है।
    • नियामक स्पष्टता: वैश्विक क्षमता केंद्रों (Global Capability Centres) के लिए ‘सेफ हार्बर’ की सीमा को बढ़ाकर 2,000 करोड़ रुपये करना अंतरराष्ट्रीय तकनीकी फर्मों को एक स्थिर कर वातावरण प्रदान करेगा।

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 3 (बुनियादी ढांचा: रेलवे; लॉजिस्टिक्स/रसद व्यवस्था)।

  • संदर्भ: आर्थिक पुनरुद्धार के प्राथमिक लीवर के रूप में उच्च गति वाली कनेक्टिविटी और रसद (Logistics) दक्षता पर बड़ा निवेश किया जा रहा है।
  • मुख्य बिंदु:
    • उच्च गति रेल (High-Speed Rail): 16 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सात नए रेल गलियारे (4,000 किलोमीटर का नेटवर्क) घोषित किए गए हैं। ये दक्षिण भारत के पांच राज्यों और उत्तर भारत के प्रमुख शहरों (जैसे दिल्ली-वाराणसी) को जोड़ेंगे।
    • समर्पित माल ढुलाई गलियारा (DFC): पश्चिम बंगाल के दानकुनी को गुजरात के सूरत से जोड़ने वाले एक नए समर्पित माल ढुलाई गलियारे की घोषणा की गई है।
    • अंतर्देशीय जलमार्ग: देश में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को क्रियाशील बनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग-5 (NW-5) से होगी। इसका लक्ष्य जल परिवहन की हिस्सेदारी को दोगुना करना है।
    • समुद्री पुनरुद्धार: विदेशी जहाजों और कंटेनरों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में ही कंटेनर निर्माण हेतु पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • UPSC प्रासंगिकता: “लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना”, “क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना” और “रेलवे का आधुनिकीकरण” जैसे विषयों के लिए अत्यंत उपयोगी।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • यात्रा समय में कमी: इस उच्च गति नेटवर्क का उद्देश्य यात्रा के समय को नाटकीय रूप से कम करना है (जैसे चेन्नई से बेंगलुरु केवल 1.5 घंटे और दिल्ली से वाराणसी केवल 3 घंटे 50 मिनट)।
    • रसद दक्षता: भारी कार्गो को सड़क और पारंपरिक रेल से हटाकर जलमार्गों पर स्थानांतरित करने का लक्ष्य 2047 तक माल ढुलाई की कुल लागत को सकल घरेलू उत्पाद के 12 प्रतिशत तक लाना है।

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (सामाजिक न्याय; शिक्षा; स्वास्थ्य; कल्याणकारी योजनाएं)।

  • संदर्भ: यह बजट उस प्रवृत्ति को और मजबूत करता है जहाँ जन-कल्याण पर खर्च की जिम्मेदारी केंद्र से धीरे-धीरे राज्य सरकारों की ओर स्थानांतरित की जा रही है।
  • मुख्य बिंदु:
    • शिक्षा बजट में वृद्धि: शिक्षा मंत्रालय का आवंटन 14.21 प्रतिशत बढ़कर 1.39 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसमें प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) हॉस्टल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
    • मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान: रांची और तेज़पुर में दो नए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना की जाएगी और उत्तर भारत में एक विशेष ‘निमहंस’ (NIMHANS) जैसा संस्थान बनाया जाएगा।
    • ग्रामीण रोजगार: ग्रामीण रोजगार के बजट में 43 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि की गई है। इसके साथ ही ‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण’ (VB-G RAM G) अधिनियम लागू होगा जो ‘मनरेगा’ का स्थान लेगा।
    • वृद्धों की देखभाल (Geriatric Care): बुजुर्गों के लिए एक मजबूत देखभाल पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जाएगा, जिसमें 1.5 लाख देखभाल करने वालों को राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • UPSC प्रासंगिकता: “राजकोषीय संघवाद”, “मानव पूंजी का विकास” और “समाज के कमजोर वर्गों का सशक्तिकरण”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • लागत साझाकरण का बदलाव: नई ग्रामीण रोजगार योजना में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात रखा गया है, जो राज्य सरकारों पर एक बड़ा वित्तीय बोझ डालेगा।
    • स्वास्थ्य खर्च में ठहराव: कुछ विशेष घोषणाओं के बावजूद, स्वास्थ्य क्षेत्र पर कुल व्यय अभी भी कुल बजट का मात्र 1.96 प्रतिशत है, जो पिछले वर्षों की तुलना में केवल मामूली वृद्धि है।

पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 (संघवाद; केंद्र-राज्य संबंध; संवैधानिक निकाय)।

  • संदर्भ: 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट ने सिफारिश की है कि करों के विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को 41 प्रतिशत पर ही बनाए रखा जाए, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
  • मुख्य बिंदु:
    • फॉर्मूला में परिवर्तन: नए फॉर्मूले में ‘जनसंख्या’ के भार को बढ़ाकर 17.5 प्रतिशत (15% से) कर दिया गया है, जबकि ‘जनसांख्यिकीय प्रदर्शन’ के भार को घटाकर 10 प्रतिशत (12.5% से) कर दिया गया है।
    • दक्षिणी राज्यों का लाभ: इन बदलावों के बावजूद, अन्य भारित कारकों के कारण तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे पांच दक्षिणी राज्यों की कुल हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है।
    • विभाज्य पूल का छोटा होना: रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि उपकर (Cess) और अधिभार (Surcharge) के कारण साझा किया जाने वाला पूल कुल कर राजस्व के 89.1 प्रतिशत (2014-15) से घटकर अब केवल 74-80 प्रतिशत के बीच रह गया है।
    • स्थानीय निकायों के लिए अनुदान: वित्त वर्ष 2026-2027 के लिए ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों तथा आपदा प्रबंधन के लिए 21.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है।
  • UPSC प्रासंगिकता: “राजस्व साझाकरण तंत्र”, “सहकारी संघवाद की चुनौतियां” और “हस्तांतरण के मानदंड”।
  • विस्तृत विश्लेषण:
    • प्रति व्यक्ति आय का महत्व: राज्यों के बीच ‘प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद’ (GSDP) का अंतर अभी भी 42.5 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक भार वाला कारक बना हुआ है, जो राज्यों के बीच समानता लाने पर केंद्रित है।
    • राज्यों का असंतोष: कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grants) को बंद करने और पिछले आयोगों की तुलना में कम हिस्सेदारी मिलने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

संपादकीय विश्लेषण

02 फरवरी, 2026
GS-3 उद्योग PLI से परे: रणनीतिक हब

बायोफार्मा शक्ति (SHAKTI) के लिए ₹10,000 करोड़। ‘महत्वपूर्ण खनिजों’ की मूल्य श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए दुर्लभ मृदा कॉरिडोर और ISM 2.0 का शुभारंभ।

GS-3 बुनियादी ढांचा विकास के सूत्रधार

5 दक्षिणी राज्यों को जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल। 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से 2047 तक ‘रसद लागत’ को 12% तक लाने का लक्ष्य।

GS-2 सामाजिक न्याय कल्याणकारी योजनाओं का सुदृढ़ीकरण

मनरेगा (MGNREGA) की जगह नया VB-G RAM G अधिनियम। हर जिले में लड़कियों के लिए STEM हॉस्टल और वृद्धों की देखभाल करने वालों के लिए विशेष प्रशिक्षण।

संघवाद: ग्रामीण रोजगार में 60:40 की लागत-साझाकरण व्यवस्था कल्याणकारी बोझ को राज्यों पर महत्वपूर्ण रूप से स्थानांतरित करती है।
कनेक्टिविटी: हाई-स्पीड कॉरिडोर के माध्यम से चेन्नई-बेंगलुरु की यात्रा 1.5 घंटे और दिल्ली-वाराणसी की 4 घंटे से कम हुई।
विनिर्माण: SME ग्रोथ फंड का लक्ष्य इक्विटी सहायता के माध्यम से 200 पुराने औद्योगिक समूहों का कायाकल्प करना है।
स्वास्थ्य: NIMHANS जैसे संस्थानों की स्थापना मानव पूंजी और मानसिक स्वास्थ्य पर बजटीय फोकस को दर्शाती है।
GS-4
राजकोषीय कर्तव्य
विवेक बनाम आकांक्षा: 2026 का बजट विकास और भागीदारी के “तीन कर्तव्यों” को संतुलित करता है। हालाँकि, स्वास्थ्य व्यय का 1.96% पर स्थिर रहना बढ़ती पूंजीगत महत्वाकांक्षाओं के बीच सार्वभौमिक कल्याण की नैतिक अनिवार्यता को चुनौती देता है।

यहाँ केंद्रीय बजट 2026-27 और ‘विश्व आर्द्रभूमि दिवस’ की घोषणाओं से संबंधित रणनीतिक बुनियादी ढांचे और पारिस्थितिक अद्यतनों (Updates) का विस्तृत मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:

31 जनवरी, 2026 तक भारत ने आधिकारिक तौर पर अपने रामसर नेटवर्क का विस्तार 98 स्थलों तक कर लिया है। 2026 के पर्यावरण पाठ्यक्रम के लिए इन “नाजुक पारिस्थितिकी तंत्रों” का मानचित्रण करना अत्यंत आवश्यक है।

नया रामसर स्थलस्थानमुख्य जैव विविधता और विशेषताएं
पटना पक्षी अभयारण्यएटा, उत्तर प्रदेशप्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल; लुप्तप्राय पक्षी प्रजातियों और मरुस्थलीय लोमड़ियों का घर।
छारी-ढंढ (Chhari-Dhand)कच्छ, गुजरातकच्छ के रण में स्थित एक मौसमी आर्द्रभूमि; यह ‘कैराकल’ (Caracal), मरुस्थलीय बिल्लियों और भेड़ियों का प्राकृतिक आवास है।

मैपिंग तथ्य: भारत के रामसर नेटवर्क में 2014 के बाद से 276 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसकी वर्तमान कुल संख्या 98 है।

केंद्रीय बजट 2026 में विकास के विकेंद्रीकरण के लिए 7 नए उच्च गति रेल गलियारों की घोषणा की गई है। “परिवहन और शहरीकरण” अनुभाग के लिए इनका मानचित्रण महत्वपूर्ण है।

मानचित्र पर चिह्नित किए जाने वाले प्राथमिक गलियारे:

  • मुंबई-पुणे-हैदराबाद: पश्चिमी भारत को दक्षिण-मध्य भारत से जोड़ता है।
  • हैदराबाद-बेंगलुरु-चेन्नई: दक्षिण भारत के प्रमुख तकनीकी और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ता है।
  • चेन्नई-बेंगलुरु: एक अत्यंत व्यस्त औद्योगिक गलियारा।
  • दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी: उत्तर भारत को उत्तर-पूर्व भारत के प्रवेश द्वार (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) से जोड़ता है।

सरकार रणनीतिक रूप से उच्च-ऊंचाई वाले स्थानों पर “विशाल विज्ञान” (Mega Science) सुविधाओं का मानचित्रण कर रही है।

  • नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): इसे लद्दाख की पैंगोंग झील के पास स्थापित किया जा रहा है।
  • 30-मीटर नेशनल लार्ज ऑप्टिकल टेलीस्कोप (NLOT): हिमालयी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और वैज्ञानिक मानचित्रण बिंदु।

बौद्ध सर्किट और प्राचीन पुरातात्विक स्थलों को आगंतुक बुनियादी ढांचे (Visitor Infrastructure) के लिए विशेष वित्त पोषण प्राप्त हो रहा है।

पुरातात्विक मानचित्रण बिंदु:

  • लोथल और धौलावीरा (गुजरात): प्रमुख हड़प्पाकालीन स्थल।
  • राखीगढ़ी (हरियाणा): सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा भारतीय स्थल।
  • लेह पैलेस (लद्दाख): हिमालयी वास्तुकला का प्रतीक।
  • उत्तर-पूर्व बौद्ध सर्किट: इसका उद्देश्य ‘सेवन सिस्टर्स’ राज्यों के विरासत स्थलों को जोड़ना है ताकि तीर्थाटन पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।
श्रेणीमानचित्रण मुख्य बिंदुवर्तमान 2026 का संदर्भ
नई आर्द्रभूमि केंद्रछारी-ढंढकच्छ, गुजरात।
रेल कनेक्टिविटीवाराणसी-सिलीगुड़ीउत्तर-पूर्व भारत के लिए नया उच्च गति मार्ग।
सौर विज्ञानपैंगोंग झील केंद्रनया विशाल सौर दूरबीन (Telescope)।
प्राचीन स्थल विकासराखीगढ़ीप्रमुख हड़प्पा स्थल का व्यापक विकास।

उच्च गति रेल गलियारों को मैप करते समय “चिकन नेक” (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की स्थिति पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी मार्ग भारत की मुख्य भूमि और उत्तर-पूर्व के बीच सामरिक संपर्क के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

मानचित्रण विवरण

बजट 2026 एवं पारिस्थितिक अपडेट
रामसर विस्तार 98 आर्द्रभूमि मील के पत्थर

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर वैश्विक नेटवर्क में पटना पक्षी अभयारण्य (UP) और छारी-ढांढ (GJ) को जोड़ा गया।

मेगा विज्ञान केंद्र उच्च-ऊंचाई अनुसंधान

पेंगोंग झील के पास नेशनल लार्ज सोलर टेलिस्कोप और हिमालय में 30-मीटर ऑप्टिकल टेलिस्कोप के लिए रणनीतिक वित्त पोषण।

बजट 2026 बुनियादी ढांचा
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर

सात नए कॉरिडोर विकसित किए जाने की योजना है, जिसमें रणनीतिक दिल्ली–वाराणसी–सिलीगुड़ी लिंक शामिल है, जो उत्तर-पूर्वी भारत के लिए एक तीव्र प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करेगा।

सांस्कृतिक एवं विरासत सर्किट
पुरातात्विक मानचित्रण

लोथल और धोलावीरा जैसे हड़प्पा केंद्रों के साथ-साथ राखीगढ़ी (HR) और लेह पैलेस (लद्दाख) के बड़े उन्नयन पर ध्यान।

उत्तर-पूर्व बौद्ध सर्किट

सेवन सिस्टर्स (पूर्वोत्तर राज्यों) में ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों को जोड़ने के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा, जिससे आध्यात्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। बौद्ध सर्किट

आर्द्रभूमि केंद्र छारी-ढांढ (कच्छ, गुजरात)।
NE संपर्क वाराणसी–सिलीगुड़ी रेल लिंक।
सौर विज्ञान पेंगोंग झील हब (लद्दाख)।
एटलस रणनीति
स्थानिक आधार: बजट 2026 स्थानिक विकेंद्रीकरण पर जोर देता है। GS-I और GS-III में भविष्य के शहरी विकास ध्रुवों के विश्लेषण के लिए हाई-स्पीड रेल नोड्स और पुरातात्विक विरासत स्थलों के बीच ओवरलैप का मानचित्रण करना महत्वपूर्ण है।