IAS PCS मिशन 2026: Dainik Study Material – 9 जनवरी 2026 (Hindi)
NCERT इतिहास: कक्षा 6 Chapter-8 (अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया)
यह अध्याय “अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया” मौर्य साम्राज्य के इतिहास और इसके सबसे प्रसिद्ध शासक, अशोक के जीवन में आए क्रांतिकारी बदलावों का वर्णन करता है।
1. मौर्य साम्राज्य
मौर्य साम्राज्य एक विशाल साम्राज्य था जिसकी स्थापना 2,300 वर्ष से भी पहले हुई थी।
- संस्थापक: चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने बुद्धिमान सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से इस साम्राज्य की स्थापना की। चाणक्य के विचार ‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक में मिलते हैं।
- वंश (Dynasty): मौर्य वंश में तीन महत्वपूर्ण राजा हुए: चंद्रगुप्त, उनका पुत्र बिंदुसार और बिंदुसार का पुत्र अशोक।
- प्रमुख नगर: साम्राज्य में कई महत्वपूर्ण नगर थे, जैसे पाटलिपुत्र (राजधानी और सत्ता का केंद्र), तक्षशिला (उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया का प्रवेश द्वार), और उज्जैन (उत्तर भारत से दक्षिण भारत जाने वाले मार्ग पर स्थित)।
- साम्राज्य बनाम राज्य: साम्राज्य राज्यों से बड़े होते थे, उन्हें सुरक्षा के लिए बड़ी सेनाओं, अधिक संसाधनों और कर वसूलने वाले अधिक अधिकारियों की आवश्यकता होती थी।
2. साम्राज्य का प्रशासन
साम्राज्य के विशाल आकार के कारण, अलग-अलग क्षेत्रों का प्रबंधन अलग-अलग तरीकों से किया जाता था।
- केंद्रीय नियंत्रण: पाटलिपुत्र और उसके आस-पास के क्षेत्र पर सम्राट का सीधा नियंत्रण था। अधिकारी कर वसूलते थे, संदेशवाहक सूचनाएँ पहुँचाते थे और जासूस अधिकारियों के कामकाज पर नज़र रखते थे।
- प्रांतीय शासन: अन्य प्रांतों का शासन तक्षशिला या उज्जैन जैसी प्रांतीय राजधानियों से किया जाता था। यहाँ अक्सर राजकुमारों को ‘राज्यपाल’ (गवर्नर) के रूप में भेजा जाता था।
- कर और भेंट (Tribute): जहाँ कर नियमित रूप से वसूले जाते थे, वहीं ‘भेंट’ (नजराना) उन लोगों से इकट्ठा किया जाता था जो स्वेच्छा से सोना, कंबल या जंगल के उत्पाद (हाथी, लकड़ी, शहद) देते थे।
3. अशोक और कलिंग युद्ध
अशोक इतिहास के एक अनोखे शासक थे जिन्होंने अपने संदेशों को प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में अभिलेखों के माध्यम से जनता तक पहुँचाने की कोशिश की।
- निर्णायक मोड़: राजा बनने के आठ साल बाद अशोक ने कलिंग (आधुनिक तटीय ओडिशा) पर विजय प्राप्त की।
- हृदय परिवर्तन: युद्ध की भीषण हिंसा को देखकर—जिसमें एक लाख से अधिक लोग मारे गए और कई बंदी बनाए गए—अशोक का मन दु:ख से भर गया। उन्होंने भविष्य में कभी युद्ध न करने का निर्णय लिया। वे इतिहास के अकेले ऐसे राजा हैं जिन्होंने युद्ध जीतने के बाद विजय का त्याग कर दिया।
4. अशोक का ‘धम्म’
कलिंग युद्ध के बाद अशोक ने ‘धम्म’ (संस्कृत शब्द ‘धर्म’ का प्राकृत रूप) पर ध्यान केंद्रित किया।
- मुख्य सिद्धांत: उनके धम्म में किसी देवता की पूजा या कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी। इसका केंद्र था:
- दासों और नौकरों के प्रति दयावान होना।
- बड़ों का सम्मान करना और सभी जीवों के प्रति करुणा रखना।
- सभी धर्मों का सम्मान करना; उनका मानना था कि अपने धर्म की प्रशंसा और दूसरे के धर्म की निंदा करने से अपने ही धर्म को नुकसान पहुँचता है।
- संदेश का प्रसार: अशोक ने ‘धम्म महामत्त’ नामक अधिकारियों की नियुक्ति की जो जगह-जगह जाकर लोगों को धम्म की शिक्षा देते थे। उन्होंने अपने संदेश सीरिया, मिस्र, यूनान और श्रीलंका भी भेजे।
- जन कल्याण: उन्होंने सड़कें बनवाईं, कुएँ खुदवाए, विश्राम गृह बनवाए और मनुष्यों तथा जानवरों के लिए चिकित्सा की व्यवस्था की।
5. कला और वास्तुकला
मौर्य काल अपनी उत्कृष्ट मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।
- सिंह शीर्ष (Lion Capital): यह मूल रूप से सारनाथ के एक पत्थर के स्तंभ पर स्थित था। आज यह हमारे भारतीय नोटों और सिक्कों पर दिखाई देता है (राष्ट्रीय प्रतीक)।
- रामपुरवा का सांड: बिहार में मिला पत्थर का एक उत्कृष्ट पॉलिश किया हुआ सांड, जो अब राष्ट्रपति भवन में रखा गया है।
6. मौर्यों के बाद क्या हुआ?
लगभग 2,200 वर्ष पहले मौर्य साम्राज्य का पतन हो गया, जिससे नए राज्यों का उदय हुआ:
- उत्तर और पश्चिम: हिंद-यवन (Indo-Greeks), शक, कुषाण और अंततः गुप्त वंश।
- मध्य और दक्षिण: शुंग, कण्व, सातवाहन, वाकाटक और दक्षिण के तीन प्रसिद्ध राज्य—चोल, चेर तथा पांड्य।
📅 महत्वपूर्ण तथ्य
- साम्राज्य की स्थापना: लगभग 2300 साल पहले।
- कलिंग युद्ध: अशोक के शासन के 8वें वर्ष में।
- मौर्य साम्राज्य का अंत: लगभग 2200 साल पहले।
🦁 अशोक: महान सम्राट
कक्षा-6 इतिहास अध्याय-8 PDF
सम्पूर्ण अध्ययन नोट्स: अशोक: एक अनोखा सम्राट जिसने युद्ध का त्याग किया
⚖️ भारतीय राजव्यवस्था: अनुच्छेद 15 और 16 को समझना
भारत जैसे विविधतापूर्ण समाज में, ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के लिए केवल “समान व्यवहार” पर्याप्त नहीं था; इसके लिए भेदभाव के विरुद्ध सक्रिय संरक्षण की आवश्यकता थी। अनुच्छेद 15 और 16 यही सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि किसी व्यक्ति की पहचान उसकी प्रगति में बाधा न बने।
1. अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध
अनुच्छेद 15 यह सुनिश्चित करता है कि “राज्य” सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में नागरिकों के साथ भेदभाव न करे। यह अनुच्छेद 14 से अधिक विशिष्ट है क्योंकि यह भेदभाव के पाँच निषिद्ध आधारों को सूचीबद्ध करता है।
भेदभाव के पाँच आधार:
राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल इन आधारों पर भेदभाव नहीं कर सकता:
- धर्म (Religion)
- मूलवंश (Race)
- जाति (Caste)
- लिंग (Sex)
- जन्मस्थान (Place of Birth)
महत्वपूर्ण शब्द: “केवल” (Only)
यदि भेदभाव इन पाँच आधारों के अलावा किसी अन्य कारक (जैसे शैक्षणिक योग्यता या शारीरिक दक्षता) पर आधारित है, तो उसे अनुच्छेद 15 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
अनुच्छेद 15 के विभिन्न खंड:
- 15(1): राज्य को नागरिकों के विरुद्ध भेदभाव करने से रोकता है।
- 15(2): यह “क्षैतिज अधिकार” (Horizontal Rights) है। किसी भी नागरिक को दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों या राज्य निधि से बनी सड़कों, कुओं और तालाबों के उपयोग से नहीं रोका जा सकता। यह अधिकार निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होता है।
- 15(3) [अपवाद]: राज्य महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान कर सकता है (जैसे स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण या बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा)।
- 15(4) [अपवाद]: प्रथम संशोधन (1951) द्वारा जोड़ा गया। यह राज्य को सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs), SC और ST की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है।
- 15(5): निजी शिक्षण संस्थानों सहित सभी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की अनुमति देता है (93वां संशोधन, 2005)।
- 15(6): शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए 10% तक आरक्षण की अनुमति देता है (103वां संशोधन, 2019)।
2. अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता
जहाँ अनुच्छेद 15 सामाजिक पहुंच को कवर करता है, वहीं अनुच्छेद 16 विशेष रूप से राज्य के अधीन रोजगार या नियुक्तियों तक सीमित है।
भेदभाव के सात आधार:
अनुच्छेद 16(2) निषिद्ध आधारों की सूची को सात तक बढ़ाता है। किसी भी नागरिक के साथ सरकारी नौकरियों में इन आधारों पर भेदभाव नहीं किया जा सकता:
- धर्म | 2. मूलवंश | 3. जाति | 4. लिंग | 5. जन्मस्थान | 6. उद्भव (Descent) | 7. निवास (Residence)
अपवादों का ढांचा (आरक्षण नीति):
अनुच्छेद 16 केवल “भेदभाव न करने” के बारे में नहीं है; यह “वास्तविक समानता” (Substantive Equality) के बारे में है।
- 16(3): संसद किसी विशेष राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में कुछ नौकरियों के लिए निवास की शर्त निर्धारित कर सकती है।
- 16(4): राज्य किसी भी “पिछड़े वर्ग” के पक्ष में नियुक्तियों में आरक्षण का प्रावधान कर सकता है, जिसका राज्य की सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है।
- 16(4A): SC और ST के लिए पदोन्नति (Promotion) में आरक्षण का प्रावधान करता है।
- 16(4B): “कैरी फॉरवर्ड रूल” (अग्रनयन नियम)। यदि किसी वर्ष आरक्षित सीटें नहीं भरी जाती हैं, तो उन्हें अगले वर्ष भरा जा सकता है और उन्हें उस वर्ष की 50% की सीमा में नहीं गिना जाएगा।
- 16(5): किसी धार्मिक संस्था (जैसे वक्फ बोर्ड या मंदिर ट्रस्ट) के पदाधिकारी के लिए उस विशिष्ट धर्म का होना अनिवार्य करने वाले कानून को अनुमति देता है।
- 16(6): सार्वजनिक नियुक्तियों में EWS के लिए 10% तक आरक्षण का प्रावधान करता है।
अनुच्छेद 15 और 16 में मुख्य अंतर
| विशेषता | अनुच्छेद 15 | अनुच्छेद 16 |
| दायरा (Scope) | व्यापक (सामाजिक, शैक्षिक, सार्वजनिक स्थान)। | संकीर्ण (केवल सरकारी रोजगार/पद)। |
| आधार (Grounds) | 5 आधार (धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान)। | 7 आधार (उद्भव और निवास भी शामिल)। |
| लाभार्थी | कुछ पहलुओं में गैर-नागरिक भी शामिल (15(2))। | केवल नागरिकों के लिए उपलब्ध। |
महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मामले (Landmark Cases)
- मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन (1951): इस मामले के कारण प्रथम संविधान संशोधन हुआ और अनुच्छेद 15(4) का जन्म हुआ।
- इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992): इसे “मंडल आयोग मामला” भी कहा जाता है। इसमें 27% OBC आरक्षण को बरकरार रखा गया, लेकिन कुल आरक्षण की सीमा 50% तय की गई और ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा पेश की गई।
- जनहित अभियान बनाम भारत संघ (2022): उच्चतम न्यायालय ने 103वें संशोधन (10% EWS आरक्षण) को बरकरार रखा और फैसला सुनाया कि यह संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं करता है।
🛡️ अनुच्छेद 15 और 16: सामाजिक समता
“The Hindu” संपादकीय का विश्लेषण (09 जनवरी, 2026)
यहाँ ‘द हिंदू’ (The Hindu) संपादकीय का विस्तृत विश्लेषण (9 जनवरी, 2026) हिंदी में दिया गया है, जिसे UPSC पाठ्यक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है:
1. टैरिफ का प्रहार: रूसी तेल आयात पर अमेरिकी दबाव
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध; विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का भारत के हितों पर प्रभाव)
- संदर्भ: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ‘रूस प्रतिबंध विधेयक’ (Russia Sanctions Bill) को हरी झंडी दे दी है, जो उन्हें रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
- मुख्य बिंदु:
- रणनीति: इस विधेयक का उद्देश्य भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाना है ताकि वे तेल खरीद के माध्यम से यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाइयों के वित्तपोषण को रोकें।
- द्विदलीय समर्थन: विधेयक को अमेरिकी सीनेट और हाउस दोनों में भारी समर्थन प्राप्त है, जो इसके सुचारू क्रियान्वयन का संकेत देता है।
- भारत की प्रतिक्रिया: रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दिसंबर 2025 से अपने जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल प्राप्त करना बंद कर दिया है। भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने वर्तमान 25% दंड टैरिफ से राहत मांगी है।
- UPSC प्रासंगिकता: “ऊर्जा सुरक्षा”, “रणनीतिक स्वायत्तता” और “भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंध” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- आर्थिक प्रभाव: भारत के लिए, जिसके कुल तेल आयात का 35% हिस्सा रूसी तेल रहा है, 500% टैरिफ इन खरीदों की आर्थिक व्यवहार्यता को पूरी तरह समाप्त कर देगा।
- राजनयिक संतुलन: यह कदम 2018 के पैटर्न को दोहराता है जब भारत ने इसी तरह के अमेरिकी दबाव के तहत ईरान और वेनेजुएला से तेल आयात ‘शून्य’ कर दिया था।
- आपूर्ति में बदलाव: जबकि सरकारी तेल कंपनियाँ अभी भी आयात कर रही हैं, रिलायंस और नायरा एनर्जी जैसे निजी खिलाड़ियों द्वारा आयात बंद करने से भविष्य में रूसी तेल पर निर्भरता कम होना तय है।
2. GSDP: कर हस्तांतरण के लिए एक बेहतर पैमाना?
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; संसाधनों का संग्रहण; संघीय ढांचा)
- संदर्भ: एक संपादकीय प्रस्ताव जिसमें सुझाव दिया गया है कि दक्षता और समानता को संतुलित करने के लिए ‘सकल राज्य घरेलू उत्पाद’ (GSDP) को केंद्र-राज्य कर हस्तांतरण का प्राथमिक मानदंड बनाया जाना चाहिए।
- मुख्य बिंदु:
- संग्रहण बनाम उपार्जन: महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य तर्क देते हैं कि वे केंद्रीय करों में भारी योगदान देते हैं लेकिन उन्हें हस्तांतरण में बहुत कम हिस्सा मिलता है।
- GSDP एक विकल्प के रूप में: प्रत्यक्ष कर के आंकड़े अक्सर केवल पंजीकृत कार्यालयों (जैसे मुंबई या दिल्ली) के स्थान को दर्शाते हैं, जबकि GSDP उस वास्तविक आधार को दर्शाता है जहाँ आर्थिक गतिविधि होती है।
- हस्तांतरण परिणाम: 15वें वित्त आयोग के तहत, उत्तर प्रदेश को कुल हस्तांतरण का 15.81% मिला जबकि उसका कर योगदान मात्र 4.6% था; इसके विपरीत, महाराष्ट्र का योगदान 40.3% था लेकिन उसे केवल 6.64% मिला।
- UPSC प्रासंगिकता: “राजकोषीय संघवाद”, “वित्त आयोग का अधिदेश” और “GST चुनौतियां” के लिए महत्वपूर्ण।
- विस्तृत विश्लेषण:
- दक्षता बनाम समानता: वर्तमान सूत्र ‘आय की दूरी’ और ‘जनसंख्या’ को प्राथमिकता देते हैं, जो बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को दंडित करते हैं। GSDP आधारित फॉर्मूला राष्ट्रीय आय में राज्यों के वास्तविक योगदान को मान्यता देगा।
- सांख्यिकीय संबंध: डेटा दिखाता है कि GSDP और GST संग्रह के बीच बहुत गहरा संबंध (0.91) है, जो इसे राज्य स्तर पर कर उपार्जन का एक विश्वसनीय संकेतक बनाता है।
3. नेटग्रिड (NATGRID): सुरक्षा बनाम डिजिटल अधिनायकवाद
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (आंतरिक सुरक्षा; संचार नेटवर्क के माध्यम से चुनौतियां; साइबर सुरक्षा)
- संदर्भ: नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के विस्तार और बिना किसी वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) के इसके संचालन पर चिंताओं का विश्लेषण।
- मुख्य बिंदु:
- पहुंच का विस्तार: NATGRID अब प्रति माह लगभग 45,000 अनुरोधों को संसाधित कर रहा है, और SP रैंक तक के अधिकारियों को इसकी पहुंच दी गई है।
- डेटा एकीकरण: इसे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के साथ एकीकृत किया जा रहा है, जिसमें 119 करोड़ निवासियों का डेटा है।
- तकनीकी क्षमता: सिस्टम ‘गांडीव’ विश्लेषणात्मक इंजन का उपयोग करता है जो व्यक्तियों की पहचान करने और उन्हें ट्रैक करने के लिए अलग-अलग रिकॉर्ड्स को जोड़ने (Triangulation) में सक्षम है।
- UPSC प्रासंगिकता: “निगरानी कानून”, “निजता का अधिकार (पुट्टस्वामी मामला)” और “सुशासन बनाम सुरक्षा”।
- विस्तृत विश्लेषण:
- वैधानिक निरीक्षण की कमी: NATGRID संसद के अधिनियम के बजाय कार्यकारी आदेश के माध्यम से कार्य करता है, जिससे इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए स्वतंत्र निरीक्षण की मांग बढ़ रही है।
- पूर्वाग्रहों का दोहराव: संपादकीय चेतावनी देता है कि इसमें इस्तेमाल किए गए एल्गोरिदम जाति, धर्म या भूगोल से जुड़े सामाजिक पूर्वाग्रहों को दोहरा सकते हैं, जिससे कुछ समुदायों के खिलाफ भेदभावपूर्ण परिणाम निकल सकते हैं।
4. स्पाइना बिफिडा (Spina Bifida): उपेक्षित जन्म दोष
पाठ्यक्रम: GS पेपर 2 (स्वास्थ्य; सामाजिक क्षेत्र के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे)
- संदर्भ: एक रिपोर्ट जो बताती है कि भारत में स्पाइना बिफिडा की दर विश्व में सबसे अधिक (प्रति 1,000 जन्मों पर 4) है, जबकि यह काफी हद तक रोके जाने योग्य बीमारी है।
- मुख्य बिंदु:
- रोकथाम: गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड (Folic Acid) का सेवन स्पाइना बिफिडा के 70% से अधिक मामलों को रोक सकता है।
- नीति का अभाव: 68 अन्य देशों के विपरीत, भारत में फोलिक एसिड के लिए अनिवार्य खाद्य सुदृढ़ीकरण (Food Fortification) कानून या व्यापक जागरूकता अभियान नहीं हैं।
- आर्थिक बोझ: रोकथाम पर खर्च किया गया प्रत्येक एक रुपया प्रभावित बच्चों के दीर्घकालिक उपचार पर खर्च होने वाले 100 रुपये बचा सकता है।
- UPSC प्रासंगिकता: “सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति”, “विकलांगों के लिए सामाजिक न्याय” और “पोषण सुरक्षा”।
- विस्तृत विश्लेषण:
- स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही: फोलिक एसिड के बारे में जनता को शिक्षित न करना ‘गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य लापरवाही’ माना जा रहा है, क्योंकि यह स्थिति बच्चों में आजीवन पक्षाघात (Paralysis) का कारण बनती है।
- नवाचारी समाधान: नमक या चाय जैसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों में फोलेट और विटामिन B12 का सुदृढ़ीकरण तंत्रिका संबंधी जटिलताओं को खत्म करने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
5. भारत के विकास का अनुमान: UN DESA बनाम सरकार
पाठ्यक्रम: GS पेपर 3 (भारतीय अर्थव्यवस्था; विकास)।
- संदर्भ: वित्त वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार के प्रथम अग्रिम अनुमान (7.4%) और UN DESA के विकास पूर्वानुमान (7.2%) के बीच तुलना।
- मुख्य बिंदु:
- विकास के चालक: घरेलू खपत और बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश से अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने की उम्मीद है।
- टैरिफ की बाधा: चूंकि भारत का 18% निर्यात अमेरिका जाता है, इसलिए टैरिफ एक बड़ा जोखिम है; हालांकि, यूरोप और पश्चिम एशिया की मांग इसे संतुलित कर सकती है।
- आपूर्ति पक्ष: विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र का विस्तार विकास के प्राथमिक आपूर्ति-पक्ष चालक बने हुए हैं।
- UPSC प्रासंगिकता: “मैक्रोइकोनॉमिक प्लानिंग”, “वैश्विक आर्थिक रुझान” और “बजटीय अनुमान”।
- विस्तृत विश्लेषण:
- विपरीत रुझान: जहाँ भारत में ‘सकल स्थायी पूंजी निर्माण’ (GFCF) में वृद्धि देखी जा रही है, वहीं चीन ने अपने कमजोर संपत्ति क्षेत्र के कारण निवेश में संकुचन देखा है।
- राजकोषीय समर्थन: 7%+ विकास पथ को बनाए रखने के लिए निकट अवधि में कर सुधार और मौद्रिक सुगमता को आवश्यक माना गया है।
संपादकीय विश्लेषण
09 जनवरी, 2026Mapping:
यहाँ भारत के तटीय भूगोल, प्रमुख बंदरगाहों और द्वीप समूहों का मानचित्र अभ्यास (Mapping Practice) विवरण हिंदी में दिया गया है:
1. भारत का तटीय भूगोल (India’s Coastal Geography)
भारत की कुल तटरेखा 7,516.6 किमी है, जिसमें मुख्य भूमि और द्वीप क्षेत्र शामिल हैं। इसे मुख्य रूप से पश्चिमी तट और पूर्वी तट में विभाजित किया गया है।
- पश्चिमी तट (Western Coast): यह पूर्वी तट की तुलना में संकरा है। इसके उप-भाग हैं:
- कोंकण तट: महाराष्ट्र और गोवा।
- कनारा तट: कर्नाटक।
- मालाबार तट: केरल (यह अपने ‘कयाल’ या Backwaters के लिए प्रसिद्ध है)।
- पूर्वी तट (Eastern Coast): यह अधिक चौड़ा है और महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों द्वारा बनाए गए विशाल डेल्टाओं की विशेषता रखता है।
- उत्तरी सरकार (Northern Circars): उत्तरी भाग (ओडिशा/आंध्र प्रदेश)।
- कोरोमंडल तट: दक्षिणी भाग (तमिलनाडु)।
2. भारत के प्रमुख समुद्री बंदरगाह (Major Sea Ports)
भारत में 13 प्रमुख बंदरगाह हैं जो इसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालते हैं।
| तट | प्रमुख बंदरगाह | मुख्य विशेषता |
| पश्चिमी | कांडला (गुजरात) | एक ज्वारीय (Tidal) बंदरगाह; पेट्रोलियम और उर्वरक आयात के लिए। |
| पश्चिमी | मुंबई (महाराष्ट्र) | भारत का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बंदरगाह। |
| पश्चिमी | मर्मगाओ (गोवा) | लौह अयस्क निर्यात करने वाला प्रमुख बंदरगाह। |
| पश्चिमी | कोच्चि (केरल) | एक लैगून (वेम्बनाड झील) के मुहाने पर स्थित है। |
| पूर्वी | तूतूकोरिन (तमिलनाडु) | श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के लिए विभिन्न माल का प्रबंधन। |
| पूर्वी | विशाखापत्तनम (A.P.) | सबसे गहरा स्थलसीमा से घिरा (Landlocked) और सुरक्षित बंदरगाह। |
| पूर्वी | पारादीप (ओडिशा) | जापान को लौह अयस्क के निर्यात में विशेषज्ञता। |
| पूर्वी | हल्दिया/कोलकाता (W.B.) | हुगली नदी पर स्थित एक नदीय (Riverine) बंदरगाह। |
3. द्वीप समूह और रणनीतिक चैनल (Island Territories)
भारत के पास दो प्रमुख द्वीप समूह हैं जो समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (बंगाल की खाड़ी):
- ये समुद्र में डूबी हुई पर्वत श्रेणियों के शिखर हैं।
- 10 डिग्री चैनल: अंडमान समूह को निकोबार समूह से अलग करता है।
- बैरन द्वीप (Barren Island): भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी का घर।
- लक्षद्वीप समूह (अरब सागर):
- ये प्रवाल द्वीप (Coral islands/Atolls) हैं।
- 9 डिग्री चैनल: मिनिकॉय द्वीप को शेष लक्षद्वीप से अलग करता है।
- 8 डिग्री चैनल: पूरे लक्षद्वीप समूह को मालदीव से अलग करता है।
🌍 मानचित्रण सारांश तालिका (Summary Table)
| विशेषता | विवरण | भौगोलिक स्थिति |
| सबसे लंबी तटरेखा | गुजरात | पश्चिमी तट |
| सबसे गहरा बंदरगाह | विशाखापत्तनम | पूर्वी तट |
| प्रवाल द्वीप | लक्षद्वीप | अरब सागर |
| सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप | अंडमान सागर |
💡 मैपिंग टिप:
मानचित्र पर उत्तर से दक्षिण की ओर बंदरगाहों के क्रम को याद रखें (जैसे: कांडला → मुंबई → मर्मगाओ → मंगलुरु → कोच्चि)। UPSC अक्सर उत्तर-से-दक्षिण क्रम पर प्रश्न पूछता है।
समुद्री सीमाएँ (Maritime Frontiers)
| बंदरगाह | तट | विशिष्ट विशेषता |
|---|---|---|
| मुंबई | पश्चिमी | भारत का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बंदरगाह |
| विशाखापत्तनम | पूर्वी | सबसे गहरा भू-आबद्ध सुरक्षित बंदरगाह |
| मर्मगाओ | पश्चिमी | प्रमुख लौह अयस्क निर्यातक (गोवा) |
| विशेषता | विवरण | स्थान |
|---|---|---|
| सबसे लंबी तटरेखा | गुजरात | पश्चिमी तट |
| मूंगा एटोल (Coral) | लक्षद्वीप | अरब सागर |
| रणनीतिक चैनल | 10 डिग्री चैनल | अंडमान और निकोबार |